चढ़ मार गूलर पक्के
उद्देश्य इच्छानुसार पूरा होने पर बोलते हैं अर्थात इच्छानुसार उद्देश्य प्राप्त हुआ
चढ़े चाक चाहे सो उतार लो
जब काम जारी है इस वक़्त जो चाहो करलो, हुकूमत के वक़्त सब कुछ हो सकता है, बनी में जिस के साथ चाहो सुलूक करलो
चढ़ती कला, जागती जोत
चंद्रमा के प्रकार चमकीला और बहुत उज्ज्वल हो, इक़बाल की तरक़्क़ी जलते हुए चिराग़ जैसी है
चाँद चढ़े, कुल 'आलम देखे
स्पष्ट बात किसी से छुपी नहीं रहती, सच्चाई किसी से गुप्त नहीं रहती, बात खुल जाने पर सब को ज्ञात हो ही जाता है
चाँद पर ख़ाक नहीं पड़ती
जो कुछ कोई कहे सुनूँ और ख़ामोश रहूँ क्यूँकि चाँद पर ख़ाक डालने से नहीं पड़ती मैं जैसा हूँ वैसा ही रहूँगा
चालीस चिल्ले चौरासी आसन
योग करने वालों को चौरासी आसनों में से किसी आसन को चुनना चाहिए, क्योंकि हिन्दू फ़क़ीरों के यहाँ कोई आसन चौरासी प्रकार से बाहर नहीं है और चिल्ला चालीस दिन से कम नहीं है अर्थात फ़क़री की सारी सृष्टि इतनी ही है
चालीस-सुतून
बहु-स्तंभ वाला, (चालीस स्तंभ का) महल या भवन आदि
चाम का चमोटा और कूकर रखवाल
अर्थात दोनों बातें निकम्मी, तिरस्कृत काम का तिरस्कृत सामान, अयोग्य पर विश्वास करने के अवसर पर बोलते हैं
चार साल बुरा अहवाल
घोड़े के संबंध में कहते हैं, चार साल तक ख़र्च होता है, उस के बा'द सवारी के योग्य होता है
चारू सो भारू
बहुत खाने वाला दूसरों के लिए परेशानी का कारण अर्थात बोझ हो जाता है, जो बहुत खाते हैं, वह अधिक बोझ भी ढो सकते हैं, जो जानवर बहुत खाता है वो मोटा हो जाता है
चातुर की दूर बला
चालाक शख़्स किसी न किसी तदबीर से अपने आप को हर मुसीबत और बला से बचा लेता है
चक्की तले पौसेरा , निकल सास घर मेरा
इस मौक़ा पर कहते हैं जब बहू घर का इंतिज़ाम अपने हाथ में लेना चाहे , किसी चीज़ पर ज़बरदस्ती क़बज़ा करना, किसी की चीज़ का ख़्वाही नख़्वाही मालिक बनना
चल मेरे चर्ख़े चर्रख़ चूँ कहाँ की बुढ़िया कहाँ का तूँ
एक बढ़िया अपनी बेटी से मिलने गई, जंगल में उसे शेर चीता और भेड़ीया और दूसरे जानवर मिले इस ने अपनी जान उन से ये कह कर बचाई कि वो वापसी पर मोटी होकर आएगी, तब खाना वापसी पर वो एक चरखे में बैठ गई और जब कोई जानवर मिलता तो ये फ़िक़रा कह देती वो घबरा कर भाग जाता
चले न जाए आँगन टेढ़ा
जब किसी काम को करने की युक्ति न जानता हो परंतु उसके लिए साज़-ओ-सामान को दोष दे तब कहते हैं
चलता-फिरता न मरे बैठा मर जाए
काहिल आदमी जल्दी मरता है, चलने फिरने वाला जल्द नहीं मरता, बहुत एहतियात करने वाला कभी कभी मर जाता है और एहतियात न करने वाला ज़िंदा रहता है
चमगादड़ के घर आई चमगादड़ आ बुवा लटक रहें
बदों की सोहबत से नेकों पर आफ़त आती है बुरे नेकों के बहकाने और बिगाड़ने वाले होते हैं, जब किसी मेहमान को साहिब ख़ाना की वजह से बिप्ता उठानी पड़े यानी जो तकलीफ़ साहिब ख़ाना पर गुज़रे वही ये भी बर्दाश्त करे या रंज-ओ-तकलीफ़ पर क़नाअत करने पर भी कहते हैं
चना चबा लो या शहनाई बजा लो
दोनों काम एक साथ नहीं होसकते ये इस मौक़ा पर कहा करते हैं जब कोई दो काम एक दूसरे के मुख़ालिफ़ एक ही वक़्त में करना चाहता है
चना मर्द-नाज है
चना जवाँ मर्दों की ख़ुराक है, चना सभी अन्नों से बढ़कर पौष्टिक होता है
चराग़ जला, पूत गला
लड़के जब खेलते हैं और एक की जीत दूसरे के सिर हो जाती है तो शाम के बाद माँगने पर यह कहते हैं, मतलब यह है कि अब माँगने का समय नहीं रहा
चराग़ के नेचे अँधेरा
ऐसे अवसरों पर उपयोग किया जाता है जहाँ आपके क़रीबी लोग किसी भी अच्छाई या लाभ से वंचित हों या दूसरे लोगों को फ़ायदा पहुँचे और अपने लोग महरूम रहें
चराग़ से चराग़ जलता है
ज्ञान से ज्ञान का उजाला फैलता है, संतान से संतान बढ़ती है, एक समर्थ व्यक्ति से दूसरे को सहायता मिलती है
चराग़ तले अँधेरा
ऐसे अवसर पर उपयोग किया जाता है जहाँ आप के क़रीबी लोग किसी भी अच्छाई या लाभ से वंचित हों या दूसरे लोगों को लाभ मिले और अपने लोग वंचित रहें, आँख पर लापरवाही की पट्टी
चश्म-ए-बद दूर, आँखें मोती चूर
प्रार्थना के रूप में प्रयोग किया जाता है और किसी वस्तु की प्रशंसा के लिए कहते हैं, कि इन मोती जैसी सुंदर आँखों को किसी की बुरी नज़र न लगे, एक तरह की शुभकामना
चट मंगनी पट ब्याह
किसी काम को जल्द से जल्द और बिना सोचे समझे करने के अवसर पर बोलते हैं
चटोरा कुत्ता, अलौनी सिल
लालची कुछ भी नहीं छोड़ता सिल तक चाट जाता है, चटोरे आदमी को जो मिल जाए वही बहुत है, चटोरे आदमी को जब कहीं निराश होना पड़े तब भी कह सकते हैं।
चौकी गाँव वालों को लूट खाती है
पुलिस की चौकी आम तौर पर वहाँ स्थापित की जाती है जहाँ लोग बहुत शरारती हों, पुलिस वाले अपने खाने का ख़र्च आम तौर पर उन्हीं लोगों से पूरा करते हैं
छब गठ्ड़ी में सूरत तबाक़ में
सुंदरता वस्त्रों पर निर्भर करती है (गठरी) में वस्त्र रखे जाते हैं और यौवन अच्छे भोजन पर निर्भर करता है (रिकाब में परोसा जाता है)
छछूँदर के सर में फुलेल
जब तुच्छ या कम श्रेणी का व्यक्ति अच्छी वस्तु प्रयोग करे तो कहते हैं, अच्छी वस्तु बड़े को नहीं चाहिए
छींके एक नाक काटे
इस मौक़ा पर तंज़न बोलते हैं कोई शख़्स अधूरा काम कर के बाक़ी दूसरे के लिए छोड़ दे
छींकते गए छींकते आए
(हिंदू) बदशगुनी का बुरा ही नतीजा होता है, जैसी बदशगुनी से गए थे, वैसे ही पछताए
छीले चार, बघारे पाँच
इस कहावत का प्रयोग सास उस बहू के लिए करती है जो मूर्ख होने पर भी अपने आप को बुद्धिमान समझे
छोड़ झाड़, मुझे डूबन दे
जब कोई आदमी ग़लत काम करने का इरादा कर के उसे न करना चाहे और उसके लिए कोई बहाना बनाए कि अब मैं अमुक कारण से ऐसा नहीं कर रहा हूँ तो कहते हैं
छोड़े गाँव का नाम क्या
जिस स्थान या काम को छोड़ दिया उस से क्या वास्ता, जिस से कोई संबंध नहीं रहा उस के बारे में बात करना व्यर्थ है
छोटा मुँह, बड़ी बात
अपनी योग्यता से अधिक बड़ी बात करना, प्रोत्साहन से अधिक दावा करना, बड़ों के सामने धृष्टता दिखाना
छोटी सी बछिया, बड़ी सी हत्या
जो पाप बड़े के मारने से लगता है, वही छोटे के मारने से भी लगता है, क्यूँकि छोटा सा पाप भी ऐसा ही होता है जैसे बड़ा, बुरा कर्म तो हर हालत में बुरा ही होता है
छोटी-खौटी
कहा जाता है कि छोटे बच्चे कम समझदार होते हैं
छूछी कढ़ाई मज्र का फोड़न
ज़ंगार ख़ाली कड़ाई को तोड़ देता है, चीज़ इस्तिमाल में रहे तो दरुस्त रहती है यूंही पड़े रहने से ख़राब हो जाती है
छूट भलाई, सारे गुन
भलाई के अलावा सारी अच्छाइयाँ हैं, किसी की प्रशंसा हो रही हो तो निंदा के तौर पर व्यंग्यात्मक रूप से कहते हैं
छुवा और मुवा
शरारती आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं कि जिस की तरफ़ तवज्जोह की उसको तबाह कर दिया
चिड़ा मरन गँवार की हाँसी
किसी को तकलीफ़ पहुंचे, किसी को लुतफ़ आए-ए-, हमारी जान गई आप की अदा ठहरी, किसी का नुक़्सान होता है कोई ख़ुश होता है
चोर का सर नीचा
चोर किसी के सामने आँख उठाकर नहीं देख सकता, वह सदैव लज्जित रहता है
चोर का शाहिद चराग़
दीप के उजाले में चोर पहचान लिया जाता है इस लिए चोर उजाले में चोरी नहीं करता
चोर के ख़्वाब में बुक़चे
चोर को सोते समय भी चोरी ही का ख़याल रहता है, आश्य यह है कि जिस व्यक्ति का जो व्यवसाय होता है उस का ध्यान सदैव उसी तरफ़ होता है
चोर खिड़की घर का नास
अगर बीवी ख़ावंद से छिपा कर ख़र्च करती हो या बदचलन हो या आश्ना को दे देती हो तो घर में कुछ नहीं रहता
चोर की दाढ़ी में तिनका
अपराधी अपने हाव भाव से पहचाना जाता है, अपराधी का अपने मुख बोल पड़ना या दोषी का किसी तरह से अपना दोष प्रकट करना
चोर लेवे न शाह छेड़े
यानी बड़ी हिफ़ाज़त से है या ऐसी शैय है कि बज़ाहिर कुछ क़दर नहीं रखती मगर दरअसल बेशक़ीमत है
चोर सब घर ले मरे
पकड़े जाने पर वह अपने सब साथियों के नाम बता देता है, यहाँ तक कि निर्दोषों को भी फँसा देता है
चोर, जुवारी, गठ-कटा, जार और नार छिनार, सौ सौ सौगंध खाएँ जो मोल न कर इतबार
चोर, जवारी, गठ-कटा, चरित्रहीन मर्द, दुश्चरित्र औरत, ये कितनी ही सौगंध खाएँ कि बुरा काम छोड़ देंगे, कदापि 'एतबार नहीं करना चाहिए
चोरी और सर ज़ोरी
अपनी ग़लती पर पछतावा न करके उल्टा दूसरे को दोषी ठहराना, अपनी ग़लती न समझना, अवज्ञा करना और अकड़ना, ढिठाई से सामना करना
चुप सौ को हराए
इंसान मद्द-ए-मुक़ाबिल की बात का जवाब ना दे तो वो ख़ुद हार झुक मार कर चुप हो जाता है
चुप सो बला को टाले
ख़ामोशी हज़ार तरह की आफ़तों से बचाती है, चुप रहने में आदमी बहुत से उलझावों और ज़िम्मेदारीयों से बचा रहता है
चुप, आधी मर्ज़ी
कोई जवाब में चुप रहे तो समझते हैं कि वह मान गया है, चुप्पी आधी सहमति है
चुपड़ी और दो दो
उम्दा भी और ज़्यादा भी, हसब-ए-मंशा और बकसरत, कामयाबी और बहुत से फ़ाइदों के साथ (ऐसे मवाक़े पर मुस्तामल)
चूँ क़ज़ा आयद तबीब अब्ला शवद
جب موت آتی ہے طبیب اندھا ہو جاتا ہے یعنی جب موت کا وقت آجاتا ہے تو طبیب کی بھی عقل ناکارہ ہو جاتی ہے، موت کا کوئی علاج نہیں اس وقت حکیم بھی بے وقوف بن جاتا ہے
चूका और गया
जिस ने ग़लती की, नुक़्सान उठाया, जो चूकता है वो हानि उठाता है
चून की सौत बुरी
(अविर) औरतें स्वत की बुराई में कहती हैं, सोकन बुराई की जड़ है