अधिक खोजे गए शब्द
सहेजे गए शब्द
खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे
जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ
कोशिश
कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम
आठ बार नौ त्योहार
सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता
चमनिस्तान
ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़
दादरा
संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल
मुहावरे
यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।
प्रमुख मुहावरे
आग लगे पर पानी कहाँ
अर्थ
क्रोध के समय दया और प्रेम एवं उद्देश्य या इच्छा के समय शर्म एवं लाज नहीं रहती
आठ बार नौ त्योहार
अर्थ
हिंदुओं में त्यौहार बहुत होते हैं, हर महीने दो-चार व्रत या त्यौहार पड़ जाते हैं, उस पर भी यह कहावत कही जाती है
आधी को छोड़ सारी को धावे आधी भी हाथ न आवे
अर्थ
वह व्यक्ति जो उपस्थित वस्तु को छोड़ कर अधिक की ओर भागता है वह उपस्थित वस्तु को भी खो देता है, लालची सदा हानि उठाता है
अमानी अबा दानी इजारा उजाड़ा
अर्थ
जो काम अपनी निरीक्षण में हो वह अच्छा होता है, ठेके का काम अच्छा नहीं होता
मुहावरों की सूची
संबंधित परिणाम
क़ाबू सच्चा झगड़ा झूटा
जिसका बल वही मालिक होता है, झगड़ने से कोई लाभ नहीं होता
क़ाल ही क़ाल है हाल नहीं
ऊपर से बातूनी है, काम वग़ैरह तो कुछ भी नहीं
क़ानून गोकी खोपड़ी मरी भी दग़ा दे
क़ानूनगो बड़े चालाक होते हैं
क़ाज़ी ब दो गवाह राज़ी
क़ाज़ी को फ़ैसला करने के लिए दो गवाह काफ़ी हैं अर्थात दो गवाहों से अदालत को संतोष हो जाता है
क़ाज़ी जी अपना आगा तो ढाँको पीछे किसी को नसीहत करना
सबके लिए पहले अपनी नैतिकता और आचरण की सुधार ज़रूरी है, पहले अपने दोष तो ढको फिर दूसरों को उपदेश देना अर्थात आप तो खुद नंगे हैं
क़ाज़ी जी बहुत हराएँ मैं हारता ही नहीं
जब कोई निर्लज्जता के कारण किसी बात को न माने बल्कि ज़िद और मूर्खता से अड़ा रहे तो उसे व्यंग में बोलते हैं
क़ाज़ी जी दुबले क्यों शहर के अंदेशे में
जब कोई अपने ऊपर ध्यान न दे कर संसारभर का सोच करता है तब कहते हैं
क़ाज़ी जी का प्यादा घोड़े सवार
शासक का चपरासी भी बहुत धाक जमाता है, सरकारी नौकर धाक दिखाते हैं
क़ाज़ी जी के चूहे भी सियाने
रुक : क़ाज़ी के घर के चूहे भी सयाने
क़ाज़ी जी के घर के चूहे भी सयाने
हाकिम या धनी व्यक्ति के घर का सबसे छोटा आदमी भी चालाक और चतुर होता है
क़ाज़ी जी के घर की मुर्ग़ी भी पढ़ी हुई होती है
रुक : क़ाज़ी के घर के चूहे भी सयाने
क़ाज़ी जी के मरने से क्या शहर सूना हो जाएगा
एक के न होने से कुछ हानि नहीं
क़ाज़ी जी खाना आया, हमें क्या, तुम्हारे ही लिए है, फिर तुम्हें क्या
जब कोई अपने मतलब की बात स्पष्ट न कहे, तब उससे भी कहते हैं
क़ाज़ी जी की लौंडी मरी सारा शहर आया, क़ाज़ी मरे कोई न आया
बहुत से काम बड़े आदमियों को ख़ुश करने के लिए ही किए जात हैं, उनके मरने पर उन्हें कोई नहीं पूछता क्योंकि फिर उनसे कोई काम नहीं
क़ाज़ी का प्यादा घोड़े सवार
क़ाज़ी का नौकर हर काम की ऐसी जल्दी मचाता है मानो घोड़े पर सवार है
क़ाज़ी के घर के चूहे भी सयाने
हाकिम या धनी व्यक्ति के घर का सबसे छोटा आदमी भी चालाक और चतुर होता है
क़ाज़ी के मूसल में नाड़ा
क़ाज़ी पैजामे में मूसल से इज़ारबंद अर्थात नारा डालने को कहता है
क़ाज़ी की दाढ़ी तबरुक में गई
जब कोई अच्छी शैय देखते देखते या मुफ़्त में ख़राब हो जाती है तो ये मक़ूला कहते हैं
क़ाज़ी की लौंडी मरी, सारा शहर आया, क़ाज़ी मरा, कोई न आया
बड़े एवं अमीर आदमी के जीवन काल में लोग ख़ुशामद अर्थात चापलूसी करते हैं परंतु उसके मरने के बा'द कोई उसका नाम तक नहीं लेता
क़ाज़ी की मूँछ है बेगार का काम
यह कहावत अन्यायी न्यायाधीशों के संबंध में कही जाती है कि वे वादी और प्रतिवादी से मज]दूरी लिया करते हैं
संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .
नवीनतम ब्लॉग
Delete 44 saved words?
क्या आप वास्तव में इन प्रविष्टियों को हटा रहे हैं? इन्हें पुन: पूर्ववत् करना संभव नहीं होगा