साईसी-'इल्म दरिया है
किसी भी विद्या में महारत प्राप्त करना आसान नहीं है, हर एक विद्या एवं ज्ञान असाधारण गहराई एवं विस्तार रखता है जबकि साईसी विद्या को प्रायः बहुत साधारण और निम्न समझा जाता है, उसपर भी पूर्ण महारत रखना बहुत कठिन है
साँच को आँच
सत्य हानिरहित है, सच्च बोलने वाला नुक़्सान नहीं उठाता
साफ़ रह, बे-बाक रह
दियानतदार आदमी को किसी का ख़ौफ़ नहीं होता, जिस का हिसाब किताब ठीक हो उसे किसी का डर नहीं होता
साह के सवाए कम बख़्त के दूने
साहूकार तो सिर्फ़ एक के सिवाए बनाता है, बदबख़्त दोने बनानेकी कोशिश करता है और नुक़्सान अऔठाता है , लालची शख़्स के मुताल्लिक़ कहते हैं
साहू बटे वो भी साह
जो असल क़ीमत पर बेचे वो भी सौदागर है, माल रोके रखने से कीमत-ए-ख़रीद पर बेचना बेहतर है
साझा भला न बाप का और ताव भला न ताप का
साझा चाहे अपने बाप का ही क्यों न हो अच्छा नहीं होता और ताव (गर्मी या रोब) चाहे बुख़ार का ही क्यों न हो वो भी भला नहीं, अर्थात न तो किसी का साझा करें और न किसी का ताव सहें
साझे का काम बुरा
भागीदारी के कार्य में विवाद होता है, भागीदारी का परिणाम बुरा होता है
साझे की होली सब से भली
जब ज़्यादा लोग मिलते हैं, तो होली अच्छी तरह से मनाई जाती है, त्योहार या ख़ुशी का आनंद केवल संयोग और एकता से आता है
साझे की माँ गंगा न पावे
हिंदू धर्म में बेटे के ज़िम्मेदारी है कि माता-पिता की क्रिया-कर्म करें लेकिन जहाँ बहुत बेटे हों वह एक दूसरे की तरफ़ देखते रहते हैं और माँ क्रिया-कर्म से रो जाती है यह कि भागेदारी में नुक़्सान रहता है
साख लाख से अच्छी
अच्छी शौहरत-ओ-नेकनामी, दौलत से बेहतर है, ग़रीब जिस की साख हो बेएतिबार अमीर से अच्छ्াा है
साँभर जाए , अलोना खाए
ऐसी जगह रहे जहां कोई चीज़ आम हो और ना मिले . इस शिकस् पर फ़िक़रा है जो इफ़रात की जगह रह कर भी इस चीज़ से महरूम रहे जिस की इफ़रात थी (साँभर - एक झील जिस से नमक बनाते हैं)
सारा धड़ देखे नाचे मोर पाओं देख लजाए
मोर अपने सारे बदन को देख कर ख़ुशी से नाचता है मगर जब पांव पर नज़र पड़ती है तो रोता है, ख़ूओबीयों पर ख़ुशी होती है मगर ऐबों पर नज़र पड़ती है तो श्रम आती है
सारी के वास्ते आधी न छोड़ना
अगर पूओरा फ़ायदा ना पहुंच रहा हो तो थोड़े फ़ायदे को नज़रअंदाज ना करना चाहिए, सारी की हवस में आधे को ना जाने देना चाहिए
सास के आगे बहू की बड़ाई
बे-मौक़ा, अनुचित बात, नामुनासिब बात, ऐसी बात करना जिससे दूसरे को बुरा लगे जैसे सास के सामने बहू की बुराई करो तो ख़ुश होती है
सास न नंदी, आप ही आनंदी
घर में न सास है न नंद अकेली मौज में है क्यूँकि सास की तरह नंद भी बहू के लिए एक विपत्ति होती है
सात पाँच पकवा , न एक गूलर
(पक्वा - एक बेमज़ा जंगली फल है) एक गूलर सात पांच पिकोओं से बेहतर है एक अच्छ्াी चीज़ बहुत सी ख़राब चीज़ों से बेहतर है
साथ सो , पेट का दुख
औरत मर्द अगर अखटे स्वयं तो औरत हामिला हो ही जाती है और हमल की तकलीफ़ उठानी पड़ती है
सावन के अंधे को हर तरफ़ सब्ज़ा नज़र आता है
हर व्यक्ति अपनी परिस्थितियों के अनुसार सबको समझता है; जो स्थिति नज़र में बस जाती है वही स्थिति हमेशा सामने रहती है (क्योंकि सावन का महीना सीधे बारिश का होता है और वनस्पति-विकास अपने चरम पर होता है इसलिए जो व्यक्ति इस महीने में अंधा होता है वह यही समझता रह
सब धान बाईस पसेरी
सबके साथ यकसाँ सुलूक, मुकम्मल अदल-ओ-मुसावात और अच्छे बुरे की तमीज़ ना होने के मौक़ा पर कहते हैं
सब धान बारा पंसेरी
सबके साथ यकसाँ सुलूक, मुकम्मल अदल-ओ-मुसावात और अच्छे बुरे की तमीज़ ना होने के मौक़ा पर कहते हैं
सब धान बारा पसेरी
सबके साथ यकसाँ सुलूक, मुकम्मल अदल-ओ-मुसावात और अच्छे बुरे की तमीज़ ना होने के मौक़ा पर कहते हैं
सब धान बावन पसेरी
सबके साथ यकसाँ सुलूक, मुकम्मल अदल-ओ-मुसावात और अच्छे बुरे की तमीज़ ना होने के मौक़ा पर कहते हैं
सब दिन ख़ुदा के हैं
जब सौभाग्य और दुर्भाग्य को किसी विशेष दिन से निर्धारित करते हैं तब कहते हैं
सब एक ही माथे
हर चीज़ एक ही व्यक्ति को मिलती है, अमीर के पास अधिक दौलत आती है, भरे को भरते हैं
सब सदक़े में अलग
उस के प्रति कहते हैं जो अधिक मित्रता रखे परंतु मुसीबत पड़ने पर अलग हो जाए
सब से भले भीक के रोट
फ़क़ीरों का क़ौल है कि जो चीज़ मांगे से मुफ़त मिल जाये सब से बेहतर है क्योंकि मेहनत नहीं करनी पड़ती
सहर का भूला शाम आया
अगर कोई व्यक्ति किसी प्रकार की ग़लती या अपराध करने के पश्चात, शीघ्र उस काम से तौबा (पाश्चाताप) कर ले और सुधर जाये तो कहते हैं
सहरी भी न खाऊँ तो काफ़िर न हो जाऊँ
ایک ماما سحری کھا لیتی تھی روزہ نہ رکھتی تھی ، ایک دن مالک نے پوچھا تو یہ جواب دیا ، یعنی دین کی مطلب کی بات مان لی اور تکلیف کی بات چھوڑ دی.
सहरी खाए सो रोज़ा रखे
एक व्यक्ति की सहरी कुत्ता खा गया, उसने उसे सारा दिन भूका बाँधे रखा कि उसने सहरी खाई है वही रोज़ा रखेगा अर्थात जो फ़ायदा उठाए वही काम करे
सहज पक्के सो मीठा
जिस काम में जल्दी न की जाए उस का नतीजा अच्छा होता है, जल्दी का काम अच्छा नहीं होता
सख़ी सूम साल भर में बराबर हो जाते हैं
फ़ी्याज़ और दरिया दिल आदमी का बख़शिश-ओ-सख़ावत के ज़रीये और बख़ील आदमी का बेजा सिर्फ़ के बाइस साल भर में हिसाब बराबर हो जाता है, फ़ी्याज़ आदमी का माल सही जगह सिर्फ़ होता है और बख़ील का ग़लत जगह
समझने वाले की मौत है
बुद्धिमान पर ही सब काम की ज़िम्मेदारी आकर पड़ती है इसलिए कोई काम यदि बिगड़ जाए तो उसकी बुराई भी उसी को भुगतनी पड़ती है
सम्धन का तकला चुभ चुभ जा, चोरी का लपका कभी न जा
इंसान को जब कोई बुरी आदत पड़ जाती है तो चाहे उस की वजह से कैसी ही ज़िल्लत या तकलीफ़ हो वो आदत कभी नहीं जाती. चोरी की आदी एक औरत ने अपनी समधिन के घर से चरखे का तकुला चुरा कर अपने नेफ़े में रख लिया, वो तकुला चुभ चुभ जाता था जिस से वो बेकल थी और बार बार कहती समधिन का तकुला चुभ चुभ जा. मेरे हाथ का लपका कभी ना जा
सम्धन का तकला चुभ चुभ जा, हाथ का लपका कभी न जा
इंसान को जब कोई बुरी आदत पड़ जाती है तो चाहे उस की वजह से कैसी ही ज़िल्लत या तकलीफ़ हो वो आदत कभी नहीं जाती. चोरी की आदी एक औरत ने अपनी समधिन के घर से चरखे का तकुला चुरा कर अपने नेफ़े में रख लिया, वो तकुला चुभ चुभ जाता था जिस से वो बेकल थी और बार बार कहती समधिन का तकुला चुभ चुभ जा. मेरे हाथ का लपका कभी ना जा
सम्धन का तकवा चुभ चुभ जा, हाथ का लपका कभी न जा
इंसान को जब कोई बुरी आदत पड़ जाती है तो चाहे उस की वजह से कैसी ही ज़िल्लत या तकलीफ़ हो वो आदत कभी नहीं जाती. चोरी की आदी एक औरत ने अपनी समधिन के घर से चरखे का तकुला चुरा कर अपने नेफ़े में रख लिया, वो तकुला चुभ चुभ जाता था जिस से वो बेकल थी और बार बार कहती समधिन का तकुला चुभ चुभ जा. मेरे हाथ का लपका कभी ना जा
सर का नहाया पाक
पूर्ण स्नान किया हुआ व्यक्ति पवित्र होता है, मुकम्मल नहाया हुआ इंसान पाक होता है
सर काला मुँह बाला
उसके बारे में कहते हैं जिसके सर के बाल सफ़ेद हो गए हों मगर वह जवानों की तरह लालच की बातें करता हो
सर पर जूती और मुँह में रोटी
उस अवसर पर प्रयोग किया जाता है जब कोई खिलाने-पिलाने में कमी न करे परंतु डांट डपट और मारने पीटने में भी कोई कमी नहीं करता
सर पर जूती, हाथ में रोटी
खाने को मिल जाये ख़ाह बे इज़्ज़ती ही क्यों ना हो, बेग़ैरत को बेइज़्ज़ती की पर्वा नहीं होती, वो फ़ायदा से काम रखता है
सर सलामत तो पगड़ी पचास
जीते रहे तो बहुत कुछ मिल रहेगा ज़िंदगी चाहिए साज़-ओ-सामान भी मिल जाएगा ऐसे मौक़ा पर कहते हैं जिस किसी को जान बचाने के लिए आन गंवानी पड़े
सर से बैरार दुम से नाता
एक ही कुंबे या गिरोह वग़ैरा के एक या चंद अफ़राद से ताल्लुक़ बाक़ी से बेताल्लुक़ी पर बतौर तंज़-ओ-ताज्जुब
सर से सरवाहा
सर के साथ पगड़ी है, सरदार के साथ सेना है (ज़िम्मेदारी को प्रकट करने के अवसर पर प्रयुक्त)
सरदारी का डंडा अटका है
अपने आप को बड़ा समझते हैं, बड़े पद पर रहने के बाद छोटा पद स्वीकार न करने वाले पर व्यंग्य
सरोही बाँधे तो दो
जो चीज़ किसी के लिए इतनी ज़रूरी हो जितनी कि सिपाही के लिए युद्ध के मैदान में तलवार, तो उसे वह चीज़ ज़रूरत के समय काम आने के लिए एक की जगह दो रखना चाहिए (क्योंकि तलवार अपने लोहे की गुणवत्ता के कारण... अचानक से टूट जाती है, इसलिए यह कहावत बनी)
ससी की तीन टाँग
ज़िद्दी आदमी की बारे में कहते हैं कि वह हक़ीक़त को स्वीकार नहीं करता
सस्ता रोए बार बार, महंगा रोए एक बार
इंसान को महंगी चीज़ ख़रीदने पर एक ही वक़्त अफ़सोस होता है मगर सस्ती ख़रीदने पर बार बार अफ़सोस करता है क्योंकि सस्ती चीज़ जलद ख़राब हो जाती है और तकलीफ़ देती है
सौ भूतों की ढेरी है
आम लोगों की सैकड़ों तद्बीरों से ख़ास लोगों की एक तदबीर बहर है, बहुत से शरीकों की चीज़ है जिस में से हर एक शरीक है
सौ दोस्त सौ दुश्मन
इंसान को हर वक़त सावधान रहना ज़रूरी है क्यों कि दोस्तों के इलावा दुश्मन भी होते हैं
सौ दुश्मन , सौ दोस्त
ग़ाफ़िल ना रहने की ताकीद के लिए बोलते हैं, इंसान को बरवक़्त एहतियात लाज़िम है क्योंकि दोस्तों के इलावा दुश्मन भी होते हैं
सौ गज़ वारों , गज़ भर न फाड़ों
सिर्फ़ ज़बानी हमदर्दी करने वाले की निस्बत बोलते हैं जो दोस्ती और मुहब्बत तो बहुत ज़ाहिर करे मगर अमलन कुछ ना करे बल्कि मुसीबत के वक़्त अलग हो जाये
सौ हीले हज़ार बहाने
काम न करने वाले के लिए हर तरह मना कर सकता है, काम न करने वाले बहुत से हीले ढूँढ लेते हैं
सौ जियों का एक बचावा
हिंदूस्तान में आमतौर पर सारे ख़ानदान की पालन-पोषण करने वाला एक ही व्यक्ति होता है
सौ सयाने एक मत
जितने बुद्धिमान होंगे सबकी राय एक होगी, बुद्धिमानो में एक राय पर सहमती होती है
सौ सुनार की एक लुहार की
कमज़ोर के सौ घूँसों पर ताक़तवर का एक घूँसा भारी होता है, सफलता के लिए बल से ज़्यादा कौशल या विवेक की आवश्यक होती है
सौकन तो चून की भी बुरी
स्वत चाहे कैसी ही नाचीर और कमतर हो, बहरहाल गवारा नहीं, ना जाने किस वक़्त नुक़्सान पहुंचा दे, हरीफ़ बहरसूरत हरीफ़ है
सौकन तो चूनी की भी बुरी
स्वत चाहे कैसी ही नाचीर और कमतर हो, बहरहाल गवारा नहीं, ना जाने किस वक़्त नुक़्सान पहुंचा दे, हरीफ़ बहरसूरत हरीफ़ है
सौत भली सौतेला बुरा
स्वत की बनिसबत उस की औलाद ज़्यादा दुश्मनी का बरताओ करती है , साझी की बनिसबत इस के अहल-ए-कार और मुसाहिब ज़्यादा सताते हैं
सौत चून की भी बुरी
सोकन कितनी ही हक़ीर और कमज़ोर क्यों ना हो बर्दाश्त नहीं की जा सकती या ये कि कभी ना कभी नुक़्सान पहुंचा ही देती है, (गाहे हरीफ़ के लिए इसी मफ़हूम में मुस्तामल)
सौत पर सौत और जलापा
एक दुश्मन के होते दूसरा दुश्मन और भी मुसीबत है दूसरी सोकन आती है तो जलन और बढ़ जाती है (दुश्मनों की कसरत के मौक़ा पर मुस्तामल)
सवाल दीगर जवाब दीगर
जब कोई व्यक्ति किसी सवाल के जवाब में ऐसी बात कहे जो सवाल से संबंध न रखती हो तो कहते हैं, अयोग्य उत्तर
सेर को सवा सेर
बलशाली के लिए उससे अधिक बलशाली उपस्थित है, एक से बढ़ कर एक, हर फ़िरऔन-ए- रा मूसा
शंका डायन , मंसा भूत
डर और ख़्याल भूतों और डाएनों की शक्ल बिन कर दिखाई देते हैं असलीयत कुछ भी नहीं है
शहर भर में ऊँट बद-नाम
इस शख़्स की निसबत कहते हैं जो किसी ऐब के बाइस मशहूर हो, मशहूर आदमी ही की शामत आती है, नामी चोर मारा जाता है
शैतान हर जगह मौजूद है
गुनाह की ओर ले जाने वाले हर जगह होते हैं, बुरे कामों के लिए हर जगह सामान मिल जाता है
शरमाई बिल्ली खंबा नोचे
शर्मिंदा होकर आदमी फ़ुज़ूल बातें करता है, जिसे ग़ुस्सा आरहा हो वो दूसरों पर अपनी झल्लाहट उतारता है, बेबसी में आदमी दूसरों पर गु़स्सा उतारता है, शर्मिंदा शख़्स दूसरों पर अपनी शर्मिंदगी उतारता है
शेख़ी बग़ल में
जब कोई बरख़ूद ग़लत आदमी नुक़्सान उठाए तो कहते हैं कि चलो शेखी तो बग़ल में है
शेख़ी का मुँह काला
शेखी-बाज़ को लज्ज्ति होना पड़ता है अथवा शेख़ीबाज़ को नीचा देखना पड़ता है
शे'र फ़हमी 'आलम-ए-बाला मा'लूम शुद
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) सुख़न फ़हमी का हाल मालूम हो गया किसी अच्छे शेअर या कलाम वग़ैरा की दाद ना मिले तो तंज़न इस मौक़ा पर कहते हैं
शिकार कार-ए-बेकाराँ अस्त
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) बेकार आदमी शिकार के लिए जंगलों में मारा मारा फिरता है , शिकार बेकारों का काम है
शिकारी शिकार करें अहमक़ साथ फिरें
इस के मुताल्लिक़ कहते हैं जो दूसरों के साथ ख़्वाहमख़्वाह मारा मारा फिरता है, जब काम वाले लोगों के साथ बेकार लोग अपना वक़्त ख़राब करने के लिए साथ हो लेते हैं तो ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं
शिकारी शिकार करें चूतिया साथ फिरें
इस के मुताल्लिक़ कहते हैं जो दूसरों के साथ ख़्वाहमख़्वाह मारा मारा फिरता है, जब काम वाले लोगों के साथ बेकार लोग अपना वक़्त ख़राब करने के लिए साथ हो लेते हैं तो ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं
शुनीदा के बुवद मानिंद दीदा
फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल, जो कुछ देखा हो इस के मुक़ाबले में सुनी हुई बात का एतबार क्यों कर हो सकता है कहाँ आँखों देखी और कहाँ सुनी सुनाई बात
सीधा घर ख़ुदा का
उस व्यक्ति के बारे में बोलते हैं जो हर मुसीबत में बार-बार भगवान को याद करता है, सिर झुकाकर भगवान को याद करने में मोक्ष जानता है, या बार-बार किसी के पास मदद के लिए जाता है
सीखन सीख पड़ोसन सीख
साथ का प्रभाव अवश्य पड़ता है, किसी को दूसरे की देखा देखी कोई काम करते देख कर ये कहा करते हैं
सितारा भारी होना
(हैयत) अज़रूए नुजूम किसी सितारे का किसी दूसरे सितारे की निसबत किसी शख़्स के लिए मनहूस होना, नहूसत का ज़माना आना
सिवय्याँ बिन 'ईद कैसी
ख़ुशी ही की तक़रीब में ख़ुशी अच्छी मालूम होती है, ख़ुशी की तक़रीब बगै़र पकवान के फीकी मालूम होती है
सोहे की रीत नहीं की तौफ़ीक़ नहीं
बहुत ग़रीब है जब कोई शख़्स किसी तक़रीब के पूओरा करने की हैसियत ना रखता हो इस के मुताल्लिक़ कहते हैं. वज़ा का लिहाज़ मगर हैसियत के मुताबिक़ काम करने की इस्तिताअत नहीं
सोना जाने कसे और आदमी जाने बसे
सोने की पहचान कसौटी पर परखने से और आदमी की पहचान पास रहने से होती है, सत्य तो अनुभव से ही जाना जाता है, खोटे खरे का परखने से पता चलता है
सोना पहन ढाँक चल
अमीरी, मालदारी, दौलतमंदी पर इतराना नहीं चाहिए, माल-ओ-दौलत पर ग़रूर अच्छा नहीं होता
सोना सुनार का अभरन संसार की
सुनारों की ख़ियानत कारी के लिए ये कहावत है खोट मिलावट कटौती इन की आदत होती है, लोगों को ख़ुश कर के अपना मतलब निकालना, रोगन-ए-फ़ाज़ मिल कर लोगों का माल मारना, मकर वफ़रीब से काम लेना
सोना सुनार का सोभा संसार की
सुनारों की ख़ियानत कारी के लिए ये कहावत है खोट मिलावट कटौती इन की आदत होती है, लोगों को ख़ुश कर के अपना मतलब निकालना, रोगन-ए-फ़ाज़ मिल कर लोगों का माल मारना, मकर वफ़रीब से काम लेना
सोने की बड़ीड़ी , फूस का छप्पर
किसी मामूली चीज़ पर ज़्यादा ख़र्च करने के मौक़ा पर कहते हैं, किसी चीज़ के लवाज़म भी इस के मुताबिक़ होने चाहीऐं, नामौज़ूं चीज़ अच्छी नहीं लगती
सोने की चिड़िया हाथ लगी है
अमीर आदमी क़ाबू में आया है, वकील उस अवसर पर बोलते हैं जब कोई अमीर मुक़द्दमे में फँस जाए, रंडियाँ उस वक़्त बोलती हैं जब कोई अमीर आदमी उन पर फ़िदा हो जाए और ब्राह्मण जब कोई अमीर आदमी मर जाए तो कहते हैं
सोने में सुहागा मोतियों में धागा
ज़ीनत और जिला का बाइस , सोने के रंगत सुहागे से खुलती और मोतीयों की बिहार तागे में पिरोने से मालूम होती है, खरे ीमान दार और अमीन मुलाज़म की निस्बत भी बोलते हैं, तीर बहदफ़ के मौक़ा पर भी कहते हैं
सोने से घड़ावन महंगी
मूल कीमत से अधिक व्यय, इतने का माल नहीं जितने मरम्मत आदि में व्यय हो गए, दमड़ी की बढ़िया टिका सर मुंडवाई
सोया मोया बराबर है
नींद और मौत में कोई फ़र्क़ नहीं दोनों हालतों में इंसान बेख़बर रहता है, सख़्त ग़फ़लत और बेख़बरी के मौक़ा पर मुसतामल
सोया मुवा बराबर है
नींद और मौत में कोई फ़र्क़ नहीं दोनों हालतों में इंसान बेख़बर रहता है, सख़्त ग़फ़लत और बेख़बरी के मौक़ा पर मुसतामल
सोया सो चूका, जागा सो पाया
जिस ने ग़फ़लत की इस ने नुक़सान उठाया, जो होशयार रहा वो फ़ायदा में रहा, सोते की कुटया का जागते का कटरा, बहरहाल सुई और कोशिश से राहत मिलती है, ग़फ़लत बुरी, होशयारी अच्छ्াी
सुहागन का लड़का पिछवाड़े खेलता है
जब किसी सुहागन का बच्चा मर जाता है तो ये कहावत कहते हैं क्यूँकि पति ज़िंदा होने की वजह से दूसरा बच्चा पैदा होने की उम्मीद होती है इस लिए जो बच्चा मरेगा उस को ऐसा समझो कि पिछवाड़े खेल रहा है थोड़ी देर में आ जाएगा
सुहाते की लात अन सुहाते की बात
जहाँ कुछ मिलने की आशा हो वहाँ गाली भी सह ले परंतु जहाँ कुछ प्राप्ति न हो वहाँ साधारण बात से भी नाराज़ हो उठे तब भी कहते हैं
सुख़न अज़ सुख़न मी ख़ेज़द
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) बात से बात निकलती है, सिलसिला-ए-गुफ़्तगु में कोई नई बात ज़ाहिर होती है
सुख़न शुनीदन बेख़-ए-दौलत
(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) बात सुनना हुकूमत की जड़ है फ़र्याद को सुनना शाहों का वतीरा है, नसीहत सुनने वाला फ़ायदा में रहता है
सुनार की खुटाली और दर्ज़ी के बंद
टाल मटोल करने वाले की निस्बत बोलते हैं (सुनार कहता है कि बस ज़ेवर को कठाली में डालना बाक़ी है और दर्ज़ी कहता है कि कपड़े में बंद लगाने बाक़ी हैं, ख़्वाहमख़्वाह की बहाना तराशी)
सुन्नी न शी'आ, जी में आया सो किया
स्वतंत्र बुद्धि वाले व्यक्ति के प्रति कहते हैं जो अपनी इच्छानुसार करता है, उसे किसी मसलक की परवाह नहीं होती, स्वतंत्र विचारों का व्यक्ति अथवा मनमानी करने वाले के लिए भी कहते हैं
सुर में अल्लाह बसे
गीत में भगवान का वास होता है, गीत बड़ी अजीब चीज़ है, अच्छा गीत हृदय को सत्य की ओर मोड़ देता है
सुरूद ब-मस्तान याद दहानीदन
किसे के सामने दानिस्ता या नादानिस्ता ऐसी चीज़ का ज़िक्र करना जो कभी इस का पसंदीदा मशग़ला रहा हो और जिसे सुन कर वो बेचैन हो जाये
सुसरार सुख की सार , जो रहे दिना दो चार
सुसराल में बहुत आराम और मज़ा होता है अगर दो चार दिन रहें यानी थोड़े दिनों के मेहमान की ख़ातिर तवाज़ो बहुत होती है इस लिए मेहमान को ज़्यादा दिन नहीं रहना चाहीए
सूप तो सूप छलनी भी बोली जिस में बहत्तर छेद
नीच, कमीना या तुच्छ आदमी को किसी के मामले में हस्तक्षेप करने के अवसर पर बोलते हैं, साफ़-सुथरी छवी वाला अगर शेख़ी बघारे तो ठीक है, मुँह खोलने से पहले दोषी को अपने स्वयं के दोषों को देख लेना चाहिए
सूरत तबाक़ छब गठड़ी में
सूरत तो कुछ ना हो बहन, ओढ़ कर दिलकशी पैदा करने की कोशिश की जाये, ज़ाहिर में सादा मगर बड़ा रन॒गीला
सूत न कपास और जुलाहे से लट्ठम लट्ठा
किसी चीज़ का ना वजूद है ना आसार या अस्बाब (इस मौक़ा पर मुस्तामल जब कि कोई बे वजूद बात को हक़ीक़त-ए-मफ़रूज़ा समझ कर उस की बुनियाद पर कोई काम या गुफ़्तगु करे)
सूत से कताई महंगी
कुल से थोड़ा बड़ा नज़र आना, चीज़ से ज़्यादा चीज़ प्राप्त करने की मज़दूरी
सुवा छेदे टाट को तो पहले आप को छिदाए
पहले सूऊई या सूऊई के सिरे पर छेद किया जाता है (यानी नाका बनाया जाता है), नीयत के मुताबिक पहले ही से नज़र आने लगता है. ऐसे मौक़ा पर कहते हैं जब किसी को आज़ाद देने के लिए कोई पहले ख़ुद को आज़ार देना करे .