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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

चढ़ जा बेटा सूली पर, राम भला करेगा

बढ़ावा चढ़ावा दे कर ग़लत या हानिकारक काम कराने के समय पर प्रयुक्ति

चढ़ मार गूलर पक्के

उद्देश्य इच्छानुसार पूरा होने पर बोलते हैं अर्थात इच्छानुसार उद्देश्य प्राप्त हुआ

चढ़े चाक चाहे सो उतार लो

जब काम जारी है इस वक़्त जो चाहो करलो, हुकूमत के वक़्त सब कुछ हो सकता है, बनी में जिस के साथ चाहो सुलूक करलो

चढ़े पर चढ़ाओ सर दुखे न पाँव

जिन को सब मानते हैं इन को तुम भी चढ़ाओ

चढ़े पर न चढ़ाओ सर देखे न पाँव

बेतर्तीबी से काम करने के मौक़ा पर कहते हैं

चढ़ी कढ़ाई तेल न आया तो फिर कब आएगा

जब काम होने के समय न हुआ तो फिर कभी नहीं हो सकेगा

चढ़ती कला, जागती जोत

चंद्रमा के प्रकार चमकीला और बहुत उज्ज्वल हो, इक़बाल की तरक़्क़ी जलते हुए चिराग़ जैसी है

चंदन की चुटकी भली , गाड़ी भरा न काठ

थोड़ी अच्छी चीज़ बह सी ख़राब से बेहतर है

चंदन की चुटकी भली , न गाड़ी भर अनाज कबाड़

थोड़ी सी अच्छी चीज़, ज़्यादा ख़राब चीज़ से बेहतर होती है

चंगा है मगर नंगा नहीं

सक्षम है लेकिन फ़िज़ूलख़र्च नहीं

चाँद आसमान चढ़ा सब ने देखा

बात मशहूर हुई तो हर एक ने सुन ली

चाँद चढ़े, कुल 'आलम देखे

स्पष्ट बात किसी से छुपी नहीं रहती, सच्चाई किसी से गुप्त नहीं रहती, बात खुल जाने पर सब को ज्ञात हो ही जाता है

चाँद गहन में चक्की, राहे का क्या काम

चंद्रग्रहण के मेले में चक्की टाँकने वाले की क्या आवश्यकता, इसकी आवश्यक्ता तो घर पर ही पड़ती है जहाँ चक्की है

चाँद का थूका मुँह पर आता है

अच्छे आदमी पर आरोप लगाने वाला ख़ुद अपमानित होता है

चाँद ख़ाक डालने से नहीं छुपता

नेक और पवित्र आदमी पर इल्ज़ाम लगाने का असर नहीं होता, अच्छे आदमी को दोष देने से कोई प्रभाव नहीं पड़ता

चाँद को भी ख़ुदा ने दाग़ लगा दिया है

संसार में कोई भी निर्दोष, बेगुनाह और बेदाग़ नहीं है

चाँद में मैल नहीं

चाँद एक साफ़ चीज़ है, खोपड़ी साफ़ अर्थात गंजा है

चाँद पर ख़ाक डालने से अपने मुँह पर पड़ती हे

रुक : चांद पर (का) थोका मुंह पर आता है

चाँद पर ख़ाक डालने से नहीं छुपता

सज्जनों की सज्जनता को उनकी बुराई करने से कोई आँच नहीं आती

चाँद पर ख़ाक डालने वाला अपनी आँखें मलता है

रुक : चांद पर ख़ाक डालो तो अपने मुनक्का पर पड़े

चाँद पर ख़ाक डालो तो अपने मुँह पर पड़े

रुक :चांद पर (का) थोका मुंह पर आता है

चाँद पर ख़ाक नहीं पड़ती

जो कुछ कोई कहे सुनूँ और ख़ामोश रहूँ क्यूँकि चाँद पर ख़ाक डालने से नहीं पड़ती मैं जैसा हूँ वैसा ही रहूँगा

चाँद पर थूका मुँह पर आता है

बेऐब को ऐब लगा कर या खुले हुए कमाल का इनकार कर के अनासन ख़ुद ही बदनाम होता या बुरा समझा जाता है

चाँदी का चमचा मुँह में लिये पैदा नहीं होता

कोई व्यक्ति दौलत साथ लेकर पैदा नहीं होता

चाँदी का चश्मा लगाते हैं

रिश्वत अर्थात घूस लेने वाले के लिए कहा जाता है

चाँदी की रीत नहीं सोने की तौफ़ीक़ नहीं

न यह हो सके न वह, एक का नियम नहीं दूसरे की क्षमता नहीं

चाँदनी में फ़स्द खुलवाना मना' है

चाँदनी में फ़स्द (रक्त-मोक्षण) नहीं खुलवाते क्योंकि ख़्याल है कि घाव अच्छा नहीं होता

चाँदनी में शहद नहीं होता

शुक्ल पक्ष में मधुमक्खियाँ मधु इकट्ठा नहीं करतीं

चादर छोटी पाँव पसारे बहुत

आमदनी थोड़ी ख़र्च किया ज़्यादा (कब : चादर थोड़ी अलख

चादर है थोड़ी पैर पसारे बहुत

आमदनी थोड़ी ख़र्च बहुत

चादर थोड़ी पाँव फैलाए बहुत

(अकारण व्यय करने वाले आदमी के लिए बोलते हैं) आय कम व्यय अधिक

चाह चमारी चूहड़ी सब नीचन की नीच

चाह रूपी चमारी और भंगिन सब नीचों में नीच है

चाहत की चाकरी कीजे अन-चाहत का नाम न लीजे

कद्रदां के पास रहना चाहिए, कद्रदां की लौंडी बनना नाक़द्र की बीवी बनने से अच्छा है

चाहे इधर से नाक पकड़ो चाहे उधर से

बात एक ही है, हर तरह बराबर है

चाहे जिया जाए लगी न छूटे

मोहब्बत और इश्क़ से पीछे न हटना चाहिए, चाहे कुछ भी हो

चाहे जो रंग रंगाओ खिलेगा अमवा

चाहे जो करो, हर तरह से बे जे़ब ही रहेगा

चाहे कोदों दलाले , चाहे मंडवा पिसाले

दमी से एक वक़्त में एक ही काम होसकता है , जो काम मर्ज़ी है कराले में तेरे इख़तियार में हूँ औरत ख़ावंद से कहती है

चाहे मुर्दा दोज़ख़ में जाए चाहे बहिश्त में , अपने हल्वे माँडे से ग़रज़

किसी दूसरे की पर्वा ना करते हुए अपनी बेहतरी पर नज़र रखना, ख़ुदग़रज़ी दिखाने के मौक़ा पर कहते हैं

चाहे ओढ़ो चाहे बिछाओ

जो मन में आए करो, इतने में कुछ नहीं हो सकता, अपर्याप्त चीज़ के लिए कहते हैं

चाहने के नाम से गधी ने भी खेत खाना छोड़ दिया

जहां किसी ने किसी को अपनी मुहब्बत जता दी वो नाज़ करने ओ मिज़ाज दिखाने लगता है

चाक का गुड़ कलरी के होले भादों की धूप बादशाह को नहीं मिलती

ये चीज़ें ग़रीबों के ही हिस्से की हैं, बादशाह इन चीज़ों को हक़ीर समझते हैं और उनका लुतफ़ नहीं उठा सकते

चाक कुनम गिरह कुनम देखो मिरा हुनर

आपस में लड़ने वाले के संबंधित बोलते हैं

चाक उतरा हुआ फिर नहीं चढ़ता

बिगड़ा हुआ काम नहीं बनता

चाकर है तो ना-चाकर, ना नाचे तो नाचा कर

अगर नौकर है तो काम करना पड़ेगा और अगर ना करेगा तो नौकर नहीं

चाकर के आगे कूकर कूकर के आगे पेश ख़ेमा

वहां कहते हैं जहां किसी को काम (के लिए) कहा जाये और वो दूसरे को करने का हुक्म दे दे

चाकर के आगे नौकर, नौकर के आगे कूकर

रुक : चाकर के आगे कूकुर अलख

चाकर के चूकर , चूकर के पेश कार

रुक : चाकर के आगे कूकुर अलख

चाकर को 'उज़्र नहीं कूकर को 'उज़्र है

कुत्ता हुक्म ना माने मगर नौकर को मानना पड़ता है, नौकर को ताबेदारी के सिवा और कोई चारा नहीं

चाकर से कूकुर भला जो सोवे अपनी नींद

नौकर से वह कुत्ता भला और अच्छा है जो किसी और की निरीक्षण से तो निश्चिंत है

चाकर या चाकरी कर के आप अपने हाथ बिकना है

यदि कोई व्यक्ति किसी की चाकरी कर रहा है अर्थात वो उस की ग़ुलामी कर रहा है मानो कि वो ख़ुद अपने आप को बेच रहा है

चाकरी में आकरी क्या

नौकरी में सुस्ती नहीं करनी चाहिए, नौकरी में बहाना क्या

चाकी फेरी हुई , चून की ढेरी

मेहनत करने से सिला मिलता है

चालीस चिल्ले चौरासी आसन

योग करने वालों को चौरासी आसनों में से किसी आसन को चुनना चाहिए, क्योंकि हिन्दू फ़क़ीरों के यहाँ कोई आसन चौरासी प्रकार से बाहर नहीं है और चिल्ला चालीस दिन से कम नहीं है अर्थात फ़क़री की सारी सृष्टि इतनी ही है

चालीस तलवारों की बादशाहत

थोड़े से धन में उतरना

चालीस-सुतून

बहु-स्तंभ वाला, (चालीस स्तंभ का) महल या भवन आदि

चाल्नी कहे सूई कि तेरी पेंदी में छेद

बड़ा ऐबदार भी कम ऐबदार की बुराई करता है, अदना आला की बराबरी करता है , रुक : छाज बोले सौ बोले छलनी भी बोले जिस में बेहतर सौ छेद

चाम का चमोटा और कूकर रखवाल

अर्थात दोनों बातें निकम्मी, तिरस्कृत काम का तिरस्कृत सामान, अयोग्य पर विश्वास करने के अवसर पर बोलते हैं

चाम के चंदू चलल पहाड़ फीचलल टंगड़ी टूटल कपाड़

अगर कोई व्यक्ति ऐसे काम में हाथ डाले जिसका वह योग्य न हो तो नुक़्सान उठाता है

चाक़ चौबंद टका ना'ल बंद

झूट-मूट का अधिक बचाने के अवसर पर बोलते हैं

चार अफ़ीमी और तीन हुक़्क़े

मूर्ख लोग आपस में अकारण झगड़े पर तुल जाएँ तो कहते हैं

चार बासन होते हैं तो खड़कते भी हैं

रुक : जहां चार बर्तन अलख, जहां चार आदमी जमा होते हैं तकरार भी हो जाती है

चार बरसातें ज़्यादा देखी हैं

उम्र में या तजुर्बे में ज़्यादा हूँ, किसी क़दर ज़्यादा तजरबाकार है, ज़्यादा जहां दीदा-ओ-सन रसीदा है

चार बेद पाँचवाँ लबेद

जो अक़ल की बात ना माने इस के लिए डंडा मुनासिब है

चार बुलाए चौदह आए सुनो घर की रीत, भार के आ कर खा गए घर के गाएँ गीत

इस मौक़ा पर मुस्तामल है जब कम लोगों को दावत दी जाये और बहुत ज़्यादा आ जाएं , (कब : तीन बुलाए तेराह आए देखो यहां की रीत, बाहर वाले खा गए और घर के गावें गीत)

चार चोर चौरासी बनिये, एक एक कर के लूटा

चार चोरों ने चौरासी बनियों को एक एक कर के लूट लिया

चार दिन चाँदनी चार दिन अँधियारी

उत्थान और पतन या सुख और दुख साथ-साथ हैं, कभी विलासिता होती है और कभी कठिनाई, दर्द और राहत अविभाज्य हैं

चार दिन का रंग ढंग छोड़ वही जुर्वा मोरा संग

आप की मुहब्बत चंद दिन की है, आप जानीए

चार दिन की आइयाँ और सोंठ बिसाहिन जाइयाँ

चार दिन ब्याह को नहीं हुए और अभी से जन्म देने की तय्यारी, उतावली महिला या जो आदमी जल्दी खुल जाए उस के संबंध में कहते हैं

चार दिन की चाँदनी आख़िर अँधेरा पाख

कुछ दिनों की सुख है, फिर वही पीड़ा, कुछ दिनों की उन्नति है फिर अवनति

चार दिन की चाँदनी आख़िर अँधेरी रात

कुछ दिनों की सुख है, फिर वही पीड़ा, कुछ दिनों की उन्नति है फिर अवनति

चार दिन की चाँदनी और फिर अँधेरी रात

कुछ दिनों की सुख है, फिर वही पीड़ा, कुछ दिनों की उन्नति है फिर अवनति

चार दिन की चाँदनी फिर वही उजाला पाक

कुछ दिनों की सुख है, फिर वही पीड़ा, कुछ दिनों की उन्नति है फिर अवनति

चार दिन की चमार चौदस है

कमीना या नीच की कुछ दिनों प्रसन्नता पर बोलते हैं, थोड़े दिन के लिए यह बात विख्यात है

चार दिन की चौधर पर इतना उद्माद

चार दिन की सरकार पर यह ताव

चार दिन की कोतवाली फिर वही खुर्पा वही जाली

अब यह सरकार है हटने के बाद फिर वही पहले वाली स्थिति, दो दिनों की धन-दौलत है फिर वही अपनी मूल स्थिति पर आ जाएगा

चार हाथ पाँव सब रखते हैं कुछ तुम्हारे ही नहीं हैं

सब शक्ति रखते हैं, घमंड करने वाले को कहते हैं

चार हाथ पाँव तो सब के हैं

सब में कुछ न कुछ करने का बूता है

चार महीने पाल का, चार महीने ताल का, चार महीने हाल का या जैसा कैसा

(विभिन्न शैली एवं क्रम के साथ प्रयुक्त) चार महीने तालाब का चार महीने ताज़ा या जैसा मिल जाये वैसा पानी चाहिए, बरसात में ताज़ा सर्दियों में तालाब का और गरमियों में बासी पानी अच्छा होता है

चार पाए बरू किताबे चंद

पढ़ा लिखा मूर्ख ऐसे जानवर के समान है जिस पर किताबें लदी हुई हों

चार पाँव का घोड़ा चौंकता है, दो पाँव का आदमी क्या बला है

आदमी के लिए ठोकर खाना साधारण बात है, मनुष्य धोखा खा जाता है

चार पाँव का घोड़ा चौंकता है, दो पाँव का आदमी क्या बला है

आदमी के लिए ठोकर खाना साधारण बात है, मनुष्य धोखा खा जाता है

चार पैसे के सारे खेल हैं

दिखावा और विलासिता वैभव का प्रदर्शन धन ही के बल बूते पर होता है

चार पेसे डोली पर है

दूरी का अनुमान डोली के किराया से मालूम किया जाता है, यानी दूरी ज़ियादा नहीं

चार साल बुरा अहवाल

घोड़े के संबंध में कहते हैं, चार साल तक ख़र्च होता है, उस के बा'द सवारी के योग्य होता है

चारू सो भारू

बहुत खाने वाला दूसरों के लिए परेशानी का कारण अर्थात बोझ हो जाता है, जो बहुत खाते हैं, वह अधिक बोझ भी ढो सकते हैं, जो जानवर बहुत खाता है वो मोटा हो जाता है

चाट लगी तो हल्वाई की दूकान की सूझी

किसी को मिठाई का चस्का पड़ जाए तो कहते हैं, किसी उद्देश्य से किसी के पास जाना या संपर्क करना

चाटे रूख बरे नहीं होते

(अक्सर ज़मायर के साथ) बड़े खाओ हैं कुछ नहीं छोड़ते, लूट खाते हैं

चातुर का काम नहीं पातुर से अटके, पातुर का काम ये है लिया दिया सटके

वेश्या का काम ही लोगों को मूर्ख बनाकर पैसा खींचना है

चातुर का क़र्ज़ मन में निस्तार

चालाक व्यक्ति ऋण ले कर वापस नहीं करता

चातुर की चिबिल्ली भली मूरख की नार से

बुद्धिमान की लौंडी होना मूर्ख की पत्नी होने से उत्तम है

चातुर की दूर बला

चालाक शख़्स किसी न किसी तदबीर से अपने आप को हर मुसीबत और बला से बचा लेता है

चातुर को चौ गुनी, मूरख को सौ गुनी

चतुर थोड़ा लाभ उठाते हैं और मूर्ख बहुत, चतुर को थोड़ी बात पर्याप्त है और मूर्ख को बहुत

चातुर नार नरकुढ़ से ब्याह होय पछताय, जैसे रोगी नीम को आँख मीच पी जाय

बुद्धिमान स्त्री मूर्ख से विवाह कर के पछताती है

चातुर तो बैरी भला मूरख भला न मीत, साध कहें हैं मत करो को मूरख से प्रीत

बुद्धिमान शत्रु मूर्ख दोस्त से अच्छा होता है इस लिए मूर्ख से दोस्ती नहीं करनी चाहिये

चावल खड़े रहना

(अविर) चावल का अध् गला रहना, चावल में कन्नी बाक़ी रहना

चावल की कनी नेज़ा की अनी

कच्चे चावल और नेज़ा की नोक मुज़र्रत में दोनों बराबर हैं

चावल पचे चावल

चावल जल्दी पच जाते हैं

चबूतरा ख़ुद कोतवाली सिखा देता है

ज़िम्मेदारी आदमी को काम स्वयं सिखा देती है, जब आदमी किसी मसले से दो चार होता है तो वह ख़ुद उसका समाधान ढूँड निकालता है

चचा चोर भतीजा क़ाज़ी

पारिवारिक मामला है

चचेरे ममेरे बड़ तले बहुतेरे

धनवान लोगों के बहुत रिश्तेदार बन जाते हैं

चकर्या चाकरी करके आप अपने हाथ बिकता है

नौकरी करना अपनी ख़ुशी आज़ादी और अपनी जान का बेचना है

चक्की में कोल डालोगे तो चून पाओगे

बिना काम किए कोई लाभ न होगा, पैसे ख़र्च करोगे तभी कुछ पाओगे

चक्की तले घर तेरा, निकल सास घर मेरा

मुँहज़ोर तथा उद्धत बहू के संबंध में कहते हैं

चक्की तले पौसेरा , निकल सास घर मेरा

इस मौक़ा पर कहते हैं जब बहू घर का इंतिज़ाम अपने हाथ में लेना चाहे , किसी चीज़ पर ज़बरदस्ती क़बज़ा करना, किसी की चीज़ का ख़्वाही नख़्वाही मालिक बनना

चकमक-दीदा खाए मलीदा

आँखें लड़ाने वाली औरत अच्छे अच्छे खाने खाती है

चल बुरे भले को चिड़ा आएँ

बदी पर आए तो फिर क्या जिस को चाहा ऐब लगा दिया

चल छाँव में आती हूँ, जुमला पीर मनाती हूँ

ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयुक्त जो थोड़ी सी दौलत एवं धन पर इतरा जाए

चल मेरे चर्ख़े चर्रख़ चूँ कहाँ की बुढ़िया कहाँ का तूँ

एक बढ़िया अपनी बेटी से मिलने गई, जंगल में उसे शेर चीता और भेड़ीया और दूसरे जानवर मिले इस ने अपनी जान उन से ये कह कर बचाई कि वो वापसी पर मोटी होकर आएगी, तब खाना वापसी पर वो एक चरखे में बैठ गई और जब कोई जानवर मिलता तो ये फ़िक़रा कह देती वो घबरा कर भाग जाता

चल न सकूँ मिरा कुद्दन नाम

ताक़त से ज़ियादा दावा करने वाले बच्चे के लिए प्रयुक्त, उलटी बात, नाम बड़ा और ख़ूबी कुछ नहीं

चल न सकूँ मिरे नौ सौ नख़रे

बेकार में गपशप करने वाले या आलसी बातूनी व्यक्ति के लिए प्रयुक्त; बिना मेहनत ज़्यादा माँग

चला चली का सौदा प्यारे भला भली कर लो

मौत आने वाली है कोई नेक करलो , दुनिया सराय फ़ानी है कोई नेक काम करलो

चला चली की राह में भला भली कर लो

मौत आने वाली है कोई नेक करलो , दुनिया सराय फ़ानी है कोई नेक काम करलो

चलत फिरत धन पाइए बैठे देगा कौन

मेहनत से फ़ायदा होता है घर बैठे खाने को नहीं मिलता

चल-चख़ी

अभागा नामुराद, बेहूदा

चले न जाए आँगन टेढ़ा

जब किसी काम को करने की युक्ति न जानता हो परंतु उसके लिए साज़-ओ-सामान को दोष दे तब कहते हैं

चले राँड का चर्ख़ा और बुरे का पेट

अभागी रांड को हर समय परिश्रम कर के भोजन करना पड़ता है और दुष्ट मनुष्य को असंयम होने की वजह से दस्त लगे रहते हैं

चली चली बी माखों यहाँ तक आएँ

फैलते फैलते यहाँ तक बात फैली

चली चली कहाँ गई सौत के पीहर

दुश्मनों से नेकी की उम्मीद रखना

चलनी में गई दूहने कर्म का क्या दोश

आप बेवक़ूफ़ी का काम करे तो इस में क़िस्मत का क्या क़सूर

चलो सखी वहाँ चलें जहाँ बसें बृज राज, गौ-रस बेचत हरि मिलें एक पंथ दो काज

स्त्रियों का कथन है कि वहाँ अर्थात मथुरा जाने से दूध भी बिक जाता है और कृष्ण जी का दर्शन भी हो जाता है

चलता-फिरता न मरे बैठा मर जाए

काहिल आदमी जल्दी मरता है, चलने फिरने वाला जल्द नहीं मरता, बहुत एहतियात करने वाला कभी कभी मर जाता है और एहतियात न करने वाला ज़िंदा रहता है

चलते चोर लँगोटी लाभ

चोर को भागते समय जो मिले वही बहुत

चलते हाथ सुलूक कर लो

जब तक बल है अच्छे काम कर लो

चलती का नाम गाड़ी

जब तक काम ठीक है तब तक का ही नाम है

चलती का नाम गाड़ी नहीं ईंधन

कोई चीज़ जब तक काम दे तब तक अच्छी है नहीं तो कुछ भी नहीं

चलती का नाम गाड़ी, गाड़ी का नाम ओखली

कोई वस्तु जब तक काम दे तब तक अच्छी है वर्ना बेकार

चलती का फेरा

मौत की कशमकश, प्राणांत की स्थिति

चलती में कौन कसर करता है

हर व्यक्ति अपने रो'ब और दबदबे से पूरा लाभ उठाता है, कोई कसर नहीं करता

चलती फिरती छाँव है कभी इधर कभी उधर

सांसारिक वैभव क्या है, कभी किसी को मिलता है, कभी किसी को मिलता है

चमड़ी जाए मगर दमड़ी न जाए

कृपण अर्थात कंजूस के प्रति कहते हैं, वह चाहे भूखों मरे पर धन नहीं ख़र्च करता

चमार का नाम जग जतन

तुच्छ होकर उत्कृष्टता का दावा

चमार के देवता को चप्पल की पूचा चाहिये

जो जैसा है वैसा ही उसके साथ व्यवहार किया जाना चाहिए

चमार के कोसे ढोर नहीं मरते

कोई आदमी अगर अपने स्वार्थवश दूसरे का बुरा चाहे, तो उससे कुछ होता नहीं हैं

चमार की छोकरी चंदन नाम

विपरीत नाम, अनुचित बात या कार्य

चमार की जोरू और टूटी जूनी

गंदी बात, अनुचित बात

चमार को 'अर्श बेगार उतरती है

विवश या निर्धन की हर स्थान पर दुर्भाग्य है

चमार को चमड़े का सिक्का

जैसा आदमी होता है उसी के अनुसार इनाम पाता है

चमार को दीवाली में भी बेगार

बदक़िस्मत आदमी के लिए कहते हैं जिसे कहीं भी फ़ायदा न हो

चमार-चर्म का यार

हर कोई अपना पेशा पसंद करता है

चमारों के कोसे ढोर नहीं मरते

श्राप देने से किसी की हानि नहीं होती

चंबेली चाव में आई लड़के बाले साथ लाई

(ओ) कमीने को मुंह लगाओ तो सर पर चढ़ता है

चमगादड़ के घर आई चमगादड़ आ बुवा लटक रहें

बदों की सोहबत से नेकों पर आफ़त आती है बुरे नेकों के बहकाने और बिगाड़ने वाले होते हैं, जब किसी मेहमान को साहिब ख़ाना की वजह से बिप्ता उठानी पड़े यानी जो तकलीफ़ साहिब ख़ाना पर गुज़रे वही ये भी बर्दाश्त करे या रंज-ओ-तकलीफ़ पर क़नाअत करने पर भी कहते हैं

चमगादड़ के घर मेहमान आए, हम भी लटकें तुम भी लटको

जैसे व्यक्ति के घर जाओगे वैसा ही सम्मान पाओगे, समाज जैसा करे वैसा ही करो

चंपा के दस फूल चंबेली की एक कली, मूरख की सारी रात चातुर की एक घड़ी

थोड़ी अच्छी चीज़ मामूली बहुत सी चीज़ से बेहतर होती है

चम्पा के दस फूल चंबेली की एक कली

थोड़ी अच्छी वस्तु साधारण बहुत सी वस्तुओं से बहुत अच्छी होती है

चना और चुग़ल मुँह लगा छुटता नहीं

चने खाने और चुग़लख़ोर की बातें सुनने में बड़ा मज़ा आता है और इन की आदत पड़ जाती है तो वह छूटती नहीं है

चना भट को नहीं फोड़ सकता

निर्बल बलवान का कुछ नहीं कर सकता, कमज़ोर ज़बरदस्त का कुछ नहीं कर सकता

चना चबा लो या शहनाई बजा लो

दोनों काम एक साथ नहीं होसकते ये इस मौक़ा पर कहा करते हैं जब कोई दो काम एक दूसरे के मुख़ालिफ़ एक ही वक़्त में करना चाहता है

चना डाल कर खाने में साझा

मामूली काम के लिए बड़ी मज़दूरी, छोटी पूँजी के साथ बड़ी भागीदारी नहीं मिलती

चना कहे मेरी ऊँची नाक घर दलिये दौ घर राड़, जो खावे मेरा एक टूक पानी पीवे सौ सौ घूँट

चने के दिलने की आवाज़ बहुत दूर तक जाती है और उसे खा कर बहुत प्यास लगती है

चना मर्द-नाज है

चना जवाँ मर्दों की ख़ुराक है, चना सभी अन्नों से बढ़कर पौष्टिक होता है

चंचल नार छैल से लड़ी खन अंदर खन बाहर खड़ी

आशिक़ माशूक़ लड़ें तो बहुत बेक़रार रहे हैं

चंचल नार की चाल छुपे नाहीं नीच छुपे न बढ़पन पाए, जोगी का भेक नीक धरो कोई क्रम छुपे ना भभूत रमाए

कमीनी स्त्री चाल से ही प्रतीत हो जाती है, कमीना चाहे कितना बड़ा हो छुप नहीं सकता

चंडाल न छोड़े मक्खी, न छोड़े बाल

चंडाल के खाने में से मक्खी या बाल निकल आए तो वो परवाह नहीं करता, हर प्रकार की वस्तु को खा जाता है

चंदन के पेड़ पर नाग का बसेरा

अच्छी वस्तुओं पर बुरे लोगों का क़ब्ज़ा, अच्छी जगह पर बुरे लोगों के हस्तक्षेप के अवसर पर कहा जाता है

चंदन पड़ा चमार के नित उठ कूटे चाम, रो रो चंदन मही फिरे पड़ा नीच से काम

अच्छी चीज़ नाक़द्र शनास के हाथ लग जाये-ओ-वो क़दर नहीं करता और फ़ुज़ूल कामों में इस्तिमाल करता है

चने चबाओ या शहनाई बजाओ

दो अलग प्रकार के काम एक ही वक़्त में अच्छे नहीं हो सकते

चने परमल वाला है

ज़लील आदमी है, विनम्र व्यक्ति है

चा-निस्बत ख़ाक रा बा 'आलम-ए-पाक

पृथ्वी और आकाश में क्या संबंध

चप्पे भर की कोठरी मियाँ मुहल्ला दार

थोड़ी पूंची पर इतराने या हैसियत कम और हौसला बड़ा होने के मौक़ा पर कहते हैं

चराग़ गुल, पगड़ी ग़ाइब

उस समय के लिए प्रयुक्त है जब किसी अच्छी स्थिति के बाद उस की उल्टी स्थिति हो जाए

चराग़ जला, पूत गला

लड़के जब खेलते हैं और एक की जीत दूसरे के सिर हो जाती है तो शाम के बाद माँगने पर यह कहते हैं, मतलब यह है कि अब माँगने का समय नहीं रहा

चराग़ के नेचे अँधेरा

ऐसे अवसरों पर उपयोग किया जाता है जहाँ आपके क़रीबी लोग किसी भी अच्छाई या लाभ से वंचित हों या दूसरे लोगों को फ़ायदा पहुँचे और अपने लोग महरूम रहें

चराग़ में बत्ती आँख पे पट्टी

शाम होते ही सोने की तैयारी शुरू कर दी

चराग़ में बत्ती पड़ी लाडो मेरी तख़्त चढ़ी

उस व्यक्ति के संबंध में कहते हैं जो काहिली की वजह से शाम में जल्दी सोने की तैय्यारी करे

चराग़ रौशन मुराद हासिल

चोर कहते हैं कि जब चिराग़ रौशन हों यानी रात पड़े तो काम बनता है

चराग़ से चराग़ जलता है

ज्ञान से ज्ञान का उजाला फैलता है, संतान से संतान बढ़ती है, एक समर्थ व्यक्ति से दूसरे को सहायता मिलती है

चराग़ तले अँधेरा

ऐसे अवसर पर उपयोग किया जाता है जहाँ आप के क़रीबी लोग किसी भी अच्छाई या लाभ से वंचित हों या दूसरे लोगों को लाभ मिले और अपने लोग वंचित रहें, आँख पर लापरवाही की पट्टी

चराग़-ए-मुक़्बिलाँ हरगिज़ न मीरद

सौभाग्य का चिराग़ कभी गुल नहीं होता, जब तक क़िस्मत किसी का साथ देती है उस वक़्त तक उसके सभी काम ठीक होते हैं

चराग़-ए-मुर्दा कुजा शम'-ए-आफ़ताब कुजा

निम्न और उच्च में क्या संबंध

चरख़ा बना, सूत ख़ुदा देगा

कोई साधन पैदा कर, अगर कोई कमी होगी तो अल्लाह उसे भी पूरा कर देगा

चर्सी यार कस के दम लगाया खिसके

नशे-बाज़ों को अपने नशे से मतलब रहता है दम लगाया और खिसक गए

चश्म-ए-बद दूर, आँखें मोती चूर

प्रार्थना के रूप में प्रयोग किया जाता है और किसी वस्तु की प्रशंसा के लिए कहते हैं, कि इन मोती जैसी सुंदर आँखों को किसी की बुरी नज़र न लगे, एक तरह की शुभकामना

चस्का दिन दस का, पराया ख़सम किस का

दोस्ती का मज़ा कुछ दिनों का होता है, पराया आदमी अपना नहीं बनता

चट मंगनी पट ब्याह

किसी काम को जल्द से जल्द और बिना सोचे समझे करने के अवसर पर बोलते हैं

चट मेरी मंगनी पट मेरा ब्याह, टूट गई टंगड़ी रह गया ब्याह

मानवीय कामों की या संसार की अल्पकालिकता और भविष्य के अविश्वास को प्रकट करने के अवसर पर बोलते हैं कि समय या युग बदलते देर नहीं लगती, आदमी योजना बनाता है, पर भविष्य में क्या होगा, कोई नहीं जानता

चटोरा खावे अपना घर, बटोरा खावे दोनों घर

पेटू तो खा पी कर अपना घर उजाड़ता है मगर जमा करने वाला अपना भी और दूसरे का भी

चटोरा कुत्ता, अलौनी सिल

लालची कुछ भी नहीं छोड़ता सिल तक चाट जाता है, चटोरे आदमी को जो मिल जाए वही बहुत है, चटोरे आदमी को जब कहीं निराश होना पड़े तब भी कह सकते हैं।

चटोरी खोदे अपना घर, बटूरी खोजे दूजा घर

चटोरा आदमी अपना माल खाता है, जमा करने वाला दूसरों का माल तकता है

चटोरी ज़बान दौलत की बान

चटोरा आदमी कभी अमीर नहीं हो सकता

चटोरी ज़बान, दौलत का ज़ियाँ

चटोरा आदमी कभी अमीर नहीं हो सकता

चौबे गए थे छब्बे होने दूबे हो आए

कोई तरक़्क़ी के लिए कुछ काम करे और बजाय तरक़्क़ी के तनज़्ज़ुल हो जाये तो कहते हैं

चौबे मरें तो बंदर हों, बंदर मरें तो चौबे हों

चौबे मथुरा से बाहर नहीं निकलते और वहाँ बंदर भी बहुत हुए हैं

चौदहवीं रात के चाँद को गहन लगा

पूर्ण चंद्र को ग्रहण लगा, जब किसी का ऐसा अनिष्ट हो जाए जो होना नहीं चाहिए था, तब कहते हैं

चौधरी हो या राव जब काम न दे ऐसी तैसी में जाओ

कोई बड़े से बड़ा हो जब काम ना आया तो निकम्मा है

चौकी गाँव वालों को लूट खाती है

पुलिस की चौकी आम तौर पर वहाँ स्थापित की जाती है जहाँ लोग बहुत शरारती हों, पुलिस वाले अपने खाने का ख़र्च आम तौर पर उन्हीं लोगों से पूरा करते हैं

चौकीदार सोए डाकू मारे

अगर चौकीदार सौ रहे तो चोरी ज़रूर होती है

चौरी रहे तो तेल निकले

मूल वस्तु होनी चाहिए सब काम हो जाते हैं, रुपया होना चाहिए

चे पिद्दी चे पिद्दी का शोरबा

(अवमानना) वह क्या और उसका सामर्थ्य क्या, उसकी वास्तविकता ही क्या

चेले चीनी हो गए गुरू गुढ़ ही रहे

शागिर्द तो तरक़्क़ी कर गए उस्ताद वहीं के वहीं रहे

चेले लावें माँग कर बैठा खाए महंत, राम भजन का नाम है पंथ

भजन नाम को है ये सब पेट भरने के तरीक़े हैं, चेले मांग कर लाते हैं, गुरु बैठे खाते हैं

चेना जी का लेना चौदह पानी देना, बाव चले तो लेना न देना

चेना की खेती के संबंध में कहा गया है कि वह एक मुसीबत की चीज़ है

चेरी सब के पाँव धोवे, अपने धोती लजावे

दूसरों की सहायता करता है अपने स्वजनों की नहीं करता

छः चावल, नौ पखाल पानी

चीज़ थोड़ी दिखावा बहुत, छोटा एवं तुच्छ काम बड़ा प्रबंध, साधारण काम के लिए बहुत आडंबर

छः महीने मिमियारई तो एक बच्चा बियाई

कोलाहल एवं वावेला बहुत और परिणाम मामूली निकले तो कहते हैं

छाँटे और ऊँट निगल जाए

थोड़े में ईमानदारी और बहुत में बेईमानी

छाज बोला तो बोला छलनी भी बोली जिस में बहत्तर छेद

लो ऐबदार भी बेऐब की बराबरी करने लगा, जब कोई ऐबदार हो कर साफ़ लोगों में बोलता और दख़ल देता है तो इस की निसबत कहते हैं

छाज बोले तो बोले छलनी भी बोली जिस में सत्तर छेद

जब कोई ऐबदार हो कर साफ़ लोगों में बोलता और दख़ल देता है तो इस की निसबत कहते हैं, बेऐब एतराज़ करे तो करे लेकिन ऐबदार को एतराज़ करने का कोई हक़ नहीं

छाती का सौदा है

साहस का कार्य है, हौसले का काम है

छाती पर बाल नहीं, भाल से लड़ाई

कमज़ोर हो कर बहादुर से मुक़ाबला करना

छाती पर धर के कोई नहीं ले जाता

मृत्यु के बाद सब यहीं पड़ा रह जाएगा

छाया बड़ी चीज़ है

आश्रय बड़ी चीज़ है

छब गठ्ड़ी में सूरत तबाक़ में

सुंदरता वस्त्रों पर निर्भर करती है (गठरी) में वस्त्र रखे जाते हैं और यौवन अच्छे भोजन पर निर्भर करता है (रिकाब में परोसा जाता है)

छछूँदर के सर में चंबेली का तेल

अनमेल बात या काम पर भी कहते हैं

छछूँदर के सर में फुलेल

जब तुच्छ या कम श्रेणी का व्यक्ति अच्छी वस्तु प्रयोग करे तो कहते हैं, अच्छी वस्तु बड़े को नहीं चाहिए

छदाम में लड़ाई पैसे में सुग्घड़

छदाम का झगड़ा पैसे में फ़ैसल होजाता है

छैल छींट, बग़ल में ईंट

ऐसा व्यक्ति जो बहुत शौक़ीनी अंदाज़ से रहता हो, पर उस के पल्ले कुछ न हो

छैला फिरे गली गली, जेब में नहीं खली की डली

पास कुछ भी नहीं शेखी और नमूद बहुत हो तो कहते हैं

छल का फल बुरा होता है

धूर्तता और धोखे का परिणाम बुरा होता है

छलनी चम्मा, घोड़ लगम्मा काएथ गुलम्मा या तीनों नहीं कोई कम्मा

छलनी का चमड़ा, घोड़े की लगाम और कायथ नौकर किसी काम के नहीं होते

छलनी दोसे सूप को जिस में बहत्तर छेद

जिसमें स्वयं खोट हो वह दूसरों में क्या खोट निकाले, अपनी बड़ी त्रुटि को न देख कर दूसरों की साधारण सी त्रुटि को देखना

छलनी क्या बोले जिस में बहत्तर साै छेद

जिसमें स्वयं खोट हो वह दूसरों में क्या खोट निकाले, अपनी बड़ी त्रुटि को न देख कर दूसरों की साधारण सी त्रुटि को देखना

छलनी क्या कहे सोप को कि जिस में नो सौ छेद

बेअमल इंसान के मुताल्लिक़ कहते हैं जो दूसरों को नसीहत करता हो और ख़ूब उयूब में मुबतला हो

छलनी में दूध दूहें कर्ग का क्या दोश

हमाक़त का काम ख़ुद करें और तक़दीर को इल्ज़ाम दें, ख़ुद ही ग़लती करे तो क़िस्मत का क्या क़सूर

छलनी में दूध दूहें कर्ग को रोएँ

हमाक़त का काम ख़ुद करें और तक़दीर को इल्ज़ाम दें, ख़ुद ही ग़लती करे तो क़िस्मत का क्या क़सूर

छप्पर पर फूस नहीं डेवढ़ी पर नक़्क़ारा

कोई अति निर्धन हो कर दिखावा करता है तो कहते हैं

छप्पर पर फूस नहीं रहा

बहुत ग़रीबी है, दिवालिया हो गया, बहुत कंगाल हो गया

छटाँक चून, चौबारे रसोई

डींग हाँकने वाले के संबंध में बोलते हैं कि तनिक चीज़ों पर भी इतराने लगता है

छटाँक धनिया ख़ैर आबादी कोठी

कम सरमाया पर बहुत शेखी मारने वाले की निसबत बोलते हैं

छटी न चिल्ला हराम का पिल्ला

अगर कोई बच्चे की जन्म पर दावत न दे तो व्यंग के रूप में कहते हैं

छटी न चिल्ला मुवा हरामी पिल्ला

अगर कोई बच्चे की जन्म पर दावत न दे तो व्यंग के रूप में कहते हैं

छटी न सत्वाँसा , मेरा लाडला नवासा

देना ना लेना ख़ातिरदारी बहुत यानी ख़ुशक मुहब्बत जताई

छटी न सत्वाँसा अमीर-उल-उमरा का नवासा

मामूली हैसियत का हो कर अपने आप को बहुत कुछ समझे तो कहते हैं

छत्रपति, घटे पाप, बढ़े रती

जब बच्चा छींके तो हिंदू महिलाएँ कहती हैं

छत्री का भगत न मूसल का धनक

जातीय गुण-दोष या परंपरागत गुण-दोष नहीं जा सकते

छट्टी के पोतड़े, अब तक नहीं धुले

अभी अनुभवहीन है, अभी कल का बच्चा है

छत्तीस प्रकार के भोजन में सत्तर दो बहत्तर रोग भरे रहते हैं

बहुत खाने से इन्सान प्रायः बीमार रहता है

छेदी मूली ख़ूब बैठती है

अलग काम बिना सम्मिलित के दिल चाहने पर होता है

छेली जान से गई , खाने वालों को स्वाद न आया

जब किसी की मेहनत की कोई दास ना दे तो कहते हैं, हमारी जान गई आप की अदा ठहरी

छब्बे होने गए थे दूबे रह गए

तरक़्क़ी की कोशिश में तनज़्ज़ुल नसीब हो तो ये मिसल बोली जाती है, बिलउमूम चौबे के साथ मुस्तामल

छींका टूटा बिल्ली के भागों

रुक: बिल्ली के बकहागों छींका टूटा

छींके एक नाक काटे

इस मौक़ा पर तंज़न बोलते हैं कोई शख़्स अधूरा काम कर के बाक़ी दूसरे के लिए छोड़ दे

छींकते गए छींकते आए

(हिंदू) बदशगुनी का बुरा ही नतीजा होता है, जैसी बदशगुनी से गए थे, वैसे ही पछताए

छींकते ही नाक काटी

प्रकट होते ही दंडित किया, छींकते ही काम बिगड़ा

छीले चार, बघारे पाँच

इस कहावत का प्रयोग सास उस बहू के लिए करती है जो मूर्ख होने पर भी अपने आप को बुद्धिमान समझे

छिनाल का बेटा, बबुआ रे बबुआ

जब कोई चरित्र-भ्रष्ट स्त्री अपने लड़के को बहुत प्यार करती है तब भी व्यंग में ऐसा कहते हैं

छिनाल लुगाई चातुर सिपाही छुपे नहीं रहते

भ्रष्ट-आचरण की स्त्री एवं चतुर सिपाही, दोनों अपने आप को किसी स्थिति में छुपा नहीं सकते, इन की विशेषताएँ उजागर हो ही जाती हैं

छोड़ चले बंजारे की सी आग

मतलब निकल जाने पर जब कोई साथ छोड़ कर चल देता है, तब कहते हैं

छोड़ जाट, पराई खाट

अत्याचारी से अत्याचार न करने के लिए ऐसा कहा जाता है

छोड़ झाड़, मुझे डूबन दे

जब कोई आदमी ग़लत काम करने का इरादा कर के उसे न करना चाहे और उसके लिए कोई बहाना बनाए कि अब मैं अमुक कारण से ऐसा नहीं कर रहा हूँ तो कहते हैं

छोड़े गाँव का नाम क्या

जिस स्थान या काम को छोड़ दिया उस से क्या वास्ता, जिस से कोई संबंध नहीं रहा उस के बारे में बात करना व्यर्थ है

छोड़ो बी बिल्ली चूहा लंडूरा ही भला

जो हानि कर दिया सौ कर दिया अब पीछा छोड़ो, हम जैसे भी हैं अच्छे हैं

छोटा घर बड़ा समधियाना

नाम बड़ा और हैसियत कुछ नहीं, मामूली हैसियत का लेकिन संबंध बड़ों बड़ों से

छोटा मुँह, बड़ा निवाला

किसी की ऐसी चीज़ को हथियाना जो पचाई न जा सके

छोटा मुँह, बड़ी बात

अपनी योग्यता से अधिक बड़ी बात करना, प्रोत्साहन से अधिक दावा करना, बड़ों के सामने धृष्टता दिखाना

छोटा सब से खोटा

छोटा बहुत ख़राब होता है

छोटा सो मोटा

बनियों और महाजनों के संबंध में कहते हैं

छोटे से ग़ाज़ी मियाँ, बड़ी सी दुम

लड़कों से हँसी में उस समय कहते हैं जब वह कोई बहुत ढीला ढाला वस्त्र पहन लेते हैं

छोटी नंद अँगिया का बंद, बड़ी नंद बिजली बसंत

छोटी नंद से प्रायः दुल्हन का प्यार होता है और बड़ी से शत्रुता

छोटी सी बछिया, बड़ी सी हत्या

जो पाप बड़े के मारने से लगता है, वही छोटे के मारने से भी लगता है, क्यूँकि छोटा सा पाप भी ऐसा ही होता है जैसे बड़ा, बुरा कर्म तो हर हालत में बुरा ही होता है

छोटी-खौटी

कहा जाता है कि छोटे बच्चे कम समझदार होते हैं

छुपी घात में सुवर खुले खेत में गीदी

इस शख़्स के मुताल्लिक़ कहते हैं जो घर वालों पर बेजा रोब जमाए और बाहर वालों से दब जाये (कब : घर में शेर बाहर भीड़

छुरी भली न कटारी

शत्रु शत्रु सब समान, दोनों ही जान-लेवा हैं

छुरी पाता हूँ तो आप को नहीं पाता, आप को पाता हूँ तो छुरी नहीं पाता

जान का दुश्मन है मगर कुछ बस नहीं चलता, जब तक ख़ुदा न चाहे कोई किसी को हानि नहीं पहुंचा सकता

छुरी पर कद्दू, कद्दू पर छुरी

हर स्थिति में बात वही है, हानि निर्धन ही की होती है

छुरी तले दम लो

अंत तक धैर्य से काम लो

छुटी घोड़ी भुसौरे खड़ी

बेकारी में पेट की फ़िक्र

छूँछा का संग न साथी भेला दुवारे झूम ले हाथी

ग़रीब का कोई दोस्त नहीं अमीर के घर पर हाथी झूमते हैं अमीर को हर कोई मिलता है

छूछा किन पूछा

ग़रीब को कोई नहीं पूछता

छूछे फटके उड़ उड़ जाए

कम बुद्धि एवं कौशल वाले व्यक्ति का परीक्षण करें तो वह परीक्षण में खरा नहीं उतरता

छूछी हाँडी बाजे टन टन

रुक : थोथा चना बाजे घुन्ना

छूछी कढ़ाई मज्र का फोड़न

ज़ंगार ख़ाली कड़ाई को तोड़ देता है, चीज़ इस्तिमाल में रहे तो दरुस्त रहती है यूंही पड़े रहने से ख़राब हो जाती है

छूट भलाई, सारे गुन

भलाई के अलावा सारी अच्छाइयाँ हैं, किसी की प्रशंसा हो रही हो तो निंदा के तौर पर व्यंग्यात्मक रूप से कहते हैं

छूटल घोड़ा भुसोले ठाड़

घोड़ा छूट जाये तो थान पर आता है

छूटे गाँव से नाता क्या

जिस से ताल्लुक़ ना रहा फिर उस की अच्छाई बुराई से किया ग़रज़

छूटो बैल भुसोरी में

छोटा हुआ बैल खरली पर जाता है

छुवा और मुवा

शरारती आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं कि जिस की तरफ़ तवज्जोह की उसको तबाह कर दिया

चिड़ा मरन गँवार की हाँसी

किसी को तकलीफ़ पहुंचे, किसी को लुतफ़ आए-ए-, हमारी जान गई आप की अदा ठहरी, किसी का नुक़्सान होता है कोई ख़ुश होता है

चिड़ी मार टोला भाँत भाँत का पंछी बोला

इस मजलिस के मुताल्लिक़ कहते हैं जहां हर एक मुख़्तलिफ़ रए-ए-दे, जहां मुख़्तलिफ़ अलरए-ए-हूँ, वो मजलिस जहां तरह तरह की बोलियां बोली जाएं

चिड़िया अपनी जान से गई खाने वाले ने स्वाद न पाया

इस मौक़ा पर कहते हैं जब नौकर काम करते करते मरजाते और मालिक ख़ुश ना हो या बीवी काम करती करती मर जाय और मियां को पसंद ना आए-ए-

चिड़िया अपनी जान से गई लड़का ख़ुश न हुआ

इस मौक़ा पर कहते हैं जब नौकर काम करते करते मरजाते और मालिक ख़ुश ना हो या बीवी काम करती करती मर जाय और मियां को पसंद ना आए-ए-

चिड़िया जी से गई और राजा ने कहा अलौनी खाई

रुक : चिड़िया अपनी जान से अलख

चिड़िया करे ख़ोंचा चड़ा करे नोचा

बीवी बेचारी तो थोड़ा थोड़ा करके जमा करती है मियां उड़ा डालते हैं , कमज़ोर की निसबत ज़बरदस्त से ज़्यादा नुक़्सान पहुंचता है

चिड़िया की जान गई, लड़के का खिलौना

किसी के दुख की परवाह न कर के जब कोई उल्टा उस पर हँसे तो यह कहावत कहते हैं

चिड़िया की जान गई खाने वाले को मज़ा न मिला

रुक : चिड़िया अपनी जान से गई अलख

चिड़िया को शाहीन से कोथ

ग़रीब को अमीर से क्या काम

चिड़िया मरन गँवारन हाँसी

बेवक़ूफ़ के सामने सारी ख़ैर ख़्वाही गंवाई है या एहसान ज़ाए होने की निसबत बोलते हैं

चिड़ियों का मरन गँवारों का हाँसा

रुक : चिड़िया मरण गँवारिन हांसी

चील अंडा छोड़ती है

भयंकर गर्मी है

चील के घर में मास की धरीड़

किसी नाक़ाबिल एतबार शख़्स पर एतबार करने के मौक़ा पर मुस्तामल

चील के घर पारस होता है

चील के घर में ही सोना मिलता है

चील के घोंसले में मास कहाँ

फ़ुज़ूलखर्च के पास रुपया मिलना दुशवार है, मुस्रिफ़ हमेशा तंगदस्त रहता है

चीज़ न रखे आपनी चोरों गाली दे

जो शख़्स अपनी चीज़ को सेंत सिनहाल कर ना रखे और दूसरों पर इल्ज़ाम लगाए उस की निसबत कहते हैं

चिकना देख फिसल पड़े

किसी के रूप-यौवन पर मुग्ध हो जाने पर कहते हैं

चिकना घड़ा बूँद पड़ी ढल गई

निर्लज्ज पर अभिशाप एवं धिक्कार का कुछ असर नहीं होता

चिकना मुँह पेट ख़ाली

मुंह पर रौनक पेट का अल्लाह ही बेली, ज़ाहिरी टीम टॉम की निसबत कहते हैं

चिकना मुँह सब चाटते हैं

ख़ुशहाल की सब जगह ख़ातिर होती है

चिकनाया फ़क़ीर मख़्मल का लंगोट

मालदार चुफा नहीं रहता

चिकने गाल तेलिनियाँ के और जरे बरे भुरजिनियाँ के

व्यवसाय का असर मनुष्य पर हो जाता है

चिकने गलवा मलवा के

माल-टाल खाने वाले के चिकने गाल होते हैं

चिकने घड़े पर बूँद नहीं ठहरती

बेग़ैरत को पर्वा नहीं होती

चिकने घड़े पर बूँद पड़ी और फिसल पड़ी

रुक : चिकना घड़ा बोन पड़ी अलख

चिकने घड़े पर पानी

बेशर्म को शर्म आना असंभव बात है, बेशर्म शर्मिंदा नहीं होता

चिकने घड़े पर पानी ढलता

रुक : चिकना घड़ा बूंद पड़ी अलख

चिकने मुँह को सब चूमते हैं

अच्छे लोगों की अतिथि सत्कार सब जगह होती है

चिकनी-चुपड़ी बातों से पेट नहीं भरता

ये कहावत वहाँ कहते हैं जहाँ कोई कुछ न देकर केवल बातों में टाले

चिकनिया फ़क़ीर मख़्मल का लंगोट

शौक़ीन आदमी निर्धनता में भी शौकीनी से नहीं रुकता

चिल्लड़ चमोकन चिथड़ा ये तीनों बिपत का बख़रा

जवीं, थप्पड़ और चीथड़े ग़रीबों के हिस्से में आते हैं

चिल्लड़ चुनने से भगवा हल्का होवे

कोरे दिखावटी प्रयास से कहीं सिद्धि नहीं मिलती

चिल्लर चमोकन चिथड़ा ये तीनों बिपत का बख़रा

जवीं, थप्पड़ और चीथड़े ग़रीबों के हिस्से में आते हैं

चिल्वों के दर से कथरी नहीं छोड़ी जाती

किसी के ख़ौफ़ से तर्क मस्कन नहीं होसकता, ग़ैर के लिए अपनों से नहीं बिगाड़ी जाती

चित भी मेरी पट भी मेरी, अंटा मेरे बाप का

हर तरह से अपना मतलब निकालने और अपने अनुकूल बात तै कराने का प्रबंध, हर तरह अपना ही लाभ चाहना

चिट्ठी न परवाना मार खाएँ मुल्क बेगाना

हुकूमत की बदइंतिज़ामी और हाकिम की ग़फ़लत से बदमाश ख़्वाहमख़्वाह लागों को लौटते फिरते हैं

चिट्ठी न परवाना मार खाएँ मुल्क बिराना

हुकूमत की बदइंतिज़ामी और हाकिम की ग़फ़लत से बदमाश ख़्वाहमख़्वाह लागों को लौटते फिरते हैं

चिय्याँ सी गाँड पर हाथी का बै'आना

अदना शख़्स हो कर आला कामों का हौसला करने के मौक़ा पर कहते हैं

चोर और साँप दबे पर चोट करता है

चोर और साँप घिर जाएँ अथवा दब जाएँ तो हमला करते हैं वर्ना भाग जाते हैं

चोर और साँप की बड़ी धाक होती है

लोग उन के नाम से डरते हैं

चोर चकार चूके लेकिन चुग़ल न चूके

चोर उचक्कों के लिए संभव है कि चोरी छोड़ दें परंतु चुग़लख़ोर चुग़ली खाने से नहीं चूक सकता, वह चुग़ली करके ही रहता है

चोर चोरी कर गया, मूसलों ढोल बजा

इतनी कुप्रबंध है कि चोर खुल्लम-खुल्ला चोरी करते हैं

चोर चोरी से जाए, हेरा फेरी से न जाए

बुरी 'आदतों को कितना ही दबाया जाए परंतु वो रह-रह कर प्रकट हो उठती हैं

चोर चुरावे और गर्दन हिलावे

एक तो बुरा काम करे दूसरे मुकरे तो कहते हैं

चोर ढोर दोनों हाज़िर हैं

प्रमाण समेत चोर को पकड़ने पर कहा जाता है

चोर गठड़ी ले गया बेगारियों को छुट्टी हुई

जब बेमन से कोई काम किया जा रहा हो और किसी कारणवश उससे छुटकारा मिल जाय तब कहते हैं

चोर गठड़ी ले गया बेगारियों ने छुट्टी पाई

किसी हीले से मेहनत से बचना , मुसीबत टली, ख़लासी हुई

चोर जाने चोर की सार

चोर ही चोर की बात समझ सकता है इस लिए चोर पकड़ने के लिए चोर ही लगाना चाहिए

चोर जाने मंगनी के बासन

चोर को चोरी से ग़रज़ है इस को पर्वा नहीं माल कैसा है

चोर जाते रहे कि अंधियारी

बुरे स्वभाव वाला अवसर पाते ही बुरे काम करता ही है, जगत के नियम नहीं बदलते

चोर का भाई गट्ठी चोर

जो जैसा होता है उसके यार-दोस्त भी वैसे ही होते हैं

चोर का हाल सो मेरा हाल करना

अगर बात ग़लत हो तो मैं हर सज़ा भुगतने को तैयार हूँ

चोर का जी कितना

चोर थोड़ी सी बात से डर जाता है

चोर का माल सब खाए चोर की जान अकारत जाए

चोर का माल दूसरे उड़ाते हैं और चोर बेचारा मुफ़्त में फंसता है

चोर का मन बुक़्चे में

चोर की नज़र गठरी पर ही रहती है

चोर का मुँह चाँद सा

चोर की शक्ल से ही पता चल जाता है कि वो चोर है

चोर का सर नीचा

चोर किसी के सामने आँख उठाकर नहीं देख सकता, वह सदैव लज्जित रहता है

चोर का शाहिद चराग़

दीप के उजाले में चोर पहचान लिया जाता है इस लिए चोर उजाले में चोरी नहीं करता

चोर के दिल में चोरी

रुक : चोर के जी में अलख

चोर के हाथ में दिया

एक तो अपराध करना दूसरे खुले रूप से

चोर के ख़्वाब में बुक़चे

चोर को सोते समय भी चोरी ही का ख़याल रहता है, आश्य यह है कि जिस व्यक्ति का जो व्यवसाय होता है उस का ध्यान सदैव उसी तरफ़ होता है

चोर के मन में चोरी बसे

जिस की जो आदत होती है, वह छूटती नहीं

चोर के पेट में गाय, आप ही आप रंभाए

थोड़े से दबाव पर चोर अपना भेद खोल देता है, चोर अपनी घबराहट से अपनी पहचान करा देता है, आदमी का अपराध उसकी बातों से ही प्रकट हो जाता है

चोर खिड़की घर का नास

अगर बीवी ख़ावंद से छिपा कर ख़र्च करती हो या बदचलन हो या आश्ना को दे देती हो तो घर में कुछ नहीं रहता

चोर की अम्माँ घुटनों में सर डाल के रोए

अपनों की बुरी बात ज़ाहिर नहीं की जाती और जी ही जी में कुढ़ना पड़ता है इस की बरी हरकतें किसी से कह भी नहीं सकते

चोर की अम्माँ घुटनों में सर दे और रोए

अपनों की बुरी बात ज़ाहिर नहीं की जाती और जी ही जी में कुढ़ना पड़ता है इस की बरी हरकतें किसी से कह भी नहीं सकते

चोर की बूमड़ी सब से आगे

जो क़सूरवार होता है वो अपनी बेगुनाही साबित करने को ज़्यादा शोर मचाता है

चोर की दाढ़ी में तिनका

अपराधी अपने हाव भाव से पहचाना जाता है, अपराधी का अपने मुख बोल पड़ना या ‌‌‌दोषी का किसी तरह से अपना दोष प्रकट करना

चोर की जोरू कोने में मुँह दे कर रोती है

बेचारी चोर की पत्नी को हर समय अपने पति के पकड़े जाने की चिंता होती है

चोर को अंगारे मीठ

अपने बुरे काम को भी वह भला समझता है

चोर को चोर ही पहचाने

जैसे को तैसा ही पहचानता है

चोर को चोर ही सूझता है

हर व्यक्ति दूसरे को अपनी तरह का ही समझता है

चोर को पकड़े गाँठ से, छिनाल को पकड़े खाट से

चोर को चोरी करते और वेश्या को बुरा काम कराते पकड़ना चाहिए तो फिर सबूत काफ़ी होता है वर्ना निरा लांक्षन माना जाता है

चोर को पिंहाई दूर से सूझे

चोर जानता है कि जब पकड़ा गया तो जूते लगेंगे

चोर लाठी दो जने, हम बाप बेटे अकेले

बुज़दिल आदमी लुट जाये तो परिहास के रूप में उसे कहते हैं

चोर लेवे न शाह छेड़े

यानी बड़ी हिफ़ाज़त से है या ऐसी शैय है कि बज़ाहिर कुछ क़दर नहीं रखती मगर दरअसल बेशक़ीमत है

चोर सब घर ले मरे

पकड़े जाने पर वह अपने सब साथियों के नाम बता देता है, यहाँ तक कि निर्दोषों को भी फँसा देता है

चोर से कह चोरी कर शाह से कहे तेरा घर लुटा मुस्ता है

इस शख़्स की निसबत बोलते हैं जिस में लगाने बुझाने की आदत हो

चोर से कहे तू चोरी कर और साह से कहे तू जागते रहियो

ऐसे व्यक्ति के लिए कहा जाता है जो लड़ाई में स्वयं अलग रहकर दोनों पक्षों को उकसाता रहता है

चोर से कहें मूस, शाह से कहें जाग

इस के मुताल्लिक़ कहते हैं जो दोनों फ़रीक़ों में लगाई बुझाई कर के फ़साद करा देता है

चोर, जुवारी, गठ-कटा, जार और नार छिनार, सौ सौ सौगंध खाएँ जो मोल न कर इतबार

चोर, जवारी, गठ-कटा, चरित्रहीन मर्द, दुश्चरित्र औरत, ये कितनी ही सौगंध खाएँ कि बुरा काम छोड़ देंगे, कदापि 'एतबार नहीं करना चाहिए

चोरी और चतुराई

एक तो चोरी करना दूसरे बहाना बनाना

चोरी और मुँह ज़ोरी

अपने क़सूर पर नादिम ना हो कर धमकाना, अपने क़सूर पर नादिम ना होना

चोरी और सर ज़ोरी

अपनी ग़लती पर पछतावा न करके उल्टा दूसरे को दोषी ठहराना, अपनी ग़लती न समझना, अवज्ञा करना और अकड़ना, ढिठाई से सामना करना

चोरी और सरहंगी

रुक : चोरी और सर ज़ोरी

चोरी और सीना ज़ोरी

रुक : चोरी और सर ज़ोरी

चोरी बे-सुराग़ नहीं निकलती

बिना सुराग़ के चोरी का पता नहीं चलता

चोरी बे-थाँग नहीं होती

बिना मिले-जुले चोरी नहीं होती है अर्थात भेद मिलने से ही चोरी होती है

चोरी का गुड़ मीठा

मनुष्य-प्रकृति है कि उसे बाहर की अथवा निशुल्क चीज़ अच्छी लगती है

चोरी-ओ-सरहंगी

रुक : चोरी और सर हुंगी

चोरवा के मन बसे ककड़ी का खेत

चोर हमेशा चोरी की ही ताक में रहता है

चोट लगी पहाड़ की और तोड़ें घर की सिल

जब कोई बाहर का ग़ुस्सा घर पर उतारता है तब कहते हैं

चोटी कुतिया जलेबियों की रखवाली

रुक : चोटिटी कुतिया अलख

चोट्टी आई चीज़ छुपाओ लुत्री आई बात छुपाओ

चोरी की आदत औरत से घर की चीज़ों की निगरानी करनी चाहिए और चुगु़लखोर औरत के सामने राज़ की बात ना कहनी चाहिए

चुड़ेलों की शक्ल और मिज़ाज परियों का

सूरत चुड़ैलों की मिज़ाज परियों का, बदसूरती के बावजूद नाज़ व नख़रा

चुड़ैल पर दिल आ जाए तो वो भी परी है

प्रेमी रूप-कुरूप नहीं देखता, प्रेम अंधा है

चुल्लू भर पानी में डूब मरो

लज्जा दिलाने के लिये कहते हैं

चुल्लू भर पानी में गज़ भर न उछलो

थोड़ी पूँजी पर इतना ग़ुरूर न करो

चुल्लू चुल्लू साधेगा तो द्वारे हाथी बाँधेगा

थोड़ा थोड़ा बचाएगा तो अमीर हो जाएगा, थोड़ा थोड़ा पीने से ज़्यादा पीने की आदत हो जाती है, हर काम में आदत को बड़ा दख़ल होता है

चुल्लू चुल्लू साधेगा तो लोटे भर पर आवेगा

थोड़ा थोड़ा बचाएगा तो अमीर हो जाएगा, थोड़ा थोड़ा पीने से ज़्यादा पीने की आदत हो जाती है, हर काम में आदत को बड़ा दख़ल होता है

चुल्लू में समंदर नहीं आता

छटे सामर्थ्य वाले से बड़ा काम नहीं हो सकता

चुल्लू में समंदर नहीं समाता

छटे सामर्थ्य वाले से बड़ा काम नहीं हो सकता

चुल्लू में उल्लू और लोटे में गुड़गप

थोड़े नशा में आदमी मख़मूर और ज़्यादा में बिलकुल मदहोश और चकनाचूर हो जाता है

चुल्लू पानी डूब मरने को बहुत है

रुक : चुल्लू भर पानी डब मरने को बहुत है

चुल्लू पानी, तंग ज़िंदगानी

आर्थिक कष्ट में रहने वाले व्यक्ति का कहना

चुप रहूँ बावा कुत्ता खाए , बोलूँ तो माँ मारी जाए

किसी बात के करने से भी मुसीबत आए और ना करने से भी, हर तरह से मुश्किल का सामना हो तो कहते हैं

चुप सौ को हराए

इंसान मद्द-ए-मुक़ाबिल की बात का जवाब ना दे तो वो ख़ुद हार झुक मार कर चुप हो जाता है

चुप सो बला को टाले

ख़ामोशी हज़ार तरह की आफ़तों से बचाती है, चुप रहने में आदमी बहुत से उलझावों और ज़िम्मेदारीयों से बचा रहता है

चुप, आधी मर्ज़ी

कोई जवाब में चुप रहे तो समझते हैं कि वह मान गया है, चुप्पी आधी सहमति है

चुपड़ी और दो दो

उम्दा भी और ज़्यादा भी, हसब-ए-मंशा और बकसरत, कामयाबी और बहुत से फ़ाइदों के साथ (ऐसे मवाक़े पर मुस्तामल)

चुरावे नथ वाली, नाम लगे चेर कठी वाली का

अमीर क़सूर करे तो कोई कुछ नहीं कहता ग़रीब फ़ौरन पकड़ा जाता है

चुटिया को तेल नहीं पकौड़ों को जी चाहे

आवश्यक चीज़ों के लिए है नहीं फ़ालतू बातों पर ख़र्च करते हैं

चूँ क़ज़ा आयद तबीब अब्ला शवद

جب موت آتی ہے طبیب اندھا ہو جاتا ہے یعنی جب موت کا وقت آجاتا ہے تو طبیب کی بھی عقل ناکارہ ہو جاتی ہے، موت کا کوئی علاج نہیں اس وقت حکیم بھی بے وقوف بن جاتا ہے

चूहा बजावे चपनी और ज़ात जतावे अपनी

आदमी अपनी करतूतों से मालूम हो जाता है

चूहा बिल में समाता नहीं, कानों में बाँधा छाज

अपनी बसर ना होने की हालत में दूसरे का ज़िम्मा लिया, अव्वल गुज़ारा ही ना होता था ऊपर से और ख़र्च बढ़ा लिया, तंज़न उन को कहते हैं जो हैसियत से ज़्यादा शादी ब्याह पर ख़र्च करें

चूहा, बिल्ली का शिकार है

सबल एवं शक्तिशाली द्वारा सदैव निर्बल सताए जाते हैं

चूहे का बच्चा बिल ही खोदेगा

ख़ून का असर अवश्य होता है, हर व्यक्ति अपनी असल की तरफ़ जाता है

चूहे के हाथ हल्दी की गिरह लगी वो पंसारी बन बैठा

थोड़ी सी पूंजी हाथ लगने पर इतराना

चूहिया ज़रीह पर चढ़े से पाक नहीं होती

ज़ाहिरदारी से दिल की कसाफ़त दूर नहीं होती

चूहिय्या को जो देना हो वो बिल्ली को दे दो

कोई ऐसा तरीक़ा जिस से नतीजा जल्दी निकले इख़तियार करने के मौक़ा पर कहते हैं

चूका और गया

जिस ने ग़लती की, नुक़्सान उठाया, जो चूकता है वो हानि उठाता है

चूल्हा छोड़, भंसार में जाओ

एक मुसीबत से निकल कर दूसरी में फँसो

चूल्हा झोंके चादर हाथ

पँखा हाथ में है और चूल्हा झोंक रहे हैं बहुत नख़रे बाज़ हैं

चुल्हे आग न घड़े पानी

बहुत नाकारा है, उसका सत्यानाश हो

चूल्हे चक्की, सब ही काम पक्की

चतुर गृहिणी के लिए कहा जाता है

चूल्हे की न चक्की की

किसी काम की नहीं

चुल्हे की तेरी तवे की मेरी

अच्छी चीज़ अपने लिए और बरी दूसरे के लिए

चुल्हे से निकल कर भाड़ में गिरना

एक कठिनाई से बच कर दूसरी कठिनाई में गिरफ़्तार हो जाना

चुल्हे से निकल कर भाड़ में पड़ना

एक कठिनाई से बच कर दूसरी कठिनाई में गिरफ़्तार हो जाना

चून का हाकिम भी बुरा होता है

अदना से अदना हाकिम से भी डरना चाहिए

चून खाए भसंड होए तला खाए रोगी

आटा खाने वाला मज़बूत होता है ओ रमठाई खाने वाला बीमार रहता है

चून की सौत बुरी

(अविर) औरतें स्वत की बुराई में कहती हैं, सोकन बुराई की जड़ है

चून की सौत बुरी और साझे का काम

सोकन और साझे काम दोनों ही झगड़े की जड़ होते हैं

चूना और चमार कूटे ही ठीक रहता है

चूने को जितना ज़्यादा कूटें उतना ही मज़बूत होता है, चमार को जूते लगते रहें तो दुरुस्त रहता है

चूनी भी कहे मुझे घी से खाओ

साधारण अन्न को भी अच्छा बनाकर खाने में पैसा ख़र्च होता है

चूरा झाड़ खाओ लड्डू न तोड़ो

असल को बर्बाद नहीं करना चाहिये उस की आमदनी खानी चाहिये

चूतड़ को लगी धूपड़ी , बला छावे झोंपड़ी

जो लोग सामयिक आवश्यकता समाप्त हो जाने पर भविष्य में ऐसे अवसर के लिए चिंता एवं प्रबंध नहीं करते, उनके लिए यह कहावत कहते हैं

चूतिया मर गए, औलाद छोड़ गए

मूर्ख के बारे में कहते हैं जो काम ख़राब करे

चूतियों ने गाँव मारा है

क्या मूर्खों ने भी कभी कोई काम किया है?

च्यूँटी भी दबने पर काटती है

कमज़ोर व्यक्ति भी तंग आने पर मुक़ाबला करता है

च्यूँटी चाहे सागर थाह

सामर्थ्य से बाहर काम करने का धृष्ट प्रयास करना

च्यूँटी चली पराग नहाने

अपनी हैसियत से बढ़ कर काम करने की मौक़ा पर मुस्तामल

च्यूँटी के पर निकले और मौत आई

मृत्यु का समय निकट आ गया

च्यूँटी की आवाज़ 'अर्श पर

पीड़ित की आवाज़ का प्रभाव बहुत बड़ा होता है

च्यूँटी की आवाज़ 'अर्श तक

पीड़ित की आवाज़ का प्रभाव बहुत बड़ा होता है

च्यूँटी को मौत का रेला भी बहुत है

थोड़ी आपदा भी ग़रीब को बर्बाद कर देती है

च्यूँटी को मौत का तरेड़ा बस है

थोड़ी विपदा भी निर्धन को बर्बाद कर देती है

च्यूँटी को मूत पैराव

निम्न व्यक्ति कम धन में फूल जाता है

च्यूँटियों के घर नित मातम

गरीब को सदैव परेशानी ही रहती है

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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