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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

वा नारी को मत कोढ़ बताओ, जा सों दिन दिन लाखा पाओ

जिस से फ़ायदा हो इस से बुरा बरताओ मत करो

वाए बर जान-ए-सुख़न गर ब सुख़न-दाँ न रसद

(फ़ारसी मिसरा बतौर कहावत उर्दू में मुस्तामल) कलाम अगर कलाम के पहचानने वाले तक ना पहुंचे तो इस के हाल पर अफ़सोस है

वा'दा आसान है वा'दे की वफ़ा मुश्किल है

वचन देना आसान है पर उसका निभाना कठिन है

वा'दा कम न ज़ियादा

रुक : वाअदे से दम ज़्यादा ना कम

वा'दा-ए-वस्ल चूँ शवद नज़दीक आतिश-ए-शौक़ तेज़-तर गर्दद

(फ़ारसी का कथन कहावत के रूप में प्रयुक्त) मिलन का वादा जितना निकट आता जाता है लालसा की ज्वाला उतनी ही तेज़ होती जाती है

वा'दा-ख़िलाफ़ी बुरी बात है

کسی کو وعدہ پورا کرنے کے لئے کہنا ہو تو یہ فقرہ کہتے ہیں

वा'दे से दम ज़्यादा न कम

मौत का वक़्त मुक़र्रर है, मौत मुअय्यना वक़्त ही पर आती है, मौत टाले नहीं टलती, मोतबर हक़ है

वाह बीवी तेरी चतुराई, देखा मूसा कहे बिलाई

वाह बीवी तेरी चालाकी भी देख ली कि चूहा देख कर बिल्ली बताती है

वाह मियाँ बाँके तेरे दगले में सौ सौ टाँके

बे सर-ओ-सामान बांके की निसबत कहते हैं , बेसर-ओ-सामानी पर शेखी

वाह मियाँ बाँके तेरे गले में सौ सौ टाँके

बे सर-ओ-सामान बांके की निसबत कहते हैं , बेसर-ओ-सामानी पर शेखी

वाह मियाँ काले ख़ूब रंग निकाले

ख़ूब चालाकियाँ दिखाईं, ख़ूब मक्कारी की

वाह मियाँ नाक वाले

सम्मानित व्यक्ति कोई घटिया काम करे तो व्यंग में कहते हैं

वाह पुरखा तेरी चतुराई, चून बेच कर गाजर खाई

हे मनुष्य तेरी होशियारी भी देख ली है कि तूने आटा बेच कर गाजरें ख़रीद ली हैं

वाह पुरखा तेरी चतुराई, माँगा गुड़ और ला दी खटाई

उलट पलट काम करने वाले के प्रति व्यंग में कहते हैं

वाह रे गिलहरी क्या ख़ूब रंग लाई

हक़ीर चीज़ के मोस्सर या कारआमद होने के मौके़ पर कहते हैं

वार-ए-मर्दां ख़ाली न बाशद

मर्दों का वार ख़ाली नहीं जाता, जवाँ मर्दों की ज़रब या हर्बा ख़ाली नहीं जाता, मर्दों का वार चूकता नहीं, कुछ ना कुछ असर करता है

वहाँ फ़रिश्तों के भी पर जलते हैं

इस जगह किसी की पहुँच नहीं है, यहाँ परिंदा पर नहीं मार सकता, बड़े विनीत व्यवहार एवं शिष्टता की जगह है

वहाँ गर्दन मारिये जहाँ पानी न मिले

(संकेतात्मक) बहुत ही कठोर दंड देना चाहिए, किसी व्यक्ति के अपराध को सुनकर लोग सुझाव के रूप में कहते हैं

वहाँ लटका के मारे जहाँ पानी न मिले

रुक : वहां गर्दन मारीए अलख

वहाँ तक गुदगुदाइये जहाँ तक दूसरा रो न दे

इतना मज़ाक़ होना चाहिए जिस से दूसरा तंग ना आ जाये, वहां तक हनसईए जो रो ना दे

वहाँ तक हँसाइए जो रो न दे

रुक : वहां तक गदगदईए अलख

वहाँ तक हँसिये जो न रोए

हद से ज़्यादा नहीं हंसना चाहिए

वहाँ तक हँसिये जो रो न दे

हंसी ठट्ठा वहीं तक बेहतर है जहां तक फ़साद ना हो जाये

वहाँ उस के घर बसंत है , यहाँ मेरे घर बसंत

में इस के घर जाना नहीं चाहता, अगर इस को यहां आने में उज़्र है तो मुझे भी उज़्र है

वही अपना जो अपने काम आए

जिस से मतलब निकले वह सगे एवं स्वजन अथवा अपनों के बराबर है, जो अपनी सहायता करे वही प्यारा है

वही बड़ा जगत में जिन करनी के तान, कर लेना है अपना महाराज भगवान

وہ دنیا میں بڑا آدمی ہے جس نے نیک کام کر کے خدا کو اپنا کر لیا

वही भला है मेरे लेखे हक़ नाहक़ को जो नर देखे

मेरे नज़दीक वो बड़ा आदमी है जो इंसाफ़ करे और बे इंसाफ़ी ना करे

वही हम हैं वही तुम हो

हम तुम एक दूसरे के क़दीमी वाक़िफ़ कार हैं, हम तुम एक जैसे हैं, हम में और तुम में कोई फ़र्क़ नहीं, जो हम हैं वही तुम इस लिए आपस में लड़ना झगड़ना नहीं चाहिए नीज़ हम दोनों में से कोई नहीं बदला है

वही होगा जो क़िस्मत का लिखा है

नविश्ता-ए-क़ुदरत पूरा हो कर रहता है

वही कासा वही आश

फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रचलित, वह पिछली परिस्थिती जिसमें कोई अंतर न आया हो

वही मानस दे सके राजों को सीख ज्ञान जो ना राखे लाभ धन और धरे हाथ पर जान

राजों को मश्वरा वही दे सकता है जिसे दौलत का लालच ना हो और जान की पर्वा ना करे

वही मन , वही चालीस सेर

मतलब एक ही है चाहे जैसे समझ लो, नतीजा दोनों का एक ही है

वही मियाँ चूल्हा फूँकें , वही मियाँ दरबारी

वो शख़्स जिसे आला-ओ-अदना सब काम करने पढ़ें

वही मियाँ दरबार वही चूल्हा झोंकने को

अपने काम आला अदना सब तरह के करने पड़ते हैं, ऐसे मौके़ पर मुस्तामल जब किसी शख़्स को अपने सारे छोटे बड़े काम ख़ुद ही करने पढ़ें

वही मियाँ दरबार वही चूल्हा फूँकने को

अपने काम आला अदना सब तरह के करने पड़ते हैं, ऐसे मौके़ पर मुस्तामल जब किसी शख़्स को अपने सारे छोटे बड़े काम ख़ुद ही करने पढ़ें

वही मोची के मोची

ग़रीब के ग़रीब ही रहे, हालात में कोई बेहतरी नहीं आई, ख़ुद को बिलकुल नहीं बदलते

वही पड़ोसन भावें जो दोनों पल्ले बचावें

दोनों फ़रीक़ों से मिला रहना और किसी का बुरा ना होना

वही फूल जो महेसर चढ़े

रुक: फूल वही जो महेश चढ़े, तदबीर वही ठीक जो काम आए

वही फूल जो महेश चढ़ें

रुक: फूल वही जो महेश चढ़े, तदबीर वही ठीक जो काम आए

वही तीन बीसी , वही साठ

नतीजा दोनों का एक ही है, चाहे यूं कहो और चाहे वों, बात एक ही है, एक ही बात है, एक ही हक़ीक़त है

वही तो गंगा जिस में कसेर

अगर वो शरीफ़ होता तो ऐसे बुरे काम ना करता

वही ज़मीन से उगता है जो बोते हैं

जैसा करोगे वैसा भरोगे, जो बोओ गे वो काटोगे

वहम का 'इलाज हकीम लुक़्मान के पास भी नहीं

वहम का कोई ईलाज नहीं, वहम ला इलाज बीमारी है

वहम की दारू ही नहीं

भ्रम का कोई इलाज नहीं है, भ्रम दवाओं से दूर नहीं होता

वहम की दारू लुक़्मान के पास नहीं

वहम की दवा लुक़्मान जैसा हकीम भी नहीं कर सकता, वहम का कुछ ईलाज नहीं

वहम की दारू मौत है

वहम अर्थात भरम का कोई 'इलाज नहीं, भरम के दूर करने का कोई उपाय नहीं

वहम की दवा लुक़्मान के पास भी नहीं

वहम की दवा लुक़्मान जैसा हकीम भी नहीं कर सकता, वहम का कुछ ईलाज नहीं

वैसा ही तो को फल मिले जैसा बीज बोवाए, नीम बोय के निकले गाँडा कोई न खाए

जैसा बीज बोओगे वैसा ही फल मिलेगा, नीम बोकर ईख कोई नहीं खाता है

वकीलों का हाथ पराई जेब में

वकील बिना फ़ीस लिए किसी का काम नहीं करते

वली हो कर शैतान का काम

शरीफ़ और भले हो कर दुष्ट और पापी लोगों की तरह हरकतें करना, नेक हो कर बुरों के जैसा काम करना

वली को वली ख़ूब पहचानता हे

हर आदमी अपनी तरह के आदमी को ख़ूब जानता है

वली सब का अल्लाह है हम तो रखवाले हैं

सब का मालिक ईश्वर है हम तो मात्र रखवाले हैं

वक़्त आया हुआ नहीं टलता

मौत के समय में लेट-सवेर नहीं होती

वक़्त गुज़र जाता है लेकिन बात रह जाती है

मुसीबत का समय हमेशा नहीं रहता लेकिन दोस्त दुश्मन की पहचान हो जाती है, किसी का कोई काम नहीं रुकता लेकिन न करने वाले की बात दिल को लग जाती है

वक़्त गुज़रे पीछे 'अक़्ल आती है

काम बिगड़ने के बाद उपाय समझ में आता है

वक़्त का ग़ुलाम और वक़्त ही का बादशाह

अवसर के अनुसार काम करना चाहिए

वक़्त का रोना बे-वक़्त की हँसी से अच्छा

हर एक बात के मौके़ और वक़्त का लिहाज़ ज़रूरी है, हर बात अपने अपने अवसर पर शोभा देती है

वक़्त के बादशाह हैं

۔निहायत बेफ़िकर और बेग़म हैं २।हाकिम-ए-वक़त हैं। इन के बहुत इख़्तयारात हैं। ये बहुत कुछ करसकते हैं

वक़्त की ख़ूबी

समय का घूम-घुमावट है, ज़माने का चक्कर है, दुर्भाग्य का प्रभाव है, बुरे दिन आने की वजह से परेशानी उठानी पड़ रही है

वक़्त की ख़ूबी है

समय का प्रभाव है व्यंग में कहते हैं

वक़्त को ग़नीमत जानिए

अवसर को नहीं गँवाना चाहिए, समय की क़द्र करनी चाहिए, अवसर पर काम कर लेना चाहिए, समय को अनमोल समझना चाहिए

वक़्त नहीं रहता बात रह जाती है

मौक़ा निकल जाता है और गिला-शिकवा रह जाती है, काम निकल जाता है मगर जो मुसीबत के वक़्त मदद न करे उस की बेवफ़ाई और साथ न देना याद रहता है

वक़्त निकल जाता है बात रह जाती है

किसी का काम नहीं रुकता परंतु मुसीबत के वक़्त जो काम न आए उसके बुरे व्यवहार या असहयोग की शिकायत रह जाती है

वक़्त पड़े पर गधे को बाप बना लेते हैं

लाचारी में अदना से अदना की ख़ुशामद करनी पड़ती है (मजबूरी के मौके़ पर बोलते हैं

वक़्त पड़े पर गधे को बाप बना लिया जाता है

लाचारी में अदना से अदना की ख़ुशामद करनी पड़ती है (मजबूरी के मौके़ पर बोलते हैं

वक़्त पड़े पर जानिए को बैरी को मीत

मुसीबत के वक़्त पहचान होती है कि कौन दुश्मन है कौन दोस्त

वक़्त पड़ने पर गधे को बाप बनाते हैं

परेशानी या लाचारी की हालत में अदना लोगों की भी ख़ुशामद करनी पड़ती है

वक़्त पर भाग जाना ही मर्दांगी है

समय के अनुसार ही काम करना निष्ठा और निपुणता है

वक़्त पर भाग जाना मर्दानगी नहीं है

जब लड़ना चाहिए तब भाग जाना बहादुरी नहीं

वक़्त पर गाँठ का पैसा ही काम आता है

आवश्यकता पड़ने पर कोई नहीं देता अर्थात कोई सहायता नहीं करता

वक़्त पर गधे को बाप बनाते हैं

संकट या आवश्यकता के समय नीच और घटिया आदमी की भी चापलूसी करनी पड़ती है

वक़्त पर जो हो जाए सो ठीक है

सही समय पर जैसा भी काम हो जाए ठीक है, यह बड़ी बात है कि कुछ न कुछ हो गया

वक़्त पर कोई काम नहीं आता

संकट और परेशानी के समय कोई मदद नहीं करता

वक़्त पर कुछ बन नहीं आता

विपत्ति में अक़्ल काम नहीं करती

वक़्त पर रोना बे वक़्त की हँसी से अच्छा होता है

हर बात अपने समय एवं स्थान पर अच्छी होती है

वक़्त पर सब कुछ करना पड़ता है

जब मौक़ा आ जाए और ज़रूरत पड़ जाए तो जो कुछ हो सकता हो करना चाहिए, मजबूरी में हर काम करना ही पड़ता है

वक़्त सब कुछ करा लेता है

मजबूरी के अवसर पर बोलते हैं

वक़्त टल जाता है बात रह जाती है

वक़्त तो गुज़र जाता है मगर शिष्टाचार याद रहता है

वक़्त वक़्त का राग है

जैसी परिस्थिति हो वैसी ही बात मुनासिब होती है

वक़्त वक़्त की बात है

स्थितियाँ बदलती रहती हैं, समय का संयोग है, अच्छे और बुरे समय आते-जाते रहते हैं, (किसी बड़े बदलाव के अवसर पर या आम तौर पर बुरे समय में कहते हैं)

वक़्त वक़्त की रागनी

जैसा अवसर वैसी ही बात उचित होती है, हर समय हर काम के लिए उचित नहीं होता

वक़्त-ए-पीरी शबाब की बातें, ऐसी हैं जैसे ख़्वाब की बातें

बुढ़ापे के ज़माने में जवानी की बातें ख़्वाब की बातें मालूम होती हैं यानी अविश्वसनीय मालूम होती हैं

वक़्त-वक़्त का राग अच्छा होता है

हर चीज़ अपनी परिस्थिति और जगह के हिसाब से अच्छी होती है

वर्सा चीज़े दीगर अस्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) विरसा और ही चीज़ है यानी विरसा मुफ़्त में हाथ आया माल है

वसीला बड़ी चीज़ है

साधन या माध्यम से हर काम हो जाता है, साधन या माध्यम बहुत महत्वपूर्ण है, पहुँच से काम बन जाता है

वसीले बिना रोज़गार नहीं मिलता

बिना सिफ़ारिश के नौकरी नहीं मिलती

वही आश-दर-कासा

फ़ारसी कहावत उर्दू में प्रचलित, वो पिछली परिस्थिती जिसमें कोई अंतर न आया हो

वज़ीरे चुनीं शहरयारे चुनाँ

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जैसा बादशाह वैसा वज़ीर, जैसा अफ़्सर वैसे ही मातहत, दोनों बुरे, अमीर और मातहत दोनों नालायक़

वेद में लबेद है

सलाह सख़्ती से अप्रिय लगती है

वित्र के आगे सज्दा नहीं

हर वस्तु की एक सीमा होती है, उससे आगे नहीं बढ़ना चाहिए (किसी वस्तु या क्रिया के असीमित करने के अवसर पर प्रयुक्त)

वो बाल खींचूँ कि जिस की जड़ दूर हो

सारे छुपे छुपाए दोष प्रकट कर दूँ, सारी दुनिया में अपमान का माध्यम एवं तिरस्कीर एवं अपयश का कारण बनूँ

वो बात कहाँ मौलवी मदन की सी

(साहित्य) साधारणतया उस समय प्रयुक्त जब यह कहना हो कि वह विशेष बात या प्रभाव नहीं है जो किसी और की बात में है

वो भी देखा ये भी देख, इन नैनन का यही परेख

समय एवं काल-चक्र एक जैसे नहीं रहते बुरा समय भी आता है, जब अच्छा समय देखा तो बुरा समय भी धैर्य से व्यतीत करो

वो भुस पे छाई दोनों मिल ख़ाक उड़ाई

दोनों अयोग्य लोगों ने मिल कर काम ख़राब किया

वो बिल्ली पोच के चलते हैं

अंध विश्वासी आदमी के लिए कहा जाता है, हिन्दुओं का ख़्याल है कि बिल्ली में ब्राह्मण की आत्मा होती है

वो दड़बा ही जल गया

वह अवसर ही जाता रहा अर्थात वह मामला ठंडा पड़ गया

वो डाल डाल तो हम पात पात

वह अपने स्थान पर हम अपने, उनका अपना ख़्याल है और हमारा अपना, अपनी अपनी राय

वो डाल डाल तो मैं पात पात

वह अपने स्थान पर हम अपने, उनका अपना ख़्याल है और हमारा अपना, अपनी अपनी राय

वो डरबा ही जल गया

वहाँ से अब किसी बात की आस नहीं, उसकी बुनियाद को ध्वस्त कर दिया, वह अवसर ही जाता रहा

वो दिन डुब्बा कि घोड़ी चढ़ा कुब्बा

जिस दिन यह दोषयुक्त व्यक्ति घोड़ी चढ़ेगा वह दिन विनाश या तबाही का होगा

वो दिन गए जब ख़लील ख़ाँ फ़ाख़्ता मारा करते थे

भाग्यशाली एवं ख़ुशहाली का ज़माना गुज़र गया

वो दिन गए जो भैंस पकौड़े हगती थी

उस व्यक्ति के लिए कहते हैं जिसने बेकार में ख़र्च करना छोड़ दिया हो, बेकार में ख़र्च करने का ज़माना बीत गया

वो दिन गुज़र गए कि पसीना गुलाब था

अर्थात हमारे वैभव का समय अब नहीं रहा, पहले हमारे पसीने को भी गुलाब समझा जाता था,अब वह बात कहाँ

वो डूबें मंजधार जिन पर भारी बोझ

जिस के पास कुछ है ही नहीं उससे किया लिया जाए एवं जो व्यक्ति अपनी हैसियत से बढ़ कर कोई काम करेगा वो अवश्य तबाह होगा

वो गुड़ नहीं जो च्यूँटे खाएँ

उनकी मालदारी से किसी को लाभ नहीं पहुँचता

वो गुड़ नहीं जो च्यूँटियाँ खाएँ

तुम मुझे धोखा नहीं दे सकते

वो गुड़ नहीं जो मक्खी बैठे

उनकी मालदारी से किसी को लाभ नहीं पहुँचता

वो कम्बल ही गए जिसमें तिल बँधते थे

अब वह वस्तु ही नहीं जिसके कारण से लोग मुतवज्जा होते थे

वो कमली ही जाती रही जिसमें तिल बँधते थे

अवसर निकल जाने पर जब कोई किसी चीज़ की माँग करे तब कहते हैं

वो कौन सी किश्मिश है जिस में तिनका नहीं

कुछ न कुछ दोष हर चीज़ में होता है

वो कौन सी पत्री जो हम से छुप रही

वह कौन सा घर है जो हम से छुपा है तात्पर्य यह कि तुम हमें क्या सिखाते हो हम सब जानते हैं

वो कीमिया-गर कैसा जो माँगे पैसा

धोखेबाज़ के लिए बोलते हैं कि यह धोकेबाज़ है नहीं तो गुणवान के पास तो पैसा की क्या कमी जो वह पैसे माँगे

वो कोदों दे कर पढ़ा है

उसे पढ़ना लिखना बिलकुल नहीं आता, वह मुफ़्त में पढ़ा है, गुरू की अच्छी तरह सेवा नहीं की इस लिए ठीक से नहीं पढ़ सकता, अयोग्य है, उसकी शिक्षा अधूरी है, नाम को पढ़ा हुआ है

वो कोदों दे के पढ़ा है

उसे पढ़ना लिखना बिलकुल नहीं आता, वह मुफ़्त में पढ़ा है, गुरू की अच्छी तरह सेवा नहीं की इस लिए ठीक से नहीं पढ़ सकता, अयोग्य है, उसकी शिक्षा अधूरी है, नाम को पढ़ा हुआ है

वो क्या मेरी ख़ाला की ख़ल बच्ची है

(व्यंगात्मक) मेरा उसका कोई संबंध नहीं है

वो महफ़िल हैरान जहाँ पान न-बाशद

(डोमुनियाँ पैसे माँगते समय बोलती थीं) वह महफ़िल महफ़िल ही नहीं है जहाँ पान से सत्कार न हो

वो मंढी ही जाती रही जहाँ अतीत रहते थे

वह समय ही अब जाता रहा, ऐसे मृत पुरुष की याद में कहते हैं जो अपने जीवन काल में बहुत उदार रहा हो और जिसके निकट अनेक लोगों को बराबर आश्रय मिलता रहा हो

वो मर गए हम को मरना है

परिणाम स्वरूप हर एक को मरना है (क़सम के रूप में या सत्यता का विश्वास दिलाने के लिए) सबको एक दिन मरना है, मानव नश्वर है (पछतावे के प्रकटन के रूप में)

वो मर गए हमें मरना है

परिणाम स्वरूप हर एक को मरना है (क़सम के रूप में या सत्यता का विश्वास दिलाने के लिए) सबको एक दिन मरना है, मानव नश्वर है (पछतावे के प्रकटन के रूप में)

वो मीरासी हैरान जहाँ बेल नबाशद

मीरासी की नज़र में वह महफ़िल महफ़िल नहीं जहाँ पैसे न हों (डोमनियाँ पैसे माँगते समय कहती थीं)

वो पानी में पहुँचने से पहले ही कपड़े उतार लेता है

(पश्तो कहावत उर्दू में प्रयुक्त)बुद्धिमान व्यक्ति, सतर्क व्यक्ति के बारे में कहा जाता है

वो पानी मुल्तान बह गया

अवसर हाथ से जाता रहा, रात गई बात गई के समान, वह बात अब कोसों दूर गई

वो पानी मुलतान गया

अवसर हाथ से जाता रहा, रात गई बात गई के समान, वह बात अब कोसों दूर गई

वो पानी मुल्तान गया, वो बूँद विलायत गई

वह बात अब नहीं रही और कोसों दूर हो गई, अब इस बात का समय निकल गया

वो फूल ही क्या जो कि महेसर न चढ़े

पारबती देवी की मूर्ती पर चढ़ाया हुआ वह फूल जो उसके सर पर रह जाता था और सबसे ऊँचा गिना जाता था

वो राह तुम्हारी है तो ये राह हमारी

हमारा तुम्हारा कोई संबंध नहीं है बेपर्वाई स्पष्ट करने के लिए प्रयुक्त

वो राह तुम्हारी है तो ये राह हमारी

हमारा तुम्हारा कोई संबंध नहीं, बेपर्वाई स्पष्ट करने के लिए प्रयुक्त

वो राजा मरता भला जिसमें न्याव न हो, मरी भली वो स्त्री लाज न राखे जो

अन्याय करने वाला राजा और निर्लज्ज स्त्री का मर जाना बेहतर है

वो सेर तो हम सवा सेर

यह एक दूसरे से बढ़ कर हैं

वो शाख़ ही न रही जिस पे आशियाना था

वह वस्तु ही शेष न रही जिसके लिए सब आवेश थे, निराशा की स्थिति का प्रकटन

वो सुहागन है जिसे पिया चाहे

जिसे पति या शासक पसंद करे उसकी सब चापलूसी करते हैं

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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