या भैंसों में या क़साई के खूंटे पर
या सफल हुए या जान गई, ये काम करना आवश्यक है चाहे मामला इधर हो या उधर, तख़्त या तख़्ता, बात एक तरफ़ होगी, भैंसा बैल की तरह काम नहीं देता सो सामान्यतया उसे मार डालते हैं, या नतीजा काम का भला होगा या बुरा होगा
या जाए हज़ारी या जाए बज़ारी
मैले तमाशे में या तो अमीर आदमी जाये कि मैले की सैर करे या फ़क़ीर जाये कि सैर करने के इलावा कुछ मांग भी लाए, मेलों ठेलों में या तो अमीर जाते हैं या ओबाश लोग
या किसी को कर रहे या किसी का हो रहे
लोगों से अलग थलग नहीं रहना चाहिए या किसी को दोस्त बनाए या ख़ुद किसी का दोस्त बने, या किसी को अपना दोस्त बनाए या किसी का दोस्त बिन जाये अलग थलग रह कर गुज़ारा नहीं होता
या किसी को कर रखो तुम या किसी के हो रहो
लोगों से अलग थलग नहीं रहना चाहिए या किसी को दोस्त बनाए या ख़ुद किसी का दोस्त बने, या किसी को अपना दोस्त बनाए या किसी का दोस्त बन जाए अलग थलग रह कर गुज़ारा नहीं होता
या लड़े सूरमा या लड़े अन भोल
या तो बहादुर लड़ने से नहीं डरता या भोला, लड़ाई की गौत के दो ही आदमी हैं या शुजाअ या बेवक़ूफ़, या बहादुर आदमी लड़ता है या बेवक़ूफ़, या बहादुर लड़ता है जा हिल
या नहलाए दाई या नहलाएँ चार भाई
(सफ़ाई का ख़्याल ना रखने वाले के बारे में कहा जाता है) या तो पैदाइश के वक़्त जो ग़ुसल दिया था या मरने के वक़्त जो ग़ुसल दिया जाएगा
या रिंद या फ़तह चंद
या तो बिलकुल निर्धन होना चाहिए या बहुत अमीर, मध्यवर्गीय व्याक्ति परेशान रहता है
या तख़्त या तख़्ता
या कामियाब होंगे या मर जायेंगे, या राज्य के सिंहासन पर बैठेंगे या ताबूत पर लेट जायेंगे
यार बाक़ी सोहबत बाक़ी
अब नहीं तो फिर समझा जाएगा, कुछ मज़ाइक़ा नहीं नीज़ अमोमा तक़रीर, ख़िताब या जसले के इख़तताम पर मुस्तामल
यार ग़ार बायद कि ज़ख़्म मारे कशद
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) यार-ए-ग़ार को चाहिए कि साँप का ज़हर चूस ले, (हज़रत अबूबकर सिद्दीक़ की तरफ़ इशारा) मुख़लिस दोस्त ऐसा हो कि अपनी जान की भी पर्वा ना करे
यार का ग़ुस्सा भतार के ऊपर
दुराचारिणी स्त्री के लिए कहते हैं कि वह किसी कारणवश अपने प्रेमी से क्रोधित हो जाती है तो उसका ग़ुस्सा अपने पति पर उतारती है
यार ज़िंदा सोहबत बाक़ी
अगर दोस्त ज़िंदा है तो सोहबत बाक़ी है, बिलउमूम किसी सोहबत य अजलसे के इख़तताम पर ये कि अजाता है और इस से मुराद होती है कि ज़िंदगी रही तो फिर मुलाक़ात होगी
यहाँ हज़रत जिब्राईल के भी पर जलते हैं
यहां तक ही रसाई थी (मेराज के वाक़िया की तरफ़ इशारा है, हज़रत जबराईलऑ पैग़ंबर सिल्ली अल्लाह अलैहि वालही वसल्लम के हमराह थे एक मौक़ा पर जा के उन्हों ने कहा कि वो इस से आगे नहीं जा सकते पैग़ंबर सिल्ली अल्लाह अलैहि वालही वसल्लम आगे तन्हा रवाना हुए
यहाँ सब कान पकड़ते हैं
यहाँ सब का सर झुका हुआ है, इस जगह किसी की उस्तादी नहीं चलती, यहाँ कोई दावा नहीं कर सकता, इस जगह सब मजबूर हैं
यहाँ तो जग ही डूबा है
एक व्यक्ति ग़लती या भूल-चूक करे तो दूसरे उसे समझाएँ, जब सब ही ग़लती करें तो कौन समझाए
यही गो यही मैदान
यानी अगर दावा है तो उसी जगह समझ लो, यही वक़्त इमतिहान का है, आज़माईश का यही ज़माना है, जब कोई हैसियत से बढ़ कर दावे करता है तो उसे नीचा दिखाने के वास्ते कहते हैं
यही मुँह यही मसाला
इसके लायक़ नहीं है, इसके लिए सक्षम नहीं है, इस काम या बात के क़ाबिल नहीं, ये हैसियत या औक़ात नहीं है
यहीं का चुन यहीं का पुन
जो कुछ है वह यहीं का है, जो कुछ है वह इसी संसार का है, संसार की बातें संसार में रह जाएँगी, चन चोन का अर्थ आटा और पन का अर्थ पानी, अर्थात खाना पीना लेना देना सब इसी संसार का है दूसरी संसार में कुछ नहीं
यक गज़ दो फ़ाख़्ता
एक पंथ दो काज, एक दाव या वार में दुश्मनों का काम तमाम, एक तीर से दो शिकार, एक तदबीर से दो काम होना
यक मन 'इल्म रा, दह मन 'अक़्ल बायद
(फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त) एक भाग ज्ञान के लिए दस भाग बुद्धि की आवश्यक्ता होती है, बुद्धि के बिना ज्ञान से लाभ नहीं उठाया जा सकता
यक सर हज़ार सौदा
एक आदमी और हज़ारों काम , जब कोई आदमी बहुत से कामों में फंसा हुआ होता है तो वो अपनी कम फुर्सती जताने के लिए कहता है, निहायत मसरूफ़
यक-अनार-सद-बिमार
रुक : एक अनार सौ बीमार, चीज़ थोड़ी और ज़रूरतमंद ज़्यादा नीज़ उस वक़्त भी मुस्तामल जब किसी एक शख़्स को बहुत से लोग चाहने लगीं
यक-पंत-दो-काज
रुक : एक पंथ (और) दो काज , एक तदबीर से दो काम निकल आना, एक काम से दो फ़ायदे
यक-पीरी व सद-'ऐब
बुढ़ापा सौ बीमारियों के बराबर है, बुढ़ापा सौ बुराइयों की एक बुराई है
यक़ीन बड़ा रहबर है
यक़ीन हो तो इंसान कामयाबी हासिल करता है, मनुष्य सफल होता है यदि वह निश्चित है
यथा राजा तथा प्रजा
जैसा सरदार होता है वैसे ही उसके अधीन भी होते हैं, हाकिम-ए-वक़त की नीयत और कार्य शैली का प्रभाव प्रजा पर कुछ न कुछ ज़रूर होता है, जैसा राजा होता है वैसी ही उसकी प्रजा भी होती है
ये बेल मंढे नहीं चढ़ने की
यानी इस बात का अंजाम अच्छा नहीं और ये बात सरसब्ज़ होती नहीं दिखाई देती, ये काम पूरा होता हुआ नहीं दिखाई देता, ये मुराद हासिल होनी दुशवार है
ये भी मेरा वो भी मेरा
कोई नाइंसाफ़ी से हर एक चीज़ पर हाथ मारे तो इस की निसबत कहते हैं, जो सब कुछ लेना चाहे
ये गूए और ये मैदान है
आइये अभी प्रतियोगिता हो जाये, अर्थात जब कोई सामर्थ्य से बढ़कर दावा करता है तो उसे नीचा दिखाने के लिए कहते हैं
ये गू औ ये मैदान है
आइये अभी प्रतियोगिता हो जाये, अर्थात जब कोई सामर्थ्य से बढ़कर दावा करता है तो उसे नीचा दिखाने के लिए कहते हैं
ये कला न बधी
सारे उपाय बर्बाद गए, जो उपाय किया न बना या जो काम किया अंजाम को ना पहुँचा, जो बात की पसंद न आई और कोई हीला साधन का कारण न हुआ
ये ख़िदमत हम्माम की लुंगी है
नौकरी और मुलाज़िमत का कुछ भरोसा नहीं है, जिस पद पर आज हम हैं उसी पर कल दूसरा है या यूँ कहो कि नौकरी किसी की विरासत और किसी का अधिकार नहीं है इसका हर व्यक्ति योग्य हो सकता है
ये किस का मूत है
(हक़ार ता) ये किस का नुतफ़ा है, ये किस का नुतफ़ा-ए-बद है, ये किस का जाया है
ये किया तो फिर मुझ से बुरा कोई नहीं
चेतावनी के तौर पर कहते हैं कि अगर मैंने फलां काम किया तो मैं बहुत बुरा व्यवहार करूंगा और मुझे बहुत बुरा लगेगा और फिर मैं भी बदले में वैसा ही करूंगा
ये मुँह और गाजरें
इसके लायक़ नहीं है, इसके लिए सक्षम नहीं है, इस काम या बात के क़ाबिल नहीं, ये हैसियत या औक़ात नहीं है
ये मुँह और खाए चौलाई
ऐसी ख़ाहिश या आरज़ू जो किसी की हैसियत से ज़्यादा हो, जब कोई किसी चीज़ के काबिल ना हो तो कहते हैं
ये मुँह और मलीदा
इसके लायक़ नहीं है, इसके लिए सक्षम नहीं है, इस काम या बात के क़ाबिल नहीं, ये हैसियत या औक़ात नहीं है
ये मुँह और मसाला
इस योग्य नहीं, इस काम या बात के योग्य नहीं, अर्थात इस पदवी एवं कार्य के योग्य या अधिकारी नहीं, यह सामर्थ्य या शक्ति नहीं है
ये मुँह और मसाला
इस योग्य नहीं, इस काम या बात के योग्य नहीं, अर्थात इस पदवी एवं कार्य के योग्य या अधिकारी नहीं, यह सामर्थ्य या शक्ति नहीं है
ये मुँह और मसूर की दाल
इस योग्य नहीं, इस काम या बात के योग्य नहीं, अर्थात इस पदवी एवं कार्य के योग्य या अधिकारी नहीं, यह सामर्थ्य या शक्ति नहीं है
ये मुँह पान जोगा
तुस इसके लायक़ नहीं है, तुम इसके लिए सक्षम नहीं हो, इस काम या बात के क़ाबिल नहीं, ये हैसियत या औक़ात नहीं है
ये नौकरी है ख़ाला जी का घर नहीं
नौकरी में समय की पाबंदी और हाज़िरी ज़रूरी है (नियमों का पालन न करने पर कहते हैं), ये नहीं कि जब मन किया चले गए, मानो कि बेतकल्लुफ़ी अथवा अनौपचारिकता का मिलना हो
ये तो कबीर भी कह गए हैं
ये तो मुस्लिमा बात है, ये बात तो और सब बुज़ुर्गों की तस्लीम की हुई है, उसे तो आरिफ़ बिल्लाह भी मानते हैं ये तो मानी हुई और तस्लीम की हुई बात है
यह मुँह पान जोगा
जब किसी ऐसे मनुष्य को पान दिया जा रहा हो जिसने किसी की निंदा की हो तब उसके प्रति तिरस्कार दिखाते हुए कहते हैं