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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

बड़ तले का भूत

उस व्यक्ति के प्रति कहा जाता है जिस से पीछा छुड़ाना कठिन हो

बड़ा आदमी दाल खाए तो सादा-हाल ग़रीब खाए तो कंगाल

एक ही बात में किसी का सम्मान किसी का अपमान, एक ही काम में एक के लिए बदनामी दोसरे के लिए ख्याती होती है

बड़ा बोल क़ाज़ी का प्यादा

घमंड करके आदमी बहुत जल्दी नीचा साबित हो जाता है

बड़ा जाने किया, बालक जाने हिया

बच्चा जो उससे प्रेम करे उसे अच्छा समझता है और अनुभवी व्यक्ति दूसरे के काम को देख कर उसके संबंध में राय स्थापित करता है

बड़ा पत्थर न उठ सके तो तीन सलाम कर के छोड़ दीजिये

जो कार्य न हो सकता हो उसे छओड़ ही देना चाहिए

बड़े बड़े बहे जाएँ, गडड़िया पूछे कित्ती थाह

जहाँ बड़े बड़े लोगों की भी किसी को परवाह नहीं वहाँ साधारण व्यक्ति को कौन पूछेगा

बड़े बर्तन की खुरचन भी बहुत है

आर्थिक स्थिति बिगड़ जाने पर भी बड़े आदमी के घर में जो निकलता है वही बहुत होता है

बड़े बोल का सिर नीचा

अभिमानी को रुसवा होना पड़ता है, ग़ुरूर से बड़ा बोल बोलने वाले को रुसवा होना पड़ता है

बड़े चोर का हिस्सा नहीं

बलवान जो चाहे ले ले उसका कोई निश्चित हिस्सा नहीं होता

बड़े घर पड़े पत्थर ढो ढो मरे

ऊण् ख़ानदान में रिश्ता होने से क़िस्म किस्म की मुश्किलात का सामना करना पड़ता है, मालदार के पास रह कर कामयाब ना होना बदनसीबी ऊण् ख़ानदान तकलीफ़ में मुबतला रहता है

बड़े कड़ाही में तले जाते हैं

हमारे दिल में बड़ों का कोई रो'ब नहीं

बड़े मियाँ तो बड़े मियाँ, छोटे मियाँ सुबहानल्लाह

छोटे तेज़ी और शरारत में बड़ों से बढ़ कर हैं, एक से एक बढ़ कर है

बड़े न बूड़न देत हैं जाकी पकड़ें बाँह, जैसे लोहा नाव में तिरत फिरे जल माँह

जिस प्रकार नाव के साथ लोहा तिर जाता है उसी प्रकार बड़े जिसकी सहायता करें वह सफल हो जाता है

बड़े तो बड़े छोटे सुब्हान-अल्लाह

बड़ों का क्या वर्णन छोटे उन से भी अधिक शरारती या बुराई में लिप्त हैं

बढ़ा तो अमीर, घटा तो फ़क़ीर, मरा तो पीर

सब हाल में ठीक है (हिन्दू लोग मुसलमानों के बारे में कहते हैं)

बड़ी बहू बड़ा भाग

पत्नी उम्र की बड़ी हो तो क़िस्मत अच्छी होती है

बड़ी बहू को बुलाओ खीर में नमक डालें

किसी होशियार के हाथ से काम बिगड़ जाने पर व्यंगात्मक तौर पर प्रयुक्त है

बड़ी बहू ने निकाले कार, वो ही उतरी पारम पार

बड़े बूढ़ों ने जो तरीक़ा एवं विधान जारी कर दिया वही छोटों की कार्य-प्रणाली हो गई

बड़ी भैंस पर बालाई

बड़ी भैंस में अधिक मक्खन होता है

बड़ी कमाई पर नोन बुकवा

अधिक आमदनी के उपरांत नमक बेचते हैं, कंजूस व्यक्ति पर व्यंग है

बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है

बलवान निर्बल को सताता है, एक जीव दूसरे पर आश्रित है

बड़ों का बड़ा ही भाग

बड़ों का भाग्य भी बड़ा ही होता है

बड़ों का बड़ा ही मुँह

बड़ों की आग्रह भी बड़ी होती है

बड़ों की बात बड़े पहचानें

बड़े आदमी ही बड़ों की बात समझ सकते हैं

बँधा ख़ूब मार खाता है

मजबूर आदमी को जितना चाहो दबा लो या सता लो ख़ामोश रहेगा

बँधी मुट्ठी लाख बराबर

उपहार किसी को छुपा कर देना चाहिए, छुपा कर दिया जाए तो सस्ता उपहार भी बहुत महंगा प्रतीत होता है

बँधी रहे न टके बिके

अधिक लाभ की आस में किसी वस्तु को रोक कर बेचना सामान्यतया हानिकारक होता है

बंगाली जो आदमी तो प्रेत कहो किस को

बंगाली यदि मनुष्य है तो भूत कौन है

बाड़ ही जब खेत खाए तो रखवाली कौन करे

जब रक्षक ही भक्षक हो तो किस से सहायता की गुहार लगाई जाये

बाड़ लगाई खेत को बाड़ खेत को खाए राजा हो चोरी करे नियाव कोन चुकाए

जब रक्षक ही भक्षक हो तो किस से सहायता की गुहार लगाई जाये

बाड़ में क्यों बोहिया तुड़ाया

व्यर्थ क्यों हानि उठाया, व्यर्थ क्यों परिश्रम की

बाड़ रखे खेत को और खेत रखे बाड़ को

जिस तरह बड़े छोटों के काम आते हैं इस तरह छोटे भी बड़ों के काम आते हैं

बाढ़ काटे नाम तलवार का

मातहत काम करते हैं शोहरत अफ़सरों की होती है, काम कोई करता है नाम किसी और का होता है

बाड़ी में बारह आम सट्टी अठारह आम

फ़सल में गिरानी और ग़ैर फ़सल में अर्ज़ानी , नौकर का आक़ा से भी ज़्यादा मिज़ाज

बाँध खीसा खा हरीसा

पैसा पास होतो अनोखी से अनोखी वस्तु मिल सकती है, रूपये से सब काम निकलते हैं

बाँध सकेला फीरे अकेला

हथियारबंद के साथ रहने से लोग घबराते हैं कि कहीं किसी झगड़े में न फँस जाएँ

बाँधे सकेला, फिरे अकेला

हथियारबंद व्यक्ति को किसी का डर नहीं

बाँधी मूठी का बड़ा भरम

एकता में ही शक्ति है

बाँदी औरों के पाँव धोवे , अपने लिये सोवे

दूसरों के काम में चुसती और अपने काम में सुस्ती

बाँदी जब शादी करती है तो ऐसी ही करती है

तुच्छ या डींगें मारने वाला व्यक्ति शादी आदि में अपनी स्थिति या क्षमता से अधिक काम करता है

बाँदी के आगे बाँदी आई, लोगों ने जाना आँधी आई

निम्न स्थिति का व्यक्ति यदि समृद्ध हो जाए तो अहंकार में फूल जाता है और दूसरों की पीड़ा का ध्यान नहीं रखता

बाँदी के आगे बाँदी मेंह देखे न आँधी

कमीने आदमी नौकरों से बहुत काम लेते हैं

बाँदी को बाँदी कहा रो दी, बीवी को बाँदी कहा हँस दी

दोषपूर्ण व्यक्ति का दोष बताया जाए तो वह बुरा मानता है एवं दोषमुक्त पर दोष लगाया जाए तो वह हंस कर टाल देता है

बाँह पकड़े की और निबाहना

सहारा देकर अंत तक निबाहना चाहिए

बाँह टूटती है तो गले में आती है

मुसीबत में अपने ख़ास क़रीबी लोगों ही का सहारा होता है

बाँझ अच्छी इकाँज बुरी

जिस स्त्री के बच्चा ही न हो वो एक बच्चे वाली स्त्री से अच्छी है क्यूँकि उसे हर समय बच्चे के मर जाने का भय रहता है

बाँझ बंजोटी, शैतान की लंगोटी

बाँझ स्त्री शैतान के वश में होती है और अकेली होने के कारण शरारत की बातें सोचती रहती है

बाँझ बियानी, सोंठ उड़ानी

बाँझ के अगर लड़का हो तो उसका सम्मान बहुत बढ़ जाता है

बाँझ बियावे सोंठिया खाने को

आदत के विपरीत काम किसी उम्मीद ही पर होता है

बाँझ क्या जाने परसोती की पीड़

जो पीड़ा किसी ने स्वयं न उठाई हो उसे वह नहीं समझ सकता

बाँस चढ़े गुड़ खाय

अश्लीलता अपनाना मतलब हासिल हो

बाँस चढ़ी तो अब घूँगट कैसा

अपनी बेपर्दगी पर घूंघट या इज़्ज़त को कहाँ तक सँभालेगा, बेपर्दा होने पर घूंगट और इज़्ज़त क़ायम नहीं रह सकती

बाँस डूबें पूरी थाह माँगे

जिस काम के अंजाम देने से बड़े बड़े लोग असमर्थ हैं उसे मामूली आदमी क्या अंजाम दे सकता है

बाँस गुन बसोर चमार गुन आधोर

बाँस की अच्छाई जंगल में और चमार की अच्छाई चमड़े के गोदाम में प्रकट होती है, हर चीज़ अपनी-अपनी जगह पर बहुत अच्छी लगती है

बाँस के बाँस मल्लाही की मल्लाही

दोहरी तकलीफ़, धन-दौलत की हानि और ऊपर से पड़ोसियों का उपहास

बांस की जड़ में घमोय जमे हुए

अच्छी वस्तु को त्रुटि या दोष लगा हुआ

बाँटल भाई पड़ोसी बराबर

अलग रहने वाला भाई पड़ोसी के समान है

बाबा आएँ न घंटा बजे

किसी के बिना कोई काम रुका पड़ा हो और उसकी प्रतीक्षा की जा रही हो तब कहते हैं

बाबा आवें न घंटा बाजे

जब तक बाबा नहीं आजाते घंटा नहीं बजने का, ऐसे मौक़ा पर मुस्तामल जब एक काम का करना किसी दूसरे दुशवार तर काम पर मौक़ूफ़ हो

बाबा कमावे, बेटा उड़ावे

पिता ने कमाई करके जोड़ा, इकट्ठा किया, और बेटे ने अपव्ययी या विलासिता और व्यर्थ में बर्बाद कर दिया

बाबा मरा निहालू जना वही तीन के तीन

जितना नुक़्सान हुआ था इतना ही फ़ायदा हो गया

बाबा मरें तो बैल बटें

रुकावट दूर हो तो लाभ प्राप्त हो

बा'द अज़ ख़राबी बसरा

बड़ी मुश्किल से, बड़ी कठिनाई से, बड़े हानि के बाद (फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त)

बादाम दो एक पोस्त हैं

बहुत निश्छल और मित्र आपस में मिले हुए हैं

बा'द-अज़-ख़राबी-ए-बिस्यार

मुसीबतें उठाने के बाद, तकलीफें सहने के बाद, विपत्ति में ग्रस्त होने के बाद

बा'द-अज़-मर्ग वावेला

वक़्त गुज़रने के बाद शोर और हंगामा से क्या फ़ाइदा

बादला मंढे से नीम नहीं छुपता

भेस बदलने से असलीयत नहीं बदलती

बादशाह और 'आशिक़ दूसरे को नहीं देख सकता

प्रेमी ईर्ष्या के कारण और बादशाह देश में उपद्रव होने की वजह से अपने अलावा दूसरे को गवारा नहीं कर सकता

बादशाह का हुक्म मर्ग-ए-मुफ़ाजात

देखिए : हुक्म-ए-हाकिम मर्ग-ए-मुफ़ाजात, जो ज़्यादा प्रयोग में है

बादशाह मारी पोदनी हम बैर बसावन जाएँ

मुक़ाबले के मौक़ा पर डरपोक का साथ दे कर अपने आप को क्यों मुसीबत में डाला जाये

बादशाहों और दरियाओं का फेर किस ने पाया है

दोनों का कुछ पता नहीं होता कि क्या करेंगे

बादशाहों की बातें बादशाह ही जानें

बड़ों की बातें बड़े ही जान एवं समझ सकते हैं

बाग़ लगा नहीं मंगतों ने डेरे डाल दिये

वस्तु तैयार होई नहीं माँगने वाले पहले से आ अरस्थित हुए

बाघ की मासी बिलाई

एक ही प्रकार के हैं अथवा एक ही नस्ल से हैं, बिल्ली और शेर एक ही नस्ल से हैं

बाह मरें बैल बैठे खाएँ तरंग

बैल तो हल चलाते हैं और घोड़े बगै़र मेहनत के खड़े खड़े खाते हैं, कोई मेहनत करता है कोई मज़े उड़ाता है,अपनी अपनी क़िस्मत है

बाहर के खाएँ घर के गीत गाएँ

योग्य वंचित रह जाएँ अयोग्य लाभान्वित हों, परायों को लाभ पहुँचे और अपने वंचित रहें

बाहर की चिकनी चुपड़ी से घर की रूखी ही भली

अपनी कमाई का मा'मूली खाना भी दूसरों के दिए हुए उम्दा खाने से अच्छा होता है

बाहर मियाँ अब्बे-तब्बे घर में भूनी भंग नहीं

मुफ़लिस और ज़ाहिरी नमूद वाले हैं

बाहर मियाँ हफ़्त हज़ारी घर बीवी फ़ाक़ों मारी

मियाँ ठाठ से नवाब बने फिरते हैं बीवी भूखी रहती है या नसीबों को रोती है

बाहर मियाँ झंग झंगीले घर में नंगी जोए

मियाँ ठाठ से नवाब बने फिरते हैं बीवी भूखी रहती है या नसीबों को रोती है

बाहर मियाँ सूबेदार घर में बीबी झोंके भाड़

मियाँ ठाठ से नवाब बने फिरते हैं बीवी भूखी रहती है या नसीबों को रोती है

बाहर त्याग भीतर सुभाग

बाहर कुछ अंदर कुछ, ज़ाहिर कुछ बातिन कुछ

बाहर वाले खा गए और घर के गाएँ गीत

दूसरे लाभ उठाएँ और अपने लोग को भूखा मरें

बाजरा कहे में हूँ अकेला दो मोसली से लड़ूँ अकेला जो मेरी ताजो खिचड़ी खाए तो तुरत बोलता ख़ुश हो जाए

एक कहावत जो बाजरे की प्रशंसा में प्रयुक्त, परयायवाची: यदि सुंदर स्त्री बाजरा खाए तो बहुत प्रसन्न हो

बाजरे की टट्टी गुजराती ताला

अनावश्यक बात, असमय प्रबंधन

बाल जंजाल पले तो पाल, नहीं तो मूँछों को टाल

बालों को यदि अच्छी तरह रख सकते हो तो रक्खो नहीं तो मुंडवाओ

बाल उखाड़ने से मुर्दा हल्का नहीं होता

मामूली कोशिश से कोई बहुत बड़ा काम अंजाम नहीं पाता (अक्सर तंज़िया नीज़ इस्तिफ़हाम-ए-इन्कारी के तौर पर मुस्तामल)

बाला कुन कि अर्ज़ानी हनूज़

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) और क़ीमत बढ़ा क्योंकि ये क़ीमत बहुत कम है, बहुत बावक़अत है, बेशक़ीमत चीज़ है (बिलउमूम बतौर तंज़न मुस्तामल)

बालकों को सिखाना बालकपन ही से चाहिए

बच्चों का प्रशिक्षण बचपन ही से करना चाहिए

बाले की माँ और बूढ़े की जोरू को ख़ुदा न मारे

ना फिर उस को माँ मिलेगी ना उस को जोरू हाथ आएगी यानी इस उम्र का आदमी दूसरे का मुहताज होता है

बालू की भीत ओछे का संग, परतुरिया की प्रीत तितली का रंग

ओछे की मित्रता बालू अर्थात रेत की दीवार की तरह है और रंडी का प्रेम तितली के रंग की तरह

बामन बेटा लोटे पोटे मूल बियाज दोनों घोटे

ब्रहमन को क़र्ज़ा दिया जाये तो सूद कुजा असल भी वसूल नहीं पोती, वो मिन्नत समाजत कर के छुड़ा लेता है

बामन जीमे जब ही पतियाए

ब्राहमण जब तक खा न ले नक़द माँगता रहता है

बामन का बेटा बावन बरस तक बौंगा

ब्राह्मण जीवन भर मांग कर खाता है काम नहीं करता

बामन की बेटी कलिमा भरे

दूसरे धर्म की अच्छाई को मान ने

बामन की बेटी कलिमा जपे

दूसरे धर्म की अच्छाई को मान ले

बामन की बेटी कलिमा पढ़े

दूसरे धर्म की अच्छाई को मान ले

बामन मंत्री भाट ख़्वास इस राजा का होवे नास

लालची मंत्री एवं चापलूस परामर्शदाता सरकार के पतन का कारण होते हैं

बामन नाचे धोबी देखे

जो मेहनत से अपनी जीविका चलाता है वह भिखारी पर हँसता है

बामन-बचन-परवान

लिखे पढ़े की बात काबिल मंद होती है, तजरबाकार आदमी के कलाम पर ज़्यादा भरोसा होता है, ऐसे मौक़ा पर मुस्तामल जहां कोई ऐसी बात कहे जिस के मालिन्य में कुछ फ़ायदा ना हो मगर बज़ाहिर इस का इक़रार करना मुनासिब मालूम हो

बा-मुसलमाँ अल्लाह अल्लाह बा-ब्रह्मण राम राम

जैसा दस-ओ-बसा भेस (सलहकार आदमी की निसबत मुस्तामल जिसे किसी से पर्ख़ाश ना हो

बान जल गया पर बल न गए

रस्सी जल गई ऐठन न गई अर्थात बरबाद हो गए पर शेख़ी न छूटी

बानिये की बान न जाए, कुत्ता मूते टाँग उठाए

बा-वजूद समझाने के जब कोई अपनी शरारतों और अनुचित हरकतों से बाज़ न आए तो कहते हैं

बानिये की बान न जले , कुत्ता मूते टाँग उठाए

फ़हमाइश के बावजूद अपनी हरकतों और शरारतों से बाज़ नहीं आता

बाप बनिया, पूत नवाब

कमीने एवं डींग हाँकने वाले के प्रति कहते हैं कि अपनी हैसियत से बढ़ कर बात करता है

बाप भला न भैया, सब से भला रुपैया

रुपए के लिए सब नाते टूट जाते हैं

बाप चुप-चुप, पूत लप-झप

बाप तो चुप्पा या सीधा है और लड़का शरारती

बाप दीना माँ पुदीना बेटा मिर्ज़ा नीना

कमअस्ल आदमी अपने आप को बहुत बड़ा बनाना है

बाप दिखा या गोर बता

या तो खोई हुई चीज़ तलाश करके लाओ या फिर उस की गुमशुदगी साबित करो

बाप डोम और डोम ही दादा, कहे मियाँ मैं शर्मा-ज़ादा

शेख़ी मारने वाले के प्रति भी कहते हैं

बाप-हफ़्त हज़ारी

बाप से माँ की मुहब्बत ज़्यादा होती है

बाप का नाम साग-पात, बेटे का नाम परवर

जो धन के प्रति बाप से बढ़ कर स्वयं को दर्शाए

बाप कंटक, पूत हातिम

बाप कंजूस एवं बेटा दानवीर

बाप करे बाप पाए बेटा करे बेटा पाए

हर किसी को उसके अपने कर्मों की सज़ा दी जाएगी, एक की सज़ा दूसरे को नहीं दी जाएगी, हर एक अपने आमाल की सज़ा ख़ुद भुगतेगा

बाप के माल पर आँखें लाल

बच्चे बाप की दौलत धड़ल्ले से ग़लत कामों जैसे मदिरा-पान इत्यादि में उड़ा देते हैं

बाप की बरात बेटा जाए

संतान के रहते हुए जब कोई दूसरा विवाह कर लेता है तब कहते हैं

बाप की नाव आज नहीं कल और कल नहीं परसों डूबे और डूबे

पापी को दण्ड अवश्य मीलता है, बुराई को अवश्य पतन है

बाप की टाँग तले आई और माँ कहलाई

सम्मान के योग्य न होते हुए विवश हो कर जिसका सम्मान करना पड़े उसके लिए व्यंग्य में कहते हैं

बाप को आटा न मिले जो ईंधन को भेजे

कोई स्थिति न बन जाए कि काम करना पड़े, सुस्त और आलसी के बारे में उपयोग किया जाता है

बाप को पूत पिता पत घोड़ा बहुत नहीं तो थोड़ा थोड़ा

प्रत्येक व्यक्ति और जानवर में अपने बाप की स्वभाविक विशेषता पाई जाती हैं, अपने वंश का प्रभाव ज़रूर आता है, बीज की प्रभावशीलता प्राकृतिक है

बाप मरा बेटा भया, इस का टोटा उस में गया

जितना घाटा हुआ उतना लाभ हो गया, प्रायः व्यंग्य में ही कहते हैं

बाप न दादे सात पुस्त हराम ज़ादे

निराधार व्यक्ति जो घमंड से स्वत्वाधिकार जताए, नौ-दौलतिया

बाप न मारे पिदड़ी बेटा गो-अंदाज़

बाप दादा से कुछ हो नहीं सका बेटा सोरमाई दिखाता है (वो लोग जिन के बुज़ुर्गों से कुछ ना होसका, जब बढ़ चढ़ कर दावे करते हैं तो इस मौक़ा पे तंज़िया कहा जाता है)

बाप न मारे पिदड़ी बेटा तीर-अंदाज़

बाप दादा से कुछ हो नहीं सका बेटा सोरमाई दिखाता है (वो लोग जिन के बुज़ुर्गों से कुछ ना होसका, जब बढ़ चढ़ कर दावे करते हैं तो इस मौक़ा पे तंज़िया कहा जाता है)

बाप नर कटय्या , पूत भगतय्या

बुरे बाप की अच्छी संतान

बाप ओछान , माँ डाबन

दोनों मुरब्बी ज़दर रसां

बाप पंडित, पूत छिनैरा

अच्छों की ना-लायक़ एवं कमानी संतान

बाप पर पूत पिता पर घोड़ा, बहुत नहीं तो थोड़ा थोड़ा

प्रत्येक व्यक्ति और जानवर में अपने बाप की स्वभाविक विशेषता पाई जाती हैं, अपने वंश का प्रभाव ज़रूर आता है, बीज की प्रभावशीलता प्राकृतिक है

बाप पेट में पूत ब्याहे चला

बेटा बाप से बढ़ कर चालाक है

बाप पूत बराती

ग़रीबों की शादी के मुताल्लिक़ कहते हैं

बाप से बैर, पूत से सगाई

बाप से तो दुश्मनी और लड़के से मित्रता

बापत पूत परापत घोड़ा कुछ नहीं तो थोड़ा थोड़ा

प्रत्येक व्यक्ति और जानवर में अपने बाप की स्वभाविक विशेषता पाई जाती हैं, अपने वंश का प्रभाव ज़रूर आता है, बीज की प्रभावशीलता प्राकृतिक है

बापुत पूत पिता पर घोड़ा बहुत नहीं तो थोड़ा थोड़ा

प्रत्येक व्यक्ति और जानवर में अपने बाप की स्वभाविक विशेषता पाई जाती हैं, अपने वंश का प्रभाव ज़रूर आता है, बीज की प्रभावशीलता प्राकृतिक है

बाक़ी का मारा गाँव , चिलमों का मारा चूल्हा और ओलों का मारा खेत पनपता ही नहीं

जिस गान के लोगों पर लगान बाक़ी रह जाये या जिस चूल्हे से बार बार आग निकाली जाये या जिस खेत पर ओले पड़ जाएं वो कभी अच्छी हालत में नहीं रहते

बारह बाट, अठारह पैंडे

बारह रास्ते और अठारह पगडंडियाँ, कौन-सा मार्ग चयनित किया जाए

बारह बरस दिल्ली में रहे और भाड़ ही झोंका

उस अवसर पर प्रयुक्त है जब कोई निरंतर अवसर मिलने पर भी विकास न करे या न सीखे

बारह बरस काठ में रहे, चलती दफ़ा' पाँव से गए

जल्दी करने में मनुष्य हानि उठाता है

बारह बरस के बा'द घूरे के भी दिन फिरते हैं

कंगाली या परेशान हाली हमेशा नहीं रहती

बारह बरस के बैद क्या और अट्ठारह बरस के क़ैद क्या

बारह वर्ष के लड़के को सिखाने की क्या आवश्यकता वह स्वयं समझता है एवं अठारह वर्ष के लड़के पर नियंत्रण की भी क्या आवश्यकता उसे स्वयं अपना भला-बुरा समझना चाहिए

बारह बरस की कन्या और छटी रात का बर वो तो पीवे दूध है तेरा मन माने सो कर

जब वास्तविकता में पति बुरा है तो स्त्री को अधिकार है जो चाहे सो करे

बारह बरस की कन्या पठिया बीस बरस की टटिया

शादी के बाद स्त्री के जल्द बूढ़े हो जाने की तरफ़ संकेत

बारह बरस में फ़क़ीरी और अमीरी की बू नहीं जाती

चस्का या लत बहुत दिनों के पश्चात छूटती है

बारह बरस सैई काशी मरने को मगध की माटी

अवधि तक प्रतिक्षा में रहे और इच्छा पूरी न हुई (हिंदूओं का ख़्याल है कि जो काशी में मरे वह आवा-गोन से छूट जाता है जो मगध में मरे वह गधे की जून में जाता है

बारह ब्राह्मण बारह बाट बारह देहाती एक घाट

शरीफ़ों में तो वैमनस्य और कमीनों भाई-चारा, मेल-जोल

बारह ब्राह्मण बारह बाट बारह खाती एक घाट

शरीफ़ों में तो वैमनस्य और कमीनों भाई-चारा, मेल-जोल

बारह गाँव का चौधरी अस्सी गाँव का राव, अपने काम न आवे तो ऐसी तैसी में जाव

कोई कितना ही बड़ा आदमी क्यूँ न हो परंतु उससे अगर कोई अपना मतलब न निकले तो उसका वह बड़प्पन किस काम का?

बारह में तीन गए तो रहे क्या ख़ाक

बारह में से यदि बरसात के तीन महीने सूखे ही निकल जाएँ तो फिर कुछ बचता नहीं क्यूँकि फिर अन्न पैदा नहीं होगा

बारह वफ़ात की खिचड़ी आज है कल नहीं

ऐसी वस्तु जो आज तो बहुतायत से मिल रही हो परंतु फिर न मिले

बार-बार पानी पीते हैं

बार-बार न्योछावर हो रहे हैं

बारू जैसी भुरभुरी धौली जैसे धूप मीठी ऐसी कुछ नहीं जैसे मीठी चूप

शुक्र जो रीत की तरह भर भरी और धूप की तरह सफ़ैद होती है, चुप से ज़्यादा मीठी नहीं होती, ख़मोशी की तारीफ़ के मौक़ा पर मुस्तामल

बासन से वही टपकता है जो उस में भरा है

घ‌ड़े में जो होगा वही टपकेगा, जिस्की बुद्धी जैसी होगी वैसी ही वाणी उसकी ज़बान पर आएगी

बासी बचे न कुत्ता खाए

ग़रीबी की हालत के लिए कहते हैं

बासी भात में अल्लाह मियाँ का निहोड़ा

ख़राब वस्तु देकर उपकार जताना क्या अर्थ रखता है

बासी कढ़ी में उबाल आया

अकस्मात क्रोध के लिए भी कहते हैं

बासी मुँह फूका पानी औगुन करे है

नहार-मुँह या ख़ाली पेट पानी पीना हानि पहुँचाता है

बाट भली पर साँकरी

रास्ता अच्छा है मगर तंग है, बात अच्छी है मगर इस में उलझनें हैं

बाट चले जानिये या बाहा पड़े जानिये

मुआमला पड़ने या सफ़र या सोहबत या हमसायगी से आदमी का हाल खुलता है

बात छीले रुखड़ी काठ छीले चिकना

बात में जितनी चर्चा बढ़ाओ उतनी ही उसमें बारीकियाँ निकलती चली आती हैं

बात गई फिर हाथ नहीं आती

मुँह से निकली बात वापस नहीं आती इसलिए ध्यान से बोलना चाहिए

बात हाथी पाए बात हाथी पाँव

बात ही के कारण (कभी) उपहार मिलता है और उसी के कारण (कभी) दंड भुगतना पड़ता है

बात जो चाहे अपनी, पानी माँग न पी

सम्मान इसमें है कि हाथ फैलाकर किसी के सामने सवाल न किया जाए, संतोष और धैर्य मर्यादा और महानता का साधन है

बात का चूका आदमी या डाल का चूका बंदर फिर सँभलता नहीं

जो व्यक्ति मौक़ा पर चूक जाता है वो उसकी भरपाई नहीं कर सकता और नुक़्सान उठाता है, जिस तरह बंदर के हाथ से पेड़ की डाल छूट जाती है तो वह अवश्य गिर पड़ता है

बात कही और पराई हुई

राज़ अर्थात भेद मुँह से निकलते ही प्रसिद्ध हो जाता है, भेद मुँह से निकलने के पश्चात भेद नहीं रहता

बात कही पराई हुई

राज़ अर्थात भेद मुँह से निकलते ही प्रसिद्ध हो जाता है, भेद मुँह से निकलने के पश्चात भेद नहीं रहता

बात कहिये जग भाती और रोटी खाइये मन भाती

बात वह कहे जो दूसरों को अच्छी लगे एवं भोजन वह करे जो स्वयं को अच्छा लगे

बात लाख की करनी ख़ाक की

काम के योग्य नहीं बातें बहुत बनाता है, काम से कोरे बातों के बादशाह

बात मुँह से निकली हज़ार में पड़ी

भेद यदि किसी से भी बता दिया जाए तो फिर वह फैल जाता है, फिर वह भेद, भेद नहीं रहता

बात मुँह से निकली पराई हुई

राज़ यदि किसी को बता दिया जाए तो वह फैल जाता है, फिर वह राज़ राज़ नहीं रहता

बात पर बात याद आती है

प्राय: उपालंभ के उत्तर में कहा जाता है कि तुमने याद दिलाया तो हम भी कह सकते हैं

बात पूछे बात का लच्छन पूछे

हुज्जती व्यक्ति के लिए प्रयुक्त

बात रह जाती है वक़्त गुज़र जाता है

विपत्ति का समय बीत जाता है किंतु व्यक्तियों के व्यवहार याद रह जाते हैं

बात थल की न बेड़े की

वचन कभी पूरा नहीं होता, कथन पर स्थिर नहीं रहते (जिसका मूड स्थिर न हो उसके लिए प्रयुक्त)

बातें करे मैना की सी, आँखें बदले तोते की सी

बातें तो उसकी बहुत अच्छी हैं परंतु बहुत बे-वफ़ा है

बातों बूढ़ा, करतब ख़्वार

बातें बड़े बूढ़ों जैसी करे परंतु काम में निकम्मा

बातों चीतों मैं बड़ी, करतब बड़ी जेठानी

जो महिला बहुत बातें करे और काम न करे उसके प्रति कहा जाता है

बातों हाथी पाइयाँ बातों हाथी पाँव

बात सुनने वाले (विशेषतः शासक) के स्वभाव के अनुसार हो तो सम्मान मिलता है और स्वभाव के विरुद्ध पड़े तो दुख एवं पीड़ा का कारण बन जाती है, उन्नति एवं अवनति भाषा ही के कारण है

बातों के चिकने कामों के ख़्वार

बातें बनाना बहुत अच्छा आता है लेकिन निकम्मा (निकम्मी) है

बावा आवे ताली बाजे

बुज़ुर्ग आए तो अपने आप ही प्रसिद्धि हो जाती है

बावा भला न भैया सब से बड़ा रूपैया

रूपये का महत्त्व संसार में सभी चीज़ों से बढ़ कर है

बावा मरेंगे तब ही बैल बटेंगे

आशा काल्पनिक है, उम्मीद फ़र्ज़ी है

बावले कुत्ते ने काटा है

पागल होगया है, दीवानों की सी बातें करता है (प्रायःप्रश्नवाचक वाक्य में प्रयुक्त)

बावन तोले पाव रत्ती

(इल्मॱएॱ कीमिया) दो चावल बावन तो ले ताँबे को सोना बनादेती है (अदबीयात) बिलकुल ठीक, कुछ शुबा नहीं, निहायत कारआमद

बावला कुत्ता हिरन खदेड़े

जब आदमी को दीवाने की तरह किसी काम की धुन हो जाए तो वह अपनी शक्ति से ज़्यादा साहस करता है

बावले गाँव में ऊँट परमेशर

मूर्खों के गाँव में ऊँट आया तो वो उसे ईश्वर ही समझ बैठे, अर्थात मूर्खों के लिए सामान्य चीज़ें भी अनोखी और बहुत बड़ी मालूम होती हैं

बावले को आग बताई उस ने ले घर को लगाई

मूर्ख व्यक्ति थोड़ा सा उकसाने में उग्र होकर अपना नुक़्सान कर बैठता है

बावली बहू आग को जावे, उप्ला डाले तवा उठा लावे

मूर्ख भी अपने लाभ की बात को अच्छे से समझता है, ऊपर से मूर्ख भीतर से चालाक

बावली खाट के बावले पाए बावली रांड के बावले जाए

माता-पिता का प्रभाव संतान में अवश्य स्थानांतरित होता है, ना समझ एवं जाहिल माएँ बच्चों की सही से प्रशिक्षण नहीं कर सकतीं

बाज़ार की गाली हँस कर टाली

आम पब्लिक और जनता के बीच में जो इल्ज़ाम लगाया जाए उस का जवाब नहीं देना चाहिए (ताकि तमाशा न बने)

बाज़ार की गाली जिस ने सुनी उस पर पड़ी

जो कोई ऐसे ताने या आरोप का जवाब देगा जिसका कोई ख़ास व्यक्ति उद्धिश्ट नहीं है, स्पष्ट हो जाएगा कि वह उसी पर लागू होता है

बाज़ार की गाली जो खिझे उस को हो

जो भ्रामक आरोप का बुरा माने उसके सर चिपक जाता है

बाज़ार की गाली किस की, जो फिर कर देखे उस की

कौन क्या कहता है इसकी परवाह नहीं करनी चाहिए

बाज़ार की मिठाई से निरबाह नहीं हो सकता

आस्थायी वस्तु ख़ास कर बाज़ारी स्त्री से सदैव काम नहीं चल सकता

बाज़ार की मिठाई, जिस ने पाई उस ने खाई

ऐसी वस्तु के लिए कहा जाता है जो सब के लिए सुलभ हो

बाज़ार लगा नहीं गट्टे वाले होत

समय से पहले ही अपना अपना मौक़ा ढूंढना

बाज़ार में सर मुंडा घर न कहना

बात मशहूर हो गई अब छिपाने से क्या फ़ायदा

बाज़ार उस का जो ले के दे

साख उस की होती है जो उधार अदा करे, मामले और लेनदेन का साफ़ और खरा हो

बाज़ारी आदमी का क्या ए'तिबार

कमीने और अपमानित व्यक्ति का भरोसा नहीं हो सकता

बाज़ारी चीज़ बोदी होती है

बाज़ार की वस्तु घटिया एवं जल्द ख़राब हो जाने वाली होती है

बाज़ू टूटे बाज़ को बाज़ ही लुक़्मा दे

अपने सजातीय की सेवा और देख-रेख सजातीय ही करता है

बाज़ू टूटे बाज़ को साईं तो'मा दे

अपने पाले हुए की पालने वाले ही को मुहब्बत होती है

बच बे जुम्मा, आँधी आई

आती विपत्ति से सावधान होने के लिए कहते हैं

बच्चे की माँ और सौ रूपे की पूँजी क्या

ज़ेर-ए-बहिस चीज़ बेहक़ीक़त है

बच्चे की माँ बूढ़े की जोरू सलामत रहे

जिस तरह माँ की मौत के बाद बच्चा माँ जैसी मम्ता वंचित हो जाता है उसी तरह बीवी की मौत से बूढ़ा आदमी बेसहारा हो जाता है

बच्चों से घर की रौनक़ है

बच्चों की वजह से घर में चहल-पहल रहती है, अगर बच्चे न हों तो घर बेरौनक़ मालूम होता है

बचे सर हज़ार घर

एक अच्छे आदमी की रक्षा होने से हज़ार घरों की रक्षा होती है

बछ्ड़ा खूंटे के बल कूदता है

छोटा आदमी बड़े का सहारा पाकर ही अकड़ दिखाता है

बद अच्छा बदनाम बुरा

इसलिए कि बदनाम आदमी कोई बुराई न भी करे तो भी लोगों का ध्यान उसी की ओर जाता है

बद बदी से न जाए तो नेक नेकी से भी न जाए

चाहे बुरा आदमी अपनी बुराई से बाज़ ना आए मगर नेक को अपनी नेकी नहीं छोड़ना चाहिए

बद भला बदनाम बुरा

तिरस्कृत एवं कलंकित होना व्यभिचार से भी ख़राब है

बद से बदनाम बुरा

जिस व्यक्ति का नाम बदनाम हो जाए हर बुरा काम उसके ज़िम्मा लगता है, चाहे उसने किया हो या न किया हो, इस लिए बदनाम को बद आदमी से बुरा गिना जाता है, किसी को बदनामी से रोकने के मौक़ा पर कहा जाता है

बदन पर नहीं लत्ता पान खाएँ अल्बत्ता

ग़रीबी में अमीरी की तरह दिखना, पास कुछ न होते हुए भी शौक़ीन स्वभाव होना

बदन पे नहीं लत्ता, पान खाएँ अलबत्ता

छैल छबीलों के लिए कहा जाता है जिसके पल्ले कुछ नहीं होता है

बदी का बदला हाथों हाथ

बुरे काम का बदला बहुत जल्दी मिलता है

बदली की छाँव किया

बदली की छाँव क्षणस्थायी होती है

बद्ली में दिन न दीसे फूहड़ बैठी पीसे

मूर्ख एवं असभ्यय अवसर नहीं देखता और ग़फ़लत के कारण से काम उस समय आरंभ करता है जब समय निकल जाता है

बद्र के बा'द हिलाल है

पूर्णता के बाद पतन है

बग़ल में बच्चा शहर में ढँडोरा

चीज़ तो निकट है और सारे संसार में उसकी तलाश हो रही है

बग़ल में छुरी मुँह में राम राम

उस पाखंडी के लिए प्रयुक्त जो बाहर से धार्मिकता का प्रचार करे लेकिन दिल में छल रखता हो

बग़ल में लड़का, शहर में ढँढोरा

बग़ल में रखी चीज़ को इधर-उधर ढूंढ़ना

बग़ल में सोंटा नाम ग़रीब दास

उस व्यक्ति के संबंध में बोलते हैं जिसके नाम और चरित्र में विरोधाभास हो

बग़ल में तोशा तो मंज़िल का भरोसा

इस शख़्स की कामयाबी यक़ीनी है जो सी मुहिम पर रवाना होने से पहले पूरी तरह सामान से लैस हो

बग़ल में तोती का पिंजरा, नबी जी भेजो

अत्यधिक लालची, हर समय दूसरों के माल-ओ-दौलत पर नज़र

बग़ल था सियारा, तो पूत था हमारा, जब कमर हुवा कटारा, तो कंथ हुआ तुम्हारा

खाने पीने को हमारा था कमाने को तुम्हारा हो गया बेटे बहू की तरफ़ इशारा है

बगुला मारे पंख हाथ

किसी को हानि भी पहुँचाया और उससे कुछ लाभ भी नहीं हुआ

बहन इंदर तो भाई सिकंदर

जब बहन किसी महत्वपूर्ण स्थान पर हो तो अपने संबंध के कारण भाई भी शक्तिशाली हो जाता है

बहनें बहनें आपस में लड़ीं लोगों ने जाना बैर पड़े

आपस में तकरार से अदावत नहीं हो जाती, आपस की लड़ाई लड़ाई किया

बहरा सुने धर्म की कथा

असंभव बात संभव नहीं हो सकती

बहरे के आगे गाना गूँगे के आगे गल अंधे के आगे नाचना सारे लल बिलल

बहरा सुनता नहीं गूंगा बोलता नहीं अंधा देखता नहीं, ऐसे शख़्स से कुछ कहना सुनना बेकार है जिस पर असर ना हो

बहुत अतीत मठ ख़राबा

जिस काम की अधिक्ता हो जाती है उसमें झगड़े होते हैं

बहुत कथनी, थोड़ी करनी

बातें बहुत करना और काम थोड़ा करना, शोर बहुत और काम बहुत थोड़ा

बहुत मार में आदमी तौबा भूल जाता है

जब हर ओर से घिर जाए तो इंसान घबरा जाता है, जब संकट की भीड़ होती है तो आदमी भौंचक्का जाता है

बहुत मार में रोना नहीं आना

जब ज़्यादा मुसीबत पड़े तो शिकायत नहीं की जाती

बहुत सोना दलिद्दर की निशानी

आवश्यक्ता से अधिक सोना या नींद दरिद्रता अर्थात अशुभ है

बहुतेरा गाओ बजाओ, कौड़ी न पाओ

कैसी ही असीम सेवा करो कुछ हासिल नहीं

बहू बेटी सब रखते हैं

जब कोई किसी को माँ-बहन की गाली दे अथवा दूसरे की स्त्री को बुरी नज़र से देखे तब उसे भर्त्सना करते हुए कहते हैं

बहू लाली, दुल्हन घर घाली

शौक़ीन स्त्री दुश्चरित्र होती है और घर बर्बाद कर देती है

बहू शरम की, बेटी करम की

बहू तो शरमदार और बेटी करमैत अथवा भाग्यशील अच्छी होती है

बैद करे बैदाई, चंगा करे इलाही

आदमी अपनी तरफ़ से उपाय करता रहे अब रही सफलता सो वह ईश्वर के हाथ है

बैल बैल जी का जवाल

सांड जंजाल होता है

बैल की दुम किधर है

ऐसे व्यक्ति के लिए उपहासपूर्ण बोलते हैं जो सहज और स्पष्ट बात को न समझ पाए या जानबूझकर भोला और अनजान बन जाए

बैल मरें बहुतवा और नदही खाएँ तरंग

मेहनती मशक़्क़त में रहें और अय्याश चयन करें

बैल न कूदा, कूदी गौन, ये तमाशा देखे कौन

जब कोई आशा के विरुद्ध कार्य करे या बिना अवसर बात करे तो कहते है

बैल सरकारी, यारों की टिटकारी

आपस में भड़का कर लड़ाई करा देने की तुलना में प्रयोग में लाया जाता है; माल किसी का उपयोग कौन करे

बैरी का बोल, बसूले का छोल

शत्रु की फब्तियाँ बसूली की तरह कलेजे को छीलती हैं अर्थात बुहत दुखदायी होते हैं

बैरी से बच, प्यारे से रच

दुश्मन से बच कर अर्थात दूर रहना चाहिए और शुभेच्छुओं से मिल कर रहना चाहिए

बैठे बैठे कुँवें ख़ाली हो जाते हैं

बेकारी में सारी जमा पूँजी समाप्त हो जाती है

बैठे बैठे तो क़ारून का ख़ज़ाना भी ख़ाली हो जाता है

जब कोई उद्योग न करे और बैठ के ही खाए तब कहते हैं

बैठे से बेगार भली

ख़ाली बैठने से तो मुफ़्त में किसी का काम करना अधिक अच्छा है

बैठते कोसना उठते दो हत्तड़

हर समय पीड़ा देने और बुरा-भला कहने की स्थिति

बजावे ख़ुनिया ढोलकी मियाँ ख़ैर से आए

(व्यंगात्मक) उस अयोग्य व्यक्ति के लिए प्रयुक्त जिसके हाथ से संयोग कोई बड़ा काम पूरा हो जाए, या निखट्टू को छेड़ने के लिए

बजी तो बजाई नहीं तोड़ खाई

उस व्यक्ति के लिए बोलते हैं जो किसी वस्तु को बर्बाद न होने दे और हर तरह से अपने काम में लाए

बख़्शो बी बिल्ली चूहा लंडूरा ही भला

ऐसे लाभ से जिसमें हानि का भय हो उससे हाथ खींच लेना ही अच्छा है

बख़्त करे यारी तो कर घोड़ी की सवारी

तक़दीर मदद करे तो सब कुछ है

बख़्त उड़ गए बुलंदी रह गई

रस्सी जल गई बिल नहीं गए

बख़्तों के बलिया, पकाई खीर हो गया दलिया

जब क़िस्मत ना मुवाफ़िक़ हो तो बना बनाया काम बिगड़ जाता है

बकरा मुटाए तब लकड़ी खाए

बकरा मोटा होता है तब मार खाता है क्यूँकि वह लड़ाका हो जाता है

बकरे की माँ कब तक ख़ैर मनाएगी

व्यक्ति अपने भाग्य एवं अपनी नियति से नहीं बच सकता

बकरी जान से गई, खाने वालों को मज़ा न आया

किसी के आत्म-त्याग या परिश्रम की जब प्रशंसा न की जाए तो कहते हैं

बकरी करे घास से यारी तो खाने कहाँ जाए

कोई व्यक्ति यदि मेहनताना माँगने में लिहाज़ करे या जो जिस काम को करता है उसमें मुनाफ़ा' न ले तो उसका ख़र्च कैसे चले

बकरी के नसीबों छुरी है

बकरी के भाग्य में तो मरना ही बदा है, अच्छा काम कर के भी उसका फल न मिलना

बकरी ने दूध दिया, वो भी मेंगनी भरा

जब कोई रो कर या झींक कर एहसान करे तब कहते हैं

बकरी से हल जुतता तो बैल कौन रखता

जिसका जो काम है वह उसी से निकलता है

बल जाए राज को, मोती लागे प्याज को

कुव्यवस्था के प्रति या अंधेर के संबंध में प्रयुक्त

बल सूँ नामी हो गए रुस्तम अर्जुन भीम, बल बिन कैसी हाकिमी कह गए साँच हकीम

बल के कारण संसार में रुस्तम अर्जुन एवं भीम का नाम है और बिना इसके संसार में हुकूमत नहीं हो सकती, जिसकी लाठी उसकी भैंस

बल तो अपना बल, पराया बल जावे जल

भरोसा अपने ही बल पर करना चाहिये अगर अपना बल नहीं तो पराया बल बेकार है

बलवान का हल बहुत जुते

उस व्यक्ति के संबंध में बोलते हैं जो शक्ति के बल पर दूसरों से काम ले

बन आए की फ़क़ीरी भी भली

भाग्य अच्छा हो तो फ़क़ीरी भी रास आ जाती है, भाग्यवान हर परिस्थिति में अच्छा रहता है

बन आई कुत्ते की जो पालकी बैठा जाए

कमीने व्यक्ति को यदि अवसर मिल जाए तो ख़ूब मज़े उड़ाता है

बन बालक भैंस और उखारी, जेठ मास ये चार दुखारी

गरमी में ये चारों कष्ट पाते हैं अर्थात सूखते या विकल हो जाते हैं

बन के जाए सदा बन में नहीं रहते

यह व्यक्ति के लिए प्रयुक्त होता है जो विकास करके समृद्ध और धनवान बन जाए

बन में उपजे सब कोई खाए, घर में उपजे घर ही खाए

ढोंग और असहमति की निंदा में प्रयुक्त

बनैनी पान दमड़ी के खाए घर रहे कि बाहर जाए

कंजूस थोड़े ख़र्च को बहुत समझता है

बनज में क्या भाई-बंदी

व्यापार में किसी का ख़याल नहीं होता

बंद के जाए बंद में नहीं रहते

दुख सदैव नहीं रहता, क़ैदी आज़ाद भी हो जाते हैं

बंद मुँह में मक्खी नहीं जाती

ज़्यादा बात न करने वाले को शर्मिंदगी नहीं उठानी पड़ती

बंदा आई रोज़ी गया बंदा गई रोज़ी

آدمیوں کی کمی بیشی کے ساتھ رزق کی بھی کمی بیشی ہوتی رہتی

बंदर का हाल मुछंदर जाने

किसी का हाल उसका साथी ही अच्छी तरह जानता है

बंदर के गले में मोतियों का हार

अयोग्य या क़द्र न करने वाले को कोई ऊँची वस्तु मिल जाने की परिस्थिति

बंदर के हाथ आईना

अयोग्य या अनाड़ी को कोई उच्च गुणवत्ता वाली चीज़ मिल जाने के अवसर पर प्रयुक्त

बंदर के हाथ आर्सी

अयोग्य या महत्वहीन व्यक्ति को कोई श्रेष्ठ वस्तु प्राप्त होने की परिस्थिति

बंदर के हाथ नारियल लगा, पंसारी बन बैठा

ज़रा सी बात पर घमंड करने लगा

बंदर की आशनाई, घर में आग लगाई

मूर्ख की मित्रता से हानि होती है अर्थात धूर्त से मित्रता करने में हानि उठानी पड़ती है

बंदर की बला तवेले के सर

किसी की ज़िम्मेदारी या मुसीबत दूसरे के सर पर आन पड़ने के अवसर पर प्रयुक्त

बंदर की दोस्ती जी का जंजाल

चंचल की दोस्ती में सदैव हानि होती है

बंदर को मिली हल्दी की गिरह पंसारी बन बैठा

छिछोरा आदमी ज़रा सी चीज़ पर बहुत इतराता और गर्व करता है

बंदर क्या जाने अदरक का भाव

साधारण व्यक्ति उत्तम की वस्तुओं का महत्व नहीं जानता, साधारण पहचान वाले को मुल्यवान वस्तु की क्या पहचान हो सकती है

बंदर क्या जाने अदरक का मज़ा

साधारण व्यक्ति उत्तम की वस्तुओं का महत्व नहीं जानता, साधारण पहचान वाले को मुल्यवान वस्तु की क्या पहचान हो सकती है

बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद

साधारण व्यक्ति उत्तम की वस्तुओं का महत्व नहीं जानता, साधारण पहचान वाले को मुल्यवान वस्तु की क्या पहचान हो सकती है

बंदर नाचे, ऊँट जल मरे

दूसरों की प्रसन्नता को न देख सकना

बंदे का चाहा कुछ नहीं होता, अल्लाह का चाहा सब कुछ होता है

ईश्वर की मर्ज़ी होती है बंदे या किसी व्यक्ति की मर्ज़ी नहीं होती

बनी के सब साथी हैं, बिगड़ी का कोई नहीं

अच्छे समय में सब दोस्त होते हैं बुरे समय में कोई ख़बर नहीं लेता

बनी के सौ साले हैं और बिगड़ी का एक बहनोई नहीं होता

अच्छे समय में सब दोस्त होते हैं बुरे समय में कोई ख़बर नहीं लेता

बनी तो बनी, नहीं तो दाऊद ख़ाँ पनी

अगर ज़्यादा फ़ायदा हुआ तो हुआ नहीं तो क़दीमी मआश कहीं नहीं गई, या जब फ़ायदा जाता रहेगा अलग हो जाऐंगे

बनी तो भाई नहीं तो दुश्मनाई

फ़ायदे के लिए दोस्त बनते हैं नहीं तो दुश्मन हैं

बनिया अपना गुड़ छुपा के खाता है

अपना दोष सभी लोग छुपाते हैं

बनिया बैठने देता ही नहीं पूरा तोलियो

काम सिरे से बनता ही नहीं अच्छे परिणाम का आग्रह है

बनिया भी अपना गुड़ छुपा कर खाता है

जब कोई स्पष्ट रूप से कोई बुरा काम करे तब भी कहते हैं

बनिया देता ही नहीं कि पूरा तोल

काम सिरे से बनता ही नहीं अच्छे परिणाम का आग्रह है

बनिया जब उठाता है तो झाड़ू देने लगता है

लालची व्यक्ति के संबंधित प्रयुक्त

बनिया जिस का यार, उस को दुश्मन क्या दरकार

बनियों की मक्कारी एवं स्वार्थीपन के प्रति व्यंग्यात्मक रूप से प्रयोग किया जाता है

बनिया मारे जान को, ठग मारे अंजान को

बनिया जान पहचान वाले को ही ठगता है, ठग तो अनजान को ठगता है

बनिये का बहकाया और जोगी का फटकारा ख़राब होता है

जिस मूर्ख एवं सीधे-सादे व्यक्ति को कोई बनिया बहका दे या जोगी एवं फ़क़ीर लोग किसी व्यक्ति को श्राप दे दें तो इन दोनों प्रकार के आदमीयों की मिट्टी ख़राब हो जाती है

बनिये का बेटा कुछ देख कर गिरता है

चालाक या स्वार्थसाधक का कोई कार्य लाभ से ख़ाली नहीं होता

बनिये का बेटा कुछ सोच कर ही गिरता है

चालाक या स्वार्थसाधक का कोई कार्य लाभ से ख़ाली नहीं होता

बनिये का जी धनिया

बनिया बहुत अल्प-साहासी होता है

बनिये का मुँह ग्राह और पेट मोम

मगरमच्छ के मुँह में जो चीज़ आ जाए वह नहीं छूटती, बनिया भी ऐसा ही करता है और रुपया बचाने के लिए पेट के ख़ूराक अर्थात भोजन में भी कमी कर लेता है

बनिये का साह भड़-भूँजा

बनिये पर व्यंग है

बनिये की गौन में नौ मन का धोका

मामला थोड़ा सा है मगर भूल बहुत बड़ी है

बनिये से सियाना सो दीवाना

जो स्वयं को बनिये से अधिक होशियार समझे वह पागल है

बंजी और बटाउना सुख पावें जिस गाम, वा को तो चौखूंट में करें नेक सरनाम

व्यापारी और राहगीर सब जगह उस गाँव की प्रशंसा करते हैं जहाँ उन्हें सुख मिलता है

बन्ना सा मुँह गज़ भर की ज़बान

रुक : छोटा मुँह बड़ी बात

बनते देर लगती है, बिगड़ते देर नहीं लगती

धन-सम्पन्नता सरलता से नहीं आती जबकि बिगड़ते देर नहीं लगती क्यूँकि धन-दौलत का भरोसा नहीं

बन्या भूलता है तो ज़्यादा बनाता है

चतुर एवं चालाक आदमी भूल से भी अपना अहित नहीं होने देता, बुद्धिमान आदमी भूल से भी अपना मतलब नहीं खोने देता

बर कन्या को चेचक खाए, नाव काट का कहीं न जाए

हर हाल में अपना मतलब निकाल लेता है

बर मरे पटवासी न टूटे

शौहर के मरने पर भी श्रृँगार में कमी नहीं आई

बरात का छैला सावन का खैला

बरात की ख़ुशी उतनी ही सामान्य है जतबी सावन की घास

बरात की शोभा बाजा अरथी की शोभा रोना

विवाह में गाने-बजाने से शोभा होती है और मृत्यु में रोने से, गाना-बजाना ख़ुशी के अवसर पर शोभा देता है और विलाप दुख के अवसर पर

बरात पीछे धौंसा 'ईद के पीछे टर

'ईद के बाद ख़ुशियाँ मनाना और बरात के बाद बाजा बजाना दोनों ही व्यर्थ हैं

बरात-ए-'आशिक़ाँ बर शाख़-ए-आहू

झूटा वादा, वो बात जो विश्वास के योग्य न हों

बरातियों को खाने की चाह, दूल्हा को दुल्हन की चाह

हर आदमी अपने मतलब से ही मतलब रखता है

बर-'अक्स निहंद नाम-ए-ज़ंगी काफ़ूर

जिस विशेषता में प्रसिद्ध है उसके विरुद्ध विशेषण मिलता है, (किसी में) प्रसिद्धि के अनुरूप विशेषण नहीं पाया जाता बल्कि उसके विपरीत विशेषता पाई जाती है

बरस भर में सखी और सूम बराबर हो जाते हैं

दानवीर लुटाता रहता है और कंजूस ख़र्च नहीं करता परिणाम एक है कि दानवीर अपने पास ख़र्च करने को कुछ रखता नहीं और कंजूस ख़र्च करता नहीं

बरेली रूपा रेली

बरेली में बहुत धन है

बरसा थोड़ी भभरौती बहुत

उछल-कूद बहुत परंतु काम थोड़ा

बरसात बर के साथ

वर्षा ऋतु तो पति के साथ ही अच्छी तरह कटती है

बरसात में कढ़ाई घर घर

आसूदा हाली के सामान हैं निराले हैं, दौलतमंद की ख़ातिरदारी हर जगह होती है

बरसे आसौज तो नाज की मौज

असोज के महीने (अर्थात जब सूर्य कन्यराशि में हो) की बारिश से किसानों को बहुत लाभ पहुँचता है

बरसे न बरसावे, ना हक़ जी तोसावे

थोड़ा भी दया नहीं खाता, उम्मीद या आस दिला देता है आवश्यकता पूरी नहीं करता

बरसे साढ़ तो बन जाए ठाठ

आषाढ़ की बारिश जमींदार के लिए समृद्धि का प्रतीक है

बरसे सावन, तो हों पाँच के बावन

सावन में वर्षा हो तो फ़सल अच्छी होती है

बरसों का सामान करे और परसों वा की मय्यत

आदमी बड़ा हवसनाक है, आइन्दा का इंतिज़ाम करता है और पता नहीं होता कि किस वक़्त मौत आजाए

बर्तन से बर्तन खटक ही जाता है

आपस में किसी न किसी बात पर तकरार हो ही जाती है

बस हो चुकी नमाज़ मुसल्ला उठाइए

अब ये काम ख़त्म करो जगह ख़ाली करो यहाँ दूसरा काम होगा

बस कर मियाँ बस कर, देखा तेरा लश्कर

जब कोई बहुत डींग मारे तो कहते हैं कि चुप रहो हमें तुम्हारी वास्तविक्ता पता है

बसाव शहर का, खेत नहर का

दोनों अपनी-अपनी जगह अच्छे होते हैं

बसंत जाड़े का अंत

बसंत के पश्चात सर्दी कम हो जाती है

बथवे का साग किन सागों में ख़ल्या सास किन सासों में

कम हैसियात वाली चीज़ की कोई मूल्य नहीं होती है, दूर का रिश्ता कोई एहमियत नहीं रखता

बटिया की राह बे-निर्बाह

पगडंडी का रास्ता आदमी को कहीं का कहीं ले जाता है

बत्तीस दाँत की भाका ख़ाली नहीं जाती

मुँह से निकली हुई बद-शगूनी का असर अवश्य होता है, श्राप अवश्य असर करती है

बत्तीस मुँह की फ़ाल ख़ाली नहीं जाती

जो बात प्रसिद्ध हो जाए वह हो कर रहती है

बत्तीस ज़बान की भाका ख़ाली नहीं जाती

बहुत से लोगों की प्रार्थना लग ही जाती है

बौहरा की राम राम जम का संदेसा

उधार माँगने वाले का सलाम भी एक प्रकार का माँगना ही है

बौहरा की राम राम, जम का संदेसा

ऋणि व्यक्ति का सलाम भी एक प्रकार का तक़ाज़ा अर्थात क़र्ज़ की उगाही है

बौना, बीवी का खिलौना

ठिंगने आदमी को चिढ़ाने के लिए कहते हैं

बज़ाज़ की गठरी पर झिंगर नाचे

बज़्ज़ाज़ के माल को उमूमन कीड़ा खा जाता है

बे भई के प्रीत नहीं

जब तक किसी से भय या शंका नहीं होती उससे मोहब्बत नहीं होती

बे दरद क़साई क्या जाने पीर पराई

कठोर हृदय का व्याक्ति दूसरे की पीड़ा का अनुभव नहीं कर सकता

बेड़ा ग़र्क़ हो

नष्ट होना, तबाह हो, बर्बाद हो

बे-भेदी चोरी नहीं

चोरी तभी होती है जब कोई मुख़बिर चोर को यह बता दे कि अमुक स्थान पर माल रखा हुआ है

बे-ब्याही खाए रोटियाँ, ब्याही खाए बोटियाँ

ब्याह हो जाने के बाद लड़की जब ससुराल चली जाती है तो हमेशा उसे कुछ न कुछ भेंट अथवा सौग़ात देते रहना पड़ता है

बेच-बेच मेरी पखनी का ब्याह

लड़की के ब्याह में प्रायः बहुत ख़र्च करना पड़ता है, उसी पर कहते हैं कि बेचो घर की संपत्ति और करो लड़की की शादी

बेचे साग, करे मोतियों का दाम

अपनी हैसियत से बाहर बात करना

बेचे सो बंजारा, रखे सो हत्यारा

अनाज के बेचने वाले को बंजारा कहते हैं और जो रोक रखे वह क़ातिल अर्थात हत्यारा है

बे-दिल नौकर दुश्मन बराबर

बे-दिसी से काम करने वाला नौकर शत्रु के समान है

बे-गाने भरोसे खेला जुवा, आज नहीं तो कल मुवा

दूसरे के भरोसे पर काम करने वाला सदैव ख़राब एवं बरबाद होता है

बेगाने भरोसे पे खेला जुवा आज न मुवा कल मुवा

जो ग़ैर के भरोसे पर कोई काम करता है वो बहुत जल्द तबाह होजाता है

बेगाने फ़ुलाने पर शिक्रा पाला

ग़ैर के भरोसे पर काम उठाया

बेगानी आस, नित उपास

दूसरों पर भरोसा करने वाला अथवा आश्रित रहने वाला सदैव भूखा रहता है

बे-हयाई तेरा आसरा है

बहुत निर्लज्ज है, बहुत बेशर्मी की बात है

बेझड़ा की पिसन्हारी गेहूँ के गीत गावे

तुच्छ व्यक्ति श्रेष्ठ कार्य का साहस करे

बेझड़ पिसन्हारी गेहूँ के गीत गावे

तुच्छ व्यक्ति श्रेष्ठ कार्य का साहस करे

बेझर की पिसन्हारी गेहूँ के गीत गावे

तुच्छ व्यक्ति श्रेष्ठ कार्य का साहस करे

बेकार मबाश कुछ किया कर, कपड़े ही उधेड़ कर सिया कर

बेकार रहने से कुछ न कुछ करना ही बेहतर है

बे-कार से बेगार भली

बिना उजरत या कम फ़ायदे का काम बेकार रहने से अच्छा है

बेल बढ़ावे और जड़ काटे

धूर्त या कपटी के लिए भी कहते हैं

बेल का मारा बबूल तले और बबूल का मारा बेल तले

बड़ाबद बख़्त है जहां जाता है नुक़्सान उठाता है

बेल पका तो कव्वे के बाप का क्या

माना कि कोई वस्तु बहुत बढ़िया है परंतु वह यदि हमें सुलभ नहीं तो उससे हमें क्या लाभ

बेल, बबूल, ख़ाक और धूल

आगे से भी बुरी स्थिति में होने के अवसर पर बोलते हैं

बे-सीखे कुछ नहीं आता

सीखे या ज्ञान प्राप्त किए बिना कोई गुण नहीं आता

बेस्वा 'औरत और उगलती तलवार ख़स्म को मार खाती है

बदचलन औरत और मियान से उगलती हुई तलवार से जहां तक हो सके परहज़ करना चाहिए नहीं तो मार रखेगी

बेटा बन के सब ने खाया है, बाप बन के किसी ने नहीं खाया

छोटा बन कर मतलब निकाला जाता है बड़ा बन कर नहीं

बेटा बेटी बस का अच्छा

संतान वही अच्छी जो माता-पिता का कहा माने और वश में हो

बेटे की बरी बाज़ार में खड़ी

बेटे की शादी के लिए जिस सामान की ज़रूरत होती है वो बड़ी आसानी से और बहुत जल्द उपलब्ध हो सकता है (इस की तैयारी में लड़की के जहेज़ की तरह वक़्त नहीं लगता)

बेटी और ककड़ी की बेल बराबर होती है

बेटी और ककड़ी बहुत जल्द बढ़ती है और जवान होती है

बेटियों का नसीब पत्ते के तले

बेटी के रिश्ते आने और क़िस्मत खुलने में देर नहीं लगती

बेटियों वाला घर और चिलमों वाला चूल्हा कभी पनपता नहीं

जिस घर में बहुत सी बेटियां हूँ इस के मसारिफ़ बहुत ज़्यादा होते हैं जो उमूमन ख़ुशहाल नहीं होने देते जिस तरह वो चूल्हा जिस से बार बार हक़ीक़ी चिलिमें भरी जाएं पूरी आन नहीं देने पाता

बे-ज़र 'इश्क़ टें टें

बिना पैसे के 'इश्क़ नहीं होता

भड़ भूँजे की लड़की केसर का तिलक

निर्धन व्यक्ति को बड़ा साहस न करना चाहिए और कंगाल के श्रेष्ठ बुद्धि या अमीराना स्वभाव बनने के संबंध में भी बोलते हैं

भड़क भारी, खीसा ख़ाली

कोरी शान-ओ-शौक़त

भड़वे को भी मुँह पर भड़वा नहीं कहते

किसी व्यक्ति में यदि कोई कमी हो तो उसे उसके सामने इस तरह नहीं कहना चाहिए कि उसे बुरा लगे

भई छछूँदर सरप गई उगले बने न खात

(अर्थात) मुसीबत बन जाना, (किसी चीज़ या शख़्स का) अंतत: पीड़ादायक हो जाना

भंग खाना सहल है लेकिन उस की मौजें रंग लाती हैं

बिना जाने-बूझे किसी काम को कर डालना आसान है परंतु उसका परिणाम भोगना कठिन है

भंगी की ज़ात क्या झूटे की बात क्या

जिस प्रकार भंगी की जाति बहुत नीची होती है, उसी प्रकार झूठे व्यक्ति की बातों पर विश्वास नहीं किया जा सकता

भंगियाँ दर बाग़ रफ़्तन्द बेर व गुठ्ली सब रवा

नशे की अवस्था में हर चीज़ खा ली जाती है, नशे की दशा में हर काम तर्कसंगत या अतर्कसंगत हो सकता है

भाड़ लीपा हाथ काले

मेहनत करने से कोई फ़ायदा नहीं हुआ, मेहनत और परिश्रम ख़ाली रही, उसका कोई लाभ न मिला, कोशिश निरर्थक रही

भाड़ में पड़े वो सोना जिस से टूटें कान

वह लाभ किस काम का जिसमें कष्ट सम्मिलित न हो, जो लाभ यातना पहुँचाए उसका न होना अच्छा है

भाड़ से निकाला भट्टी में झोंका

एक मुसीबत से निकाल कर दूसरी मुसीबत में डाल दिया

भाई भाव का अपने दाव का

सब अपने मतलब के पहचानने वाले स्वार्थी होते हैं, दर्दमंद नहीं होते

भाई भाव का नहीं अपने दाव का

भाई वह है जो प्यार करे न कि वह जो हमेशा अपने फायदे के बारे में सोचे

भाई भाव करे नैन मारे ऊपर छाव करे

अपनों की कठोरता बेगानों की दया से अच्छी है

भाई भाव करे तल मारे ऊपर चाव करे

सामने से तो भाई की तरह प्यार करे और चाहत दिखाए और भीतर में शत्रुता करे

भाई दूर पड़ोसी नज़दीक

भाईयों से अधिक पड़ोस के लोगों से संबंध होता है

भाई जैसा दोस्त न भाई जैसा दुश्मन

भाई से बढ़ कर दोस्त कोई नहीं और भाई से बढ़ कर दुश्मन कोई नहीं

भाई का बोल और बसूले का छोल तुरत जलता है

भाई का ताना शीघ्र प्रभावित करता है और तीशे का छिला हुआ तुरंत जलता है

भाई न दे भाव दे

अपने प्रेम एवं मित्रता पर भरोसा करना चाहिए

भाई सा साहू न भाई सा बैरी

भाई के जैसा न तो सहायक है और न ही भाई के जैसा शत्रु

भाई सो भाई, बाक़ी छींके पर

भाई के सिवा और किसी की परवाह नहीं

भाई तो खाई नहीं छींके धर उठाई

जो पसंद आया खाया नहीं तो दूर किया

भाइयों के डंड़ मलो

ऐसे अवसि पर बोलते हैं जब कोई व्यक्ति डींग मारे और काम न कर सके

भाइयों में कौन छोटा कौन बड़ा

(समुदाय में) सब समान हैं.

भाँडों के साथ खेती किया गा बजा सब उन्हीं ने लिया

ऐसे लोगों के साथ किसी काम में साझी होना जो निकम्मे हों कठोर पीड़ादायक है वह काम भी नहीं करते और सब कुछ खा पी जाते हैं

भाँडों संग खेती की, गा बजा के अपनी की

लफंगों के साथ काम करने में हानि होती है

भादों दोनों साख का राजा

भादों की बारिश दो फ़स्लों के लिए लाभकारी होती है एक फ़स्ल पकने के क़रीब और दूसरी की बुवाई का समय होता है

भादों का झाला एक सींग गीला एक सूखा

इतना कम मेंह कि मवेशी के दोनों सींग भी ना भीग पाएँ

भादों की छाछ भूतों को, कातिक की छाछ पूतों को

भादों में छाछ हानिकारक और कार्तिक में गुणकारी मानी जाती है इसीलिए कहते हैं

भादों की धूप में हिरन काले

भादों की धूप की प्रचंडता जिस से हिरन काला हो जाता है

भादों की मेंह से दोनों साख की जड़ बंधती है

भादों की वर्षा दोनों फ़सलों के लिये लाभदायक होती है जिस में एक फ़सल पकने के निकट होती है और दूसरी के कटने का समय होता है

भादों में बरखा होए काल पिछो कर जा कर रोए

भादों की बारिश क़हत को रोकती है

भादों से बचे तो फिर मिलेंगे

जीवित रहेंगे तो फिर भेंट होगी

भागते भूत की लँगोटी ही सही

जाती हुई वस्तु में से जितना भी मिल जाये अधिक है

भागते भूत की लँगोटी सही

जाती हुई वस्तु में से जितना भी मिल जाये अधिक है

भागते चोर की लँगोटी सही

हाथ से निकली हुई चीज़ में से जो कुछ भी वह बहुत है

भाजी की भाजी, क्या दूसरे की मुहताजी

दूसरे की मुहताजी से संतोष करना बेहतर है

भानमती ने कुंबा जोड़ा, कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा

आवारा, लुच्चा या विभिन्न प्रकार के लोगों के मिश्रित समूह के लिए उपयोग किया जाता है

भार डाल सब भाड़ में सतमन उतरे पार

जिस झंझट में फंसे थे उससे किसी तरह छुट्टी पाई

भारी ब्याज मोल को खाए

अधिक सूद पर रुपया देने से असल भी वसूल नहीं होता

भात है तो कव्वे बहुत

धन होगा तो चापलूस बहुत आ जाएँगे

भात होगा तो कव्वे बहुत आ रहेंगे

पैसा होगा तो निशुल्क खाने वालों की क्या कमी

भाट कैसी कब्त है

मौखिक तारीफ़ और प्रशंसा है दिल में कुछ नहीं

भात खाने बहुतेरे काम दूल्हा दुल्हन से

निशुल्क खाने वाले तो बहुत मिल जाते हैं लेकिन मूल कठिनाई तो ख़र्च करने वाले के सर आती है

भद्रा उन को खाएँगे

साअत मनहूस उन को ज़रर पहुंचाएगी

भगले चोर कुठरिया हाथ

भागता हुआ चोर जो हाथ लगे ले जाता है

भगवान की बाँह्ह बुलंद है

इश्वर शक्तिशाली है

भैंस दूध को कढ़वा पीवे हंगा घटे न जब तक जीवे

भैंस का दूध बड़ा ताक़त दह होता है जो उसे काढ़ कर पीता रहे जब तक जीता रहेगा उस की ताक़त कम ना होगी

भैंस दूध नहीं देती कटड़े की टाँग तोड़ डालो

ग़लती किसी की, सज़ा या दंड किसी को

भैंस का दूध नली का गूदा

भैंस का दूध हड्डी के गूदे की तरह होता है अर्थात बहुत बल होता है

भैंस कहे गुन मेरा पूरा मेरा दूध पी होवे सूरा, जिस के घर में बँध जाऊँ दूध दही की नाल बहाऊँ

भैंस की प्रशंसा है कि जिस घर में भैंस होती है वहाँ दूध दही की कमी नहीं होती

भैंस के आगे बीन बजाए भैंस पड़ी पखराए

ना अहल या नादान के सामने हुनर दिखाना बेसूद है , बेवक़ूफ़ के आगे हुनर दिखाने की कुछ क़दर नहीं होती

भैंस को अपनी सींग भारी नहीं होते

जो असल बात होती है वो बरी नहीं लगती

भैंस को डहर, मज़दूर को शहर

डहर नशीबी ज़मीन को कहते हैं वहां घास ज़्यादा होती है और मज़दूर को शहर में मज़दूरी ज़्यादा मिलती है

भैंस न कूदी कूदी गौन, ये तमाशा देखे कौन

रुक : बैल ना कूदा कूदी गौण अलख

भैंस पकौड़े हक गई

उस अवसर पर कहते हैं जब किसी निकम्मे को कहीं से दौलत मिल जाए

भैंस पे दूध किन ने छोड़ा

मतलब किसी ने नहीं छोड़ा अथवा कोई नहीं छोड़ता सब उसे प्राप्त कर लेते हैं

भैंस सब भैंसों को भर देती है

एक बुराई से सब बदनाम हो जाते हैं

भैंसा भैंसों में मिले या क़साई के बंधे गले

रुक : भैंसा भैंसों में या कसाई के खूंटे

भैंसा भैंसों में या क़साई के खूँटे

मु'आमले का एक तरफ़ होना, या आश्य प्राप्त करेंगे या जान देंगे

भैंसे लड़े झोंडों का नुक़्सान

जब सरदार लड़ते हैं तो रईब और ग़रीब लोग तबाह होते हैं

भजन और भोजन एकांत में भले

दुआ और खाना अकेले में अच्छे होते हैं

भल जन्मल भल पन्डत भैल

अच्छे पैदा हुए और अच्छे पंडित हुए जो घर में खाने को नहीं जुड़ता, किसी पंडित की स्त्री उससे व्यंग्य में कह रही है

भल माथ मरौलन, भल बेल गिरैलन

अच्छा सर मुंडाया कि सिर पर बेल गिरा, सर मुंडाते ही ओले पड़े

भला हुआ मेरी गगरिया टूटी, पानी भरन से छूटी

अर्थात हानि तो हुई परंतु भविष्य के परिश्रम से बच्चे

भला हुआ मेरी मटकी टूटी, मैं दही बेचने से छूटी

अर्थात हानि तो हुई परंतु भविष्य के परिश्रम से बच्चे

भला जो चाहे आप का देना न रखे बाप का

उधार की निंदा है अपनी भलाई चाहते हो तो बाप का भी ऋण भुगतान करो

भला कहीं टोटकों से गाज टली है

मूल कारण को हटाए बिना कुछ भी हासिल नहीं होता है

भला किया सो ख़ुदा ने बुरा किया सो बंदे ने

ईश्वर जो कुछ करता है सब अच्छा करता है, बुरे कर्म तो मनुष्य करता है और उनका फल भोगता है

भला मानस नियो चला, रज़ाले ने जाना मुझ से डरा

लुच्चा व्यक्ति शराफ़त को कमज़ोरी समझता है, कमीने के साथ कमीना-पन से पेश आना आवश्यक है

भलाई कर, बुराई से डर

जब कोई बुरे काम पर के लिए आतुर हो तो कहते हैं

भले आदमी की मुर्ग़ी टके-टके

भले आदमी की चीज़ का मोल नहीं पड़ता

भले आदमी को एक बात, भले घोड़े को एक चाबुक

अच्छा आदमी आसानी से सावधान हो जाता है उसे बार बार समझाने की आवश्यकता नहीं पड़ती

भले बाबा बंद पड़ी गोबर छोड़ कशीदे पड़ी

एक के बाद दूसरी मुश्किल में पड़ना, एक मुसीबत से बच्ची तो दूसरी में पड़ी

भले बुरे में चार उँगल का अंतर हैं

भलाई और बुराई में बहुत कम अंतर होता है, भले और बुरे में अंतर स्पष्ट है

भले दिन जाते देर नहीं लगती, बुरी घड़ियाँ काटे नहीं कटतीं

अच्छे दिन पलक झपकते बीत जाते हैं और दुख का समय लम्बा हो जाता है

भले का ज़माना ही नहीं

शरीफ़ व्यक्ति के लिए आज-कल हर तरह मुसीबत और परेशानी है

भले के भाई और बुरे के जंवाई

समपन्नता में सब मित्र होते हैं और दुर्दशा एवं कंगाली में सब धौंस जमाते हैं

भले के पास बेठे चबाए नागर पान, बुरे के पास बेठे कटाए नाक और कान

भले लोगों की संगति लाभदायक और बुरों की हानि का कारण होती है

भले की भलाई और बुरे की जँवाई

अच्छे व्यक्ति के साथ अच्छा व्यवहार किया जाना चाहिए और बुरे व्यक्ति के साथ बुरा व्यवहार किया जाना चाहिए, अच्छे आदमी से अच्छा सुलूक करना चाहिए और बुरे के साथ बुरा

भले की दुनिया नहीं

अच्छाई का ज़माना नहीं, इस ज़माने में किसी से भलाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि लोग नेकी का बदला बुराई से देते हैं

भले मानस की मिट्टी ख़राब

भले आदमी का हर तरह से हानि होता है

भले मियाँ इल्यास आप गए सो गए खोया आस पास

दूसरे के किए वजह से मुश्किल में पड़ना , आप भी ख़राब हुए औरों को भी ख़राब किया जब किसी के सबब से और पर सदमा आता है तो कहते हैं

भली कमाई साध की जो लागे हर के हीत

वह रुपया बहुत अच्छा जो ईश्वर की प्रसन्नता के लिए ख़र्च हो

भली के भाई और निबड़ी के जँवाई

प्रसन्नता की अवस्था में सब मित्र होते हैं या दुनियादार परिस्थिति के अनुसार अपने सिद्धांतों को बदलने वाला के संबंध में बोलते हैं

भंग खाई तो नशा चढ़ा

जैसा किया वैसा पाया

भर हाथ चूड़ी, पट से राँड

विधवा हो कर चूडियाँ पहनती है

भरा कहार और ख़ाली कुम्हार तेज़ जाता है

डोली लेकर धीरे-धीरे चलने में कहार को असुविधा होती है और खाली कुम्हार तो तेज चलेगा ही अपने काम के कारण

भरा कनाला छाने थी, फागुन को नहीं जाने थी

आरंभ में जो इतना व्यय किया ऐसे दिनों की आशा न थी

भरम भारी पिटारा ख़ाली

ढकोसला, दिखावा, झूठा ठाट-बाट, ऊपरी तड़क भड़क

भरम मारे, भरम जियावे

गरिमा अच्छी हो तो 'इज़्ज़त बाक़ी रहती है एवं गरिमा जाती रहे तो ज़िंदगी मौत के बराबर है

भरे समंदर घोंघा हाथ

बहुत लाभ की जगह से कुछ न मिलना

भरे समंदर प्यासे

बहुत होने के अतिरिक्त भी लालच कम नहीं होती

भरी जवानी माँझा ढीला

कमज़ोर अथवा आलसी व्यक्ति को लज्जित करने के लिए कहते हैं

भ्रमा भूत, संका डायन

कल्पना भूत दिखाती है और डर से डायन दिखाई देती है आश्य यह है कि ऐसी चीज़ों से डरना नहीं चाहिए यह सब काल्पनिक बातें हैं

भरो पय्ये लादो

खाने को दो और मेहनत लो

भरोसे केरे भैंस कटरा जनी

ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं जब मोतबर से ग़ैर मोतबर काम सरज़द हो

भसक्कड़ के दामाद को भात ही मिठाई

पेटू आदमी को जो खाने को मिले ग़नीमत है

भट भटयारी बेसवा तीनों जात कुजात आते का आदर करें जात न पूछें बात

ये (भट्ट, भटियारी, बेसवा) सब अपने स्वार्थ के यार होते हैं, ये तीनों स्वार्थी होते हैं

भट पड़े सोना जिस से टूटे कान

वो फ़ायदा किस काम का जिस में कोई ज़रर शामिल हो, जो नफ़ा अज़ीयत पहुँचिए इस का ना होना अच्छा है

भट पड़े वो सोना जिस से टूटें कान

ऐसे लड़के या संबंधी के लिए कहते हैं जिससे बहुत कष्ट पहुँच रहा हो अथवा जो एक बोझ बन गया हो

भट पड़े वो ज़माना, नतनी को घूरे नाना

ऐसे अवसर पर बोलते हैं जब बूढ़ा व्यक्ति जवान से शादी करना चाहे

भटयारी के तन्नूर पे नाना की फ़ातिहा

पराए माल को अपना समझ कर अंधाधुंध व्यय करना, दूसरे के धन पर मज़े उड़ाना

भवानी निबल बकरी सिबल

नौकर आक़ा से भी ज़्यादा मिज़ाजदार

भेड़ की लात क्या, 'औरत की बात क्या

अधिक से अधिक इतना कर सकेगा ऐसा भाव प्रकट करने लिए कहते हैं

भेड़ की लात टख़नों तक

दुर्बल की चोट का अधिक असर नहीं होता अथवा दुर्बल का प्रतिरोध अप्रभावी होता है

भेड़ पे ऊन किस ने छोड़ी, भेड़ तो जहाँ जाएगी मूँडी जाएगी

कोई नहीं छोड़ता, सब कोई उसके बाल कतर लेते हैं क्यूँकि वह बहुत कामों में आता है

भेड़ी की लात टख़नों तक

घटिया का व्यक्तित्व ही किया उससे हानि का क्या भय

भेली टूटी और रूपया टूटा फिर नहीं रहता

दोनों जल्द ख़त्म हो जाते हैं , इत्तिफ़ाक़ अजब चीज़ है

भिड़ की लात क्या 'औरत की बात क्या

भिड़ की लात कमज़ोर होती है हाथ में पकड़ो टूट जाती है, इसी तरह औरत की बात कमज़ोर होती है

भिड़ों के छत्ते को मत छेड़ो

किसी भी ऐसी गतिविधि में शामिल न हो जिसमें बुराई, छति या उत्पात का डर हो

भीक माँगें और पूछें गाँव की जम'

भिकारी होकर आदेश देने के भाव में बात करना, स्थिति तुच्छ और हौसला बड़ा, अपनी हैसियत भूल कर बात करना

भीड़ न ठट्ठा मार नुहटा

न भीड़, न अवसर, अवसर के विरुद्ध बात करने के समय पर बोलते हैं, अकारण लड़ने वाली औरत के संबंध में कहते हैं

भीक के टुकड़े बाज़ार में डकार

ग़रीबी में अहंकार और डींग मारना

भीक के टुकड़ों पर मुर्शिद का प्याला

दूसरे के धन के बे हिसाब ख़र्च करने के अवसर पर बोलते हैं, अपनी गिरह से कुछ न निकाले मगर दूसरे के माल को पढ़ पढ़ कर ख़र्च करे

भीक माँगे और आँख दिखावे

निर्धनता की स्थिति में नख़रा और घमंड का होना

भीक माँगे बग़ैर नहीं मलती

बिना कोशिश और प्रयास के कुछ भी हासिल नहीं होता

भीक माँगने चले और मश'अलची साथ

नीच काम कर के शेखी बघारने के अवसर पर प्रयुक्त

भीत होगी तो लेव बहुतेरे चढ़ रहेंगे

अपने पास रुपया होगा तो चापलूस बहुत आ रहेंगे, हड्डियाँ रहेंगी तो मास बहुतेरा चढ़ जाएगा, अस्ल होगी तो उसकी इस्लाह हो सकेगी

भीत के भी कान होते हैं

अपना भेद किसी से नहीं कहना चाहिए वर्ना पूरी दुनिया में मशहूर हो जाएगा

भीत टले पर बान न टले

बुरी लत किसी तरह नहीं छूटती

भीतर का घाव, रानी जाने या राव

मन की व्यथा तो जो पीड़ित है वही जान सकता है

भोंदू भाव न जाने, पेट भरन से काम

मूर्ख आदमी को किसी चीज़ का स्वाद नहीं आता उसे तो पेट भरने से काम होता है

भोग भाग, छैत्तीसों राग

जितना भी हो सके जीवन का आनंद लूट लो

भोगी सो रोगी

भोगी व्यक्ति की सेहत सदैव ख़राब रहती है

भोजन ना भात नीहर का साध

हिंदू विधवा की दशा अत्यधिक दया योग्य होती है न खाना न कपड़ा न मैके की ख़बर

भोजला पहाड़ी के पत्थर खाओ

यहाँ खाने की कोई वस्तु नहीं अगर हाज़मा क़वी है तो भोजला पहाड़ी का पत्थर हाज़िर है

भोजपुर में जाइयो मत जाइयो तो खाइयो मत खाइयो तो सोइयो मत सोइयो तो टोहियो मत टोहियो तो रोइयो मत

भोज पर के लोग बड़े सार्क होते हैं इस लिए नसीहत की गई है कि अव्वल तो वहां ना जाना और अगर जाना तो खाना ना खाना और अगर खाना पड़े तो सोना मत और अगर सोना पड़े तो अपनी हिमियानी मिट टटोलना और अगर टटोलना तो मत रोना कीवनका उस वक़्त तक वो चोरी होचुकी होगी

भोर भया जब जानिए जब पौरे बादल होएँ

जब बादलों का रंग पीला हो तो जानना चाहिए कि सुबह होने वाली है

भोरे भुलाए साँझ घरे आवे ओ भुलेल न कहलावे

सुबह का भोला शाम को घर आ जाये तो उसे भोला नहीं कहना चाहीए

भोरे का मुर्ग़ा बोला, पंछी ने मुँह खोला

सुबह का समय हो गया, सुबह होती है तो पंछी बोलने लगते हैं

भुस के मोल मलीदा

जब बढ़िया चीज़ सस्ते दामों में मारी-मारी फिरे तब कहते हैं

भुस में चिनगी दे कर जमालो दूर खड़ी

षड्यंत्री षड्यंत्र कर के तमाशा देखता है

भुस पर छटी और बाव पर बरात

ख़्याली पुलाव पकाने की निसबत बोलते हैं

भूड़ के हूड़ होते हैं

भूड़ अर्थात रेगिस्तान के लोग झगड़ालू होते हैं

भूईं बिस्वा भर नहीं नाम पृथ्वी पालक

ज़मीन ज़रा क़बज़े में नहीं नाम ज़मीन का पालने वाला, बरअक्स नहंद नाम ज़ंगी काफ़ूर

भूईं पड़ी साह की दव्वानी

अमीर आदमी जो चाहे दावा करे सब बजा है

भूभल में रोटी दाब कर तो नहीं आई

जब कोई औरत जल्दी वापस जाने लगे तो कहते हैं

भूक जनम की हूक

ख़ाहिश, इच्छा या लालसा ज़िंदगी भर रहती है, रोटी की कमी जीवन के लिए ख़तरा है

भूक की झाँज निकल जाना

भूक की तीव्रता और तेज़ी ख़त्म हो जाना

भूक लगी भड़वे को तंदूर की सूझी

विचार कर लो, ग़ौर कर लो, समझ लो

भूक लगी तो घर की सूझी

ऐसे व्यक्ति के बारे में कहते हैं जो लापरवाह हो और खेल कुद में व्यस्त रहता है

भूक में भजन भी न हो

भूखे आदमी से इबादत और पूजा भी नहीं हो सकती

भूक में किवाड़ भी पापड़

सख़्त हाजत में अच्छी बरी चीज़ की तमीज़ नहीं रहती या इशतिहा में बदमज़ा चीज़ भी लज़ीज़ हो जाती है

भूक प्यास अल्लाह ने सब के साथ लगा दी है

ज़रुरत हर किसी को है, हर व्यक्ति को खाने पीने की आवश्यकता है

भूक सब से मीठी है

खाने का असली स्वाद भूख में ही आता है, खाना कैसा भी हो भूख में स्वादिष्ट लगता है

भूका भले मानस और पेट भरे गँवार से न बोले

ये दोनों उन हालतों में बेबाक और मग़लूब-उल-ग़ज़ब होते हैं

भूका भले मानस से डरे

भूके शरीफ़ से बहुत डरना चाहिए

भूका हो तो हरे हरे रूख देखो

मांगने वाले को बगै़र दिए बातों में टालना

भूका के घर में नून नहारी

ग़रीब के घर में जो खाने को मिल जाये ग़नीमत है

भूका को खिला और नंगे को पहना

दोनों सवाब के काम हैं

भूका बंगाली भात ही भात करे

अर्थात व्यक्ति जिस वस्तु का भूखा हो उसी की धुन में लगा रहे

भूका बंगाली भात ही भात पुकारे

मनुष्य को जिस वस्तु की लत हो जाती है वही बार बार याद आती है

भूका बेचे जोरू और राजा कहे मैं ऊधार लूँ

अपेक्षक अपनी प्रिय वस्तु को विक्रय करे और लेने वाला उसकी मुल्य देने में काहिली या आना कानी करे

भूका बेचे जूते अघाना कहे ऊधार दे

अपेक्षक बेचने पर विवश हो और लेने वाला तुरंत भुगतान न करे

भूका चाहे रोटी दाल रजा कहे मैं जोड़ूँ माल

भूखा आदमी दाल रोटी पर जीवन व्यतीत करता है अमीर धन एवं दौलत ईकट्ठा करना चाहता है

भूका गया जो बेचने उगाहना कहे बंधक रखो

दूसरों की आवश्यकता से लाभ उठाने पर कहते हैं

भूका मरे कि सत्वा साने

थोड़ा होना कुछ न होने से अच्छा है

भूका मरता क्या नहीं करता

कंगाल आदमी निम्न से निम्न काम के लिए भी तैयार हो जाता है

भूका तुर्क न छेड़िए हो जाए जी का झाड़

भूखे आदमी से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए वर्ना पीछा छुड़ाना कठिन हो जाता है, भूका आदमी बात बात पर लड़ता है

भूका उठाता है भूका सुलाता नहीं

ईश्वर सबको खाने को देता है, जितने जीव हैं उन सबको सुबह से शाम तक खाने को मिल ही जाता है

भूके बेर उघाने गाँडा तुसपर खाएँ मूली का खाँडा

भूख में सब कुछ संतोष करने योग्य है

भूके हो तो हरे हरे रूख देखो

प्राय: कंजूस लोग माँगने वालों को यह जवाब देते हैं

भूके के घर में नोन नहारी

निर्धन के घर में जो खाने को मिल जाए वही बहुत है

भूके को अन्न प्यासे को पानी, जंगल जंगल आवादानी

जो भूखे को अन्न और प्यासे को पानी देता है उसे हर जगह आराम मिलता है

भूके को भूके ने मारा ये भी गिरा वो भी गिरा

किसी अलाभकारी परिश्रम के संबंध में बोलते हैं

भूके को दे नहीं सकते रजे को देख नहीं सकते

इर्ष्या करने वाले के संबंध में बोलते हैं

भूके को कुछ दीजिए यथा शकत जो होए

जहाँ तक होसके भूखे को कुछ देना चाहिए

भूके को क्या रूखा और नींद को क्या तकिया

भूख में रूखा भी समृद्धि अर्थात ईश्वरीय देन है एवं नींद के समय बिस्तर या तकिया की आवश्यक्ता नहीं होती

भूके को क्या रूखा सूखा और नींद को क्या बिछौना

भूख में मनुष्य जो कुछ मिले खा लेता है और अत्यधिक नींद में बिछौने की परवाह नहीं करता

भूके को नाक नहीं होती

भूख में व्यक्ति निर्लज्ज हो जाता है

भूके को सूखा क्या

भूख में सूखी हुई रोटी भी स्वादिष्ट भोजन होता है

भूके कुत्ते को हड्डी पौ 'ईद है

अभिलाषी को थोड़ा ही बहुत होता है

भूके से कहा दो और दो क्या, कहा चार रोटियाँ

स्वार्थी व्यक्ति के संबंध में कहते हैं

भूके शरीफ़ और पेट भरे रज़ील से डरना चाहिये

दोनों लड़ने मरने को तैयार रहते हैं

भूखे भजन न हो

भूखे आदमी से पूजा भी नहीं हो सकती

भूखे को क्या रूखा और नींद को क्या तकिया

आवश्यक्ता के समय जो मिल जाए संतोष करने योग्य है

भूल गए राग रंग भूल गए जकड़ी, तीन चीज़ें याद रहीं नोन तेल लकड़ी

मनुष्य विवाह के पश्चात संसार के झमेलों में पड़ जाता है केवल घर की ज़रूरतें याद रहती हैं

भूल गए सब ज्ञान शास्त्र पढ़ कर सभी डबोया

लिखे पढ़े निष्क्रियता के संबंध में बोला करते हैं

भूल गई दिन दिहाड़ा , मुंडो ने सेहरा बाँधा

नीच लोगों के संबंध कहते हैं जो अमीर हो जाएँ और अपनी मूलतः स्थिती भूल जाएँ

भूल गई नार, हींग डाल दिया भात में

उस अवसर पर कहते हैं जब ग़लती से कोई काम ख़राब हो जाए

भूला भाट दीवाली गाए

बिना अवसर काम करने पर बोलते हैं

भूला जोगी, दूनी लाभ

यदि फ़क़ीर भूल कर किसी के घर दुबारा माँगने के लिए जाए तो उसे दोहरा लाभ होता है

भूला फिरे किसान जो कातिक माँगे मेंह

वर्षा पूस या माघ की अच्छी होती है कातिक की वर्षा से खेती को कोई लाभ नहीं होता बल्कि गेहूँ आदि की बुवाई में बाधा पड़ती है

भूल-चूक लेनी-देनी

कम और ज़्यादा कर दिया जाएगा, हिसाब बाद में अच्छी तरह कर लिया जाएगा और जो लेना होगा लिया जाएगा जो देना होगा दिया जाएगा

भूले बामन गाए खाई अब खाऊँ तो राम दुहाई

एक बार की भूल से मनुष्य समझ जाता है

भूले बिसरे राम सहाई

ग़लती के समय ख़ुदा मदद करे

भूले चूके डंड नहीं

अनजाने में हुई भूल क्षमा की जाती है

भूले फिरे किसान जो कातक माँगे मेंह

मूर्ख़ है वह व्यक्ति जो असंभव बात की उम्मीद करे

भूली रे राघवा तेरी लाल पगड़ी पर

जब कोई किसी के ऊपरी ठाट-बाट से प्रभावित हो जाए या बाहरी रूप देख कर धोखे में आ जाए तब कहते हैं

भूमियाँ तो भूमी पे मरे, तू क्यों मरे बुटेर

भुमिहार तो भुमि के लिए लड़ता है तो ए बटेर क्यों लड़ती है, जहाँ कोई चाहे न चाहे में लड़ाई मोल ले वहाँ कहते हैं

भून बोया, उपट गया

भूना हुआ बीज बोया जाए तो उगता नहीं

भूनी भाँग न कड़वा तेल

बहुत ग़रीब के बारे में कहते हैं

भूनी मछ्ली जल में पड़ी

का बना बनाया बिगड़ गया

भूरा भैंसा चाँदली जोए पूस महावट बुरे होए

भूरा भैंसा गण औरत और पोस में बारिश बुरी होती या शाज़-ओ-नादिर होती हैं

भूसी बहुत आटा थोड़ा

बेकार चीज़ें बहुत, अच्छी थोड़ी, दिवालिया है, ग़रीब है

भूत जान न मारे, सता मारे

भूत कुछ नहीं करता परंतु उस का भय दिल को दहलाता है

भूत को पत्थर की चोट नहीं लगती

चूँकि भूत के पास शरीर नहीं होता उसे चोट नहीं लगती

भूत से पूत और कीड़ से आमले

बेजा उम्मीद या इच्छा नहीं रखनी चाहिए, ये इच्छा अत्यधिक है ऐसा नहीं होता

भुवा की नदी में कोन हाथ डाले

कौन अपने सर मुसीबत ले

बिंध गया सो मोती, रह गया सो पत्थर

जो काम हो गया उसे संतोष योग्य समझना चाहिए

बिच्छू का काटा रोवे , साँप का काटा सोवे

मुशाहिदे पर मबनी मशहूर कहावत मुराद ये है कि बिच्छू का ज़हर मोहलिक तो नहीं मगर सख़्त अज़ीयत नाक है इस के बर ख़िलाफ़ सांप का ज़हर मोहलिक है मगर इस के काटने में अज़ीयत कम होती है

बिच्छू का मंतर न जाने, बाँबी में हाथ डाले

अनुभवहीन सवारी करने और अनुचित साहस दिखाने पर व्यंग

बिद्दिया करने की

इलम उस को हासिल होता है जो मेहनत करता है, महारत उसी को हासिल होती है जो तजुर्बा करता रहता है

बिद्दिया वो माल है जो ख़र्चत दुगना हो राजा रवा चोर ताछीन न साके को

इलम ऐसा माल है जो (ख़र्च करे) सिखाने से ज़्यादा होता है और उसे राजा राव या चोर कोई नहीं छीन सकता

बिगड़ा बेटा, खोटा पैसा कभी न कभी काम आ ही जाता है

अपनी वस्तु कैसी ही ख़राब हो किसी न किसी समय ज़रूरत में काम दे जाती है

बिगड़ी लड़ाई बक्तर-पोश के सर

काम बिगड़ने पर बुद्धिमान को इल्ज़ाम दिया जाता है

बिगाने कारन लूली तोड़े तान

फ़ायदा किसी को हो और ख़ुशी मनाए

बिगानी आस , फ़ित ओपास

पुराने भरोसे पर नहीं देना चाहिए

बिगानी खेती पर झींगर नाचे

पराए माल पर फ़ख़र करने या शेखी बघारने या बेजा तसर्रुफ़ करने के मौक़ा पर मस्तमाल

बी बकरी नाव में ख़ाक उड़ाती हो

उसके संबंध में कहा जाता है जो अकारण झगड़ा पैदा करे, भेड़िये और बकरी की कहानी की तरफ़ इशारा है

बी बी ख़ता करे बाँदी पकड़ी जाए

बड़े के दोष पर छोटे का दुर्भाग्य अर्थात बड़ा अपराध करे एवं छोटा पकड़ा जाए

बीबी दौलती अपने आप ही खौलती

उन लोगों के लिए उपयोग किया जाता है जो ख़ुद को ईर्ष्या और हसद से जलाते हैं

बीबी ख़ैला दो चिट्टे एक मैला

बाहर से कुछ और अंदर से कुछ और

बीबी ख़ेला दो चिट्टे एक मेला

जहाँ बीबी खैला और जाटनी मिल जाती हैं वहाँ मेला हो जाता है

बीबी को बाँदी कहा वो हँस दी बाँदी को बाँदी कहा वो रो दी

नीच व्यक्ति अपना नीचता स्पष्ट होने पर क्रोधित होता है

बीबी न पीर पहले फ़त्तन फ़क़ीर

दूसरों को नज़र अंदाज करके सब से पहले अपना हिस्सा माँगने वाले के लिए प्रयुक्त

बी-दिया सलाई सुब्ह को गई शाम को आई

अत्यधिक अनुपस्थित रहने वाले के लिए प्रयुक्त

बीवी बीवी 'ईद आई, चल दूर तुझे अपनी दाल टिकिया से काम

अपने स्वार्थ की दृष्टि से कोई बात करना

बीवी नेक बख़्त, दमड़ी की दाल तीन वक़्त

बहुत प्रबंधकीय स्त्री के संबंध में कहते हैं जो थोड़े ख़र्च में गुज़ारा करे

बिजली काँसी पर पड़ती है

दुख बड़ों पर ही पड़ता है

बिजली मेहमान, घर में नहीं तिनका

जब कोई निर्धन किसी धनवान व्यक्ति की दा'वत करे तो व्यंग में कहते हैं

बिख की औखद का

ज़हर लाइलाज है मफ़सा और फ़ित्ना अंग़ेज़ अशख़सास की मुज़म्मत में मुस्तामल

बिल्ली अपनी घात में चूहा अपनी घात में

दोनों विरोधी अपने अपने लाभ या दाँव चलाने की चिंता में लगे हुए हैं

बिल्ली और हमीं से मियाओं

रुक : हमारी बिल्ली हमें से मियाऊं

बिल्ली बख़्शे चूहा बेचारा लंडूरा ही जी जाएगा

रुक : बख़्शो ही बिल्ली चूहा लंडोरा ही भला

बिल्ली भागों छींका टूटा

अप्रत्याशित वस्तु मिल गई, वह धन मिल गया जिसके योग्य न थे, संयोग से काम हो गया

बिल्ली भी दब कर हमला करती है

दूसरों पर क़ाबू पाने के लिए विनम्र बनने की आवश्यकता होती है

बिल्ली भी लड़ती है तो मुँह पर पंजा रख लेती है

बिना किसी शर्म के लड़ने वाले के प्रति बोलते हैं

बिल्ली जब गिरती है तो पंजों के बल

चालाक व्यक्ति कठिनाई में घबराता नहीं और अपनी रक्षा का उस समय भी ख़्याल रखना

बिल्ली का दिल छीछड़े में

हर समय अपने लाभ की चिंता में रहने का अवसर पर प्रयोग में लाया जाता है

बिल्ली का गूह न लेपने का न पोतने का

बिलकुल नाकारा और बेकार है

बिल्ली का मुँह काला

एक वाक्यांश जो प्रायः स्त्रियाँ दावे के साथ कोई काम करने के अवसर पर शुभ-शगून के लिए बोलती हैं

बिल्ली के भागों छींका टूटा

अप्रत्याशित या अकल्पनीय लाभ

बिल्ली के ख़्वाब में छीछड़े

हर व्यक्ति अपने मतलब की सोचता है

बिल्ली खाएगी नहीं तो फैलाएगी

बुरे स्वभाव का व्यक्ति बिना लाभ भी नुक़्सान पहुँचाता है

बिल्ली ख़ुदा वास्ते चूहा नहीं मारती

प्रत्येक व्यक्ति जो काम करता है अपने लाभ के लिए करता है

बिल्ली की म्याउं को कौन सुनता है

बड़े की अपेक्षा छोटे का सम्मान कौन करता है

बिल्ली से छीछ्ड़ों की रखवाली

बददियानत आदमी से अमानतदारी नहीं होती

बिन बहू प्रीत नहीं

ससुर अपने जमाई को तभी तक प्यार करता है जब तक उसकी लड़की जीवित रहती है

बिन भाए प्रीत नहीं, बिन परिचय प्रतीत नहीं

जब तक मन आकर्षित न हो प्रेम नहीं होता और जब तक किसी को परख न लिया जाए उसका भरोसा नहीं होता

बिन बिद्या के नर और नार, जैसे गधा कुम्हार

बिना ज्ञान के स्त्री पुरूष कुम्हार के गधे की तरह होते हैं

बिन बुलाई अहमक़ ले दौड़ी सहनक

बिन-पूछे किसी मामले में हस्तक्षेप देने वाले और बिन बुलाए किसी के घर जाने वाले के लिए प्रयुक्त

बिन बुलाई डोमनी लड़कों बालों साथ आई

बिन-पूछे किसी मामले में हस्तक्षेप देने वाले और बिन बुलाए किसी के घर जाने वाले के लिए प्रयुक्त

बिन चूची बारह बरस लड़के को रखता है

उसके प्रति कहते हैं जो झूठे वा'दे करे

बिन देखा चोर बाप बराबर

जिस चोर की चोरी पकड़ी नहीं गई, उसे साहूकार ही माना जाएगा

बिन गांड़ का बधना

जिसका कोई सिद्धांत अथवा नियम न हो

बिन घरनी घर भूत का डेरा

बिन पत्नी के घर उजाड़ मालूम होता है

बिन घरनी घर पादत है, है घरनी घर गाजत है

पत्नी ही से घर की रौनक़ होती है एवं बिना पत्नी के घर सूना प्रतीत होता है

बिन होनी होती नहीं और होती होवन्हार

जो भाग्य में है अवश्य होगा

बिन जाने कौन माने

जब तक देखते नहीं विश्वास नहीं होता

बिन जोलाहे 'ईद नहीं

जोलाहे के बिना 'ईद नहीं होती क्यूँकि वह नमाज़ पढ़ने की दरियाँ अर्थात मुसल्ला बनाता है

बिन जोलाहे नमाज़ नहीं, बिन ढोलक तक़रीर नहीं होती

बिना जुलाहे के नमाज़ नहीं होती और बिना पुकार के कोई बड़ा दंड नहीं दिया जाता

बिन कौड़ी बिन पैसे का तमाशा

बिना ख़र्च किए मज़ा लेने का मौक़ा

बिन कौड़ी बिन पैसे का तमाशा

बिना व्यय कैसे आनंदित होने का अवसर

बिन कुटना पे छिनाला नहीं

जब तक दिल न कहे दुश्चरित्रता नहीं हो सकती

बिन माँ कैसा माल्वा बिन पी क्या सुसराल

माँ न हो तो मैके में कोई दिलकशी नहीं शौहर न हो तो ससुराल में घबराहट होती है, सरपरस्त या सर धरा न हो तो किसी काम में आनंद नहीं या कोई काम नहीं बनता

बिन माँगे माँ भी बच्चे को दूध नहीं देती

बिना माँगे कोई वस्तु प्राप्त नहीं होती, जीविका प्राप्त करने में मेहनत करना एवं जूझना आवश्यक है

बिन माँगे मिले सो दूध और माँगे मिले सो पानी

सवाल करना बुरा है जो स्वयं से मिल जाए वही अच्छा है (अनिच्छा की व्याख्या में प्रयोग किया जाता है)

बिन माँगे मोती मिलें और माँगे मिले न भीक

जो मिलने वाला होता है वह स्वंय ही मिल जाता है माँगने से तो भीख भी नहीं मिलती

बिन मतलब के सौ मतलब के दो

अपनी पसंद और ज़रूरत की थोड़ी चीज़, बगैर पसंद या ज़रूरत की ज़्यादा चीज़ से बहुत बेहतर होती है

बिन पैसे कौड़ी के तेली साहू, टूटी हाँडी काँडू साहू

तेली और भड़भूंजा दोनों का धंधा ऐसा है कि उसके लिए उन्हें किसी प्रकार की पूंजी की आवश्यकता नहीं पड़ती इसलिए भी कहते हैं

बिन पखावज बिन ताल नाचे है

दरिद्रता में अभिमानी है

बिन रोए माँ भी दूध नहीं देती

बिना माँगे अपनी इच्छा से कोई कुछ नहीं देता

बिन रुके बैद की घोड़ी न चले

मनुष्य अपनी 'आदत एवं स्वभाव के अनुसार ही काम करता है, हकीम की घोड़ी जगह जगह रुकती है

बिन सेवा मेवा नहीं

सेवा में महानता है

बिन ताल पखावज नाचे है

व्यर्थ काम करता है

बिना वसीले चाकरी बिना बुद्धि के देह, बिना गुरू का बालका सर में डाले खेह

नौकरी बिना माध्यम एवं अनुशंसा के नहीं मिल सकती एवं शरीर बिना बुद्धि के बेकार है और जिस चेले का गुरू नहीं वह दुष-चरित्र हो जाता है

बिनौले की लूट में बरछी का घाव

थोड़े से लाभ में बहुत अधिक तकलीफ़

बिपत बराबर सुख नहीं, जो थोड़े दिन की हो

थोड़ी मुसीबत सुख-सम्पदा की क़दर का कारण हो जाती है

बिपत पड़ी जब भेंट मानी, मुकर गया जब देनी आई

मुसीबत के समय मनुष्य को ईश्वर याद आता है और छुटकारा पाने के लिए तरह तरह के भेंट और मन्नतें मानता है परंतु जब मुसीबत टल जाती है तो सब कुछ भूल जाता है

बिपत संगाती हैं तीन, जोरू बेटा आप

मुसीबत में वही लोग साथ देते हैं जिन से बहुत अधिक क़रीबी संबंध हों

बिपता में कोई साथी नहीं

मुसीबत के वक़्त कोई साथ नहीं देता

बिरादरी को न खिलाया, चार काँधी ही जमा दिये

शव उठाने वालों को खाना खिलाया और सगे-संबंधियों को पूछा भी नहीं

बिसात भड़ भूँजे की दिमाग़ शाहजहाँ का

उस व्यक्ति की निंदा में प्रयुक्त है जो अपनी हैसियत का ख़्याल न करे और बड़े लोगों की रेस करे, कहाँ गंगा तेली कहाँ राजा भोज

बिसनी बिलार डैरी पर डैरा

बिन बुलाए या अचानक आ जाने वाले मेहमान की मुज़म्मत में मुस्तामल

बिसवा बिस की गाँठ है

गांव में ज़मीन का हिस्सा बहुत झगड़े पैदा करता है

बिस्वा बिस की गाँठ

ज़रई जायदाद बहुत से बाहमी झगड़ों और नज़ाआत की जड़ होती है

बिटौरे में उपले ही निकलेंगे

बुरों से बुरे ही लच्छन ज़ाहिर होंगे, किसी को बुरे से अच्छे की उम्मीद नहीं करनी चाहिए

बिटिया लंगोटिया धन है

कुँवारेपन में बेटी के ख़र्च आसान होते हैं

बियाही बेटी पड़ोसन दाख़िल

ब्याह के पश्चात बेटी पराए घर की हो जाती है और बहुत कम मायके आती है

बोएँ जौ और काटें गेहूँ

अजीब बात है की हराई और बदले में मिली नेकी

बोहनी थोहनी रद्द-ए-बला

बोहनी अच्छी हो तो सारा दिन कोई तकीफ़ नही होती

बोल बंदा किस का मेरा कि तेरा

इस अवसर पर प्रयुक्त जब किसी दुर्बल को बलवान के सामने हथियार डालना पड़े

बोले की न चाले की, मैं तो सोते की भली

बहू की सुस्ती एवं काम न करने पर कहते हैं

बोले सो घी को जाए

जो उपाय बताए वही काम को अंजाम दे

बोले सो मारा जाए

जो बोलता है और दूसरे की बात के बीच में आता है वह मार खाता है इसलिए चुप रहना अच्छा है

बोली बोलें तो ये बोलें मेरी जूती बोले

बोलती ही नहीं, यदि बोली तो लड़ाई मोल ली

बोली तीन काम

बे दर पै मुतअद्दिद कामों की फ़र्माइश, एक एक सांस में कई कई हुक्म

बोलो तो बोलो, नहीं पिंजरा ख़ाली करो

या तो अच्छी तरह रहो या फिर यहाँ से जाओ

बोलता चाकर आक़ा के सामने गूँगा

बहुत तेज़ आदमी भी हाकिम के सामने भीगी बिल्ली बन जाता है

बोलता चाकर मुनीब के आगे गूँगा

नौकर मालिक के आगे नहीं बोल सकता

बोलता है जब तलक बोलता है

साँसों के साथ वाक्-शक्ति है

बोटी दे कर बकरा लेते हैं

थोड़ा सा उपकार करके बहुत सा मतलब निकालना चाहते हैं

बोटी सौ कुत्ते

रुक : एक अनार सौ बीमार

बोया गेहूँ उप्जा जौ

की थी नेकी बदले में ब्वॉय मिली

बोया न जोता, अल्लाह ने दिया पोता

किसी को कोई चीज़ मुफ़्त मिल जाए तो कहते हैं

बृछ का साया और पुरुष का माया

दरख़्त का साया और इंसान का रसूख़ इन की अपनी अपनी ज़ात के साथ है

बुड़बक की जोरू, सब की भौजाई

मूर्ख की 'औरत से सब छोड़-छाड़ करते हैं

बुढ़िया दीवानी हुई, पराए बर्तन उठाने लगी

मतलब की दीवानी है, पागलपन में भी अपना लाभ सूझता है

बुढ़िया का काता जवान का खाजा या तमाशा

बुढ़िया का काता जिसके बेचने वालों की ये पुकार है

बुढ़िया के मरने का रंज नहीं फ़रिश्तों ने घर देख लिया

एक बार के नुक़्सान का ग़म नहीं, चिंता ये है कि आगे के लिए नुक़्सानात का ख़तरा पैदा हो गया

बुढ़िया की शादी में सौ ख़तरे

जिसमें कोई दोष हो उसकी उद्देश्य प्राप्ति में बहुत सी रुकावटें पैदा होती रहती हैं

बुढ़िया को पैंठ बिना कब सरे

वृद्ध रुचिकर अथवा तमाशाई पर व्यंग है

बुढ़िया मरी तो मरी फ़रिश्तों ने घर देख लिया

एक बार के नुक़्सान का ग़म नहीं, चिंता ये है कि आगे के लिए नुक़्सानात का ख़तरा पैदा हो गया

बुढ़िया ने सीखा सलाम न देखी सुब्ह न शाम

तकरार अच्छे काम की भी अच्छी नहीं होती (उसकी निंदा में प्रयुक्त जो मौक़ा बे मौक़ा वक़्त ना वक़्त अपनी बात की तकरार करता रहे

बुढ़िया ने सीखा सलाम, न देखी सुब्ह न शाम

तकरार अच्छे काम की भी अच्छी नहीं होती (उसकी निंदा में प्रयुक्त जो मौक़ा बे मौक़ा वक़्त ना वक़्त अपनी बात की तकरार करता रहे

बुड्ढा ब्याह करके पड़ोसियों को सुख होए

बुढ़ापे के ब्याह पर कटाक्ष है, पड़ोसी मज़े उड़ाते हैं

बुड्ढा मरे या जवान , अपने हल्वे माँडे से काम

अपनी ग़रज़ पूरी करने के सामने किसी की तकलीफ़ का ख़्याल नहीं

बुड्ढे की न मरे जोरू, बाले की न मरे माँ

बुड्ढे की बीवी और बच्चे की माँ मर जाए तो दोनों का सहारा ख़त्म हो जाता है अथवा दोनों पर बड़ी विपदा आ जाती है

बुड्ढे की सीख करे काम को ठीक

बुज़ुर्गों की सलाह बहुत लाभदायक होती है

बुड्ढी भैंस का दूध शकर का घोलना, बुड्ढे मर्द की जोरू गले का ढोलना

बूढ़ी भैंस का दूध मीठा और गाढ़ा होता है और बूढ़े आदमी को अल्प-आयु पत्नी की बहुत रक्षा करनी पड़ती है

बुड्ढी घोड़ी लाल लगाम

जो व्यक्ति बुढ़ापे में भी युवकों की तरह रहे

बुड्ढों ने जो काम सिखाया धोका मोल न वामें पाया

सन रसीदा और तजरबाकार आदमीयों की बताई हुई बात पर अमल करने में फ़ायदा ही होता है

बुझना बुरी होती है

इश्क़ बुरी बला है, प्यार के जुनून में कुछ भी नज़र नहीं आता है, मुहब्बत में अच्छा बुरा कुछ नहीं सूझता

बुझना तो रोज़ी, नहीं तो रोज़ा

अत्यधिक निर्धनता स्पष्ट करने के लिए प्रयुक्त

बुरा हाकिम, ख़ुदा का ग़ज़ब

ईश्वर जब लोगों को दंड देना चाहता है तो अत्याचारी शासक भेज देता है जिस के हाथों वो अपने परिणाम अथवा दंड को पहुँचते हैं

बुरा करे नाई बामना भुला करे मेरे भाग

काम इन जाये तो फ़ायदा का ना बने तो नौकर के सर , बुराई दूसरे के ज़िम्मे भलाई अपने ज़िम्मे

बुरा मानो या भला

अच्छा लगे या बुरा, अच्छा समझो या बुरा

बुराई बग़ल में ख़ूबाई बात में

बाहर से अच्छा और अंदर से बुरा है, दोहरे चरित्र वाला है, बहुमुख है

बुरे का साथ दे सो भी बुरा

बुरे व्यक्ति का मित्र भी बुरा ही होता है

बुरे के पास बैठे कटाए नाक और कान

बुरों की संगत में उठने बैठने से रुसवाई होती है

बुरे की बुराई से डरिए, बुरे से देव भी डरे

बुरे व्यक्ति से संबंध न रखिये कहीं ऐसा न हो कि हानि पहुँचाए

बुरे वक़्त का अल्लाह बेली

दुख के समय ईश्वर के सिवा कोई सहायता नहीं करता

बुर्क़ा' न ग़िलाफ़ धोया धाया दीदा साफ़

बेहद ढिटाई और निर्लज्जता है (स्त्री के लिए प्रयुक्त)

बू गई , बू-दार गई , रही खाल की खाल

शान-ओ-शौकत जाती रही असली हालत रह गई

बूढ़ा बाला बराबर

बूढ़े और बच्चे की अक़्ल बराबर होती है, दोनों बराबर के देखभाल के मुहताज होते हैं

बूढ़ा चोचला जनाज़े के साथ

वहाँ कहते हैं जहाँ कोई वृद्धावस्था में युवावस्था की सी हरकत करता हो

बूढ़ा घोड़ा लाल लगाम

बुढ़ापे में जवानी का सिंगार या नख़रे, ऐसी उम्र में बनाव सिंगार करना में जिस में ज़रूरत नहीं होती है

बूढ़ा जाने क्या बाला जाने हिया

बूढ़ा व्यक्ति कार्य को देखता है और बच्चा प्यार पर झुकता है, मुहब्बत अकारण नहीं होती

बूढ़ा मुँह मुहासा लोग आए तमाशा

बुढ़ापे में जवानी की क्रियाएँ सूझी हैं, जो अधिक प्रयुक्त हैं

बूढ़ा तोता टें टें करे या काट खाए

बूढ़े व्यक्ति पर उपदेश का प्रभाव नहीं होता वह अपनी लत के अनुसार ही करेगा

बूढ़े बारे ख़ल्क़ द्वारे

बूढ़े और बच्चे साथी की तलाश में इधर उधर घूमा करते हैं

बूढ़े ख़सम की जोरू गले का ढोलना

बुढ़ापे में शादी करने का नतीजा ज़न मुरीदी होता है

बूढ़े मुँह मुहा से लोग चढ़े तमाशे

बुढ़ापे में जवानी की क्रियाएँ सूझी हैं

बूढ़े मुँह मुहासे

बुढ़ापे में जवानी की या जवानी में बचपन की अड़, ज़िद

बूढ़े तोते भी कहीं पढ़ा करते हैं

वृद्धों का प्रशिक्षण नहीं हो सकता

बूढ़े तोते भी कहीं पढ़ा करते हैं

बूढ़े आदमी को कोई काम नए सिरे से नहीं सिखाया जा सकता

बूढ़े तोते नहीं पढ़ते

बड़ी आयु में ज्ञान या अदब प्राप्त नहीं होता

बूढ़े तोते पढ़ें क़ुरआन

बड़ी आयु में ज्ञान या अदब प्राप्त नहीं होता

बूढ़े तोते क़ुरआन नहीं पढ़ते

बड़ी आयु में ज्ञान या अदब प्राप्त नहीं होता

बूढ़ी बकरी हुंडार से ठट्ठा

दुर्बलता होते हुए भी बलशाली से उलझते हैं

बूढ़ी घोड़ी, लाल लगाम

बुढ़ापे में जवानी का श्रिंगार या नख़रे, ऐसी उम्र में बनाव श्रिंगार करना जिस में इसकी आवश्यक्ता न हो

बूढ़ी जर्वा नाम ख़तिजा

ज़ाहिर शानदार है लेकिन औसाफ़ बिलकुल नाक़िस हैं

बूँद का चूका घड़ा ढलकाए

जब मौक़ा हाथ से निकल जाये तो कितना भी हाथ पाँव मारा जाए काम नहीं बनता

बूर के लड्डू खाए सो पछताए, न खाए सो पछताए

ऐसा काम जिस के न करने में हसरत रहे और करने में पछतावा हो

बुवा भसक्को ने सलीक़ा किया मियानी फाड़ घुटने पर पैवंद सिया

इस बद सलीक़ा और फूहड़ के लिए इस्तिहज़ा के तौर पर मुस्तामल है जो एक मामूली चीज़ की दरूस्तगी की कोशिश में दूसरी अहम चीज़ को तबाह-ओ-बर्बाद करदे

ब्याह में खाई बूर, फिर क्या खाएगी धूर

जिसको ब्याह के अवसर पर बूर खाने को मिले उसे ब्याह के पश्चात क्या ख़ाक मिलेगा

ब्याह पीछे बढार

मौक़ा निकल जाने के बाद भूल चूक या ग़फ़लत पर पछतावा

ब्याह पीछे बरात

अवसर निकल जाने के बाद युक्ति सूझना

ब्याह पीछे पत्तल भारी होता है

अधिक ख़र्च करने के पश्चात थोड़ा ख़र्च भी बड़ा प्रतीत होता है

ब्याही बेटी का रखना हाथी का बाँधना है

शादी करने के बाद बेटी का अपने घर रखना मसारिफ़ वग़ैरा के लिहाज़ से इतना ही भारी है जितना हाथी पालना मुश्किल होता है

ब्याही न बरात चढ़ी डोली में बैठी न चूँ-चूँ हुई

अभी तक शादी ही नहीं हुई, जिस बात को देखा ही नहीं, उसका पता ही क्या हो

ब्याहने आई बरात दुलहन को लगी हगास

गलत समय पर पैदा होने वाली बात जो टाली न जा सके

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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