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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

उड़ भंभीरी सावन आया

पदच्युति का समय आया

उड़ी उड़ी ताक़ बैठी

(कोई बात) चर्चा होते ही जनता में फैल गई, धीरे-धीरे कहाँ से कहाँ जा पहुँची

उड़ती-उड़ती ताक़ चढ़ी

सत्यापित हुई अफ़वाह या उड़ती हुई ख़बर ठीक थी, किसी उड़ती ख़बर का सच बन जाना

उलझना आसान सुलझना मुश्किल

किसी झगड़े में पड़ना तो आसान होता है किंतु उससे छुटकारा पाना कठिन होता है

उधार देना लड़ाई मोल लेना है

उधार देना झगड़ा पैदा करना है

उधार दिया गाहक खोया, सदक़ा दिया रद्द-ए-बला

उधार देने से गाहक जाता रहता है और दान देने से परेशानी दूर होती है और पुण्य मिलता है

उधार खाना और फूस तापना बराबर है

क़र्ज़ की चीज़ और फूंस की आग टिकाऊ नहीं होती है, बे बरकत है, कुछ लाभ नहीं होता पर लाचारी को क्या करे

उधार की क्या माँ मरी है

नक़द पास न सही उधार तो मिलेगा

उधार सब से बड़ी साख है

उधार लेना एक आपदा है

उधेड़ के रोटी न खाओ तंगी होती है

उधेड़ कर रोटी का खाना बुरा समझा जाता है, रोटी का छिलका नहीं उतारना चाहिए

उधयाइल सतुवा पितरन के दान

ख़राब हुए सत्तू बड़ों के नाम दान, जो सत्तू उड़ गया वह पितरों को अर्पित

उद्यम से दलिद्दर घटे

परिश्रम और प्रयास से परेशानी जाती रहती है, परिश्रम या काम-धंधे से दरिद्रता दूर होती है

उगलती तलवार बीस्वा लुगाई ख़सम को मार रखती है

जिस तरह में से तलवार अचानक निकल पड़ने पर इंसान को ज़ख़मी कर देती है इस तरह बदचलन औरत से भी ख़ावंद को ज़रूर पहुंचता है

उगत उगे माह भरे बिसवत उगे जाए

जो एक महीने के बाद उगने की चीज़ है अगर वो अगाई अर्थात पहले उगे तो ख़राब हो जाती है

उगले तो अंधा, खाए तो कोढ़ी

करने और न करने में दोनों प्रकार से ख़राबी, घोर असमंजस की स्थिति

उजड़े गाँव का नाता किया

जिस जबज़ को छोड़ दिया इस से किया वास्ता, ताल्लुक़ आबादी से होता है वीरान बस्ती सैकिया ताल्लुक़

उजड़े घर का बलेंडा

बर्बाद शूदा, अज़ कार रफ़्ता, बक़ीया, मरे होविं की निकम्मी यादगार

उज्जड़ नगरी सूना देस

वीरान, तबाह, बर्बाद जगह, उजाड़ और निर्जन स्थान

उज्ज्वल बरन अधीनता एक चरन दो ध्यान, हम जाने तुम भगत हो निरे कपट की खान

बगुले के लिए कहा गया है, देखने में साफ़-सुथरे एवं विनम्र हो, एक पैर से खड़े हो लेकिन तुम्हारा ध्यान दो जगह बंटा हुआ है, हम समझे तुम कोई साधु हो किंतु तुम तो बड़े कपटी निकले

उकता ई कुम्हारन नाख़ुन से मिट्टी खोदे

जब आदमी मेहनत करते करते थक जाता है या काम पर जी नहीं लगता तो बेदिली और बेतवज्जुही से काम करने लगता है

उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे

अपने कर्मों पर लज्जित न होना और रोकने वाले को आँखें दिखाना, किसी की हानि करके उल्टा उसी पर धाक जमाना

उल्टे बाँस बरेली

((शाब्दिक) बरेली शहर (यूपी, भारत) के पैदा होने वाले बांस जो वहां से लाए गए थे फिर वहीं को वापिस चले, (लाक्षणिक) उलटा मामला, बेवक़ूफ़ी का काम, नुक़्सान का काम

उल्टे बाँस पहाड़ चढ़े

मुआमला उलट गया (ख़िलाफ़ महल काम करने के मौक़ा पर तंज़न मुस्तामल

उल्टी गंगा पहाड़ को चली

असंभव बात का संभव होना

उल्टी खोपड़ी औंधा ज्ञान

जब कोई मूर्खता की या बे-तुकी बात करे तो कहते हैं

उल्टी नगरी तलपट राजा

जैसी रियाया बेसलीक़ा वैसा हाकिम फिर इंतिज़ाम क्योंकर हो, सब काम ख़िलाफ़-ए-दस्तूर, ग़ैर मुनज़्ज़म

उल्टी टाँगें गले पड़ीं

भलाई के बदले बुराई और लाभ की जगह हानि हुई

उलटी वाकी रीत है उलटी वाकी चाल, जो नर भोंडी राह में अपना खोवे माल

जो व्यक्ति अपना धन बेकार चीज़ों में बर्बाद करता है वह बहुत बड़ा मूर्ख है

उन का काटा पानी नहीं माँगता

सख़्त अर्थात ज़हरीले साँप के काटने की ओर इशारा है, काले साँप का काटा बचता नहीं

उपकारी-धर्म-धारी

एक उदार आदमी धर्मनिष्ठ होता है

उरद कहै मेरे माथे टीका, मो बिन ब्याह न होवै नीका

सब अपने आप को बड़ा समझते हैं और समझते हैं कि उनके बिना काम नहीं हो सकता

उर्दू का मुहावरा दिल्ली पर ख़त्म है

दिल्ली की ज़बान या भाषा प्रमाणित या विश्वसनीय है

उस दिन भूलें चौकड़ी, वली, नबी और पीर, लेखा होवे जिन दिनाँ, क़ादिर पाक क़दीर

ईश्वर जिस दिन कर्मों का लेखा लेने बैठेगा उस दिन क्या संत, क्या पैगंबर और क्या पीर सभी अपनी चौकड़ी भूल जाएंगे

उस जातक पर प्यार जताओ, मात-पिता बिन जिस को पाओ

अनाथों के साथ अच्छा व्यवहार करो, अनाथ बच्चों से प्यार करना चाहिए, अनाथ पर दया करनी चाहिए

उस जातक से करो न यारी, जिस की माता हो कलहारी

उस लड़के से कभी मित्रता या प्रेम मत करो जिसकी माँ लड़ाका अर्थात झगड़ालू हो

उस की सीख न सीखियो जो गुर से फिर जाय, बिद्या सूं ख़ाली रहे फिर पाछे पछताय

उस व्यक्ति के पद्य-चिंहों पर नहीं चलना चाहिए जो अपने गुरू से ही फिर जाए क्यूँ कि वो कुछ नहीं सीख सकता और पछताता है, बुरे के पीछे नहीं चलना चाहिए

उस नर के भी एक दिन, पड़े गले में फाँद, जिस ने चोरी लूट पर ली कमर बाँध

चोर एक न एक दिन पकड़ा जाएगा, चोरी और लूट करने वाला आदमी बहुत दिनों तक स्वतंत्र नहीं घूम सकता

उस नर को न सीख सुहावे, नेह फंद में जो फँस जावे

प्रेम-फंद में पड़े आदमी को सीख अच्छी नहीं लगती

उस नर से तुम मिलो न कोई, जाको देखो कपटी धोई

कपटी और धोखेबाज़ का साथ नहीं करना चाहिए

उस ने रक्खा इस ने उठाया

दोनों एक दूसरे का समरूप हैं, दोनों एक जैसे हैं (उस मौके़ पर प्रयुक्त जब दो आदमी आदतों और लक्षणों और चरित्र आदि में समान हों)

उस पुरखा की बात पर न भरोसा रख, बर-बर झूट बोले जो दिन भर माँ सो लख

झूठे व्यक्ति पर कभी भरोसा नहीं करना चाहिए अर्थात जो हमेशा ही झूठ बोलता रहा हो उसका विश्वास न करें

उसे तो धोनी भी नहीं आती

शौच के लिए पानी लेना भी नहीं जानता

उसे तो धोती बाँधनी भी नहीं आती

अनभिज्ञ या अनाड़ी है, बड़ा मूर्ख है

उसी रूख पर है चढ़ा उसी की जड़ कटवाय, वो मूरख तो एक दिन गिर दब कर मर जाय

जिस वस्तु पर मनुष्य का गुज़ारा हो यदि उसी को बर्बाद करे तो हानि उठाएगा

उसके देने के हज़ारों हाथ हैं

आजीविका का एक द्वार बंद हो तो ईश्वर सत्तर द्वार खोल देता है, वह किसी न किसी तरह मनुष्य को अवश्य रोटी-रोज़ी पहुँचाता है

उसको सब की फ़िक्र है

ईश्वर सभी का ख़याल रखता है, भगवान सबकी ख़बर लेता है

उस्ताद बैठे पास तो काम आए रास

अगर माहिर-ए-फ़न मौजूद हो तो काम बहुत अच्छा होता है

उत औखद कुछ काम न आवे, मौत पकड़ जी जिस का लेवे

मौत का कोई उपचार नहींं, मौत के आगे छोटे-बड़े किसी की नहीं चलती

उत भी तू मत बैठ पियारे जित बैठे हों बैरी सारे

जहाँ शत्रु हों वहाँ रुकना ठीक नहीं है

उत दाता देवे ऐसे जो ले दाता नाम, इत भी सगरे ठीक हों उस के करतब काम

जो ईश्वर को याद करे ईश्वर उसे ख़ूब देता है और उसके काम संवर जाते हैं

उत मत गेहूँ बुवा रे चेले, जित हों थाल और पाथर ढेले

जिस ज़मीन में पत्थर और ढेले हों वहाँ गेहूँ नहीं बोना चाहिए

उत मत कभी न जा रे मीता, जित रहता हो सिंह और चीता

जहाँ अत्याचारी एवं निर्दयी रहते हों वहाँ नहीं जाना चाहिए

उत मत रो अपना दुख जा कर जित आवें बैरी उमड कर

शत्रु के आगे अपना दुख प्रकट नहीं करना चाहिए

उत से अंधा आए इत से अंधा जाए, अंधे से अंधा मिला कौन बताए राह

जहाँ दोनों ही अंधे हों तो रास्ता कौन बताए अर्थात जहाँ सब अनपढ़ या अनभिज्ञ हों वहाँ कौन किसी कि दिशा-निर्देश करे

उत तेरा जाना निपट भलेरा, जित होवे तेरे मीत का ढेरा

मित्र के घर जाना अच्छा है, जहाँ तेरे मित्र का घर है वहाँ तेरा जाना अच्छा है अर्थात मनुष्य को मित्रों से मिलना चाहिए

उत तू बुवा बाजरा भाई, जित होवे थल की मुकताई

ख़ूब जुती हुई भुरभुरी ज़मीन में ही बाजरा बोना चाहिए

उतार ली मुँह को लोई तो क्या करेगा कोई

बेशर्म सब कुछ कर सकता है, लज्जाहीन से कोई बात दूर नहीं

उतावला सो बावला, धीरा सो गंभीरा

जल्दी करने वाला मूर्ख होता है एवं धीरे काम करने वाला बुद्धिमान, जल्दबाज़ी अच्छी नहीं है

उतर गई लोई तो क्या करेगा कोई

मनुष्य निर्लज्जता चुन ले या निर्लज्ज हो जाए तो किसी का डर नहीं रहता, जब इज़्ज़त उतर जाती है या अपमानित हो जाता है तो मनुष्य निडर हो जाता है, धृष्ट या निर्लज्ज आदमी का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, लज्जाहीन व्यक्ति को किसी की परवाह नहीं होती

उतरती नदी किनारे ढाए

जब आदमी का कुछ बस नहीं चलता तो ग़रीब को सताता है

उठ गए न जानिए जो टट्टी दे गए बाड़

जो द्वार पर ताला लगाकर चले गए हों उन्हें मरा नहीं समझ लेना चाहिए, यदि वापस न आना होता तो खुला छोड़ जाते

उठ जा तड़के उठ रे भाई, जित तन्ने देखी लाभ भलाई

जहाँ लाभ हो वहाँ अवश्य जाना चाहिए

उठा बबूला प्रेम का तिन का चढ़ा अकास, तिन का तिन में मिल गया तिन का तिन के पास

आत्मा के संबंध में कहा गया है कि मरने पर देह पंचतत्वों में मिल जाती है और आत्मा ईश्वर में जाकर लीन हो जाती है

उठाओ बी बी मखना घर संभालो अपना

श्रम दूर करो और काम काज अपने हाथ में लो (इस मौक़ा पर कहते हैं जब कोई झिझक की वजह से घर वग़ैरा का इंतिज़ाम ना कर पाए)

उठाओ कूँडा कुंबे का कुंबा भौंडा

इस मौक़ा पर बोलते हैं जब किसी टोली के लोगों में कोई बुराई यकसाँ तौर से पाई जाये

उठाओ मेरा मकना घर संभालूँ अपना

रो'ब जमाना, कोई विवाहित स्त्री ससुराल में आते ही कह रही है कि हटाओ मेरा यह परदा मैं अपना घर संभालूँगी

उथल रकाबी फैला भात, लो पंचो हाथों हात

अच्छी चीज़ के लिए में देर नहीं लगानी चाहिए वर्ना कोई और ले जाएगा

उठते ही टाँग टूटी

कार्यारंभ में ही विघ्न अर्थात आरंभ ही में घाटा हुआ, दुर्भाग्य आरंभ में ही प्रकट हो गया

उठते जूती बैठते लात

हर समय कठोर और अपमानजनक उपचार से पेश आना, हर समय डाँट डपट करना फटकारना

उतरा घाटी हुआ माटी

जो चीज़ गले के नीचे उतर गई मिट्टी हो गई अर्थात स्वाद केवल जीभ तक होता है, गले के नीचे उतरने के बाद अच्छा स्वाद और बुरा स्वाद बराबर है

उतरा पातर, मैं मियाँ तू चाकर

लड़कों के खेल की एक तुकबंदी, अपने ऊपर चढ़ी हुई दाँव को चुका देने पर इसका प्रयोग करते हैं

उतरा शहना मर्दक नाम

पद से अलग हुआ कोतवाल नामर्द कहलाने लगता है अर्थात लोगों की नज़रों से गिर जाता है

उतरी घाटी हुई माटी

रुक : उतरा घाटई हुआ माटी

उतरी खली बल्दियों जोग

(लफ़ज़न) ख़राब खुली घोसी के काम आई है, गाय भैंस की ग़िज़ा होती है, (मुरादन) नाक़िस, ख़राब और इस्तिमाल शूदा चीज़ को कोई आदमी नहीं पूछता बेक़दर हो जाती है

उत्तम गाना, मद्धम बजाना

हर काम में मध्यम मार्ग को ही अपनाना चाहिए, बीच का रास्ता सबसे अच्छा और सबसे सुंदर रास्ता है

उत्तम खेती मद्धम बान निखद चाकरी भीक नदान

सब से ऊंचा पेशा काशतकारी है इस के बाद व्यपार और नौकरी और भीक सब से आख़िर में

उत्तम खेती मद्धम बान निखद चाकरी भीक नदार

सब से ऊंचा पेशा काशतकारी है इस के बाद व्यपार और नौकरी और भीक सब से आख़िर में

उत्तम से उत्तम मिले, मिले नीच से नीच, पानी से पानी मिले और कीच से कीच

जो जैसा होता है वह वैसे व्यक्ति की ही संगत करता है, जो जैसा होता है वैसे के पास जाता है

उत्तर जाव कि दक्खन वही कर्म के लच्छन

तक़दीर साथ ना दे तो सफ़र वसीला ज़फ़र नहीं होता, चाहे कहीं जाऐ कहीं रहो बदनसीबी पर अब्र साथ लगी रहती है

उत्तर जाव कि दक्खन वही कर्म के लक्खन

तक़दीर साथ ना दे तो सफ़र वसीला ज़फ़र नहीं होता, चाहे कहीं जाऐ कहीं रहो बदनसीबी पर अब्र साथ लगी रहती है

उत्थल रकाबी फैला भात, लो पंचो हाथों हात

अच्छी चीज़ के लिए में देर नहीं लगानी चाहिए वर्ना कोई और ले जाएगा

ऊँच नीच में बोई क्यारी, जो उप्जे सो भई हमारी

अगर ऊँची नीची धरती में फ़सल बोओगे तो बहुत कम लाभ होगा

ऊँचे का गिरा तो सँभल सकता है, नज़रों का गिरा नहीं सँभलता

हाथ पांव टूट जाये तो ईलाज से ठीक ठाक होसकता है लेकिन इज़्ज़त पर हर्फ़ आजाए तो इस का कुछ ईलाज नहीं

ऊँचे से गिरा तो सँभल सकता है, नज़रों से गिरा नहीं सँभलता

हाथ पांव टूट जाये तो ईलाज से ठीक ठाक होसकता है लेकिन इज़्ज़त पर हर्फ़ आजाए तो इस का कुछ ईलाज नहीं

ऊँची दुकान फीका पकवान

दूकान की तड़क-भड़क तो बहुत परंतु मिठाई मिष्ठता शून्य

ऊँचो ऊँचो सब चलें नीचो चले न कोय, तुलसी नीचो वो चले जो गर्ब से ऊँचो होय

जिस में घमंड का अंश नहीं उसके अतिरिक्त कोई शांतिपूर्ण तरीक़े से नहीं रह सकता

ऊँघने को ठेलते का बहाना

काम करने को ख़ुद जी नहीं चाहता था दूसरे के मना करने को बहाना बना लिया, काम पर ख़ुद आमादा थे दूसरे ने जो ताईद की तो उसी को हीला क़रार दे लिया, किसी काम की ख़ाहिश पर दूसरे की ताईद या सहारा

ऊँघता जाए सोए की ख़बर लाए

लक्षण से मालूम हो जाता है कि अंजाम या परिणाम क्या होगा

ऊँघते को सो जाते कुछ देर नहीं

जिस बात के कारण उपस्थित हैं उसको अस्तित्व में आने में क्या समय लगता है

ऊँघते को सो जाते क्या देर

जिस बात के सामान मौजूद हैं उसको वजूद में आते क्या देर लगती है

ऊँघते को ठेलते का बहाना

काम करने को स्वयं ही जी नहीं चाहता था दूसरे के मना करने को कसी प्रकार बहाना बना लिया, काम पर स्वयं तैयार थे दूसरे ने जैसे ही समर्थन किया तो उसे किसी प्रकार बहाना बना लिया, किसी काम की इच्छा पर दूसरे का समर्थन या सहारा

ऊँट बराबर डील बढ़ाया पापोश बराबर 'अक़्ल न आई

इतने बड़े हो गए मगर अक़्ल ज़रा नहीं आई

ऊँट बुड्ढा हो गया पर मूतना न आया

सयाने आदमी को काम का शऊर न होना

ऊँट चढ़े कुत्ता काटे

उस जगह भी प्रयुक्त जहाँ कोई व्यक्ति सुरक्षित स्थान पर होने के बाद भी डरे

ऊँट दाग़े जाते थे मक्कड़ ने टाँग फैलाई कि मुझे भी दाग़ो

उच्च को देख कर निम्न भी उनकी रेस करने लगे

ऊँट दग़ते थे मक्कड़ भी दग़ने आए

उच्च को देख कर निम्न भी उनकी रेस करने लगे

ऊँट फ़रिश्ते की ज़ात है

ऊंट कई कई दिन तक भूका रहता है, बड़ा धैर्यवान और आत्मसंतोषी जानवर है

ऊँट जब भागता है तो पच्छिम को

हर वस्तु अपने मूल आधार की तरफ़ पलटती है

ऊँट जब पहाड़ के नीचे आता है तो आप को समझता है

अपने से अधिक बलशाली का मुक़ाबला होने पर अपनी वास्तविकता खुलती है, घमंडी व्यक्ति अपने से अधिक बलशाली के आगे ठीक हो जाता है

ऊँट जब पहाड़ के नीचे आता है तो बलबलाना भूल जाता है

अपने से अधिक बलशाली का मुक़ाबला होने पर अपनी वास्तविकता खुलती है, घमंडी व्यक्ति अपने से अधिक बलशाली के आगे ठीक हो जाता है

ऊँट का पाद न ज़मीन का न आसमान का

जिस व्यक्ति के व्यवहार में गंभीरता न हो उसकी या मूर्ख की बात का कोई असर नहीं होता

ऊँट के गले में घंटाल

एक लाभदायक काम के साथ दूसरा हानिकारक काम अनिवार्य होने के अवसर पर प्रयुक्त

ऊँट के गले में मियाना

अनहोनी बात, आश्चर्यजनक और अद्भुत बात या वस्तु के संबंध में बोलते हैं

ऊँट के मुँह में ज़ीरा

जब ज़्यादा चीज़ के ज़रूरतमंद को ज़रूरत से बहुत कम चीज़ दी जाए

ऊँट की चोरी निहोरे निहोरे

ऐसी जगह प्रयुक्त जहाँ कोई बुराई करके छुपाना चाहता हो जो छुप न सकती हो

ऊँट की चोरी, सर पर खेलना

कोई बड़ी चोरी छिपती नहीं

ऊँट की दाढ़ में ज़ीरा

ऊंट के मुंह में ज़ीरा, बड़े पेट वाले को थोड़ी सी चीज़ खाने को देना, किसी चीज़ का ज़रूरत से कम होना

ऊँट की कोई कल सीधी नहीं

शुरू शुरू मक़ासिद तक अपने क़लम से लिखे लेकिन ऊंट की कोई कल सीधी नहीं

ऊँट की पकड़, कुत्ते की झपट

दोनों नहीं रुक सकते, यह दोनों ही ख़तरनाक होते हैं

ऊँट किस पहलू बैठे

देखें अंत में क्या होता है

ऊँट किस पहलू बैठता है

ऐसे मामले के संबंध में प्रयुक्त जिसके परिणाम का ज्ञान न हो

ऊँट लद्दे बेगारी

उस अवसर पर प्रयुक्त जहाँ कोई काम चाहे न चाहे बिना उजरत मज़दूरी करना पड़े

ऊँट मक्के ही को भागता है

हर एक अपने मूल में लौटता है, ऊँट जब भागता है तो पच्छिम को

ऊँट मरा कपड़े के सर

मरे हुए ऊँट की क़ीमत अर्थात मूल्य उस पर लाए हुए माल में से निकाली जाती है अर्थात माल को महंगा बेच कर हानि को पूरा किया जाता है

ऊँट ने न पादा न पादा पादा तो फुस

शालीनता के वचन के बाद भी मूर्खतापूर्ण बातें कर बैठा (उस व्यक्ति के लिए प्रयुक्त जिसे बहुत गंभीर और बुद्धिमान माना जाता हो लेकिन बोलने या कार्य करने पर पता चले कि मूर्ख है

ऊँट रे ऊँट तेरी कौन सी कल सीधी

बेढंगे आदमी या उस काम के लिए व्यंग के रूप में प्रयुक्त जो किसी प्रकार ठीक न हो

ऊँट सा क़द बढ़ा लिया पर शु'ऊर ज़रा नहीं

शरीर इतना लंबा परंतु बुद्धि तनिक भी नहीं

ऊंट सस्ता है पट्टा महंगा है

काम साधारण है मज़दूरी अधिक है, लाभ के साथ एक आपत्ति लगी हुई है

ऊँट से बड़े नाम छोटे ख़ाँ

देखने में छोटा है मगर बड़े बड़ों के कान काटता है, बाहर से भोला भाला है अंदर से शैतान

ऊजड़ नगरी सूना देस

उस स्थान के बारे में बोलते हैं जो निर्जन और उजाड़ हो, तबाह और बर्बाद देश या शहर आदि

ऊख से गंडेरी प्यारी गुड़ से प्यारा गाँडा, माँ बहन से जोरू प्यारी जिस से होय गुज़ारा

साधारण सी बात को कहावत के तौर पर बयान किया गया है अर्थात गन्ने से गंडेरी भली लगती है एवं गुड़ की तुलना में गन्ना अधिक अच्छा लगता है, माँ एवं बहन से अधिक पत्नी प्रिय होती है क्यूँकि उस से घर बसता है

ऊल में चूल, दही में मूसल

चलते चलाते काम में रोड़ा अटकाना, सच्ची बात में रुकावट

ऊपर छाएँ माँझा, भीतर पिलाएँ गाँजा

ज़ाहिरदारी में अच्छी तरह मिलते जुलते हैं और बातिन में ईज़ा पहुंचाते हैं

ऊपर का धड़ भाई और नीचे का अलख़ुदाई

जो ऊपर से भाई जैसा व्यवहार करे, पर मन में क्या है, ईश्वर ही जाने

ऊपर से राम राम, भीतर क़साई का काम

देखने में बड़ा भला परंतु करतूतें बहुत बुरी, दिखावे में दयालु भीतर से निर्दयी, दिखावे में बहुत संयमी परंतु वास्तव में बहुत क्रूर कपटी और धूर्त

ऊसर खेत में केसर

अयोग्य के बीच योग्य का होना, बुरे लोगों के बीच अच्छे व्यक्ति का होना, कुरूप लोगों के बीच एक सुंदर का होना

ऊत गए न जानिये दे गए बाड़

जिस के घर ढनखर लग गए कोई ना रहा और जो शख़्स अपने बुज़ुर्गों के ख़िलाफ़ बदचलन और बदअतवार हुआ वही ओत है

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