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hierach

हरचा-बाशद

۔(फ) कोई चीज़ क्यों ना हो।

हरचे-बाद-अबाद

कुछ ही क्यों न हो, कुछ ही हो, जो कुछ हो सो हो, जो कुछ हुआ वो हुआ, जो कुछ होगा देखा जाएगा, जो हो सो हो

हर चीज़ कि दर कान नमक रफ़्त नमक शुद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) रुक : हर चह दर कान-ए-नमक अलख

हर च दर कान नमक रफ़्त नमक शुद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो चीज़ नमक की कान में गई नमक होगई, सोहबत का असर हो ही जाता है, नेकों की सोहबत का नेक और बदों की महफ़िल का बद असर होता है (जब कोई आदमी किसी दूसरे आदमी या जमात के रंग में रंग जाता है या किसी मुक़ाम की ख़ुसूसीयात इख़तियार कर लेता है तो कहते हैं

हरिचंदन

एक प्रकार का पीला और अत्यंत सुगंधित चंदन

हर च अज़ ग़ैब मी रसद नेकूस्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो क़ुदरत की तरफ़ से मिले अच्छा ही होता है

हर चे बर ख़रे बाशद मन पालानम

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) चाहे गधे पे कुछ हो में तो पालान हूँ , मुझे हरकिस-ओ-नाक्स से पाला पड़ता है , अपने काम से काम रखना चाहिए (ऐसे मौके़ पर कहा जाता है जब किसी को अपनी मंसबी मजबूरी के सबब ग़लत या हमाक़त का काम करना पड़ता है , जैसे : पालान के ऊपर अच्छा बुरा, क़ीमती सस्ता हर तरह का सामान लदा होता है

हरी-छाल

رک : ہری چھال (کا) کیلا ۔

हर-छुटा

رک : ہر چھٹان ۔

हर चहार तरफ़

चारों तरफ़, हर तरफ़

हरी छाल केला

एक प्रकार का उत्तम केला जो हरा और लंबा होता है

हीरे चुनना

बेहतरीन चीज़ों या महत्वपूर्ण लोगों का चयन करना

हर-छुटान

کھیت کی ہلائی ختم ہونا یا پوری ہوجانا

हर-चंद

यद्यपि, अगरचे

headache

सर-दर्द

हर चंद कि

यद्यपि, हालाँकि, अगरचे

हर चीज़ दरख़शंदा तिला नीस्त

हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती, किसी चीज़ की ज़ाहिरी हालत से धोका नहीं खाना चाहिए

हर च अज़ दोस्त मी रसद नेकूस्त

(فارسی کہاوت اُردو میں مستعمل) جو کچھ بھی دوست سے ملے اچھا ہی ہوتا ہے

huaracho

harchable

headachy

दर्द सर पैदा करने वाला

hurrache

headcheese

सिरी पिए-ए-पनीर

हर च ज़ूद आयद देर न-पायद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो चीज़ जलद आती है वो देर तक नहीं ठहरती , जो काम जल्दी में किया जाये वो देरपा नहीं होता

हर च गुज़श्त गुज़श्त

जो हो गया सौ हो गया

हरचरण

किशन जी या शिव जी के पवित्र पाँव

हर-चे

हर चीज़, जो कुछ

हर च दर देग अस्त दर कफ़्चा मी आयद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो कुछ देग़ में है वो कफ़चे या चमचे में आएगा , जो असलीयत होती है ज़ाहिर होकर रहती है , जो दिल में है वही ज़बान से भी ज़ाहिर होता है

हीरा चाटना

हीरा चाट कर मर जाना, हीरा खाकर आत्महत्या कर लेना, हीरा फाँकना

हीरा चबाना

हीरा खा कर मर जाना, हीरा खा कर ख़ुदकुशी कर लेना

हरी चुगा है

हरीस है , खाने के वास्ते जाबजा फिरता है

हर-आँचा

जो चीज़ ।।

हद्द चिकलना

सीमा लांघना, हद पार करना

हार चढ़ना

हार चढ़ाना (रुक) का लाज़िम

हार चढ़ाना

۔ مقدس بزرگوں کی قبروںپر ہار چڑھاتے ہیں۔؎

हरी-चुग

(शाब्दिक) हरी चीज़ें चुगने वाला

हेड-चपरासी

کسی دفتر یا ادارے میں قاصدوں یا اردلیوں کا سربراہ ۔

हर च गीरीद मुख़्तसर गीरीद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) थोड़ी सी चीज़ पर क़नाअत करो, ज़्यादा की हवस ना करो , वो काम अपने ज़िम्मे लो जो आसानी से कर सको

हरि-चर्चा

conversation about (or investigation of or concerning) Vishṇu, religious conversation

हा-ए-दो-चश्मी

the letter (h) in the Urdu alphabet

हर च अज़ दिल दूर अज़ दीदा दूर

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) रुक : आँख ओझल पहाड़ ओझल

हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती

किसी चीज़ की ज़ाहिरी हालत से धोका नहीं खाना चाहिए

हर च अज़ दिल ख़ेज़द बर दिल रेज़द

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो कुछ दिल से उठता है दिल पर टपकता है , जो बात दिल से निकलती है दिल पर असर करती है

हर च दर दिल फ़रूद आयद दर दीदा निको नमायद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो चीज़ दिल में समा जाती है वो आँख को भली मालूम होती है , जिस चीज़ से हमारे दिल को कुछ लगाओ होता है वो हम को अच्छी मालूम होने लगती है

हर च ब-क़ामत केहतर ब-क़ीमत-ए-बेहतर

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो चीज़ जसामत में कम होती है क़दर-ओ-क़ीमत में ज़्यादा होती है, छोटी चीज़ भी क़ीमती होती है

हर चे ब-ज़ाबान आयद ब-ज़ियाँ आयद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो बात ज़बान से निकलती है वो नुक़्सान भी पहुंचाती है, बात सोच समझ कर करना चाहिए वर्ना बाद में पछताना पड़ता है

हर चंद जामा तंग अस्त जुज़्व-ए-बदन न गर्दद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) कपड़ा कितना ही तंग हो मगर जुज़ो-ए-बदन नहीं होता , ग़ैरों से कैसी ही मुलाक़ात हो वो अपनों के बराबर नहीं हो जाते, ग़ैर जिन्स हमजिंस के बराबर नहीं हो सकता, अपने अपने हैं और ग़ैर ग़ैर

हर च मर्ज़ी-ए-ऊस्त हमा नेकूस्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो कुछ उस की (अल्लाह की) मर्ज़ी वही ठीक है

hierach के लिए उर्दू शब्द

hierach

hierach के देवनागरी में उर्दू अर्थ

संज्ञा

  • पेशवा
  • मज़हबी रहनुमा
  • पैर
  • शेख़
  • मुर्शिद
  • उस्कुफ़-ए-आज़म
  • मज़हबयात में हुक्मरानी करने वाला जैसे बड़ा पादरी, बिशप या मज़हबी रहनुमा

hierach کے اردو معانی

اسم

  • پیشوا
  • مذہبی رہنما
  • پیر
  • شیخ
  • مرشد
  • اسقف اعظم
  • مذہبیات میں حکمرانی کرنے والا جیسے بڑا پادری، بشپ یا مذہبی رہنما

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hierach

हरचा-बाशद

۔(फ) कोई चीज़ क्यों ना हो।

हरचे-बाद-अबाद

कुछ ही क्यों न हो, कुछ ही हो, जो कुछ हो सो हो, जो कुछ हुआ वो हुआ, जो कुछ होगा देखा जाएगा, जो हो सो हो

हर चीज़ कि दर कान नमक रफ़्त नमक शुद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) रुक : हर चह दर कान-ए-नमक अलख

हर च दर कान नमक रफ़्त नमक शुद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो चीज़ नमक की कान में गई नमक होगई, सोहबत का असर हो ही जाता है, नेकों की सोहबत का नेक और बदों की महफ़िल का बद असर होता है (जब कोई आदमी किसी दूसरे आदमी या जमात के रंग में रंग जाता है या किसी मुक़ाम की ख़ुसूसीयात इख़तियार कर लेता है तो कहते हैं

हरिचंदन

एक प्रकार का पीला और अत्यंत सुगंधित चंदन

हर च अज़ ग़ैब मी रसद नेकूस्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो क़ुदरत की तरफ़ से मिले अच्छा ही होता है

हर चे बर ख़रे बाशद मन पालानम

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) चाहे गधे पे कुछ हो में तो पालान हूँ , मुझे हरकिस-ओ-नाक्स से पाला पड़ता है , अपने काम से काम रखना चाहिए (ऐसे मौके़ पर कहा जाता है जब किसी को अपनी मंसबी मजबूरी के सबब ग़लत या हमाक़त का काम करना पड़ता है , जैसे : पालान के ऊपर अच्छा बुरा, क़ीमती सस्ता हर तरह का सामान लदा होता है

हरी-छाल

رک : ہری چھال (کا) کیلا ۔

हर-छुटा

رک : ہر چھٹان ۔

हर चहार तरफ़

चारों तरफ़, हर तरफ़

हरी छाल केला

एक प्रकार का उत्तम केला जो हरा और लंबा होता है

हीरे चुनना

बेहतरीन चीज़ों या महत्वपूर्ण लोगों का चयन करना

हर-छुटान

کھیت کی ہلائی ختم ہونا یا پوری ہوجانا

हर-चंद

यद्यपि, अगरचे

headache

सर-दर्द

हर चंद कि

यद्यपि, हालाँकि, अगरचे

हर चीज़ दरख़शंदा तिला नीस्त

हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती, किसी चीज़ की ज़ाहिरी हालत से धोका नहीं खाना चाहिए

हर च अज़ दोस्त मी रसद नेकूस्त

(فارسی کہاوت اُردو میں مستعمل) جو کچھ بھی دوست سے ملے اچھا ہی ہوتا ہے

huaracho

harchable

headachy

दर्द सर पैदा करने वाला

hurrache

headcheese

सिरी पिए-ए-पनीर

हर च ज़ूद आयद देर न-पायद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो चीज़ जलद आती है वो देर तक नहीं ठहरती , जो काम जल्दी में किया जाये वो देरपा नहीं होता

हर च गुज़श्त गुज़श्त

जो हो गया सौ हो गया

हरचरण

किशन जी या शिव जी के पवित्र पाँव

हर-चे

हर चीज़, जो कुछ

हर च दर देग अस्त दर कफ़्चा मी आयद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो कुछ देग़ में है वो कफ़चे या चमचे में आएगा , जो असलीयत होती है ज़ाहिर होकर रहती है , जो दिल में है वही ज़बान से भी ज़ाहिर होता है

हीरा चाटना

हीरा चाट कर मर जाना, हीरा खाकर आत्महत्या कर लेना, हीरा फाँकना

हीरा चबाना

हीरा खा कर मर जाना, हीरा खा कर ख़ुदकुशी कर लेना

हरी चुगा है

हरीस है , खाने के वास्ते जाबजा फिरता है

हर-आँचा

जो चीज़ ।।

हद्द चिकलना

सीमा लांघना, हद पार करना

हार चढ़ना

हार चढ़ाना (रुक) का लाज़िम

हार चढ़ाना

۔ مقدس بزرگوں کی قبروںپر ہار چڑھاتے ہیں۔؎

हरी-चुग

(शाब्दिक) हरी चीज़ें चुगने वाला

हेड-चपरासी

کسی دفتر یا ادارے میں قاصدوں یا اردلیوں کا سربراہ ۔

हर च गीरीद मुख़्तसर गीरीद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) थोड़ी सी चीज़ पर क़नाअत करो, ज़्यादा की हवस ना करो , वो काम अपने ज़िम्मे लो जो आसानी से कर सको

हरि-चर्चा

conversation about (or investigation of or concerning) Vishṇu, religious conversation

हा-ए-दो-चश्मी

the letter (h) in the Urdu alphabet

हर च अज़ दिल दूर अज़ दीदा दूर

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) रुक : आँख ओझल पहाड़ ओझल

हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती

किसी चीज़ की ज़ाहिरी हालत से धोका नहीं खाना चाहिए

हर च अज़ दिल ख़ेज़द बर दिल रेज़द

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो कुछ दिल से उठता है दिल पर टपकता है , जो बात दिल से निकलती है दिल पर असर करती है

हर च दर दिल फ़रूद आयद दर दीदा निको नमायद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो चीज़ दिल में समा जाती है वो आँख को भली मालूम होती है , जिस चीज़ से हमारे दिल को कुछ लगाओ होता है वो हम को अच्छी मालूम होने लगती है

हर च ब-क़ामत केहतर ब-क़ीमत-ए-बेहतर

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो चीज़ जसामत में कम होती है क़दर-ओ-क़ीमत में ज़्यादा होती है, छोटी चीज़ भी क़ीमती होती है

हर चे ब-ज़ाबान आयद ब-ज़ियाँ आयद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो बात ज़बान से निकलती है वो नुक़्सान भी पहुंचाती है, बात सोच समझ कर करना चाहिए वर्ना बाद में पछताना पड़ता है

हर चंद जामा तंग अस्त जुज़्व-ए-बदन न गर्दद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) कपड़ा कितना ही तंग हो मगर जुज़ो-ए-बदन नहीं होता , ग़ैरों से कैसी ही मुलाक़ात हो वो अपनों के बराबर नहीं हो जाते, ग़ैर जिन्स हमजिंस के बराबर नहीं हो सकता, अपने अपने हैं और ग़ैर ग़ैर

हर च मर्ज़ी-ए-ऊस्त हमा नेकूस्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जो कुछ उस की (अल्लाह की) मर्ज़ी वही ठीक है

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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