बड़ तले का भूत
उस व्यक्ति के प्रति कहा जाता है जिस से पीछा छुड़ाना कठिन हो
बड़े बोल का सिर नीचा
अभिमानी को रुसवा होना पड़ता है, ग़ुरूर से बड़ा बोल बोलने वाले को रुसवा होना पड़ता है
बड़े घर पड़े पत्थर ढो ढो मरे
ऊण् ख़ानदान में रिश्ता होने से क़िस्म किस्म की मुश्किलात का सामना करना पड़ता है, मालदार के पास रह कर कामयाब ना होना बदनसीबी ऊण् ख़ानदान तकलीफ़ में मुबतला रहता है
बँधी मुट्ठी लाख बराबर
उपहार किसी को छुपा कर देना चाहिए, छुपा कर दिया जाए तो सस्ता उपहार भी बहुत महंगा प्रतीत होता है
बाढ़ काटे नाम तलवार का
मातहत काम करते हैं शोहरत अफ़सरों की होती है, काम कोई करता है नाम किसी और का होता है
बाँध खीसा खा हरीसा
पैसा पास होतो अनोखी से अनोखी वस्तु मिल सकती है, रूपये से सब काम निकलते हैं
बाँझ अच्छी इकाँज बुरी
जिस स्त्री के बच्चा ही न हो वो एक बच्चे वाली स्त्री से अच्छी है क्यूँकि उसे हर समय बच्चे के मर जाने का भय रहता है
बाँस गुन बसोर चमार गुन आधोर
बाँस की अच्छाई जंगल में और चमार की अच्छाई चमड़े के गोदाम में प्रकट होती है, हर चीज़ अपनी-अपनी जगह पर बहुत अच्छी लगती है
बाबा आएँ न घंटा बजे
किसी के बिना कोई काम रुका पड़ा हो और उसकी प्रतीक्षा की जा रही हो तब कहते हैं
बाबा आवें न घंटा बाजे
जब तक बाबा नहीं आजाते घंटा नहीं बजने का, ऐसे मौक़ा पर मुस्तामल जब एक काम का करना किसी दूसरे दुशवार तर काम पर मौक़ूफ़ हो
बाबा कमावे, बेटा उड़ावे
पिता ने कमाई करके जोड़ा, इकट्ठा किया, और बेटे ने अपव्ययी या विलासिता और व्यर्थ में बर्बाद कर दिया
बा'द अज़ ख़राबी बसरा
बड़ी मुश्किल से, बड़ी कठिनाई से, बड़े हानि के बाद (फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रयुक्त)
बाघ की मासी बिलाई
एक ही प्रकार के हैं अथवा एक ही नस्ल से हैं, बिल्ली और शेर एक ही नस्ल से हैं
बाह मरें बैल बैठे खाएँ तरंग
बैल तो हल चलाते हैं और घोड़े बगै़र मेहनत के खड़े खड़े खाते हैं, कोई मेहनत करता है कोई मज़े उड़ाता है,अपनी अपनी क़िस्मत है
बाला कुन कि अर्ज़ानी हनूज़
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) और क़ीमत बढ़ा क्योंकि ये क़ीमत बहुत कम है, बहुत बावक़अत है, बेशक़ीमत चीज़ है (बिलउमूम बतौर तंज़न मुस्तामल)
बामन-बचन-परवान
लिखे पढ़े की बात काबिल मंद होती है, तजरबाकार आदमी के कलाम पर ज़्यादा भरोसा होता है, ऐसे मौक़ा पर मुस्तामल जहां कोई ऐसी बात कहे जिस के मालिन्य में कुछ फ़ायदा ना हो मगर बज़ाहिर इस का इक़रार करना मुनासिब मालूम हो
बाप बनिया, पूत नवाब
कमीने एवं डींग हाँकने वाले के प्रति कहते हैं कि अपनी हैसियत से बढ़ कर बात करता है
बाप न मारे पिदड़ी बेटा गो-अंदाज़
बाप दादा से कुछ हो नहीं सका बेटा सोरमाई दिखाता है (वो लोग जिन के बुज़ुर्गों से कुछ ना होसका, जब बढ़ चढ़ कर दावे करते हैं तो इस मौक़ा पे तंज़िया कहा जाता है)
बाप न मारे पिदड़ी बेटा तीर-अंदाज़
बाप दादा से कुछ हो नहीं सका बेटा सोरमाई दिखाता है (वो लोग जिन के बुज़ुर्गों से कुछ ना होसका, जब बढ़ चढ़ कर दावे करते हैं तो इस मौक़ा पे तंज़िया कहा जाता है)
बारह बरस सैई काशी मरने को मगध की माटी
अवधि तक प्रतिक्षा में रहे और इच्छा पूरी न हुई (हिंदूओं का ख़्याल है कि जो काशी में मरे वह आवा-गोन से छूट जाता है जो मगध में मरे वह गधे की जून में जाता है
बात कही और पराई हुई
राज़ अर्थात भेद मुँह से निकलते ही प्रसिद्ध हो जाता है, भेद मुँह से निकलने के पश्चात भेद नहीं रहता
बात कही पराई हुई
राज़ अर्थात भेद मुँह से निकलते ही प्रसिद्ध हो जाता है, भेद मुँह से निकलने के पश्चात भेद नहीं रहता
बात थल की न बेड़े की
वचन कभी पूरा नहीं होता, कथन पर स्थिर नहीं रहते (जिसका मूड स्थिर न हो उसके लिए प्रयुक्त)
बातों हाथी पाइयाँ बातों हाथी पाँव
बात सुनने वाले (विशेषतः शासक) के स्वभाव के अनुसार हो तो सम्मान मिलता है और स्वभाव के विरुद्ध पड़े तो दुख एवं पीड़ा का कारण बन जाती है, उन्नति एवं अवनति भाषा ही के कारण है
बावन तोले पाव रत्ती
(इल्मॱएॱ कीमिया) दो चावल बावन तो ले ताँबे को सोना बनादेती है (अदबीयात) बिलकुल ठीक, कुछ शुबा नहीं, निहायत कारआमद
बावले गाँव में ऊँट परमेशर
मूर्खों के गाँव में ऊँट आया तो वो उसे ईश्वर ही समझ बैठे, अर्थात मूर्खों के लिए सामान्य चीज़ें भी अनोखी और बहुत बड़ी मालूम होती हैं
बद अच्छा बदनाम बुरा
इसलिए कि बदनाम आदमी कोई बुराई न भी करे तो भी लोगों का ध्यान उसी की ओर जाता है
बद से बदनाम बुरा
जिस व्यक्ति का नाम बदनाम हो जाए हर बुरा काम उसके ज़िम्मा लगता है, चाहे उसने किया हो या न किया हो, इस लिए बदनाम को बद आदमी से बुरा गिना जाता है, किसी को बदनामी से रोकने के मौक़ा पर कहा जाता है
बहू बेटी सब रखते हैं
जब कोई किसी को माँ-बहन की गाली दे अथवा दूसरे की स्त्री को बुरी नज़र से देखे तब उसे भर्त्सना करते हुए कहते हैं
बैल की दुम किधर है
ऐसे व्यक्ति के लिए उपहासपूर्ण बोलते हैं जो सहज और स्पष्ट बात को न समझ पाए या जानबूझकर भोला और अनजान बन जाए
बंदर के हाथ आईना
अयोग्य या अनाड़ी को कोई उच्च गुणवत्ता वाली चीज़ मिल जाने के अवसर पर प्रयुक्त
बंदर के हाथ आर्सी
अयोग्य या महत्वहीन व्यक्ति को कोई श्रेष्ठ वस्तु प्राप्त होने की परिस्थिति
बंदर क्या जाने अदरक का भाव
साधारण व्यक्ति उत्तम की वस्तुओं का महत्व नहीं जानता, साधारण पहचान वाले को मुल्यवान वस्तु की क्या पहचान हो सकती है
बंदर क्या जाने अदरक का मज़ा
साधारण व्यक्ति उत्तम की वस्तुओं का महत्व नहीं जानता, साधारण पहचान वाले को मुल्यवान वस्तु की क्या पहचान हो सकती है
बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद
साधारण व्यक्ति उत्तम की वस्तुओं का महत्व नहीं जानता, साधारण पहचान वाले को मुल्यवान वस्तु की क्या पहचान हो सकती है
बनिये का मुँह ग्राह और पेट मोम
मगरमच्छ के मुँह में जो चीज़ आ जाए वह नहीं छूटती, बनिया भी ऐसा ही करता है और रुपया बचाने के लिए पेट के ख़ूराक अर्थात भोजन में भी कमी कर लेता है
बर-'अक्स निहंद नाम-ए-ज़ंगी काफ़ूर
जिस विशेषता में प्रसिद्ध है उसके विरुद्ध विशेषण मिलता है, (किसी में) प्रसिद्धि के अनुरूप विशेषण नहीं पाया जाता बल्कि उसके विपरीत विशेषता पाई जाती है
बे-भेदी चोरी नहीं
चोरी तभी होती है जब कोई मुख़बिर चोर को यह बता दे कि अमुक स्थान पर माल रखा हुआ है
बेच-बेच मेरी पखनी का ब्याह
लड़की के ब्याह में प्रायः बहुत ख़र्च करना पड़ता है, उसी पर कहते हैं कि बेचो घर की संपत्ति और करो लड़की की शादी
बेटे की बरी बाज़ार में खड़ी
बेटे की शादी के लिए जिस सामान की ज़रूरत होती है वो बड़ी आसानी से और बहुत जल्द उपलब्ध हो सकता है (इस की तैयारी में लड़की के जहेज़ की तरह वक़्त नहीं लगता)
भाड़ लीपा हाथ काले
मेहनत करने से कोई फ़ायदा नहीं हुआ, मेहनत और परिश्रम ख़ाली रही, उसका कोई लाभ न मिला, कोशिश निरर्थक रही
भादों दोनों साख का राजा
भादों की बारिश दो फ़स्लों के लिए लाभकारी होती है एक फ़स्ल पकने के क़रीब और दूसरी की बुवाई का समय होता है
भल जन्मल भल पन्डत भैल
अच्छे पैदा हुए और अच्छे पंडित हुए जो घर में खाने को नहीं जुड़ता, किसी पंडित की स्त्री उससे व्यंग्य में कह रही है
भले की भलाई और बुरे की जँवाई
अच्छे व्यक्ति के साथ अच्छा व्यवहार किया जाना चाहिए और बुरे व्यक्ति के साथ बुरा व्यवहार किया जाना चाहिए, अच्छे आदमी से अच्छा सुलूक करना चाहिए और बुरे के साथ बुरा
भले की दुनिया नहीं
अच्छाई का ज़माना नहीं, इस ज़माने में किसी से भलाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि लोग नेकी का बदला बुराई से देते हैं
भली के भाई और निबड़ी के जँवाई
प्रसन्नता की अवस्था में सब मित्र होते हैं या दुनियादार परिस्थिति के अनुसार अपने सिद्धांतों को बदलने वाला के संबंध में बोलते हैं
भरम मारे, भरम जियावे
गरिमा अच्छी हो तो 'इज़्ज़त बाक़ी रहती है एवं गरिमा जाती रहे तो ज़िंदगी मौत के बराबर है
भ्रमा भूत, संका डायन
कल्पना भूत दिखाती है और डर से डायन दिखाई देती है आश्य यह है कि ऐसी चीज़ों से डरना नहीं चाहिए यह सब काल्पनिक बातें हैं
भीड़ न ठट्ठा मार नुहटा
न भीड़, न अवसर, अवसर के विरुद्ध बात करने के समय पर बोलते हैं, अकारण लड़ने वाली औरत के संबंध में कहते हैं
भूक जनम की हूक
ख़ाहिश, इच्छा या लालसा ज़िंदगी भर रहती है, रोटी की कमी जीवन के लिए ख़तरा है
भूक में किवाड़ भी पापड़
सख़्त हाजत में अच्छी बरी चीज़ की तमीज़ नहीं रहती या इशतिहा में बदमज़ा चीज़ भी लज़ीज़ हो जाती है
भूक सब से मीठी है
खाने का असली स्वाद भूख में ही आता है, खाना कैसा भी हो भूख में स्वादिष्ट लगता है
भूला जोगी, दूनी लाभ
यदि फ़क़ीर भूल कर किसी के घर दुबारा माँगने के लिए जाए तो उसे दोहरा लाभ होता है
भूल-चूक लेनी-देनी
कम और ज़्यादा कर दिया जाएगा, हिसाब बाद में अच्छी तरह कर लिया जाएगा और जो लेना होगा लिया जाएगा जो देना होगा दिया जाएगा
बिच्छू का काटा रोवे , साँप का काटा सोवे
मुशाहिदे पर मबनी मशहूर कहावत मुराद ये है कि बिच्छू का ज़हर मोहलिक तो नहीं मगर सख़्त अज़ीयत नाक है इस के बर ख़िलाफ़ सांप का ज़हर मोहलिक है मगर इस के काटने में अज़ीयत कम होती है
बिद्दिया करने की
इलम उस को हासिल होता है जो मेहनत करता है, महारत उसी को हासिल होती है जो तजुर्बा करता रहता है
बिख की औखद का
ज़हर लाइलाज है मफ़सा और फ़ित्ना अंग़ेज़ अशख़सास की मुज़म्मत में मुस्तामल
बिल्ली का मुँह काला
एक वाक्यांश जो प्रायः स्त्रियाँ दावे के साथ कोई काम करने के अवसर पर शुभ-शगून के लिए बोलती हैं
बिन जोलाहे 'ईद नहीं
जोलाहे के बिना 'ईद नहीं होती क्यूँकि वह नमाज़ पढ़ने की दरियाँ अर्थात मुसल्ला बनाता है
बोले सो मारा जाए
जो बोलता है और दूसरे की बात के बीच में आता है वह मार खाता है इसलिए चुप रहना अच्छा है
बोली तीन काम
बे दर पै मुतअद्दिद कामों की फ़र्माइश, एक एक सांस में कई कई हुक्म
बुझना बुरी होती है
इश्क़ बुरी बला है, प्यार के जुनून में कुछ भी नज़र नहीं आता है, मुहब्बत में अच्छा बुरा कुछ नहीं सूझता
बुरा हाकिम, ख़ुदा का ग़ज़ब
ईश्वर जब लोगों को दंड देना चाहता है तो अत्याचारी शासक भेज देता है जिस के हाथों वो अपने परिणाम अथवा दंड को पहुँचते हैं
बूढ़ा बाला बराबर
बूढ़े और बच्चे की अक़्ल बराबर होती है, दोनों बराबर के देखभाल के मुहताज होते हैं
बूढ़ा घोड़ा लाल लगाम
बुढ़ापे में जवानी का सिंगार या नख़रे, ऐसी उम्र में बनाव सिंगार करना में जिस में ज़रूरत नहीं होती है
बूढ़ी घोड़ी, लाल लगाम
बुढ़ापे में जवानी का श्रिंगार या नख़रे, ऐसी उम्र में बनाव श्रिंगार करना जिस में इसकी आवश्यक्ता न हो