खोजे गए परिणाम

सहेजे गए शब्द

"और ही" शब्द से संबंधित परिणाम

और ही

quite different

और ही कुछ हो जाना

परेशान हो जाना, बौखलाया हुआ होना

और ही बात है

अनोखी स्थिति है, अजीब आनंद है

कुछ और ही

बिल्कुल अलग, भिन्न; पूरी तरह से बदला हआ

तुम्हारी जूती और तुम्हारा ही सर

तुम्हारा माल ही तुम पर ख़र्च हो रहा है

कुछ और ही 'आलम होना

बदल जाना, स्थिति में परिवर्तन आना

और रोना ही क्या है

यही सोच तो है

मेरी ही बिल्ली और मुझ से ही म्याऊँ

रुक : मेरी बिल्ली और मुझी से मियाऊं

माँ मारे और माँ ही पुकारे

अपनों की सख़्ती भी बुरी नहीं प्रतीत होती, अपना कितनी ही सख़्ती करे अपना ही कहलाएगा

ज़ालिम की चाल ही और है

अत्याचारी के तरीक़े अलग होते हैं, ज़ालिम के तरीक़े मुख़्तलिफ़ होते हैं

अपना ही माल जाए और आप ही चोर कहलाए

अपनी हानि का इल्ज़ाम अपने ही सर, आया क्या परिहासयुक्त अत्याचार है

हाकिम हारे और मुँह ही मुँह मारे

हाकिम की किसी बात की तरदीद नहीं होसकती, अफ़्सर की ग़लती भी हो तो मातहत को ही नुक़्सान उठाना पड़ता है

नौकरी और अरंड की जड़ ही क्या

रुक : नौकरी अरंड की जड़ है

नौकरी और अरंड की जढ़ ही क्या

रुक : नौकरी अरंड की जड़ है

माँ मारे और माँ ही माँ पुकारे

अपनों की सख़्ती भी बुरी नहीं प्रतीत होती, अपना कितनी ही सख़्ती करे अपना ही कहलाएगा

तेली ख़सम किया और रूखा ही खाया

मतलब के लिए बुरा काम किया फिर भी वो हासिल ना हुआ , ख़िलाफ़-ए-वज़ा या आदात कोई काम किया इस प्रभी मक़सद पूरा ना हुआ, मालदार की नौकरी और फ़ाक़ों मरे

दिल का कुछ और ही नक़्शा है

दिल घबराता है, दिल परेशान है

दिल का कुछ और ही नक़्शा है

दिल घबराता है, दिल परेशान है

सारी रात रोई और एक ही मरा

प्रयास बहुत की परंतु प्राप्त बहुत कम हुआ

मुँह ही मुँह मारे और तौबा-तौबा पुकारे

ख़ुद ही सज़ा दे खुद ही शरण माँगे, अपना आरोप मासूम के सिर थोपे

अपना घुटना खोलिए और आप ही लाजों मरिए

अपनों के दोष खोलने से अपने आप को ही लज्जित होना पड़ता है, अपनी प्यारी वस्तु तिरस्कार अपना ही तिरस्कार है

अपना घुटना खोलिए और आप ही मरिए लाज

अपनों के दोष खोलने से अपने आप को ही लज्जित होना पड़ता है, अपनी प्यारी वस्तु तिरस्कार अपना ही तिरस्कार है

दस्तार और गुफ़्तार अपनी ही काम आती है

अपने हाथ से अपनी पगड़ी (दोपट्टा) बांधना चाहिए और अपनी बात ख़ुद ही कहना मुनासिब है दोसे के ज़रीये दोनों ठीक नहीं क्यों कि अपनी बात या मतलब को जैसे ख़ुद कह सकता है इस तरह दूसरे से अदा नहीं हो सकता

किरिया और तरकारी खाने ही के लिए है

झूठी सौगंध खाए तो उसकी औचित्यता में कहते हैं

चूना और चमार कूटे ही ठीक रहता है

चूने को जितना ज़्यादा कूटें उतना ही मज़बूत होता है, चमार को जूते लगते रहें तो दुरुस्त रहता है

दिल्ली में रहे और भाड़ ही झोंका

जब कोई अच्छे स्थान या वातावरण में काफ़ी दिनों तक रह कर भी कुछ न सीख सके तो उसके प्रती व्यंग में ऐसा कहते हैं. अनाड़ी ही रहा, अच्छी जगह रह कर भी कुशलता नहीं प्राप्त कर सका, अनभिज्ञ व्यक्ति कभी उन्नति नहीं कर सकता

हवा ही और होना

पर्यावरण पूरी तरह बदल जाना, परिस्थितियों का पूरी तरह अलग हो जाना, तौर-तरीक़ा ही दूसरा होना

मेंह का लड़का और नौकरी घड़ी घर ही नहीं हुआ करते

यह चीज़ें बहुत मुश्किल से मिलती हैं

हमारी बिस्मिल्लाह और हम से ही छू

रुक : हमारी बिल्ली और हमें से मियाऊं, जो मारूफ़-ओ-मुस्तामल है

मियाँ का जूता हो और मियाँ ही का सर

अपने ही हाथों लाचार होना, किसी की बेइज़्ज़ती इस के अपने ही कारिंदों के हाथों कराना

जहाँ और दरख़्त नहीं वहाँ अरनड ही दरख़्त है

जहां लायक़ नहीं होते, वहां कम लियाक़त ही लियाक़तदार होजाते हैं, जहां कोई शैय बेहतर ना हो वहां कमतर ही सही, रुक: जहां रूख नहीं अलख

बाप डोम और डोम ही दादा, कहे मियाँ मैं शर्मा-ज़ादा

जो अपनी जाति को छुपाए उसके प्रति कहते हैं

पर को कुँवाँ खोदे और आप ही डूब मरे

पराए व्यक्ति की बुराई चाहने में अपनी ही हानि होती है

घर की बिल्ली और घर ही में शिकार

घरेलू एवं आपसी झगड़ों अथवा विवादों के समय प्रयुक्त

वक़्त का ग़ुलाम और वक़्त ही का बादशाह

जैसा अवसर हो वैसा काम करे, अवसर के अनुसार दास और राजा बन जाए

पर को कुँवाँ खोदे और आप ही डूब-डूब मरे

पराए व्यक्ति की बुराई चाहने में अपनी ही हानि होती है

बाप डोम और डोम ही दादा, कहे मियाँ मैं शरफ़ा-ज़ादा

जो अपनी जाति को छुपाए उसके प्रति कहते हैं

बारह बरस दिल्ली में रहे और भाड़ ही झोंका

उस अवसर पर प्रयुक्त है जब कोई निरंतर अवसर मिलने पर भी विकास न करे या न सीखे

आता तो सब ही भला थोड़ा बहुत कुछ, जाते दो ही भले दलिद्दर और दुख

जो मिले अच्छा जो जाए बुरा

आता तो सब ही भला, थोड़ा बहुता, कुच्छ, जाते तो दो ही भले, दालिद्दर और दुःख

जो मिले अच्छा जो जाए बुरा

जब भी तीन और अब भी तीन, जब पाए तब तीन ही तीन

बहुत भाग्यहीन हैं, हर समय तीन काने हैं

दो हाजू की जोरू और सौदागर की घोड़ी जितनी कूदे उतनी ही थोड़ी

नई नवेली दुल्हन के मुताल्लिक़ कहते हैं कि वो जितने नख़रे दिखाए कम है

पान और ईमान फेरे ही से अच्छा रहता है

यदि देख-रेख न की जाए तो पान गल जाते हैं, ईमान बिना तौबा के सुरक्षित नहीं रहता

बाक़ी का मारा गाँव , चिलमों का मारा चूल्हा और ओलों का मारा खेत पनपता ही नहीं

जिस गान के लोगों पर लगान बाक़ी रह जाये या जिस चूल्हे से बार बार आग निकाली जाये या जिस खेत पर ओले पड़ जाएं वो कभी अच्छी हालत में नहीं रहते

सावन सोवे साँथरे और माह खरेरी खाट , आप ही मर जाएंगे तो जेठ चलेंगे बाट

जो साइन में पियाल पर सोए और माघ में ख़ाली चारपाई पर और जेठ में सफ़र करे वो ख़्वाहमख़्वाह मरेगा

लीक लीक गाड़ी चले और लीक चले सपूत, लीक छोड़ तीन ही चलें कवी, सिंघ, सपूत

नालायक़ औलाद बाप दादा की राह पर नहीं चलती, गाड़ी लीक पर चलती है और बेवक़ूफ लड़का पुराने रस्म-ओ-रिवाज पर चलता है, शायर, शेर और नालायक़ बेटा पुराने रास्ते पर नहीं चलते बल्कि नया रास्ता निकालते हैं

लीक लीक गाड़ी चले और लीक चले सपूत, लीक छोड़ तीन ही चलें सागर, सिंघ, कपूत

नालायक़ औलाद बाप दादा की राह पर नहीं चलती, गाड़ी लीक पर चलती है और बेवक़ूफ लड़का पुराने रस्म-ओ-रिवाज पर चलता है, शायर, शेर और नालायक़ बेटा पुराने रास्ते पर नहीं चलते बल्कि नया रास्ता निकालते हैं

तुलसी ऐसे मित्र को कूद-फाँद के जाए, आवत ही तो नहीं मिले और चलत रहे मुरझाए

पहले मित्र को बड़ी रूचि से मिलना चाहिए जो हंसता हुआ मिले और जाता हुआ दुखी हो

तुलसी ऐसे मित्र के कोट फाँद के जाए, आवत ही तो हंस मिले और चलत रहे मुरझाए

पहले मित्र को बड़ी रूचि से मिलना चाहिए जो हंसता हुआ मिले और जाता हुआ दुखी हो

जो तू ही राजा हुआ अपना सुख मत ठान, फिकर और फकीर के दुख सुख पर कर ध्यान

अगर तू राजा बने तो र'ईयत अर्थात सभी प्राणियों की भलाई का ख़्याल रख

आता तो सभी भला थोड़ा बहुत कुछ, जाता बस दो ही भले दलिद्दर और दुख

जो मिले अच्छा जो जाए बुरा

ये दुनिया दिन चार है संग न तेरे जा, साईं का रख आसरा और वा से ही नेह लगा

ये संसार नश्वर है, ईश्वर से ध्यान लगा

लाल बुझक्कड़ बूझियाँ और न बूझा कोए, कड़ी बड़ंगा तोड़ के ऊपर ही को लो

एक लड़का एक खंबा को दोनों हाथों से पकड़े हुए था, बाप ने चुने दिए तो उसने दोनों हाथ फैला कर ले लिए फिर हाथ न निकल सके, लाल बुझक्कड़ को बुलाया गया, उसने कहा कि छत उतार कर लड़के को ऊपर खींच लो

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में और ही के अर्थदेखिए

और ही

aur hiiاور ہی

English meaning of aur hii

  • quite different

Urdu meaning of aur hii

  • Roman
  • Urdu

खोजे गए शब्द से संबंधित

और ही

quite different

और ही कुछ हो जाना

परेशान हो जाना, बौखलाया हुआ होना

और ही बात है

अनोखी स्थिति है, अजीब आनंद है

कुछ और ही

बिल्कुल अलग, भिन्न; पूरी तरह से बदला हआ

तुम्हारी जूती और तुम्हारा ही सर

तुम्हारा माल ही तुम पर ख़र्च हो रहा है

कुछ और ही 'आलम होना

बदल जाना, स्थिति में परिवर्तन आना

और रोना ही क्या है

यही सोच तो है

मेरी ही बिल्ली और मुझ से ही म्याऊँ

रुक : मेरी बिल्ली और मुझी से मियाऊं

माँ मारे और माँ ही पुकारे

अपनों की सख़्ती भी बुरी नहीं प्रतीत होती, अपना कितनी ही सख़्ती करे अपना ही कहलाएगा

ज़ालिम की चाल ही और है

अत्याचारी के तरीक़े अलग होते हैं, ज़ालिम के तरीक़े मुख़्तलिफ़ होते हैं

अपना ही माल जाए और आप ही चोर कहलाए

अपनी हानि का इल्ज़ाम अपने ही सर, आया क्या परिहासयुक्त अत्याचार है

हाकिम हारे और मुँह ही मुँह मारे

हाकिम की किसी बात की तरदीद नहीं होसकती, अफ़्सर की ग़लती भी हो तो मातहत को ही नुक़्सान उठाना पड़ता है

नौकरी और अरंड की जड़ ही क्या

रुक : नौकरी अरंड की जड़ है

नौकरी और अरंड की जढ़ ही क्या

रुक : नौकरी अरंड की जड़ है

माँ मारे और माँ ही माँ पुकारे

अपनों की सख़्ती भी बुरी नहीं प्रतीत होती, अपना कितनी ही सख़्ती करे अपना ही कहलाएगा

तेली ख़सम किया और रूखा ही खाया

मतलब के लिए बुरा काम किया फिर भी वो हासिल ना हुआ , ख़िलाफ़-ए-वज़ा या आदात कोई काम किया इस प्रभी मक़सद पूरा ना हुआ, मालदार की नौकरी और फ़ाक़ों मरे

दिल का कुछ और ही नक़्शा है

दिल घबराता है, दिल परेशान है

दिल का कुछ और ही नक़्शा है

दिल घबराता है, दिल परेशान है

सारी रात रोई और एक ही मरा

प्रयास बहुत की परंतु प्राप्त बहुत कम हुआ

मुँह ही मुँह मारे और तौबा-तौबा पुकारे

ख़ुद ही सज़ा दे खुद ही शरण माँगे, अपना आरोप मासूम के सिर थोपे

अपना घुटना खोलिए और आप ही लाजों मरिए

अपनों के दोष खोलने से अपने आप को ही लज्जित होना पड़ता है, अपनी प्यारी वस्तु तिरस्कार अपना ही तिरस्कार है

अपना घुटना खोलिए और आप ही मरिए लाज

अपनों के दोष खोलने से अपने आप को ही लज्जित होना पड़ता है, अपनी प्यारी वस्तु तिरस्कार अपना ही तिरस्कार है

दस्तार और गुफ़्तार अपनी ही काम आती है

अपने हाथ से अपनी पगड़ी (दोपट्टा) बांधना चाहिए और अपनी बात ख़ुद ही कहना मुनासिब है दोसे के ज़रीये दोनों ठीक नहीं क्यों कि अपनी बात या मतलब को जैसे ख़ुद कह सकता है इस तरह दूसरे से अदा नहीं हो सकता

किरिया और तरकारी खाने ही के लिए है

झूठी सौगंध खाए तो उसकी औचित्यता में कहते हैं

चूना और चमार कूटे ही ठीक रहता है

चूने को जितना ज़्यादा कूटें उतना ही मज़बूत होता है, चमार को जूते लगते रहें तो दुरुस्त रहता है

दिल्ली में रहे और भाड़ ही झोंका

जब कोई अच्छे स्थान या वातावरण में काफ़ी दिनों तक रह कर भी कुछ न सीख सके तो उसके प्रती व्यंग में ऐसा कहते हैं. अनाड़ी ही रहा, अच्छी जगह रह कर भी कुशलता नहीं प्राप्त कर सका, अनभिज्ञ व्यक्ति कभी उन्नति नहीं कर सकता

हवा ही और होना

पर्यावरण पूरी तरह बदल जाना, परिस्थितियों का पूरी तरह अलग हो जाना, तौर-तरीक़ा ही दूसरा होना

मेंह का लड़का और नौकरी घड़ी घर ही नहीं हुआ करते

यह चीज़ें बहुत मुश्किल से मिलती हैं

हमारी बिस्मिल्लाह और हम से ही छू

रुक : हमारी बिल्ली और हमें से मियाऊं, जो मारूफ़-ओ-मुस्तामल है

मियाँ का जूता हो और मियाँ ही का सर

अपने ही हाथों लाचार होना, किसी की बेइज़्ज़ती इस के अपने ही कारिंदों के हाथों कराना

जहाँ और दरख़्त नहीं वहाँ अरनड ही दरख़्त है

जहां लायक़ नहीं होते, वहां कम लियाक़त ही लियाक़तदार होजाते हैं, जहां कोई शैय बेहतर ना हो वहां कमतर ही सही, रुक: जहां रूख नहीं अलख

बाप डोम और डोम ही दादा, कहे मियाँ मैं शर्मा-ज़ादा

जो अपनी जाति को छुपाए उसके प्रति कहते हैं

पर को कुँवाँ खोदे और आप ही डूब मरे

पराए व्यक्ति की बुराई चाहने में अपनी ही हानि होती है

घर की बिल्ली और घर ही में शिकार

घरेलू एवं आपसी झगड़ों अथवा विवादों के समय प्रयुक्त

वक़्त का ग़ुलाम और वक़्त ही का बादशाह

जैसा अवसर हो वैसा काम करे, अवसर के अनुसार दास और राजा बन जाए

पर को कुँवाँ खोदे और आप ही डूब-डूब मरे

पराए व्यक्ति की बुराई चाहने में अपनी ही हानि होती है

बाप डोम और डोम ही दादा, कहे मियाँ मैं शरफ़ा-ज़ादा

जो अपनी जाति को छुपाए उसके प्रति कहते हैं

बारह बरस दिल्ली में रहे और भाड़ ही झोंका

उस अवसर पर प्रयुक्त है जब कोई निरंतर अवसर मिलने पर भी विकास न करे या न सीखे

आता तो सब ही भला थोड़ा बहुत कुछ, जाते दो ही भले दलिद्दर और दुख

जो मिले अच्छा जो जाए बुरा

आता तो सब ही भला, थोड़ा बहुता, कुच्छ, जाते तो दो ही भले, दालिद्दर और दुःख

जो मिले अच्छा जो जाए बुरा

जब भी तीन और अब भी तीन, जब पाए तब तीन ही तीन

बहुत भाग्यहीन हैं, हर समय तीन काने हैं

दो हाजू की जोरू और सौदागर की घोड़ी जितनी कूदे उतनी ही थोड़ी

नई नवेली दुल्हन के मुताल्लिक़ कहते हैं कि वो जितने नख़रे दिखाए कम है

पान और ईमान फेरे ही से अच्छा रहता है

यदि देख-रेख न की जाए तो पान गल जाते हैं, ईमान बिना तौबा के सुरक्षित नहीं रहता

बाक़ी का मारा गाँव , चिलमों का मारा चूल्हा और ओलों का मारा खेत पनपता ही नहीं

जिस गान के लोगों पर लगान बाक़ी रह जाये या जिस चूल्हे से बार बार आग निकाली जाये या जिस खेत पर ओले पड़ जाएं वो कभी अच्छी हालत में नहीं रहते

सावन सोवे साँथरे और माह खरेरी खाट , आप ही मर जाएंगे तो जेठ चलेंगे बाट

जो साइन में पियाल पर सोए और माघ में ख़ाली चारपाई पर और जेठ में सफ़र करे वो ख़्वाहमख़्वाह मरेगा

लीक लीक गाड़ी चले और लीक चले सपूत, लीक छोड़ तीन ही चलें कवी, सिंघ, सपूत

नालायक़ औलाद बाप दादा की राह पर नहीं चलती, गाड़ी लीक पर चलती है और बेवक़ूफ लड़का पुराने रस्म-ओ-रिवाज पर चलता है, शायर, शेर और नालायक़ बेटा पुराने रास्ते पर नहीं चलते बल्कि नया रास्ता निकालते हैं

लीक लीक गाड़ी चले और लीक चले सपूत, लीक छोड़ तीन ही चलें सागर, सिंघ, कपूत

नालायक़ औलाद बाप दादा की राह पर नहीं चलती, गाड़ी लीक पर चलती है और बेवक़ूफ लड़का पुराने रस्म-ओ-रिवाज पर चलता है, शायर, शेर और नालायक़ बेटा पुराने रास्ते पर नहीं चलते बल्कि नया रास्ता निकालते हैं

तुलसी ऐसे मित्र को कूद-फाँद के जाए, आवत ही तो नहीं मिले और चलत रहे मुरझाए

पहले मित्र को बड़ी रूचि से मिलना चाहिए जो हंसता हुआ मिले और जाता हुआ दुखी हो

तुलसी ऐसे मित्र के कोट फाँद के जाए, आवत ही तो हंस मिले और चलत रहे मुरझाए

पहले मित्र को बड़ी रूचि से मिलना चाहिए जो हंसता हुआ मिले और जाता हुआ दुखी हो

जो तू ही राजा हुआ अपना सुख मत ठान, फिकर और फकीर के दुख सुख पर कर ध्यान

अगर तू राजा बने तो र'ईयत अर्थात सभी प्राणियों की भलाई का ख़्याल रख

आता तो सभी भला थोड़ा बहुत कुछ, जाता बस दो ही भले दलिद्दर और दुख

जो मिले अच्छा जो जाए बुरा

ये दुनिया दिन चार है संग न तेरे जा, साईं का रख आसरा और वा से ही नेह लगा

ये संसार नश्वर है, ईश्वर से ध्यान लगा

लाल बुझक्कड़ बूझियाँ और न बूझा कोए, कड़ी बड़ंगा तोड़ के ऊपर ही को लो

एक लड़का एक खंबा को दोनों हाथों से पकड़े हुए था, बाप ने चुने दिए तो उसने दोनों हाथ फैला कर ले लिए फिर हाथ न निकल सके, लाल बुझक्कड़ को बुलाया गया, उसने कहा कि छत उतार कर लड़के को ऊपर खींच लो

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

सुझाव दीजिए (और ही)

नाम

ई-मेल

प्रतिक्रिया

और ही

चित्र अपलोड कीजिएअधिक जानिए

नाम

ई-मेल

प्रदर्शित नाम

चित्र संलग्न कीजिए

चित्र चुनिए
(format .png, .jpg, .jpeg & max size 4MB and upto 4 images)

सूचनाएँ और जानकारी प्राप्त करने के लिए सदस्यता लें

सदस्य बनिए
बोलिए

Delete 44 saved words?

क्या आप वास्तव में इन प्रविष्टियों को हटा रहे हैं? इन्हें पुन: पूर्ववत् करना संभव नहीं होगा

Want to show word meaning

Do you really want to Show these meaning? This process cannot be undone