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कोशिश
कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम
आठ बार नौ त्योहार
सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता
चमनिस्तान
ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़
दादरा
संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल
मज़दूर
शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर
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"प्राणीविज्ञान" से संबंधित उर्दू शब्द, परिभाषाओं, विवरणों, व्याख्याओं और वर्गीकरणों की सूची
अख़्यल
(प्राणीविज्ञान) एक काला रंग का परिंदा जिसके परों पर हरा, लाल, सफेद और काले रंग के तिल होते हैं, सर्द, लटूरा
'अदीमत-उल-अज्निहा
(हैव इनयात) जानवरों की वो क़िस्म जिन के बाज़ू नहीं होते (इन में पुसू वग़ैरा शामिल हैं)
'अदीमत-उल-असनान
(जीव-विज्ञान) वो जानवर जिनके दाँत नहीं होते, पोपले जानवर जो अपनी लंबी नोकदार और लेसदार ज़बान को मुँह से बाहर निकाल कर कीड़े मकोड़ों का शिकार करके खाते हैं
'अर्शी-दिमाग़
(हैव इनयात) पेश दिमाग़ का एक हिस्सा जो नियम करों के पीछे होता है, (अंग :phalcon thalamenef)
'अर्सा-ए-शितविय्यत
(हैव इनयात) जाड़े का वो ज़माना जिस में जानवर है हिस पड़े या सोते रहते हैं और ख़ुराक वग़ैरा के लिए भी बाहर नहीं निकलते
इफ़राज़
(नबातात-ओ-हैव इनयात) जज़ब या ज़म होने के बाद ग़िज़ा से बने हुए तमाम मादों को उन के मर्कज़ (रगों या रेशों) में पहुंचाने का निज़ाम या अमल, जिस्म नबाती-ओ-हैवानी में ग़िज़ा से बना हुआ माद्दा
'इल्म-उल-हयात
वह ज्ञान जो जीवित चीजों और जान-दारों (पौधों और जानवरों) के शरीर की संरचना और उसके विकास की चर्चा की जाती है, जीवशास्त्र, जीव-विज्ञान
इस्रेली
(हैवानात) गिरगिट की वज़ा का एक कीड़ा जो ज़मीन से चिमटा रहता और हुआ खा कर साँप की तरह दम मिराता है, (सर उठा ने पेट झुकाए आहिस्ता आहिस्ता हुआ चलने लगता है. ग़िज़ा और पानी ना मिले तो सिर्फ़ हुआ से जीता है
उपासम
(हैव इनयात) उड़ने वाले और दूध पिलाने वाले जानवरों के बैन-बैन मगर थैलीदार जानवरों की एक क़िस्म जिन की माद्दा ग़ैर पुख़्ता बच्चा जन्नती है और वो इस के पेट में लगी हुई थैली में रहता है और जब तक पुख़्ता नहीं हो जाता माँ छातीयों से दूध निचोड़ कर इस के मुँह में चौहती रहती है
कुंद-घेरा
(हैव इनयात) हडीयों के घेरे जो धड़ के किनारों पर बतनी जानिब के मोटे अज़लात के पास होते हैं और मा फ़िक़्रों के (जो कि हर दो के बालाई किनारों के दरमयान होते हैं) जिस्म को घेर लेते हैं उन्हें कोला घेरा भी कहते हैं
क़ा'र
कुंएं की थाह, कुनें या दरिया आदि की गहराई, थाह, गहराई, बड़ा गड्ढा, गहराई, गंभीरता, आंत की नाली और शारीरिक दीवार की मद्ध्यम जगह, पेट या शरीर के और किसी अंदरूनी अंग का निचला भाग
क़ालिब
आकार, रूप, किसी वस्तु का ढांचा, सांचा, टीन या लकड़ी का वह गोल ढांचा जिस पर चढ़ाकर टोपियाँ दुरुस्त की जाती हैं
ख़ैतिय्या
जीव-जंतु: रेशा-नुमा कीड़ा, तागे जैसा पतला कीड़ा, सुई कीड़ा गोल कीड़ा, ऐसा कीड़ा जिसके एक या अधिक सोते होते हैं
ख़ाकी-हिलाल
(हैवानात) हैवानीया के बैज़ा में दाख़िल होने की वजह से बैज़ा के ख़लीया माया में कुछ तबदीलीयां रौनुमा होती हैं हवानेह के दाख़िल होने की जगह की मुख़ालिफ़ सिम्त में कुछ सतही लोन बैज़ा की अंदरूनी जानिब चला आता है जिस की वजह से सतह पर ख़ाकी रंग का एक हिलाली हिस्सा नुमायां होजाता है जिसे ख़ाकी हिलाल कहते हैं
गुज़ारा-राशन
(जीव विज्ञान) खाने की उस मात्रा का नाम जो किसी जानवर को उस समय तक खिलाया जाता है जब वह कोई काम न करता हो और न ही उस से कोई पैदावार प्राप्त हो रही हो
गरदिंदा
(जन्तुविज्ञान और वनस्पति विज्ञान ) जो किसी सहारे पर आज़ादी से इधर उधर या ऊपर नीचे हरकत कर सके
गिर्द-ए-लहम
(हैव इनयात) सींगी या कातीनी ख़ौल या पोशिश जिस से आबी हैवानों के नरम हिस्से अक्सर ढके रहते हैं
छूनी
मस करने का उज़ू या आला , (हैव इनयात) कीड़ों का वो उज़ू जिस से वो चीज़ों को मस करते हैं कीड़ों की मांड या मूंछ
जासिमा
(हैव इनयात) अड्डे पर बैठने वाले बरनद, उन्हें अक्सर उस्फ़ूर ये भी कहते हैं कीवनका ये उस्फ़ूर या गोरिया से ज़्यादा मुशाबेह होते हैं, ये नाम उन परिन्दों के लिए इस्तिमाल होता है जिन के पैर ना तो सुबह हा की मानिंद झिल्लीदार और ना शिकारी चिड़ियों की तरह मज़बूत होते हैं, उन के पैरों में चार चार अंगूठे होते हैं, तीन सामने और एक पीछे, उन की मदद से ये दरख़्तों पर बैठ सकते हैं
ज़ौरक़ी
(हैव इनयात) कशती नुमा (कोई उज़ू या पौदे का हिस्सा), कशती नुमा हड्डी जो हाथ या पैर में होती है
झालर-दार-सिरा
(हैव इनयात , नबातीयात) वो ज़ाइद या सिरा जो बालदार या रेशादार हो जिस के इर्दगिर्द या हाशीए पर बाल या रेशा हो (अंग: Fimbriated end)
डेलटाई
(हैव इनयात) मेंडक की बाज़ू हड्डी जिस के दोनों सिरे फूओले होते हैं और अंदरूनी जानिब एक उभार होता है जो कुहनी उभार कहलाता है इन तीनों की मदद से वो हाथ को उठाता है
तुख़्म-दान
(हैव इनयात) जिस्म के अंदाज़ वो थैली जिस में अंडे या तौलीदी जर सौम़्य होते हैं, बैज़ा दान कैसा-ए-करम मनी, सा-ए-तुख़्म
तुफ़ैली-तताबुक़
(हैव इनयात) वो अमल जिस के ज़रीये कोई हैवान ख़ुद को दूसरों के माहौल के मुताबिक़ बना लेता है
दवाँ-'असब
(हैव इनयात) दिमाग़ की एक छोटी और पतली रग जो दिमाग़ के ज़ुहरी जानिब, बस्री फ़स्स और दमेग़ के दरमयान से निकलती है, उसे ट्राकलेर (चर्ख़ी नुमा) भी कहते हैं
नख़ुज़-पा
(हैव इनयात) झींगा मछली में दम पारा का एक बहुत छोटा बारीक हिस्सा जो आगे को निकला होता है पांव का जोड़, हुर क़ुफ़्फ़ा
नख़ुज़-हैवान
(हैव इनयात) रुक : नख़ज़ हवीना, इबतिदाई यक ख़लवी जानदार, हैवानात इबतिदाई (जो एक ख़लीए के हूँ) (अंग : Protozoa)
नब्ज़
नाड़ी, शिरा, रोग निदान के लिए देखी जानेवाली नाड़ी, चिकित्कसा: लाई की वो रग जो हरकत करती रहती है, नाड़ी, नाड़ी की हरकत या गति, दिल की धड़कन या ख़ून की हरकत,
नबाताती-क़ुत्ब
(हैव इनयात) बैज़े का निचला ज़रदी माइल सफ़ैद हिस्सा जिस में ज़रदी जमा होती है (अंग : Vegetative Pole)
नबाती-जूँ
(हैव इनयात) रुक : नबाताती जूं, रूख जूं (अंग : Aphid) । मसलन जिन्स सर फुस्स की अन्वा के सर्वे नबाती जूं को अपनी ग़िज़ा बना लेते हैं
पेश-आँत
(हैव इनयात) अगली आन जो इन चार हिस्सों पर मुश्तमिल है : (१) मन (२) कोताह हलक़ (३) फूला हुआ पोटा (४) पेश तजवीफ़ या सन् दाना
बज़्र
(नबातीयात) जिन पौदों में फूल नहीं लगते इन में पैदा होने वाले तुख़्म नुमा दाने जिन के ज़रीये तौलीद होती है
बसला
(नबातीयात) प्याज़ वग़ैरा और इस से मुशाबहत रखने वाले पौदों का ज़ेर ज़मीनी बल्ब नुमा तना जिसे पहीले जड़ से ताबीर किया जाता था लेकिन अब माहिर इन नबातीयात इसे ज़ेर ज़मीनी कली या एक छोटा तना शुमार करने हैं
मुकम्मल-तक़ल्लुब
(हैव इनयात) इस किस्म का तक़ल्लुब जिस में पियो पाई हालत जाये मुकम्मल तक़ल्लुब कहलाता है
मे'दी-चक्की
(हैव इनयात) झींगा मछली का मादा जो दो हिस्सों, एक बड़ा उगला हिस्सा (चुकी ख़ाना) और दूसरा छोटा पिछला हिस्सा (तक़तीरी ख़ाना) पर मुश्तमिल होता है
मलस्का
(हैव इनयात) लुआब नुमा जानवर , हैवानात मफ़सलीह , नरम ख़ौल वाले जानवर, क़शरीह का एक ज़ेली तबक़ा (Malarolragain)
मुस्क-चूहा
(हैव इनयात) शुमाली अमरीका का बड़ा आबी पोस्तीनदार कतरने वाला जानवर जिस की दम लंबी क़शरी और कम बालों वाली होती है, पिछले पांव जुज़वी तौर पर झिल्ली वाले होते हैं इस से मशक की सी ुबो आती है, गरमोश, आबी छछूंदर, मशक मूश
महिस्सा
(प्राणि-विज्ञान) वह संवेदनशील अंग जिसके जोड़ कीड़ों और फिशरियों के सिरों पर पाए जाते हैं और जिनसे वह टटोलते हैं, विशेषताएँ
मिंक़ारी-शिरयान
(हैव इनयात) एक शरयान का नाम जो ज़ुहरी शाख़ से निकलती है और मिनक़ार की तरफ़ जाती है (Rostralartery)
मोरी
(ज़रूफ़ साज़ी) छोटे मुँह और बड़े पेट के औसत दर्जे के टोकरे (जिस में फल या तरकारी हिफ़ाज़त के लिए रखते हैं) का मुँह या दहाना
यक-समामी
(प्राणीविज्ञान) जिसका एक ही (झिल्ली) या आवरण हो, एकल झिल्ली, एक वाल्व का, विशेषतः कोई रेंगने वाला
रोदक
(जीव-विज्ञान) जेली फ़िश आदि खारे जल के विशेष पाचन प्रणाली रहित जीवों का आमाशय, विकसित जीवों में आमाशय की नाली
लपेट
(क्षति) ख़ुद हरीफ़ के ऊपर होने की हालत में इस के दाहिनी तरफ़ बैठ कर अपने दाहिने हाथ से इस का बाज़ू लपेट कर अपना बायां पैर उस की पुश्त की तरफ़ लंबा कर के एक दम ज़ोर से खींचते हुए पीछे मुड़ कर उसे चित्त करना और दाहिना पांव इस के सीने पर रख देना
वासिल-बाफ़ी
(हैव इनयात) वासिल बाफ़्त (रुक) से मुताल्लिक़ या मंसूब, वासिल बाफ़्त का, दूसरी बाफ़ों को जोड़ने या सहारा देने वाला
शेर-कीड़ा
(हैव इनयात) एक वज़ा का भौंरा जिस के परों पर चती्यां या धारियां होती हैं और कीड़ों का शिकार करता है
सुंदर-चूहिय्या
(हैवानात) दूओध पिलाने वाले जानवरों की एक क़िस्म जो मग़रिबी पाकिस्तान में मिलती है, माद्दा अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ दो दफ़ा बच्चे देती है एक झूल में सिर्फ़ एक बच्चा होता है. (लात : Sicistacon Color)
सोहानिया
(हैव इनयात) हैवानों की ज़बान के पिछले हिस्से में छोटे छोटे दाँतों वाला ख़मीदा शक्ल का एक उज़ू जो जबड़ों की मदद से ग़िज़ा को पीसने में मदद देता है
हथेली
कलाई के आगे का चिकना और चौड़ा भाग, करतल, हाथ पर कलाई के आगे का वह ऊपरी चौड़ा हिस्सा, जिसके आगे उँगलियाँ होती हैं
हरकी-रक़्बा
(हैव इनयात) दिमाग़ के सामने के फ़स्स का वो हिस्सा जिस का ताल्लुक़ अज़लाती हरकत की इबतिदा से है, अंग : Motor Area का उर्दू तर्जुमा
हरकी-रेशा
(हैव इनयात) वो रेशा जो नख़ाई डोर से जिस्म के मुख़्तलिफ़ हिस्सों तक तहरीक ले जाता है, बतनी रेशा
हवाई-तनफ़्फ़ुस
(हैव इनयात) अमल-ए-तनफ़्फ़ुस जो हवा में आज़ाद ऑक्सीजन की मौजूदगी में अंजाम पाता है (आबी तनफ़्फ़ुस के मुक़ाबिल जिस में पानी में मौजूद ऑक्सीजन मछलियां या दीगर आबी जानवर गलफड़ों की मदद से जज़ब करते हैं)
हवाई-थैली
(हैव इनयात) जिस्म के वो हिस्से जिन में हुआ भरी होती है, हुआ थैली या कैसा हुआ जो बाअज़ परिन्दों या हश्रों के फेफड़ों की तौसीअ है (अंग : Air sac)
हवाई-नालियाँ
(जीव विज्ञान) रेंगने वाले किटाणुओं श्वास क्रिया के लिए सांस की नालियां जो बाहर की तरफ ख़ास जगहों पर श्वास क्रिया के द्वारा खुलती हैं
हैवानात-ए-फ़िक़री
(हैव इनयात) वो तमाम हैवानात जिन के बदन में हड्डियां या ढांचा होता है और ख़ून लाल होता है (अंग : वरटिब्रेटस - Vertebrates
हैवानिय्यात
प्राणि विज्ञान, जानवरों के व्यवहार, संरचना, शरीर विज्ञान, वर्गीकरण और वितरण का वैज्ञानिक अध्ययन
हश्त-पाया
(हैव इनयात) जिन्स ओकटोपस में पाया जाने वाला जानवर इस के गोल जिस्म के एक तरफ़ बड़ा सासर और दूसरी तरफ़ आठ बाज़ू होते हैं ये बाज़ू जुज़वी तौर पर सर की तरफ़ से आपस में बत्तख़ के पंजों की तरह जुड़े होते हैं
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क्या आप वास्तव में इन प्रविष्टियों को हटा रहे हैं? इन्हें पुन: पूर्ववत् करना संभव नहीं होगा