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नेह

رک : نیہہ (محبت) ۔

नेहरू

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री 'जवाहरलाल नेहरू'

नेही

प्यार करने वाला, मुहब्बत करने वाला, आशिक़

नेहू

प्रेम, मुहब्बत, प्यार

नेह-बान

प्रेम का तीर अथवा बाण

नेहड़

कठोर, पत्थर दिल

नेहा

چکنائی ، تیل (جامع اللغات) ۔

नेहला

दान, बख़्शिश अथवा टिप (जो पूरे मन से दी जाए)

नेहक

نیہہ (رک) سے متعلق یا منسوب ، محبت کا

नेहा-बन

प्रेम का जंगल, प्यार का वन

नेहलत-उल-हक़

सत्य का धर्म

नेहायत

انتہا (رک : نہایت)

नेह लागना

इशक़ होना, मुहब्बत होना

नेह लगाना

दिल लगाना, प्यार करना

नेहा लगना

प्यार हो जाना, किसी से मुहब्बत या प्रेम हो जाना एवं संबंध पैदा होना

नेहा लाना

प्यार करना , लू लगाना

नेहा लगना

नेहा लगाना (रुक) का लाज़िम-ए-इश्क़ होना, मुहब्बत होना

नेहा आलगाना

दिल लगाना, प्यार करना

नेहा लगाना

मुहब्बत करना , इशक़ करना

मरहम-ए-नेह

मरहम रखने वाला, मरहम लगाने वाला

उस नर को न सीख सुहावे, नेह फंद में जो फँस जावे

प्रेमी पर सीख का असर नहीं होता

साईं तेरी नेह का जिस तन लागा तीर, वही पूरा साध है वही पीर फ़क़ीर

जिसे ईश्वर से प्रेम है वो पूरा फ़क़ीर है एवं वही दर्वेश है

नैन का नेह न टूटे, जैसे बेल बृछ को लिपटे, सूख जाए न छूटे

आँख लगाने के बाद मुहब्बत नहीं जाती जैसे बैल दरख़्त से लिपट जाती तो इस से अलग नहीं होती ख़ाह सूख जाये

नैन को नेह न टूटे, जैसे बेल बृछ को लिपटे, सूख जाए न छूटे

आँख लगाने के बाद मुहब्बत नहीं जाती जैसे बैल दरख़्त से लिपट जाती तो इस से अलग नहीं होती ख़ाह सूख जाये

प्रीतम हर से नेह कर जैसे खेत किसान, घाटे दे और डंड भरे फेर खेत से ध्यान

ईश्वर से प्रेम इस तरह होनी चाहिये जिस तरह किसान को अपने खेत से होती है गरचे हानि उठाता है परंतु उसे छोड़ता नहीं

ख़रबूज़ चाहे धूप को और आम चाहे मेंह, नारी चाहे ज़ोर को, और बालक चाहे नेह

ख़र बूज़ा धूओप से मज़े पर आता है और आम मीना से औरत ज़ोर आवर से ख़ुश होती है बच्चा प्यार से यानी हर शैय अपने मर्ग़ूब शैय को चाहती है

ख़रबूज़ा चाहे धूप को और आम चाहे मेंह, नारी चाहे ज़ोर को, और बालक चाहे नेह

ख़रबूज़ा धूप आम वर्षा स्त्री ज़ोर और बालक सनेह चाहते हैं

ये दुनिया दिन चार है संग न तेरे जा, साईं का रख आसरा और वा से ही नेह लगा

ये संसार नश्वर है, ईश्वर से ध्यान लगा

प्रीत डगर जब पग रखा होनी होय सो हो, नेह नगर की रीत है तन मन दीनो खो

प्रेम में भू-लोक एवं परलोक कहीं का होश नहीं रहता, मनुष्य बे-परवाह हो जाता है

प्रीत डगर जब पग रखा होनी होय सो होय, नेह नगर की रीत है तन मन दोनों खोय

प्रेम में भू-लोक एवं परलोक कहीं का होश नहीं रहता, मनुष्य बे-परवाह हो जाता है

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में नेह के अर्थदेखिए

नेह

nehنیھ

वज़्न : 21

टैग्ज़: इश्क़

نیھ کے اردو معانی

  • Roman
  • Urdu

اسم، مذکر، مؤنث

  • رک : نیہہ (محبت) ۔

Urdu meaning of neh

  • Roman
  • Urdu

  • ruk ha nehaa (muhabbat)

नेह के यौगिक शब्द

खोजे गए शब्द से संबंधित

नेह

رک : نیہہ (محبت) ۔

नेहरू

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री 'जवाहरलाल नेहरू'

नेही

प्यार करने वाला, मुहब्बत करने वाला, आशिक़

नेहू

प्रेम, मुहब्बत, प्यार

नेह-बान

प्रेम का तीर अथवा बाण

नेहड़

कठोर, पत्थर दिल

नेहा

چکنائی ، تیل (جامع اللغات) ۔

नेहला

दान, बख़्शिश अथवा टिप (जो पूरे मन से दी जाए)

नेहक

نیہہ (رک) سے متعلق یا منسوب ، محبت کا

नेहा-बन

प्रेम का जंगल, प्यार का वन

नेहलत-उल-हक़

सत्य का धर्म

नेहायत

انتہا (رک : نہایت)

नेह लागना

इशक़ होना, मुहब्बत होना

नेह लगाना

दिल लगाना, प्यार करना

नेहा लगना

प्यार हो जाना, किसी से मुहब्बत या प्रेम हो जाना एवं संबंध पैदा होना

नेहा लाना

प्यार करना , लू लगाना

नेहा लगना

नेहा लगाना (रुक) का लाज़िम-ए-इश्क़ होना, मुहब्बत होना

नेहा आलगाना

दिल लगाना, प्यार करना

नेहा लगाना

मुहब्बत करना , इशक़ करना

मरहम-ए-नेह

मरहम रखने वाला, मरहम लगाने वाला

उस नर को न सीख सुहावे, नेह फंद में जो फँस जावे

प्रेमी पर सीख का असर नहीं होता

साईं तेरी नेह का जिस तन लागा तीर, वही पूरा साध है वही पीर फ़क़ीर

जिसे ईश्वर से प्रेम है वो पूरा फ़क़ीर है एवं वही दर्वेश है

नैन का नेह न टूटे, जैसे बेल बृछ को लिपटे, सूख जाए न छूटे

आँख लगाने के बाद मुहब्बत नहीं जाती जैसे बैल दरख़्त से लिपट जाती तो इस से अलग नहीं होती ख़ाह सूख जाये

नैन को नेह न टूटे, जैसे बेल बृछ को लिपटे, सूख जाए न छूटे

आँख लगाने के बाद मुहब्बत नहीं जाती जैसे बैल दरख़्त से लिपट जाती तो इस से अलग नहीं होती ख़ाह सूख जाये

प्रीतम हर से नेह कर जैसे खेत किसान, घाटे दे और डंड भरे फेर खेत से ध्यान

ईश्वर से प्रेम इस तरह होनी चाहिये जिस तरह किसान को अपने खेत से होती है गरचे हानि उठाता है परंतु उसे छोड़ता नहीं

ख़रबूज़ चाहे धूप को और आम चाहे मेंह, नारी चाहे ज़ोर को, और बालक चाहे नेह

ख़र बूज़ा धूओप से मज़े पर आता है और आम मीना से औरत ज़ोर आवर से ख़ुश होती है बच्चा प्यार से यानी हर शैय अपने मर्ग़ूब शैय को चाहती है

ख़रबूज़ा चाहे धूप को और आम चाहे मेंह, नारी चाहे ज़ोर को, और बालक चाहे नेह

ख़रबूज़ा धूप आम वर्षा स्त्री ज़ोर और बालक सनेह चाहते हैं

ये दुनिया दिन चार है संग न तेरे जा, साईं का रख आसरा और वा से ही नेह लगा

ये संसार नश्वर है, ईश्वर से ध्यान लगा

प्रीत डगर जब पग रखा होनी होय सो हो, नेह नगर की रीत है तन मन दीनो खो

प्रेम में भू-लोक एवं परलोक कहीं का होश नहीं रहता, मनुष्य बे-परवाह हो जाता है

प्रीत डगर जब पग रखा होनी होय सो होय, नेह नगर की रीत है तन मन दोनों खोय

प्रेम में भू-लोक एवं परलोक कहीं का होश नहीं रहता, मनुष्य बे-परवाह हो जाता है

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