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सुकून-ए-क़ल्ब

दिल का इतमीनान, दिल की शांति, आराम, सहायता, चैन और सुख

ख़िल्क़िय्या

प्राकृतिक, फ़ित्री

खिस्यानी बिल्ली खम्बा नोचे

जिसे क्रोध आ रहा हो वह अपनी खीझ या क्रोध दूसरों पर उतारता है, लाचारी में आदमी दूसरों पर क्रोध करता है, लज्जित व्यक्ति दूसरों पर अपनी लज्जा उतारता है, निर्बल की खीझ

सुरूर

मन-मस्तिष्क की शांति या सुकून प्रदान करने वाली अवस्था, ख़ुशी, आनंद, प्रसन्नता, मस्ती, तन्मयता

बे-हिजाबी

बेे-पर्दा होना, बेपर्दगी, घूँघट उठा देना, खुलेबंदों फिरना (स्त्री का)

शरीक-ए-हयात

ज़िंदगी का दोस्त या साथी, अर्थात: जीवनसंगिनी, पत्नी, भार्या, पति

मशवरत

आपस में सोच विचार एवं सलाह या राय का आदान-प्रदान करना, सलाह, मशवरा, परस्पर सुझाव

सितमगर

(प्रायः कविता में) प्रेमिका, माशूक़, महबूब

कोशिश

कोई काम करने के लिए विशेष रूप से किया जानेवाला प्रयत्न, मेहनत, दौड़ धूप, प्रयत्न, प्रयास, चेष्टा, उद्योग, श्रम, उद्यम, उपाय, परिश्रम

बे-नियाज़

जिसे किसी से कुछ लेने की इच्छा न हो निःस्पृह, स्वच्छंद, आज़ाद, बेपरवाह

दीद के क़ाबिल

देखने के लायक़, देखने योग्य

क़ाबिल-ए-दीद

देखने लायक़, अच्छा दिखने वाला

आठ बार नौ त्योहार

सुख-सुविधा और आराम का शौक़ या लगन ऐसा बढ़ा हुआ है कि युग और समय उसको अल्प व्यय नहीं करने देता

चमनिस्तान

ऐसा बाग़ जहाँ फूल ही फूल हों, ऐसी जगह जहाँ दूर तक फूल ही फूल और हरा भरा नज़र आए, वाटिका, चमन, बाग़

'औरत

जाया, भार्या, पत्नी, जोरू

ताग़ूत

शैतान, अत्यन्त निर्दय और अत्याचारी व्यक्ति

मन-भावन

मन को भाने या अच्छा लगने वाला

दादरा

संगीत में एक प्रकार का चलता गाना (पक्के या शास्त्रीय गानों से भिन्न), एक प्रकार का गान, एक ताल

मज़दूर

शारीरिक श्रम के द्वारा जीविका कमाने वाला कोई व्यक्ति, जैसे: इमारत बनाने, कल-कारख़ानों में काम करने वाला, श्रमिक, कर्मकार, भृतक, मजूर

ख़ैर-अंदेश

भलाई की बात सोचने वाला, वह शख़्स जो किसी की भलाई चाहे, शुभचिंतक

मुहावरे

यह भारतीय मुहावरों का एक शब्दकोश है, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन की एक पहल है। इसमें सदियों से प्रचलित पारंपरिक कहावतों और मुहावरों का एक मूल्यवान संग्रह शामिल है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति, समाज और दैनिक जीवन को प्रतिबिंबित करता है। यह शब्दकोश आलोचकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों तथा भाषा और साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अत्यंत उपयोगी और विश्वसनीय संदर्भ स्रोत के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख मुहावरे

मुहावरों की सूची

संबंधित परिणाम

संग आमद व सख़्त आमद

मजबूरी में कोई काम करने या ज़िम्मादारी आ पड़ने के समय बोलते हैं

संग सोई तो लाज क्या

जब अनौपचारिकता हो तो शरम कैसी

संगत का प्रभाव है

जब कोई बुरी संगत में पड़ जाता है प्रायः तब कहते हैं

संगत की फूट का अल्लाह बेली

आपस में फूट पड़ जाए फिर तो ईश्वर ही मालिक है

संघ पराए देस में नित मारें नित खाएँ

ज़बरदस्त लोग दूओसरे लोग दूओसरे मुलक में जा कर लूओट् मार कर के खाते हैं

संख बाजे सत्तर बला भाजे

हिंदुओं का मानना है कि संख् की आवाज़ से बलाऐं अर्थात बुरी शक्तियाँ भाग जाती हैं

संख बजाओ सोवो साधू जो सुख पावे गा

मनुष्य को जिस बात की 'आदत हो जाए उस के बिना नींद नहीं आती, साधुओं को संख बजने से नींद आती है और आराम मिलता है

साढ़ी की साख , पीपल की लाख

फ़स्ले रबीअ और पीपल की लाख बेहतरीन होती हैं

साईं अखियाँ फेरियाँ बैरी मुल्क जहान, टुक इक झाँकी महर दी लक्खाँ करें सलाम

ईश्वर नाराज़ हो तो सारा संसार नाराज़ हो जाता है और यदि मेहरबानी की एक नज़र कर ले तो लाखों सलाम करते हैं

साईं अपने चित्त की भूल न कहिये कोय, तब लग मन में राखिये जब लग कारज होय

जब तक काम न हो जाए तब तक अपना मनोविचार किसी पर प्रकट नहीं करना चाहिये

साईं इस संसार में भाँत भाँत के लोग, सब से मिल कर बैठिये नदी नाव संजोग

दुनिया में तरह तरह के लोग हैं मिल कर जीवन व्यतीत करना चाहिए

साईं जिस को राख ले मारन मारा कौन, भूत देव क्या आग हो क्या पानी क्या पौन

ईश्वर जिसकी रक्षा करता है उसे कोई मार नहीं सकता

साईं का घर दूर है जैसे लम्बी खजूर, चढ़े तो चाखे प्रेम रस गिरे तो चकना-चूर

ईश्वर को पाना बहुत कठिन है यदि पा ले तो इससे बढ़ कर कुछ नहीं न पाए तो तबाह हो जाए

साईं का रख आसरा और वाही का ले नाम, दो जग में भरपूर हों जो तेरे सगरे काम

ईश्वर पर भरोसा रखने वाले को दोनों लोकों में सफलता मिलती है

साईं के भण्डार में कमी नहीं

ईश्वर या अल्लाह के ख़ज़ाने में कोई कमी नहीं

साईं के दरबार में बड़े बड़े हैं ढेर, अपना दाना बीन ले जिस में हेर न फेर

अपनी क़िस्मत पर शुक्र करना चाहिए और जो मिले उस पर संतोष करना चाहिए

साईं के सो खेल

ईश्वर सर्वज्ञ है वह जो चाहे सो करे

साईं को साँच प्यारा, झूटे का मालिक न्यारा

ख़ुदा सचै आदमी को पसंद करता है झूओटे का मालिक कोई और है

साईं नाता दम ही ताएँ

मर्द से या शौहर से सांस तक रिश्ता है

साईं राज बुलंद राज

पति का युग अथवा समय ऊँचाई एवं ख़ुशहाली का युग होता है

साईं राज बुलंद राज, पूत राज दूत राज

पति के रहते हुए ही स्त्री को सच्चा सुख मिलता है

साईं रूठे हम छूटे

ईश्वर नाराज़ तो जग नाराज़

साईं साईं जीभ पर और किब्र कपट मन बीच, वह न डाले जाएँगे पकड़ नरक में खींच

जिन की जीभ पर ईश्वर का नाम है और उन के दिल में घमंड और धोका कपट और हसद है उन को अंत में नरक ही मिलेगा

साईं सांसा मेट दे और न मेटे कोय, वा को सांसा क्या रहा जा सर साईं होय

ईश्वर के अतिरिक्त कोई सांसा अर्थात परेशानी एवं दुख को दूर नहीं कर सकता परंतु जिसे ईश्वर पुण्य की राह दिखा दे

साईं से सांची रहूँ बाज बाज रे ढोल, पंचन में मेरी पत रहे सखियाँ में रहे बोल

स्त्री की प्रार्थना है कि पति मुझे चाहे और लोग मुझे अच्छा समझें और सहेलियों में सम्मान हो

साईं से सच्चा और बंदे से सत भाव

इंसान को हर हाल में पाकबाज़ रहना चाहीए

साईं तेरा आसरा छोड़े जो अंजान, दर-दर बांडे मांगता कौड़ी मिले न दान

जो ईश्वर की आस छोड़ दे वो दर-दर मांगता फिरे तो भी उसे कुछ नहीं मिलता

साईं तेरे आसरे आन पड़े जो लोग, उन के पूरे भाग हैं उन के पूरे जोग

जो लोग ईश्वर के भरोसे पर पड़े हैं वो बहुत भाग्यवान हैं

साईं तेरे कारने जन तज दिया जहान, ठेठ किया बैकुंठ में उस ने जहाँ मकान

ईश्वर के लिए जो संसार को छोड़ देता है उसे स्वर्ग मिलता है

साईं तेरी नेह का जिस तन लागा तीर, वही पूरा साध है वही पीर फ़क़ीर

जिसे ईश्वर से प्रेम है वो पूरा फ़क़ीर है एवं वही दर्वेश है

साईं तेरी याद में जस तन कीता ख़ाक, सोना उस के रू-बरू है चूल्हे की ख़ाक

जो ईश्वर में लीन हो गया हो उस की नज़र में संसार का धन और दौलत धूल के समान है

साईं तुझ बिन कौन है जो करे नय्या पार, तू ही आवत है नज़र चहूँ ओर करतार

ऐ ईश्वर तेरे सिवा कौन है जो बेड़ा पार करे, जिधर देखता हूँ तू ही दिखाई देता है

साईसी-'इल्म दरिया है

किसी भी विद्या में महारत प्राप्त करना आसान नहीं है, हर एक विद्या एवं ज्ञान असाधारण गहराई एवं विस्तार रखता है जबकि साईसी विद्या को प्रायः बहुत साधारण और निम्न समझा जाता है, उसपर भी पूर्ण महारत रखना बहुत कठिन है

साँच बराबर तप नहीं और झूट बराबर पाप, जाके मन में पाप है ताके मन में आप

सच से बढ़ कर कोई तपस्या नहीं और झूठ से बढ़ कर कोई गुनाह नहीं

साँच कहे सो मारा जाए, झूट कहे सो लड्डू खाए

सच्च कहने वाले को लोग बुरा समझते हैं, झूटा मज़े में रहता है

साँच कहे सो मारा जाए, झूटा भड़ुवा लड्डू खाए

जो सच्ची बात बता दे उसे प्राय: हानि होती है

साँच को आँच

सत्य हानिरहित है, सच्च बोलने वाला नुक़्सान नहीं उठाता

साँच को आँच नहीं

सत्य बोलने वाले को हानि नहीं पहुँचता

साँच पीछे वाद नहीं, राँड पीछे गाली नहीं

सच्च से बढ़ कर कोई गाली नहीं (वाद - बात), बेवा होने से बढ़ कर मुसीब नहीं

साँच पीछे वाद नहीं, राँड पीछे काल नहीं

सच्च से बढ़ कर कोई गाली नहीं (वाद - बात), बेवा होने से बढ़ कर मुसीब नहीं

साँच वो है जो आँच को सहे

सच्च बोल और किसी का ख़ौफ़ ना कर, सच्च को किसी आज़माईश का कूफ़ नहीं होता

साँचा सब के मन से उतरता है

सच्चा आदमी सब को बुरा लगता है

साँची बात गो पाला भावे

ख़ुदा सच्च को पसंद करता है

साँची बात सा'दुल्लाह कहे, सब के मन से उतरा रहे

सच्ची बात कहने वाले से सब नाख़ुश होते हैं, जो शख़्स सच्च बोले इस से सब घबराते हैं

साँडे का तेल बेचते हैं

उस व्यक्ति के लिए कहते हैं जो ऐसी बातें करे जिनसे जानवरों का शक्ति का उकसावा हो

साँझ जाए और भोर आए , वो कैसे न छिनाल कहलाए

जो औरत शाम को जाये और सुबह को आए वो बदचलन समझी जाती है जो सरीहन बद हो उसे बद ही कहा जाएगा

साँप और चोर दबे पर चोट करते हैं

बचाओ की सूरत ना रहे तो ये हमला करते हैं वर्ना उमूमन भाग जाने की कोशिश करे हैं

साँप भी मरे लाठी भी न टूटे

बुराई भी ख़त्म हो जाए हानि भी न हो

साँप का काटा रस्सी से डरता है

जिसे कोई दुःख या पीड़ा पहुँचती है वह बहुत सावधान होजाता है, पीड़ित छोटी चीज़ से भी डरने लगता है

साँप का काटा सोए, बिच्छू का काटा रोए

सांप के काटे हुए पर बेहोशी तारी होती है और बच्चहूओ के काटे को बहुत तकलीफ़ होती है

साँप का सर भी कभी काम आता है

कोई चीज़ ज़ाए नहीं करनी चाहिए . कभी ना कभी काम आजाती है, दाश्ता आबिद बिकार, गरचा बूद सर मार

साँप का सर ही कुचला करते हैं

मूओज़ी को ज़रूर सज़ा देनी चाहिए

साँप के मुँह में छछूँदर, निगले तो अंधा उगले तो कोढ़ी

ऐसा काम करे जिसे न कर सके और न छोड़ सके

साँप के पाँव पेट में होते हैं

दुष्टाचारी व्यक्ति की दुष्टता उजागर नहीं होती

साँप की तो भाप भी बुरी

शत्रु बहुत कमज़ोर हो फिर भी बुरा ही होता है, दुश्मन गो बहुत कमज़ोर हो फिर भी बुरा है

साँप नहीं जो मिट्टी कर रहें

हर शख़्स अपनी ही ख़ुराक खा सकता है, इस में सर्फ़ा नामुमकिन है

साँप निकल गया लकीर पीटा करो

मौक़ा हाथ से जाता रहा, सिवाए अफ़सोस के कुछ चारा नहीं

साँप सब जगह टेढ़ा चलता है , अपनी बांबी में सीधा जाता है

दूसरों के साथ बरी तरह पेश आता है, अपनों से अच्छा सुलूक करता है, अपनों से चालाकी या हेराफेरी ना करना

साँप तो निकल गया लेकिन रास्ता बुरा पड़ा

इस मर्तबा तो गुज़र गई आईंदा ख़ैर चाहिए

साँप तो निकल गया पर रास्ता देख लिया

इस मर्तबा तो गुज़र गई आईंदा ख़ैर चाहिए

साँसा भला न साँस का और बान भला न काँस का

चिंता थोड़ी देर की भी बड़ी होती है, मन की सेहत के लिए अच्छी नहीं होती

सांसा साएं मेट दे और ना मेटे को, जब हो काम संदेह का तो नाम उसी का लो

ईश्वर के अतिरिक्त कोई संशय दूर नहीं कर सकता, जब कोई ख़तरनाक जुरम करता हो अथवा दुविधा की बात है तो ईश्वर का स्मरण करना चाहिए

साँसा सुध बुध सभी घुटावे , साँसा सुख का खोज मिटावे

फ़िक्र अक़ल मार देती है और चीन इराम खो देती है

साँटे की सगाई सीधे , तेल की मिठाई सीधे

तबादले की शादी और तेल की मिठाई और बराबर हैं यानी दोनों बे लुतफ़ हैं (सीधे - अच्छी रहे, ख़ूओब हो)

साबिर और शाकिर दोनों जन्नती

मुसलमानों में धैर्य और कृतज्ञता को उच्च स्थान प्राप्त है

साबित कर तब मुँह पर मार

पहले जुर्म साबित कर इस के बाद सज़ा दे

साबित लोग अंबर तारे हम लोगों से न्यारे

दृढ़ संकल्प व्यक्ति सामान्य लोगों से अच्छे होते हैं

साबित नहीं कान बालियों का अरमान

लियाक़त और इस्तिदाद वग़ैरा से ज़्यादा की ख़ाहिश के मौक़ा पर मुस्तामल

साबित क़दम को सब धावें

बात के पक्के आदमी का हर कोई भरोसा कर लेता है

साबित क़दम को सब जगह ठाँव

दृढ़ निश्चयी व्यक्ति का ठिकाना हर जगह होता है

साबुन दिए मैल कटे , गंगा नहाए पाप कटे

(हिंदू) जिस तरह-ए-साबुन मेल को दूर करता है, इसी तरह गंगा का अश्नान पाप को दूर करता है

साबुन दिए मैल कटे और गंगा नहाए पाप, झूट बराबर पाप नहीं और साँच बराबर ताप

हिंदूओं की आस्था में गंगा के नहाने से गुनाह माफ़ होते हैं, झूठ सब से बड़ा गुनाह है और सच्च के बराबर कोई 'इबादत एवं तपस्या नहीं

साबुन काटे मैल को जिस तन काटे तेग

साबुन मेल को इस तरह काटता है जैसे तलवार बदन को

साचे गुरू का बालिका मरे न मारा जाए

जिस का हादी रहनुमा सच्चा हो उस को गज़ंद नहीं पहुंचती

साधू दुखिया सब संसार , जो सुखिया सो राम आधार

तमाम दुनिया मुसीबत में गिरफ़्तार है जो ख़ुदा पर भरोसा करते हैं वो सुखी हैं

साधू हो कर देवे बत्ता , उस को जानों पेट का कुत्ता

जो सादफू हो कर धोका देवी उसे पेट का कुत्ता समझो,फ़क़ीर ऐसा नहीं होता

साधू हो कर कपट जो राखे, वो तो मज़ा नरक का चाखे

वो जो साधू हो कर हसद और बुग़ज़ से काम ले दोज़ख़ में जाएगा

साधू हो कर करे जो चोरी , उस का घर हे नरक की मोरी

जो साधूओ हो कर चोरी करे दोज़ख़ में जाएगा

साधू हो कर करे जो जारी , उस की हो दो जग में ख़्वारी

फ़क़ीर हो कर बदमाशी और बदकारी करे, दोनों जहां में ख़राब-ओ-ख़ार होगा

साधू जन रम्ते भले वाक न लागे को

साधूओ कि हमेशा फिरते रहना चाहिए ताकि इस पर किसी किस्म का इलज़ाम ना आए

साधू का देन न माधू का लेन

सब से मुआमला सुलझा हुआ है कि ना किसी का देना है और ना किसी से लेना है हिसाब साफ़ है

साधू का किया स्वाद , बतासे नहीं गुड़ ही सही

फ़क़ीर के लिए हर चीज़ यकसाँ है ख़ाह घटिया हो या बढ़िया, क्योंकि ज़बान का चस्का पूओरा करना नहीं

साधू वही जो साधन करे , करोध लोभ और मोह को मारे

फ़क़ीर वही है जो नफ़स मारे और लालच और शहवत को क़ाबू में रखे

सा'दुल्लाह बने और मन से उतरा रहे

अच्छा भी बने और क़दर नहू, खरी बात ख़ैर अल्लाह कहीं अलख

साफ़ रह, बे-बाक रह

दियानतदार आदमी को किसी का ख़ौफ़ नहीं होता, जिस का हिसाब किताब ठीक हो उसे किसी का डर नहीं होता

साह के सवाए कम बख़्त के दूने

साहूकार तो सिर्फ़ एक के सिवाए बनाता है, बदबख़्त दोने बनानेकी कोशिश करता है और नुक़्सान अऔठाता है , लालची शख़्स के मुताल्लिक़ कहते हैं

साहीब क़ाइम माल मीरास

मालिक मौजूद है लोग लौटे लिए जाते हैं, ज़ोर बस नहीं चलता

साहिब-उल-ग़रज़ मजनूँ

ग़रज़ वाला अपने मतलब के लिए दीवाना होता है, मौक़ा महल नहीं देखता

साहू बहे न जाएँ , गों से जाएँ

साहूकार जो कुछ करता है किसी ख़ास मतलब लिए करता है अगर दरिया में बपा जाये तो इस में भी इसका कोई मतलब होगा

साहू बटे वो भी साह

जो असल क़ीमत पर बेचे वो भी सौदागर है, माल रोके रखने से कीमत-ए-ख़रीद पर बेचना बेहतर है

साहू कार को किसान , बालक को मसान

जिस तरह बच्चे को मसान आहिस्ता आहिस्ता दुबला कर देना है और आख़िर में मार देता है इसी तरह साहूकार को किसान नुकसान पहुंचाता है

साजन बिन 'ईद कैसी

पति के बिना कोई ख़ुशी नहीं, प्रियतम के बिना कोई ख़ुशी नहीं

साजन हम तुम ऐक हैं देखत के हैं दो, मन से मन को तौल दो मन कदी न हो

हम तुम असल में एक हैं भले ही दो दिखाई देते हैं

साझा भला न बाप का और ताव भला न ताप का

साझा चाहे अपने बाप का ही क्यों न हो अच्छा नहीं होता और ताव (गर्मी या रोब) चाहे बुख़ार का ही क्यों न हो वो भी भला नहीं, अर्थात न तो किसी का साझा करें और न किसी का ताव सहें

साझा जोरू ख़सम का ही भला

ख़ावंद बीवी की शराकत ही बेहतर है, किसी और कर शिरकत अच्छी नहीं होती

साझे का काम बुरा

भागीदारी के कार्य में विवाद होता है, भागीदारी का परिणाम बुरा होता है

साझे का काम उतारे चाम

भागीदारी के कार्य में दर्द होता है, शिरकत के काम में तकलीफ़ होती है

साझे के चने, आँखें दुखते में भी खाने पड़ें

साझेदारी या शराकत का काम हर हालत में करना पड़ता है, शराकत का नुकसान फ़रीक़ैन को उठाना ही पड़ता है

साझे के चने, दुखती आँख चाहने पड़ें

साझेदारी या शराकत का काम हर हालत में करना पड़ता है, शराकत का नुकसान फ़रीक़ैन को उठाना ही पड़ता है

साझे की हंडियाँ चौराहे पर फूटती है

साझे का व्यापार सफल नहीं होता, साझे के काम में हमेशा झगड़ा होता है

साझे की होली सब से भली

जब ज़्यादा लोग मिलते हैं, तो होली अच्छी तरह से मनाई जाती है, त्योहार या ख़ुशी का आनंद केवल संयोग और एकता से आता है

साझे की खेती कधा न खावे

साझे के काम में एक रोज़ झगड़ा ज़रूर होता है

साझे की माँ गंगा न पावे

हिंदू धर्म में बेटे के ज़िम्मेदारी है कि माता-पिता की क्रिया-कर्म करें लेकिन जहाँ बहुत बेटे हों वह एक दूसरे की तरफ़ देखते रहते हैं और माँ क्रिया-कर्म से रो जाती है यह कि भागेदारी में नुक़्सान रहता है

साझे की नाओ गंगा न पावे

रुक : साझे की हंडिया चौराहे में फूटे

साझे की सूई साँग में चले

हिस्सा दारों में सहमति नहीं होती, साझेदारों की चीज़ बुरी तरह इस्तेमाल होती है

साझी साझी मिल गए झूटे पड़े बसीठ

फ़रीक़ैन आपस में एक हो गए दरमयान में आने वालों को ख़िफ़्फ़त उठानी पड़ी

साख लाख से अच्छी

अच्छी शौहरत-ओ-नेकनामी, दौलत से बेहतर है, ग़रीब जिस की साख हो बेएतिबार अमीर से अच्छ्াा है

साल भर में सख़ी शूम बराबर होते हैं

उदार शीघ्र, कृपण देर से ख़र्च करता है, अंत में दोनों का ख़र्च बराबर हो जाता है या निकलता है

साली आधी बना ली और सलहज पूरी जोय

साली अर्थात पत्नी की बहन और सलहज अर्थात साले की स्त्री से हँसी-दिल्लगी का रिवाज है इसी लिए कहते हैं

साली नहाली , चाहे ओढ़ी , चाहे बिछाली

रज़ाई को चाहे ओढ़ो, चाहे बिछाओ

साँभर जाए , अलोना खाए

ऐसी जगह रहे जहां कोई चीज़ आम हो और ना मिले . इस शिकस् पर फ़िक़रा है जो इफ़रात की जगह रह कर भी इस चीज़ से महरूम रहे जिस की इफ़रात थी (साँभर - एक झील जिस से नमक बनाते हैं)

सांभर में नमक का टूटा

जहां कोई चीज़ आम हो वहां ना मिले तो कहते हैं

सांभर में नून का टूटा

जहां कोई चीज़ आम हो वहां ना मिले तो कहते हैं

सांभर में पड़ा और बस गला

जैसी सोहबत हो वैसा ही इंसान होजाता है, बद सोहबत जलद असर करती है

सांभर में पड़ा सो सांभर हुआ

जैसी सोहबत हो वैसा ही इंसान होजाता है, बद सोहबत जलद असर करती है

सामने पानी भरा कलसा आजाए तो अच्छा शुगून होता है

किसी काम को जाते हुए कोई पानी लाता मिले तो अच्छा शगुन समझा जाता है

सार का सार काटती है

लोहा लोहे को काटता है, समान केवल प्रतिस्पर्धा कर सकता है

सार पराई पीड़ की क्या जाने अंजान

दूओसरे की तकलीफ़ का अंदाज़ा नहीं हो सकता, दर्दमंद ही को दर्द का एहसास होता है

सार सरावत न करें ब्याह काज के बीच इसमें धन को यूँ समझ जैसा कंकर-कीच

ब्राह्मणों का कहना है कि विवाह के अवसर पर मितव्ययिता नहीं करनी चाहिए, धन-संपत्ति को महत्व नहीं देना चाहिए

सारा देस फिरी नर बदा देख डरी

इस औरत के मुताल्लिक़ कहते हैं जो दिखाने के लिए डरे मगर हक़ीक़तन निडर हो

सारा धड़ देखे नाचे मोर पाओं देख लजाए

मोर अपने सारे बदन को देख कर ख़ुशी से नाचता है मगर जब पांव पर नज़र पड़ती है तो रोता है, ख़ूओबीयों पर ख़ुशी होती है मगर ऐबों पर नज़र पड़ती है तो श्रम आती है

सारा धन जाता देखिए तो आधा दीजिए बाँट

यदि अपना सारा जा रहा हो और दोसरे को आधा दे देने से वह बच जाए तो आधा हिस्सा दे देना ही उचित है

सारा दिन पीसा चपनी भर उठया

मेहनत-ओ-मशक़्क़त बहुत हो मगर हासिल बहुत ही कम हो तो कहते हैं

सारा गाँव जल गया , बी बी फ़ातिमा को ख़बर नहीं

इस के मुताल्लिक़ कहते हैं जो सख़्त बेपर्वा और ख़ुदग़रज़ हो

सारा गाँव जल गया , काले मींघे पानी दे

सब कुछ बर्बाद होगया, इक़बाल की तमन्ना बाक़ी है , वक़्त गुज़रने के बाद कोई चीज़ मिले तो बेफ़ाइदा है

सारा गाँव जल गया , लड़के ने आग ही न पाई

वहां कहते हैं जहां कोई काम करने में सुस्ती करे या काम ना करे, बदक़िस्मत आदमी को फ़रावानी और इफ़रात के ज़माना में भी कुछ हासिल नहीं होता

सारा जाता देखिए तो आधा दीजिए बाँट

रुक : सारा धन जाता देखिए तो आधा दीजीए बांट

सारा जोबन घाला जब एक बाला पाला

रुक : सारा जोबन ख़ालए तो एक बालक पालए

सारा जोबन घाला जब एक बाला पाला

रुक : सारा जोबन घालए तो एक बालक पालए

सारा जोबन घालिए तो एक बालक पालिए

बच्चे की परवरिश और निगहदाशत में माँ अपना ऐश-ओ-आराम तज देती है

सारा जोबन घालो जब एक लाला पालो

रुक : सारा जोबन ख़ालए तो एक बालक पालए

सारा जोबन घालो जब एक लाला पालो

रुक : सारा जोबन घालए तो एक बालक पालए

सारा खेल रूपे-पैसे का है

सफलता और शक्ति धन पर निर्भर है

सारा खेल तक़दीर का है

नविश्ता-ए-पूरा हो कर रहता है

सारा माल जाता जानिये तो आधा दीजिये बाँट

अगर तमाम माल का नुक़्सान होता नज़र आए और आधा देने से आधा बच जाये तो आधा दे देना चाहिए कि इसी में फ़ायदा है

सारस की सी जोड़ी एक अंधा एक कोड़ी

दोनों निकम्मे, निकम्मे का दिवस भी निकम्मा होता है

सारे देस फिरे नर्बदा देख डरे

बेजा नख़रे करने वाली औरत के मुताल्लिक़ कहती हैं

सारे धड़ की सूई निकालने को कोई नहीं , आँख की सूई निकालने को सब कोई

थोड़ा सा काम कर के ज़्यादा सुलह हासिल करना सब चाहते हैं, मगर मेहनत करने से जी चुराते हैं

सारे डील में ज़बान ही हलाल है

मनुष्य के सारे शरीर में जीभ ही पवित्र है इस लिए हमें झूठ नहीं बोलना चाहिए

सारे दिन पीसा , चपनी भर भी उठाया

बहुत मेहनत की और काम थोड़ा हुआ

सारे घर में दो ही धुंकर-भुंकर

सारे शहर में कमीने लोग बस्ते हैं

सारी चोट तन्हाई के सर

जो सहन करते हैं उन पर सारा बोझ पड़ता है

सारी देग में एक ही चावल टटोल्ते हैं

जुज़ु को देख कर कल का हाल मालूम कर लेते हैं

सारी के वास्ते आधी न छोड़ना

अगर पूओरा फ़ायदा ना पहुंच रहा हो तो थोड़े फ़ायदे को नज़रअंदाज ना करना चाहिए, सारी की हवस में आधे को ना जाने देना चाहिए

सारी ख़ुदाई एक तरफ़ , फ़ज़्ल-ए-इलही एक तरफ़

ख़ुदा का फ़ज़ल हो तो सारी दुनिया कुछ नहीं कर सकती

सारी ख़ुदाई एक तरफ़ , जोरू का भाई एक तरफ़

ज़नमुरीद की निसबत कहते हैं कि वो बीवी के भाई या रिश्तेदारों के मुक़ाबला में किसी को एहमीयत नहीं देता

सारी कुड़ियाँ मर गईं जो नानी से राह चले

जवान कोई नहीं रही जो बूओढ़ीयों के पीछे दौड़ता है

सारी रामायण पढ़ गए लेकिन मा'लूम नहीं कि सीता 'औरत थी या मर्द

रुक : सारी ज़ुलेख़ा सुन ली और ना मालूम हुआ कि ज़ुलेख़ा औरत थी या मर्द

सारी रामायण पढ़ गए सुन के पूछा सीता किस की जोरू थी

रुक : सारी ज़ुलेख़ा सुन ली और ना मालूम हुआ कि ज़ुलेख़ा औरत थी या मर्द

सारी रात कहानी सुनी सुब्ह को पूछे ज़ुलैख़ा 'औरत थी या मर्द

उस व्यक्ति के संबंध में कहते हैं जो ध्यान से बात न सुने और फिर उसका मतलब ग़लत समझे

सारी रात मिमियाई और एक बच्चा बियाई

फ़ायदा थोड़ा और मेहनत ज़्यादा

सारी रात मिमियाई और एक बच्चा बियानी

फ़ायदा थोड़ा और मेहनत ज़्यादा

सारी रात पीसा चपनी भर उठाया

मेहनत बहुत परिणाम थोड़ा बहुत

सारी रात रोई और एक ही मरा

प्रयास बहुत की परंतु प्राप्त बहुत कम हुआ

सारी रात सोए अब सुब्ह को भी न जागें

व्यंगात्मक तौर पर उस को कहते हैं जो बहुत सोए अथवा देर तक असतर्कता या सुस्ती से काम ले

सारी साहिबी और गुज का सोना

शेख़ी इस क़द्र और पास कुछ नहीं, टीप-टाप बहुत है मगर पास कुछ नहीं है सिर्फ़ दिखावा है

सारी 'उम्र भाड़ ही छोंका

सारा जीवन व्यर्थ कार्यों में खो दिया/बर्बाद कर दिया

सारी 'उम्र भाड़ ही झोका

सारा जीवन फ़ालतू के कामों में गँवा दी, सारी उम्र फ़ुज़ूल कामों में बर्बाद कर दी

सारी 'उम्र काठ में रहे चलते वक़्त पाँव से गए

एक मुसीबत से छूओटे तो इस से बड़ी में फंस गए

सारी ज़ुलैख़ा सुन ली और ये न मा'लूम हुआ कि ज़ुलैख़ा 'औरत थी कि मर्द

बूओरा क़िस्सा सुनने के बाद जब कोई उसी किसे के मुताल्लिक़ बेतुका सवाल कर बैठे तो इस से कहते हैं

सास बड़ी बाँस , नंद बग़ल गंद

सास और नंद मालूम होती हैं, बहू की, सास और नंद से नहीं बनती इस लिए उन्हें बुरा समझती है

सास बहू की हुई लड़ाई , सर को फोड़ मरी हमसाई

दूसरों के झगड़े में दख़ल देने से नुक़्सान होता है या उठाना पड़ता है

सास बिन कैसी सुसराल , लाभ बिन कैसा माल

बगै़र सास नके मर्द के लिए ससुराल कुछ नहीं, जिस तरह नफ़ा के बगै़र माल की कोई हक़ीक़त नहीं है

सास छोटी, बहू बड़ी

उलटा ज़माना है कि बड़ों पर छोटे हुकूमत करते हैं

सास गई गाँव, बहू कहे मैं क्या क्या खाउं

सास की ग़ैरमौजूदगी में बहू मज़े उड़ाती है

सास झांके तुईं तुईं, बहू चली बैकुन्ठ

उलटी बात है कि सास घर में रहे बहू तीर्थ यात्रा जाए जब कि बूढ़ी महिला को जाना चाहिए

सास का ओढ़ना, बहू का बिछौना

सास के साथ बहू की बे-दर्दी

सास के आगे बहू की बड़ाई

बे-मौक़ा, अनुचित बात, नामुनासिब बात, ऐसी बात करना जिससे दूसरे को बुरा लगे जैसे सास के सामने बहू की बुराई करो तो ख़ुश होती है

सास के पूत सब ही बराबर

दोनों एक जैसे, दोनों में कोई अंतर नहीं

सास की चेरी सब की झेड़ी

जो सास की सेवा करे है वह सब पर राज करती है

सास की रीसी पतोह के माथे

बहू आमतौर पर सास की नक़ल करती है

सास को नहीं पाइंचे , बहू चाहे तंबू और सराइचे

जहां बहू बहुत शेखी ख़ौर है वहां कहती हैं, ग़रीबी में अमीरी के ठाठ बाठ चाहने वाले के मुताल्लिक़ कहते हैं

सास कोठे , बहू चबूतरे

सास की अनुपस्थिति में बहू अपने मन की करती है

सास कोठे पर की घास

बहू सास को अच्छा नहीं समझती, बल्कि बेकार समझती है

सास लुका लुका, बहू बका बका

सास जो बात छुप छुप कर करती है, बहू खुल्लम खुल्लअ उस को करती है

सास मर गई अपनी रूह तोंबे में छोड़ गई

उस मौक़ा पर कहते हैं जब सास का रोब बहू पर उस के मरने के बाद भी क़ायम रहे

सास मरी, बहू बेटा जाया, उस का टूटा उस में आया

एक में नुक़्सान एक में फ़ायदा हो कर हिसाब मुसावी हो जाता है

सास मेरी घर नहीं , मुझे किसी का डर नहीं

जब कोई निगरां नहीं तो में आज़ाद हूँ, सर धरे का सब को ख़ौफ़ होता है

सास मोई , बहू बेटा जाया , वाका पल्टा वापस आया

हिसाब बराबर हो, एक जगह नुकसान हो तो दूसरी जगह फ़ायदा हो गया

सास मोरी मरे , सुसर मोरा जिए , नई बहूरिया के राज भए

सास मर जाये तो बहू के मज़े हो जाते हैं

सास न नंदी, आप ही आनंदी

घर में न सास है न नंद अकेली मौज में है क्यूँकि सास की तरह नंद भी बहू के लिए एक विपत्ति होती है

सास री सास तुझे पेट का दुख, पहले चूल्हा ही याद आया

बड़ी बूढ़ी औरतें जब किसी नए मकान में जाएं तो पहले चूल्हे की जगह देखती हैं

सास से बैर बहू से नाता

अपनों से दुश्मनी है और परायों से संबंध, उल्टा मामला है

सास से तोड़, बहू से नाता

सास की मौजूदगी में बहू का क्या लेना-देना है, बड़ों को छोड़ कर छोटों से मेल बढ़ाना बेफ़ायदा है

सास उधलिया बहू छिनलिया सुसरा भाड़ झोकावे, फिर भी दूल्हा सास बहू को सीता सती बतावे

सास पराए पुरुष के साथ भाग गई है बहू छिनाल है ससुरा भाड़ झोंकता है फिर भी दूल्हा अपनी सास और पत्नी को सीता जैसी सती बताता है

सासड़ कारण बेद बुलाया, सौत कहे तेरा धगड़ा आया

सास के ईलाज के लिए तबीब बुलाया तो स्वत ने उसे स्वत का यार बताया, जब नेकी के बदले बदगोई के सबब उलटा इल्ज़ाम उठाना पड़े तो कहते हैं

सासड़ साँसा मत करे देख थरेड़ा काम, थोड़े को बहता करे देन लगे जब राम

सास घबरा नहीं कि काम मंदा है, जब ख़ुदा देने को आता है तो थोड़ा बहुत हो जाता है

सासर कारण बेद बुलाया, सौत कहे तेरा धगड़ा आया

सास के ईलाज के लिए तबीब बुलाया तो स्वत ने उसे स्वत का यार बताया, जब नेकी के बदले बदगोई के सबब उलटा इल्ज़ाम उठाना पड़े तो कहते हैं

सासर साँसा मत करे देख थरेड़ा काम, थोड़े को बहता करे देन लगे जब राम

सास घबरा नहीं कि काम मंदा है, जब ख़ुदा देने को आता है तो थोड़ा बहुत हो जाता है

सासरा सुख बासरा

दुल्हन को कहते हैं कि सुसराल में आराम मिलेगा

सासरा तेरे सुहाग, माथे तेरे भाग, बाप के तेरे राज, तू बैठी बैठी झाँक

सास इस बहू को कहती है जो बाप की इमारत की शीख़यां मारे कि वहां से तो तुझे कुछ मिलना नहीं, ससुराल ही में तुझे आराम है

सात हाथ हाथी से रहिए पाँच हाथ सिंघाड़े से, बीस हाथ नारी से रहिए तीस हाथ मतवारे से

(सिंघाड़ा - सींग वाला बैल) सींगदार बैल और हाथी से दूर दूर रहना चाहिए मगर औरत से इस से भी दूर और शराबी से बहुत ही दूर रहना चाहिए, दरासल शराब की मज़म्मत में है

सात मामूओं का भाँजा भूक भूक पुकारे

इस शख़्स के बारे में कहते हैं जो बहुत से रिश्तेदार होने पर भी मुहताज और बेकस रहे

सात पाँच की लाठी ऐक जने का बोझ

कई आदमीयों की मदद से काम पूओरा हो जाता है

सात पाँच मिल कीजिये काज , हारे जीते न आवे लाज

सलाह मश्वरे से काम क्यू जाये तो नाकामी के बाद भी शर्मिंदगी उठाना नहीं पड़ती क्योंकि हार जीत में सभी शामिल होते हैं

सात पाँच पकवा , न एक गूलर

(पक्वा - एक बेमज़ा जंगली फल है) एक गूलर सात पांच पिकोओं से बेहतर है एक अच्छ्াी चीज़ बहुत सी ख़राब चीज़ों से बेहतर है

सात रूपिया और ये नमूद

छोटी हैसियत का आदमी अपनी बड़ाई की डींगें मारे तो कहते हैं

सात सौ चूहे खा के बिल्ली हज को चली

बहुत से बुरे काम करके नेक काम का इरादा करना, कसरत से गुनाह करके तौबा पर आमादा होने के मौक़ा पर बोलते हैं

साठ गाँव बकरी चर गई

बहुत नुक़्सान हुआ, बह ख़सारा हुआ

साथ जोरू ख़सम का

असली संगत पति-पत्नी का ही होता है

साथ के लिए भात छोड़ा जाता है

अच्छे दोस्त के लिए फ़ायदे की परवाह नहीं की जाती

साथ को हाथ का दिया ही चलता है

परलोक में दान ही काम आएगा, फ़क़ीरों का वचन

साथ कोई आया न कोई जाए

न जन्म के समय कोई साथ होता है न मौत के समय

साठ सास नंद हों सौं, माँ की होर न अनसों हो

चाहे साठ सास / सासें और नंद हूँ माँ के बराबर नहीं हो सकतीं

साठ सास नंद हों सौं, माँ की होर न अनसों हो

चाहे साठ सास / सासें और नंद हूँ माँ के बराबर नहीं हो सकतीं

साठ सासें नंद हों सौं, माँ की हवा न अनसों हो

चाहे साठ सास / सासें और नंद हूँ माँ के बराबर नहीं हो सकतीं

साथ सो , पेट का दुख

औरत मर्द अगर अखटे स्वयं तो औरत हामिला हो ही जाती है और हमल की तकलीफ़ उठानी पड़ती है

साथ सोना और मुंह छुपाना

बड़ा काम करना और छोटे काम से बचना

साठा सो पाठा

रुक : साठा तो पाठा

साठा सो पाठा, बीसी सो खीसी

मर्द साठ बरस का भी बूढ़ा नहीं लगता और औरत बीसी बरस की उम्र में ढल जाती है

साठा तो पाठा

मर्द साठ बरस का भी बूढ़ा नहीं लगता

सावन बरसे न भादों सूखे

रुक : साइन हरे ना भादों सूओखे

सावन हरे न भादों सूखे

हर स्थिति में एक समान

सावन का अंधा हरा क्या जाने

जिसने जो चीज़ कभी देखी या बरती ही न हो वो उसका क़द्र नहीं करता

सावन के अंधे को हर तरफ़ सब्ज़ा नज़र आता है

हर व्यक्ति अपनी परिस्थितियों के अनुसार सबको समझता है; जो स्थिति नज़र में बस जाती है वही स्थिति हमेशा सामने रहती है (क्योंकि सावन का महीना सीधे बारिश का होता है और वनस्पति-विकास अपने चरम पर होता है इसलिए जो व्यक्ति इस महीने में अंधा होता है वह यही समझता रह

सावन के अंधे को हरा ही हरा सूझता है

हर आदमी दूसरों का माल अपने जैसा ही समझता है

सावन के साथ साँथड़ा , पोह माह क्या पाँखड़ा

साइन में पियाल और पोस मास में पंखा फ़ुज़ूल हैं

सावन की न सीत भली, बालक की न पीत भली

सावन के महीने में दही खाना और छोटे लड़के से प्रेम करना अच्छा नहीं

सावन की फूटी को हरा-हरा सूझता है

रुक : साइन के अंधे को हरा ही हरा नज़र आता है

सावन मास करेला फूला, नानी देख नवासा भूला

पक्षधर के भरोसे पर प्रबलता दिखाने वाले के संबंध में कहते हैं

सावन सोवे साँथरे और माह खरेरी खाट , आप ही मर जाएंगे तो जेठ चलेंगे बाट

जो साइन में पियाल पर सोए और माघ में ख़ाली चारपाई पर और जेठ में सफ़र करे वो ख़्वाहमख़्वाह मरेगा

सब अपने बहू बेगानी

बहू दूसरे परिवार की होती है इसलिए उसे अन्य समझा जाता है

सब अपनी गों के यार होते हैं

सभी अपने मतलब के होते हैं

सब बात खोटी, पहले दाल रोटी

खाने की बातों के अतिरिक्त सब बातें बेकार हैं

सब धान बाईस पसेरी

सबके साथ यकसाँ सुलूक, मुकम्मल अदल-ओ-मुसावात और अच्छे बुरे की तमीज़ ना होने के मौक़ा पर कहते हैं

सब धान बारा पंसेरी

सबके साथ यकसाँ सुलूक, मुकम्मल अदल-ओ-मुसावात और अच्छे बुरे की तमीज़ ना होने के मौक़ा पर कहते हैं

सब धान बारा पसेरी

सबके साथ यकसाँ सुलूक, मुकम्मल अदल-ओ-मुसावात और अच्छे बुरे की तमीज़ ना होने के मौक़ा पर कहते हैं

सब धान बावन पसेरी

सबके साथ यकसाँ सुलूक, मुकम्मल अदल-ओ-मुसावात और अच्छे बुरे की तमीज़ ना होने के मौक़ा पर कहते हैं

सब दिन ख़ुदा के हैं

जब सौभाग्य और दुर्भाग्य को किसी विशेष दिन से निर्धारित करते हैं तब कहते हैं

सब एक ही माथे

हर चीज़ एक ही व्यक्ति को मिलती है, अमीर के पास अधिक दौलत आती है, भरे को भरते हैं

सब एक ही नाव में सवार हैं

सब की हालत एक ही जैसी हो तो कहते हैं

सब ऐक ही थैली के चट्टे बट्टे हैं

सब एक जैसे हैं, इन में कोई अंतर नहीं

सब गहनों में चंदन हार

चंदन हार सब गहनों में बेहतर है

सब गन अधूरे , कोई गुन न पूरे

किसी में कोई ख़ामी रह जाये तो इस शख़्स की बाबत कहते हैं

सब घर मटियाले चूल्हे

सब घरों में कोई न कोई बुराई मौजूद है

सब गुन भरी बेलवा सोंठ

सोंठ बड़ी लाभदायक चीज़ होती है

सब गुन भरी मेरी लाडो , कून कहे लंडूरी

शेखी ख़ौर औरत के मुताल्लिक़ कहते हैं कि इस में ख़ूओबयां हैं ख़ामी कोई नहीं

सब जग रूठा रहे, मेरा मालिक न रूठा चाहिए

रुक : सब तोड़ें, पर एक रब ना तोड़े

सब जग रूठा रहे, श्रीराम न रूठा चाहिए

रुक : सब तोड़ें, पर एक रब ना तोड़े

सब जग रूठा रूठन दे एक वो न रूठा चाहिये

ईश्वर के प्रति किसी ऐसे मनुष्य का कहना जिसका समय ख़राब आ गया हो और जिससे सभी ने मुँह मोड़ लिया हो

सब जगह से हारे तो चले नान पारे

रुक : पेट भरा तो दौर की सूओझी, भोओक् लगी तन॒दूओर की सूओझी

सब जीते जी का बखेड़ा है ये तेरा है ये मेरा है, जब चल बसे इस दुनिया से न तेरा है न मेरा है

मौत के वक़्त कोई चीज़ साथ नहीं जाती, यह सब ज़िंदगी के ही झगड़े हैं

सब जीते जी का झगड़ा है, ये तेरा है ये मेरा है, चल बसे इस दुनिया से, न तेरा है न मेरा है

मौत के वक़्त कोई चीज़ साथ नहीं जाती ये सब ज़िंदगी के साथ हैं

सब जीते जी के झगड़े हैं ये तेरा ये मेरा है जब चल बसे इस दुनिया से ना तेरा है ना मेरा है

मौत के वक़्त कोई चीज़ साथ नहीं जाती, यह सब ज़िंदगी के ही झगड़े हैं

सब काम थका तो बुरा काम तका

जब सब कामों में असफल हुआ तो बुरा काम अपनाया, मनुष्य मजबूर हो कर बुरा काम करता है

सब कामों पूरी कौन कहे लंडूरी

जब कोई औरत शेखी बघारे तो कहते हैं

सब के बालम , घेर कर ले गए 'आलम-गीर

कुछ ना छोड़ना , सफ़ाया कर देना , किसी चीज़ के नायाब होने या क़हत पड़ जाने के मौक़ा पर कहते हैं

सब खेल , खेल चुके , हरदंगा बाक़ी है

तमाम तदबीरें नाकाम हो चुकीं हैं अब आख़िरी तदबीर बाक़ी है

सब की सुनना अपनी करना

इंसान सुने सब की मगर करे वही जो अपने लिए बेहतर समझे

सब को कहो , मेरी ज़हूरन को कुछ न कहो

कोई औरत नसीहत पर नाराज़ हो जाये तो कहते हैं कि ये बहुत नाज़ुक मिज़ाज औरत है

सब को ठेल मैं अकेल

अब कोई अपने अतिरिक्त जीवित नहीं है सब मर गए

सब कोई झूमर पहिरे लंगडी कहे हम-हूँ

किसी वस्तु के उपयोग करने के योग्य न होने पर भी उसके पाने की इच्छा करना

सब कोई मिले पर लंगोटिया न मिले

हर चीज़ मिल सकती है परंतु संकोच न करने वाला और बचपन का दोस्त नहीं मिल सकता

सब कुछ गया मियाँ की टख़-टख़ न गई

कंगाल हो गए परंतु शेख़ी न गई

सब कुत्ते काशी गए तो हंडिया किस ने चाटी

अगर सब नेक हैं तो शरारत किस ने की , शरीर अपनी हरकत से बाज़ नहीं आता

सब सदक़े में अलग

उस के प्रति कहते हैं जो अधिक मित्रता रखे परंतु मुसीबत पड़ने पर अलग हो जाए

सब संसार काल का खाजा, जैसे गदवा वैसे राजा

बादशाह हो या फ़क़ीर, मौत सब के लिए अटल है

सब संसार मौत का खाजा, जैसे गदवा वैसे राजा

बादशाह हो या फ़क़ीर, मौत सब के लिए अटल है

सब से बेहतर है मियाँ साहिब सलामती दूर की

किसी से बहुत घनिष्ठता बढ़ानी ठीक नहीं

सब से भला गोपी चंद न करे खेती न भरे डंड

आज़ाद आदमी अच्छा न कोई काम करे न नुक़्सान उठाए

सब से भला खसोटा न नफ़ा' जाने न टूटा

डाकू और लुटेरे को न किसी के नफ़ा की परवाह न किसी के नुक़्सान से ग़रज़

सब से भला किसान, खेती करे और घर रहे

दूसरे व्यवसाय वाले मारे मारे फिरते हैं, किसान अपने घर रहता है इस लिए सबसे अच्छा होता है

सब से भले भीक के रोट

फ़क़ीरों का क़ौल है कि जो चीज़ मांगे से मुफ़त मिल जाये सब से बेहतर है क्योंकि मेहनत नहीं करनी पड़ती

सब से भले मूसल चंद , करें न खेती भरे न डंड

चोर और क़ज़्ज़ाक़ सब से अच्छे, ना कोई काम करते हैं ना महसूल देते हैं , तंज़न मुस्तामल

सबसे भली चुप

ख़ामोशी सबसे बेहतर है

सब शक्ल है लंगूर की , इक दुम की कसर है

किसी की बदसूरती पर तंज़न कहते हैं

सब तोड़ें पर मेरा एक रब न तोड़े

सारी दुनिया नाराज़ हो मगर ख़ुदा नाराज़ ना हो

सभा बिगाड़ें तीन जनें , चुगल , चूतिया , चोर

चुगु़लखोर, बेवक़ूफ़ और चोर पंचायत की बदनामी का बाइस होते हैं

सब्र का अज्र ख़ुदा देगा

सब्र करने वाला पर ईश्वर दया करता है

सब्र कर मन में ता सुख रहे तन में

सब्र से तस्कीन-ए-क़लब हासिल होती है

सब्र की दाद ख़ुदा के हाथ है

सब्र करने वालों का ईश्वर ही न्याय करता है

सब्र की डाल में मेवा लगता है

सब्र या धैर्य का परिणाम अच्छा होता है

सबसे भला घसोटा, न जाने नफ़' न जाने टोटा

क़ज़्ज़ाक़ को किसी के नफ़ा नुक़्सान की पर्वा नहीं होती

सबसे भला खसोटा, न जाने नफ़' न जाने टोटा

क़ज़्ज़ाक़ को किसी के नफ़ा नुक़्सान की पर्वा नहीं होती

सच और झूट में चार उँगल का फ़र्क़ है

सच्चे बात देखी जाती है और झूओती बात सुनी जाती है, इसी लिए कहते हैं क्योंकि आँख और कान में चार उंगल का फ़र्क़ है

सच बात आधी लड़ाई होती है

सच बोलने पर प्राय: लड़ाई हो जाती है

सच बराबर तप नहीं झूट बराबर पाप

झूट का अंजाम बुरा होता है

सच बोल पूरा तोल

सच बोलना चाहिये और पूरा तौलना चाहिये

सच बोलना आधी लड़ाई मोल लेना है

सच्च बोलने पर उमूमन लड़ाई होजाती है क्योंकि सच्च लोगों को गिरां गुज़रता है, सच्च बात तल्ख़ मालूम होती है

सच बोलना और लड़ाई मोल लेना बराबर है

सच्च बोलने पर उमूमन लड़ाई होजाती है क्योंकि सच्च लोगों को गिरां गुज़रता है, सच्च बात तल्ख़ मालूम होती है

सच बोलना सुखी रहना

सच बोलने वाले को कोई मानसिक पीड़ा या मानसिक कष्ट नहीं होता

सच कहूँ तो माँ मारी जाए और झूट कहूँ तो बाप कुत्ता खाए

इस मौक़ा पर मुस्तामल जहां सच्च और झूओट् दोनों के इज़हार में मुश्किल पेश आती हो

सच की संसी बुरी होती है

सच की पकड़ बुरी होती है इस लिए लोग सच से घबराते हैं

सच्चा झूटे के आगे रो मरे

झूठा सच्चे को तंग करता है, झूठ पर तुरंत विश्वास हो जाता है

सच्चा नाम ख़ुदा का

ख़ुदा के सिवा कोई सच्चा नहीं

सच्चाई में ख़ुदा की सूरत है

सच्च बोलना बहुत अच्छी बात है क्यूँकि ईश्वर का नाम भी हक़ है

सच्चे के आगे झूटा रो मरे

सच्चे के सामने झूठे की कोई क़द्र नहीं

सच्चे की बावड़े, झूटे की नाबावड़े

सच्चा आदमी कामयाब होता है और झूओता नाकाम

सच्चे मर गए , झूटों को तप भी नहीं आई

जब कोई झूट बोलता है इस वक़्त कहते हैं कि उलटा ज़माना है झूओटे को कोई नुकंसान नहीं पहुंचता

सच्ची बात जो कहे , बहुत के दिल से उतर से उतर आवे

सच्चे आदमी से कोई ख़ुश नहीं होता

सच्ची बात कड़वी लगती है

यदि किसी की त्रुटि का वर्णन करो तो वो क्रोधित हो जाता है

सच्ची बात सा'दुल्लाह कह सब के मन से उतरा रहे

बंदा तो सच्च ही बोलेगा ख़ाह लोगों को गिरां गुज़रे, सच्ची बात कहने वाले को लोग पसंद नहीं करते

सच्ची बात सा'दुल्लाह कहे सब के मन से उतरा रहे

बंदा तो सच्च ही बोलेगा ख़ाह लोगों को गिरां गुज़रे, सच्ची बात कहने वाले को लोग पसंद नहीं करते

सदा 'ऐश दौराँ दिखाता नहीं गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं

मौक़ा मिलने पर फ़ायदा उठाना चाहिए क्योंकि मौक़ा निकल जाए तो फिर हाथ नहीं आता

सदा दिन एक से नहीं रहते

समय हमेशा बदलता रहता है, कभी आराम है कभी तकलीफ़

सदा दिवाली संत के जो घर गेहूँ होय

घर में ख़ूब खाने-पीने को हो तो नित्य त्योहार है

सदा 'ईद नहीं जो हल्वा खाए

हर रोज़ ईद नीस्त कि हलवा ख़ुर्द किसे का तर्जुमा, हर रोज़ नेअमत नहीं मिलती

सदा जोबन नहीं रहता

सुंदरता हमेशा नहीं रहती

सदा के दानी , मूसल के नौ टके

बख़ील के मुताल्लिक़ तंज़ से कहते हैं कि मामूली चीज़ पर बहुत ख़र्च करता है

सदा के दुखिया, नाम चंगे ख़ान

हैसियत के प्रतिकूल नाम

सदा के उजड़े , नाम बस्ती राम

नामौज़ूं नाम, नाम अच्छा हालात ख़राब

सदा की पदनी उरदों दोश

कमी अपने आप में और लांछन दूसरों पर

सदा किसी की नहीं रही

हमेशा किसी के अच्छे दिन नहीं रहे

सदा मियाँ घोड़े ही तो रखते थे

शेख़ी-ख़ोरे पर व्यंग है

सदा न काहो की रही गल पीतम के बाँह, ढलते ढलते ढल गई सरवर की सी छाँह

किसी की बाँहें ख़ावंद के गले में हमेशा नहीं रहतीं, दरख़्त की छाओं की तरह हटती जाती हैं, मुहब्बत हमेशा एक तरह नहीं रहती शुरू में ज़्यादा होती है फिर कम होजाती है

सदा न काहो की रही गल पीतम के बाँह, ढलते ढलते ढल गई तरवर की सी छाँह

किसी की बाँहें ख़ावंद के गले में हमेशा नहीं रहतीं, दरख़्त की छाओं की तरह हटती जाती हैं, मुहब्बत हमेशा एक तरह नहीं रहती शुरू में ज़्यादा होती है फिर कम होजाती है

सदा नाव काग़ज़ की चलती नहीं

धोखा-धड़ी का काम बहुत दिनों नहीं चलता

सदा फूली फूली चुनी है

हमेशा फूली कलियाँ ही चुनी हैं अर्थात मुरझाई कली कभी उसके हाथ नहीं आई

सदा-ए-दुहुल अज़ दूर ख़ुश आयद

ढोल की आवाज़ दूर से अच्छी मालूम होती है

सद-इंसान-सद-मिज़ाज

लोगों के मिज़ाज मुख़्तलिफ़ होते हैं

सदक़ा दिया रद्द-ए-बला

दान-पुण्य करने से विपत्तियाँ दूर हो जाती हैं

सदक़ा रद्द-ए-बला

दान देने से विपत्तियाँ और मुसीबतें दूर होती हैं

सद्र जहाँ कि बद्र जहाँ , छोड़ पहानी जाएँ कहाँ

वतन ही में रहना और मुसीबत झेलना

सद्रा पढ़ कर अहमक़ रहे

मंतिक़ पढ़ कर भी अक़्ल न आई

सफ़र और सक़र बराबर हैं

सफ़र नर्क का नमूना है

सफ़र और सक़र में एक नुक़्ते का फ़र्क़ है

सफ़र अर्थात यात्रा और सक़र अर्थात नरक में बहुत थोड़ा अंतर है

सफ़र कर्दा बिस्यार-ए-गोयद दरोग़

अक्सर सी्याह मुबालग़ा आमेज़ हकाएतें बयान करते हैं, सी्याह बहुत झूट बोलते हैं

सफ़र वसीला-ए-ज़फ़र

सफ़र में बहुत फ़ायदे होते हैं, सफ़र कामयाबी का ज़रीया है

सफ़ेद बाल जवानी का ज़वाल

बाल सफ़ेद हुए और जवानी गई

सफ़ेद डाढ़ी में सियाही लगवाना

बुढ़ापे में बदनामी मूल लेना

सगरे घर में रींग के सुसरी सर पटक के मर जा

श्रम दिलाने के लिए कहते हैं

सहर का भूला शाम आया

अगर कोई व्यक्ति किसी प्रकार की ग़लती या अपराध करने के पश्चात, शीघ्र उस काम से तौबा (पाश्चाताप) कर ले और सुधर जाये तो कहते हैं

सहरी भी न खाऊँ तो काफ़िर न हो जाऊँ

ایک ماما سحری کھا لیتی تھی روزہ نہ رکھتی تھی ، ایک دن مالک نے پوچھا تو یہ جواب دیا ، یعنی دین کی مطلب کی بات مان لی اور تکلیف کی بات چھوڑ دی.

सहरी खाए सो रोज़ा रखे

एक व्यक्ति की सहरी कुत्ता खा गया, उसने उसे सारा दिन भूका बाँधे रखा कि उसने सहरी खाई है वही रोज़ा रखेगा अर्थात जो फ़ायदा उठाए वही काम करे

सहीह गए सलामत आए

जैसे गए थे वैसे ही आ गए कुछ खोया न पाया

सहज पक्के सो मीठा

जिस काम में जल्दी न की जाए उस का नतीजा अच्छा होता है, जल्दी का काम अच्छा नहीं होता

सह्ज सुहाग पर कौन गुंधाए सीस

आरिज़ी ज़िंदगी पर क्या भरोसा करना

सहता सहे , अन सहता छाती पत्थर दहे

रुक : सहता सहे इन सहता छाती दहिय

सहता सहे अन सहता छाती दहे

बर्दाश्त हो सके वो बर्दाश्त किया जाता है जो नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त हो वो दिल तोड़ देता है

सहता सहे न सहता छाती दहे

बर्दाश्त हो सके वो बर्दाश्त किया जाता है जो नाक़ाबिल-ए-बर्दाश्त हो वो दिल तोड़ देता है

सैंय्याँ भए कुतवाल अब डर क्या है

रुक : सी्यां भए कुतवाल अब डर किया है

सैंय्याँ भए कुतवाल अब डर काहे का

रुक : सी्यां भए कुतवाल अब डर किया है

सैद रा चूँ अजल आयद सूए सय्याद रवद

शिकार की जब मौत आती है तो शिकारी की तरफ़ जाता है, जब मौत का वक़्त आता है कुछ बस नहीं चलता

सैफ़ तो पट पड़ी थी मगर नीमचा काट कर गया

जिस पर भरोसा था इस से तो काम ना निकला बल्कि एक अदना वसीले से निकल आया , जिस से उम््ीद ना थी इस से मतलब बरारी हुई

सैफ़ तो पट पड़ी थी पर नीमचा काट कर गया

जिस पर भरोसा था इस से तो काम ना निकला बल्कि एक अदना वसीले से निकल आया , जिस से उम््ीद ना थी इस से मतलब बरारी हुई

सजी न वजी दूल्हा की मौसी

नामवरी के मुवाफ़िक़ लेअक्त का ना होना

सखार दखार आसमानी फ़रमान हैं

क़हत और तुग़यानी ख़ुदा के हुक्म से होते हैं

सख़ी दे और शर्माए बादल बरसे और गर्माए

फ़ी्याज़ आदमी, दे कर एहसान नहीं जताता मगर बादल बरसता है और गरजता भी है, सखी की सख़ावत एहसान रखने के लिए नहीं होती

सख़ी देवे और शर्मावे बादल बरसे और गर्मावे

फ़ी्याज़ आदमी, दे कर एहसान नहीं जताता मगर बादल बरसता है और गरजता भी है, सखी की सख़ावत एहसान रखने के लिए नहीं होती

सख़ी देवे और शरमावे बादल बरसे और गरमावे

उदार व्यक्ति अपनी उदारता प्रकट नहीं करता, जिस तरह बादल चुपके से बारिश बरसाता है

सखी हो हम हों राज कुमार

जब कोई शेखी मारे तो उसे बतौर तंबीया कहते हैं

सख़ी का बेड़ा पार और सूम की मिट्टी ख़राब

उदार व्यक्ति सफल रहता है, सोम (कंजूस) लोगों की नज़रों में गिरा रहता है

सख़ी का बेड़ा पार है

सखी की मुश्किल आसान है , सखी की आक़िबत सुधर जाती है

सख़ी का ख़ज़ाना कभी ख़ाली नहीं होता

उदार व्यक्ति के पास हमेशा रुपया रहता है

सख़ी का सर बलंद है

उदारता से बड़ा सम्मान है

सख़ी का सर बुलंद, मूज़ी की गोर तंग

उदार व्यक्ति का हमेशा सम्मान होता है मूज़ी हमेशा दुख एवं तकलीफ़ में होता है

सख़ी के माल पर पड़े और सूम की जान पर पड़े

दाता का तो केवल धन ख़र्च होता है दान करने में परंतु कंजूस के प्राणों पर आ जाती है अर्थात चोर डाकू उसे मार डालते हैं

सख़ी की कमाई में सब का साझा

क्यूँकि वह दूसरों को बाँट कर खाता है

सख़ी की नाओ पहाड़ चढ़े

दाता के कठिन से कठिन काम सफल होते हैं

सख़ी सख़ावत से फलता है 'अदू 'अदावत से जलता है

उदार व्यक्ति सदैव सुखी रहता है और शत्रु हमेशा जलता रहता है

सख़ी से भेट नहीं दलिद्दर से क्यों तोड़िए

अगर ज़्यादा फ़ायदा नहीं तो थोड़ा ही सही- बड़े से मुलाक़ात ना की छोटे ही से कर ली

सख़ी से राह नहीं दलिद्दर से क्यों तोड़िए

अगर ज़्यादा फ़ायदा नहीं तो थोड़ा ही सही- बड़े से मुलाक़ात ना की छोटे ही से कर ली

सख़ी से राह नहीं सूम से क्यूँ तोड़ियो

अगर अच्छे से मुलाक़ात नहीं तो बुरे से विरोध नहीं कुछ तो फ़ायदा हो ही रहेगा

सख़ी से शूम भला जो जल्दी दे जवाब

इंतज़ार में रखने से इनकार कर देना बेहतर है

सख़ी से शूम भला जो तुरत दे जवाब

इंतज़ार में रखने से इनकार कर देना बेहतर है

सख़ी से सूम भला जो तुरत दे जवाब

इंतिज़ार में रखने से इनकार बेहतर है

सख़ी सूम साल भर में बराबर हो जाते हैं

फ़ी्याज़ और दरिया दिल आदमी का बख़शिश-ओ-सख़ावत के ज़रीये और बख़ील आदमी का बेजा सिर्फ़ के बाइस साल भर में हिसाब बराबर हो जाता है, फ़ी्याज़ आदमी का माल सही जगह सिर्फ़ होता है और बख़ील का ग़लत जगह

सलाह के लिए बुड्ढे लड़ने के लिए जवान

मश्वरा बुड्ढों से लेना चाहिए और लड़ने के लिए जवान आदमीयों को हमराह लेना चाहिए

सलाह-कार-कुजा-ओ-मन-ख़राब-कुजा

मेरे जैसा बर्बाद कहाँ और सलाहकार कहाँ अर्थात दोनों एक दूसरे के विपरीत हैं

सलामत रहे बहू जिस का बड़ा भरोसा

किसी का लड़का मर जाने पर उसे दिलासा देते हुए कहते हैं

सलाम-ए-रोस्ताई बे ग़रज़ नीस्त

दहक़ाँ का सलाम बुला ग़रज़ नहीं होता, ग़रज़ के लिए ख़ुशामद करनी पड़ती है, ख़ुशामद के मौक़ा पर मुस्तामल, ग़रज़मंदाना सलाम

सलीमो बिन 'ईद कैसी

त्यौहार बिना सजी-धजी महिलाओं के अच्छा नहीं लगता

समा करे न क्या करे समैं समैं की बात, किसी समय के दिन बड़े किसी समय की रात

हर मौसम अपना उचित काम करता है मनुष्य कुछ नहीं कर सकता

समझने वाले की मौत है

बुद्धिमान पर ही सब काम की ज़िम्मेदारी आकर पड़ती है इसलिए कोई काम यदि बिगड़ जाए तो उसकी बुराई भी उसी को भुगतनी पड़ती है

समे चूक फिर क्या पछ्तानी

मौक़ा गुज़र गया तो पछताने से किया होता है

समय समय के दाता राम

समय पड़ने पर ईश्वर ही सहायक होता है

समय समय की बात , बाज पर झपटे बगला

मौक़ा पाने पर कमज़ोर भी हमला कर देता है

सम्धन का तकला चुभ चुभ जा, चोरी का लपका कभी न जा

इंसान को जब कोई बुरी आदत पड़ जाती है तो चाहे उस की वजह से कैसी ही ज़िल्लत या तकलीफ़ हो वो आदत कभी नहीं जाती. चोरी की आदी एक औरत ने अपनी समधिन के घर से चरखे का तकुला चुरा कर अपने नेफ़े में रख लिया, वो तकुला चुभ चुभ जाता था जिस से वो बेकल थी और बार बार कहती समधिन का तकुला चुभ चुभ जा. मेरे हाथ का लपका कभी ना जा

सम्धन का तकला चुभ चुभ जा, हाथ का लपका कभी न जा

इंसान को जब कोई बुरी आदत पड़ जाती है तो चाहे उस की वजह से कैसी ही ज़िल्लत या तकलीफ़ हो वो आदत कभी नहीं जाती. चोरी की आदी एक औरत ने अपनी समधिन के घर से चरखे का तकुला चुरा कर अपने नेफ़े में रख लिया, वो तकुला चुभ चुभ जाता था जिस से वो बेकल थी और बार बार कहती समधिन का तकुला चुभ चुभ जा. मेरे हाथ का लपका कभी ना जा

सम्धन का तकवा चुभ चुभ जा, हाथ का लपका कभी न जा

इंसान को जब कोई बुरी आदत पड़ जाती है तो चाहे उस की वजह से कैसी ही ज़िल्लत या तकलीफ़ हो वो आदत कभी नहीं जाती. चोरी की आदी एक औरत ने अपनी समधिन के घर से चरखे का तकुला चुरा कर अपने नेफ़े में रख लिया, वो तकुला चुभ चुभ जाता था जिस से वो बेकल थी और बार बार कहती समधिन का तकुला चुभ चुभ जा. मेरे हाथ का लपका कभी ना जा

समझा और पत्थर हुआ

समझदार अपने बिचार को आसानी से नहीं बदलता

समझे सो गधा, अनाड़ी की जाने बला

बुद्धिमान के लिए मुसीबत है, मूर्ख को परवाह नहीं

समझे तो पत्थर का हो जाए

ऐसे व्यक्ति के संबंध में औरतें कहती हैं जो बिलकुल नासमझ हो

समझो न बूझो खूँटा ले जूझो

ऐसे व्यक्ति के संबंध में बोलते हैं जो बुद्धि नहीं रखता और यूँ ही लड़ता है

संपत की जोरू, बिपत का यार

स्त्री धन की साथी है और सच्चा मित्र विपत्ति का साथी है

सम्पत से भेटा नहीं, दलिद्दर से टूटन

कामयाब शख़्स से ताल्लुक़ नहीं और ग़रीब से भी वास्ता नहीं, बहुत बेवक़ूफ़ है

समुंदर सोख को दरिया क्या

बड़े माल मारने वाले को थोड़े लाभ की चिंता नहीं होती

सन गली जाए सूत की देन

ताक़तवर आदमी डरें और कमज़ोर दिलेरी करें

संदल की लकड़ी को नहीं जलाते

हुनरमंद को तकलीफ़ नहीं देते , अच्छी चीज़ को ज़ाए नहीं करते

संगत भली न साध की और एक गेंदे की बास

न साधू का साथ अच्छा होता है और न गेंदे की ख़ुश्बू

संगत भली न साध की और क्या गंदी का बास

ना फ़क़ीर की रिफ़ाक़त अच्छी होती है और ना गेंदे की बूओ, इन दोनों की सोहबत पाएदार नहीं होती

संतोख कड़वा पर फल मीठा होता है

सब्र गो तल्ख़ होता है उसका फल मीठा होता है

सपेरा साँप ही ख़रीदता है

हर शख़्स मतलब की शैय लेता है

सपने की सी माया जिस को अपने बतलावे

धन-संपत्ति किसी के पास हमेशा नहीं रहती, यह सपने जैसी चीज़ है

सपने में राजा भए, दिन को वही अहवाल

रहें झोंपड़ों में ख़ाब देखें महलों का, ग़ुर्बत में भी आला ख़्यालात हैं

सपने में राजा है दिन को वही अहवाल

गरीबी में भी उच्च विचार हैं, रहें झोंपड़ों में सपना देखें महलों का

सपने में राजा भए, दिन को वही अहवाल

रहें झोंपड़ों में ख़ाब देखें महलों का, ग़ुर्बत में भी आला ख़्यालात हैं

सपने में राजा है, दिन को वही अहवाल

रहें झोंपड़ों में ख़ाब देखें महलों का, ग़ुर्बत में भी आला ख़्यालात हैं

सपूती रोवे टूकों को, निपूती रोवे पूतों को

हर व्यक्ति को कोई न कोई दुख होता है

सपूतों के कपूत और कपूतों के सपूत

अच्छों की बुरी संतान होती है और बुरों की अच्छी

सर बड़ा सरदार का पैड़ बड़ा गँवार का

क्याफ़ा के तौर पर प्रसिद्ध है कि बड़ा सिर ज्ञान या रुतबे का प्रतीक है और बड़ा पैर अज्ञानता और मूर्खता का प्रतीक है

सर बुरीदा बाँग नमी दहद

कटे हुए सर से आवाज़ नहीं निकलती, मार डालना ही बेहतर है

सर डोली पाँव कहार आएँ बीवी नौ-बहार

ज़रासी देर के लिए आकर फ़ौरन चले जाने के मौक़ा पर मुस्तामल

सर गाड़ी पैर पहिया करे तो रोटी मिलती है

मेहनत करने से रोटी हासिल होती है

सर जाए बात में फ़र्क़ न आए

वचन पूरा करना चाहिए, चाहे जान क्यूँ न चली जाए

सर का नहाया पाक

पूर्ण स्नान किया हुआ व्यक्ति पवित्र होता है, मुकम्मल नहाया हुआ इंसान पाक होता है

सर काला मुँह बाला

उसके बारे में कहते हैं जिसके सर के बाल सफ़ेद हो गए हों मगर वह जवानों की तरह लालच की बातें करता हो

सर के बदले सर गया, दाढ़ी गई अलेट

एक नुक़्सान उठा चुके अब एक और हुआ

सर की टली जान पर आई

बजाए किसी के सर की टली मेरी जान पर आई

सर में आग लगी, तल्वों में बुझी

निहायत ग़ुसे की तर्जुमानी के मौक़ा पर मुसतामल, कमाल तैश में आना

सर में बाल नहीं भाल से लड़ाई

कमज़ोर हो कर ताक़तवर से मुक़ाबला करता है

सर नहीं या सरोही नहीं

हो गज़ अपना हक़ ज़ाए नहीं होने देंगे, तख़्त या तख़्ते, जान की बाज़ी लगाना

सर नक़्द नौकरी उधार

पहले काम करो फिर उजरत या पगार मिलेगी

सर पर आरे चल गए तो भी मदार ही मदार

सख़्त तकलीफ़ उठाई फिर भी अपनी हिट पर क़ायम रहा

सर पर आरी चल गई तो भी मदार ही मदार

सख़्त तकलीफ़ उठाई फिर भी अपनी हिट पर क़ायम रहा

सर पर जूती और मुँह में रोटी

उस अवसर पर प्रयोग किया जाता है जब कोई खिलाने-पिलाने में कमी न करे परंतु डांट डपट और मारने पीटने में भी कोई कमी नहीं करता

सर पर जूती, हाथ में रोटी

खाने को मिल जाये ख़ाह बे इज़्ज़ती ही क्यों ना हो, बेग़ैरत को बेइज़्ज़ती की पर्वा नहीं होती, वो फ़ायदा से काम रखता है

सर पर पगड़ी नहीं गुलाल डालने आया

यह उन लोगों के बारे में कहा जाता है जो अपनी क्षमता से परे काम करते हैं

सर सहलाए भेजा खाए

मित्रता की आड़ में हानि पहुँचाने वाले के बारे में कहते हैं

सर सहलाऊँ भेजा खाऊँ

दोस्त बिन कर नुक़सान पहुंचाने वाले की निस्बत कहते हैं

सर सज्दों में, मन बदियों में

बज़ाहिर नेक बहातन बद, इस मौक़ा पर मुसतामल जब कि बज़ाहिर कोई बड़ा नेक बने मगर दिल में ख़यासत भरी हो

सर सलामत तो पगड़ी पचास

जीते रहे तो बहुत कुछ मिल रहेगा ज़िंदगी चाहिए साज़-ओ-सामान भी मिल जाएगा ऐसे मौक़ा पर कहते हैं जिस किसी को जान बचाने के लिए आन गंवानी पड़े

सर से बैरार दुम से नाता

एक ही कुंबे या गिरोह वग़ैरा के एक या चंद अफ़राद से ताल्लुक़ बाक़ी से बेताल्लुक़ी पर बतौर तंज़-ओ-ताज्जुब

सर से लगी तो तलवों में बुझी

क्रोध से भड़क उठना

सर से सरवाहा

सर के साथ पगड़ी है, सरदार के साथ सेना है (ज़िम्मेदारी को प्रकट करने के अवसर पर प्रयुक्त)

सर से उतरे बाल , गू में जाओ या मूत में

जिस बात को छोड़ दिया फिर इस से किया ताल्लुक़ वो बुरा है या अच्छ्াा

सर उठा कर चला और ठोकर खा कर गिरा

तकबु्ुर से ज़िल्लत और रुसवाई होती है

सराए का कुत्ता हर मुसाफ़िर का यार

सराय में रहने वाला कुत्ता हर एक यात्री का मित्र होता है, स्वार्थी और मतलबी हर एक से गठ जाते हैं

सराहिल बहुरिया डोम घर जाए

सराही बहू भंगी के साथ भाग जाती है

सरक न चुंगी डाल के भुस में

रुक : भुस में चुनगी डाल अलख

सरदारी का डंडा अटका है

अपने आप को बड़ा समझते हैं, बड़े पद पर रहने के बाद छोटा पद स्वीकार न करने वाले पर व्यंग्य

सर्दी का मारा पनपे है अन्न का मारा न पनपे

चाहे कपड़ा ना हो मगर पेट को रवी ज़रूर चाहिए, सर्दी का मारा बच जाता है फ़ाक़ों का मारा नहीं बचता

सर्दी का मारा पनपता है अन्न का मारा नहीं पनपता

चाहे कपड़ा ना हो मगर पेट को रवी ज़रूर चाहिए, सर्दी का मारा बच जाता है फ़ाक़ों का मारा नहीं बचता

सर्दी सताएगी तो गुदड़ी याद आएगी

तकलीफ़ में ऐसी चीज़ की क़दर हवन अज्जू पहले बेफ़ाइदा मालूम देती हो

सर-ए-मार कोफ़ता बा

साँप का सर कुचल देना अच्छा है, ज़हरीले को नष्ट कर देना चाहिए

सर-ए-शाम पगड़ी ग़ाइब

बहुत चोरी होती है

सरकार से मिले तेल, पल्ले ही में मेल

सरकार से छोटी से छोटी वस्तु भी मिले तो उसे प्रसन्नतापूर्वक लेना चाहिये

सरोही बाँधे तो दो

जो चीज़ किसी के लिए इतनी ज़रूरी हो जितनी कि सिपाही के लिए युद्ध के मैदान में तलवार, तो उसे वह चीज़ ज़रूरत के समय काम आने के लिए एक की जगह दो रखना चाहिए (क्योंकि तलवार अपने लोहे की गुणवत्ता के कारण... अचानक से टूट जाती है, इसलिए यह कहावत बनी)

सरसों फूले फाग में और साँझी फूले साँझ, न फूले न फले जो तिरिया हो बाँझ

उस स्त्री के प्रति कहते हैं जो बाँझ अर्थात बच्चा जनने वाली न हो

ससी की तीन टाँग

ज़िद्दी आदमी की बारे में कहते हैं कि वह हक़ीक़त को स्वीकार नहीं करता

सस्ता रोए बार बार, महंगा रोए एक बार

इंसान को महंगी चीज़ ख़रीदने पर एक ही वक़्त अफ़सोस होता है मगर सस्ती ख़रीदने पर बार बार अफ़सोस करता है क्योंकि सस्ती चीज़ जलद ख़राब हो जाती है और तकलीफ़ देती है

सस्ता गेहूँ घर-घर पूजा

सस्ते समय में लोग ख़ुश होते हैं

सस्ता हँसावे , महँगा रुलावे

सस्ते ज़माने में लोग ख़ुश होते हैं और महंगे में परेशान

सस्ता ऊँट महँगा पट्टा

अस्ल चीज़ सस्ती आवश्यक वस्तु महँगे

सस्ते को देख भाल के लेना चाहिए

सस्ते माल में ज़रूर कोई नुक़्स होता है इस लिए इस के खरीदते वक़्त एहतियात करनी चाहिए

सस्ती भेड़ की दुम उठा उठा कर देखते हैं

इंसानी फ़ित्रत है कि महंगा माल एक दम ख़रीद लेता है और सस्ती चीज़ में बहुत छानबीन करता है

सस्ती भेड़ की टाँग उठा उठा कर देखते हैं

इंसानी फ़ित्रत है कि महंगा माल एक दम ख़रीद लेता है और सस्ती चीज़ में बहुत छानबीन करता है

सत हारा और गया सारा

जिस ने हिम्मत हार दी वह मारा गया

सत मान के बकरा लाए , कान पकड़ सर काटा , पूजा थी सो मालन ले गई , मूरत को धर चाटा

जो भेंट की बुत पर चढ़ाते हैं वो कमीने लोग खा जाते हैं

सत सीता ग़प लछ्मन

मुत्तक़ी बंकर पराया माल चिट करना, सर सहलाना, भेजा खाना

सत्तर गज़ की पगड़ी सर नंगा

नालायक़ी और बेशऊरी, तवंगरी में मुफ़लिसी का इज़हार, अमीरी में फ़क़ीरी

सत्तर कान बहत्तर झोल

हर तरफ़ से टेढ़ा और झोलदार, बहुत ख़राब, ख़राब सिले हुए कपड़े की बुराई में प्रयुक्त

सत्तू खा के शुक्र क्या

थोड़ी सी चीज़ से प्रसन्न हो गए, संतोषी व्यक्ति है

सत्तू मन भत्तू जब गलबा तब खाए धान बिचारे भले कोटे खाए चले

जब कोई चालाक किसे-ए-कम समझ को अपनी लफ़्फ़ाज़ी और चर्बज़बानी से फांस कर फ़ायदा उठाता है या बेवक़ूफ़ बनाता है तो कहते हैं

सत्तू मन भत्तू जब घोले जब खाए धान बिचारे भले कोटे खाए चले

जब कोई चालाक किसे-ए-कम समझ को अपनी लफ़्फ़ाज़ी और चर्बज़बानी से फांस कर फ़ायदा उठाता है या बेवक़ूफ़ बनाता है तो कहते हैं

सत्तू मन भत्तू जब घोले तब खाए धान बिचारे भले कोटे खाए चले

जब कोई चालाक किसे-ए-कम समझ को अपनी लफ़्फ़ाज़ी और चर्बज़बानी से फांस कर फ़ायदा उठाता है या बेवक़ूफ़ बनाता है तो कहते हैं

सतवंती की लाज बड़, छिनारी की बात बड़

'इज़्ज़तदार एवं पारसा स्त्री में शर्म और लाज बहुत होती है और छिनाल बातें बहुत बनाती है

सौ 'ऐबों का एक 'ऐब नादारी है

ग़रीबी बहुत बरी चीज़ है

सौ बार तेरी तो एक बार मेरी

कभी न कभी तो पकड़ा जाएगा

सौ बरस बा'द कूड़े घूरे के दिन भी बहोरते फिरते हैं

कोई शैय सदा एक हाल पर नहीं रहती, बुरे दिनों के बाद भले दिन भी आते हैं

सौ बेद, न एक लवेद

हज़ार नसीहतें एक तरफ़ और डंडा एक तरफ़

सौ बेद, न एक मुरीद

हज़ार नसीहतें एक तरफ़ और डंडा एक तरफ़

सौ भड़वे मरे तो एक चम्मच चोर पैदा हुआ

ख़िदमत गारों पर तंज़ कि ये बदकिर्दार होते हैं

सौ भूतों की ढेरी है

आम लोगों की सैकड़ों तद्बीरों से ख़ास लोगों की एक तदबीर बहर है, बहुत से शरीकों की चीज़ है जिस में से हर एक शरीक है

सौ धोती , न एक गोती

एक क़िराबती रिश्तेदार बहुत से ग़ैरों से बेहतर होता है

सौ दिल्ली उजड़ गई तो भी सवा लाख हाथी

इतनी बार बर्बाद होने के बाद भी दिल्ली में अभी भी बहुत दौलत है

सौ दिन चोर के एक दिन साध का

झूटे का झूट, मकअर् की मक्कारी और चोर की चोरी एक ना एक दिन पकरी जाती है

सौ दिन चोर के एक दिन शाह का

झूटे का झूट, मकअर् की मक्कारी और चोर की चोरी एक ना एक दिन पकरी जाती है

सौ दिन चोर के तो एक दिन कोतवाल का

चोर एक न एक दिन अवश्य पकड़ा जाता है

सौ दोस्त सौ दुश्मन

इंसान को हर वक़त सावधान रहना ज़रूरी है क्यों कि दोस्तों के इलावा दुश्मन भी होते हैं

सौ दुश्मन , सौ दोस्त

ग़ाफ़िल ना रहने की ताकीद के लिए बोलते हैं, इंसान को बरवक़्त एहतियात लाज़िम है क्योंकि दोस्तों के इलावा दुश्मन भी होते हैं

सौ गन्ने न एक पौंडा

एक अच्छ्াी चीज़ सौ मामूली चीज़ों से बेहतर है

सौ गज़ वारों , गज़ भर न फाड़ों

सिर्फ़ ज़बानी हमदर्दी करने वाले की निस्बत बोलते हैं जो दोस्ती और मुहब्बत तो बहुत ज़ाहिर करे मगर अमलन कुछ ना करे बल्कि मुसीबत के वक़्त अलग हो जाये

सौ गुंडा न एक मुछ मुंडा

एक मच्छ मुंडा सौ गुंडों के बराबर होता है

सौ ग़ुलाम घर सूना

अगर औलाद न हो तो सौ नौकरों के बावजूद घर सूना होता है

सौ हीले हज़ार बहाने

काम न करने वाले के लिए हर तरह मना कर सकता है, काम न करने वाले बहुत से हीले ढूँढ लेते हैं

सौ 'ईलाज एक परहेज़

prevention is better than cure

सौ जियों का एक बचावा

हिंदूस्तान में आमतौर पर सारे ख़ानदान की पालन-पोषण करने वाला एक ही व्यक्ति होता है

सौ कपूत एक सपूत भला

बहुत से नालायक़ों से एक लायक़ बेहतर है

सौ कपूत से एक सपूत भला

एक लायक़ बेटा सौ नालायक़ों से अच्छा है, बहुत से नालायक़ों से एक लायक़ बेहतर है

सौ खोटों का वो सरदार , जिस की छाती एक न बाल

मशहूर है कि जिस की छाती पर बाल ना हूँ वो सख़्त दग़ाबाज़ होता है

सौ की लाठी ऐक का बोझ

कुछ लोगों की मदद से किसी का काम बन जाने के अवसर पर बोलते हैं

सौ कोसा एक मसोसा बराबर हें

सब्र सौ बद दुआओं से बेहतर है

सौ मारे एक न गिने

किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में कहा जाता है जो कड़े दण्ड के योग्य हो

सौ मारे निनान्वे से भूल जाए

बहुत ज़्यादा मारे , सौ मारे एक ना गिने

सौ में फूला, हज़ार में काना, सो लाख में ईंचा ताना

जिस की आँख में भूओला हो वो बुरा होता है, काना इस से भी बुरा और ये ेंछा ताना इस भी बुरा

सौ नक्टों में एक नाक वाला नक्कू

सौ बुरों में एक नेक आदमी हो तो वो भी बदनाम हो जाता है

सौ पाजियों का एक पजोड़ा है

बहुत पाजी है, बहुत बुरा चरित्र है

सौ पीली न एक गूलर

सौ घटिया चीज़ों से एक अच्छी चीज़ बेहतर है

सौ पूले काटे वो भी बराबर , हज़ार काटे वो भी बराबर

जहां मेहनत की कुछ क़दर नहीँ हो वहां कहते हैं

सौ रूपए में एक बोतल का नशा होता है

दौलत इंसान को ग़ाफ़िल और मुतकब्बिर करदेती है

सौ सयाने एक मत

जितने बुद्धिमान होंगे सबकी राय एक होगी, बुद्धिमानो में एक राय पर सहमती होती है

सौ सुनार की एक लुहार की

कमज़ोर के सौ घूँसों पर ताक़तवर का एक घूँसा भारी होता है, सफलता के लिए बल से ज़्यादा कौशल या विवेक की आवश्यक होती है

सौ तक गिनती , पैर तक बिंती

बानो पर गिरने से ज़्यादा कोई आजिज़ी नहीं

सौदा अच्छा लाभ का और राजा अच्छा दाब का

वह सौदा अच्छा है जिसमें फ़ायदा हो, वह राजा अच्छा है जिसका दबदबा हो

सौदा बिक गया, दुकान रह गई

सुंदरता और जवानी चली गई, केवल ढाँचा रह गया

सौदा लीजिये देख कर और रोटी खाइए सेक कर

माल देख कर ख़रीदना चाहीए और रोटी गर्म कर के खानी चाहिए

सौगन चून की भी बुरी होती है

साझी कैसा ही कमतर हो दिक करने को काफ़ी है

सौकन भुगती जाए और सौतेला न भुगता जाए

सोकन के मुक़ाबले में इस की औलाद से ज़्यादा दुख पहुंचता है

सौकन बुरी है चून की और साझे का काम, कांटा बुरा करेल का और बदरी की घाम

सौत बराए-नाम हो तो भी बुरी है यही हाल साझे के काम का है, करेल का कांटा और बरसात की घमस भी अच्छी नहीं

सौकन जाया किस को भाया

सौतन की बच्चों से प्यार नहीं होती

सौकन मर गई आँख छोड़ गई

एक दुश्मन टला दूसरा मौजूद है

सौकन तो चून की भी बुरी

स्वत चाहे कैसी ही नाचीर और कमतर हो, बहरहाल गवारा नहीं, ना जाने किस वक़्त नुक़्सान पहुंचा दे, हरीफ़ बहरसूरत हरीफ़ है

सौकन तो चूनी की भी बुरी

स्वत चाहे कैसी ही नाचीर और कमतर हो, बहरहाल गवारा नहीं, ना जाने किस वक़्त नुक़्सान पहुंचा दे, हरीफ़ बहरसूरत हरीफ़ है

सौकन ज़हर की छुरी, एक भी बुरी

रुक : सोकन तो चूंकि भी बुरी

सौत अच्छी सौत के लेल्ड़े बुरे

रुक : स्वत भली, सौतेला बुरा

सौत भली सौतेला बुरा

स्वत की बनिसबत उस की औलाद ज़्यादा दुश्मनी का बरताओ करती है , साझी की बनिसबत इस के अहल-ए-कार और मुसाहिब ज़्यादा सताते हैं

सौत चून की भी बुरी

सोकन कितनी ही हक़ीर और कमज़ोर क्यों ना हो बर्दाश्त नहीं की जा सकती या ये कि कभी ना कभी नुक़्सान पहुंचा ही देती है, (गाहे हरीफ़ के लिए इसी मफ़हूम में मुस्तामल)

सौत का लाना जीते जी का जलाना

दूओसरी जोरू का लाना पहली जोरू के साथ अपनी भी जान जलाने का सामान करना है

सौत पर सौत और जलापा

एक दुश्मन के होते दूसरा दुश्मन और भी मुसीबत है दूसरी सोकन आती है तो जलन और बढ़ जाती है (दुश्मनों की कसरत के मौक़ा पर मुस्तामल)

सवाब न 'अज़ाब कमर टूटी मुफ़्त में

तकलीफ़ मुफ़्त की हो और कुछ प्राप्त न हो

सवाल दीगर जवाब दीगर

जब कोई व्यक्ति किसी सवाल के जवाब में ऐसी बात कहे जो सवाल से संबंध न रखती हो तो कहते हैं, अयोग्य उत्तर

सवेरे का भूला साँझ को घर आए तो उसे भूला नहीं कहते

अगर ग़लती करने वाला जल्द ही उस की तलाफ़ी कर दे तो काबिल-ए-माफ़ी है, इंसान गुनाह करके तौबा करे तो ग़नीमत है, अगर बिगड़ने के बाद सुधर जाये तो बुरा नहीं

सवेरे का टहलना दिन भर की ख़ुशी

सुबह की सैर सारा दिन इंसान को ख़ुश रखती है

सयाने का गूह तीन जगह

जो व्यक्ति अपने आप को सयाना समझे वह ग़लतियाँ भी बहुत करता है

सय्याँ भए कोतवाल अब डर काहे का

दोस्त के अधिकारी या शक्तिशाली होने पर बग़लें बजाना

सय्याँ गए लदनी लदाएँ झड़ा-झड़, सौ के पचास किये चले आए घर

जब कोई घाटा खा कर वापस आए तो कहते हैं कि आधा गंवा कर वापस गए

सय्याँ की कमाई भाई का नाम

ख़र्च किसी नाम किसी का, पैसा किसी का ख़र्च हुआ और नाम किसी का लिया

सय्याद न हर रोज़ शिकारी बबुर्द

शिकारी को हर रोज़ शिकार नहीं मिलता, इंसान की हर कोशिश कामयाब नहीं होती

सय्यद का जना, कभी बिगड़ा कभी बना

सय्यद को मतोन उल-मिज़ाज तसो्वर कर के कहते हैं तंग मिज़ाज

सेंदूर न लगाएँ तो भटार का मन कैसे रखें

कुछ काम ऐसे होते हैं तो दूसरों को प्रसन्न करने के लिए करने ही पड़ते हैं

सेब में थूहड़ की क़लम

एनिमल बेजोड़ बात

सीधी अल-हम्द भी पढ़नी नहीं आती

पीग़मबरऐ की उम्मत हैं मगर नाख़्वान्दा हैं

सेह बंदी के प्यादे का आगा पीछा बराबर है

चंद रोज़ा हाकिम की कोई इज़्ज़त और रोब-ओ-दबदबा नहीं होता, ना पाएदार का अदम-ए-वजूद बराबर है

सेज की मक्खी भी बुरी

एकांतवास के समय किसी का हस्तक्षेप बुरा मालूम होता है

सेर दूध अधोंख को पानी घर घर भरे मथानी

मामूली बात को बड़ा कर के दिखा ने पर कहते हैं

सेर दूध अधवान को पानी घर घर भरे मथानी

मामूली बात को बड़ा कर के दिखा ने पर कहते हैं

सेर की हँडिया में सवा सेर पड़ा

कमीने को हैसियत और मरतबे से ज़्यादा मिला और वो आपे से बाहर हुआ

सेर की हाँडी में सवा सेर पड़ा

कमीने को हैसियत और मरतबे से ज़्यादा मिला और वो आपे से बाहर हुआ

सेर को सवा सेर

बलशाली के लिए उससे अधिक बलशाली उपस्थित है, एक से बढ़ कर एक, हर फ़िरऔन-ए- रा मूसा

सेर में हुई ही नहीं

जितनी मिक़दार दर का है इस का क़लील से क़लील हिस्सा भी ना हुए की जगह (मुस्ताल

सेर में पंसेरी का धोका

छोटी चीज़ में से ज़्यादा ग़बन, ज़्यादती के साथ ख़ियानत

सेठ क्या जाने साबुन का भाव

किसी चीज़ की स्थित या किसी बात की वास्तविकता असंबंधित व्यक्ति नहीं जानता

सेवा से मेवा मिलता

सेवा में महानता है

सेवईयों बिन ईद कैसी

ईद के दिन मुसलमान सेवईयाँ पका कर खाते हैं, इस के बिना ईद मालूम नहीं होती

शंका डायन , मंसा भूत

डर और ख़्याल भूतों और डाएनों की शक्ल बिन कर दिखाई देते हैं असलीयत कुछ भी नहीं है

शाबाश बी बी तिरे धड़के को, पादे आप लगावे लड़के को

क्या हौसला है कि क़सूर आप करे और दूओसरे के सर थोपे

शाबाश मियाँ तुझ को, तू ने मोह लिया मुझ को

व्यंग में कहते हैं जब कोई अपने आप को बहुत बांका समझने लगे

शाबश मुल्ला तेरे ता'वीज़ को बाँधते ही लड़का फुदका

तावीज़ इतना पर तासीर है कि बांधते ही काम होगया , तंज़न भी मुसतामल है यानी बात नहीं बनी

शादी और ग़मी का, चोली दामन का साथ है

एक दूसरे से अलग न होने वाले, एक दूसरे के लिए अनिवार्य

शादी है कुछ गुड़ियों का ब्याह थोड़ा ही है

निकाह के शर्त आदि को साधारण मानने अथवा टालने की कोशिश करे तो कहा जाता है

शाह का माल भूईं पड़े दूना

खेती से बादशाह की आमदनी अधिक होती है

शाह ख़ानम की आँखें दुखती हैं, शहर के चराग़ दीए गुल कर दो

ऐसी नाज़ुक मिज़ाज और मुतकब्बिर हैं कि अपनी तकलीफ़ के साथ औरों को भी तकलीफ़ देने से परहेज़ नहीं करतीं, अपनी तकलीफ़ और मुसीबत में औरों को मुबतला करना

शाहाँ कम इल्तिफ़ात ब-हाल-ए-गदा कुनंद

(फ़ारसी ज़रब-उल-मसल उर्दू में मुस्तामल) बादशाह ग़रीबों के हाल पर कम इलतिफ़ात करते हैं

शाहिद वार वार , मुक़दमे वाले पार पार

गवाह कुछ कहते यहं मुद्दई कुछ कहते हैं

शाख़-ए-हंतल से अंगूर मिलना ना-मुम्किन है

बुरे काम का बुरा फल, बुरे से अच्छाई की उम्मीद फ़ुज़ूल है

शाकिर को शक्कर, मूज़ी को टक्कर

शाकिर को ख़ुदा की तरफ़ से नेअमतें मिलती हैं और मूज़ी को तकलीफें पहुंचती हैं

शाम का भूला सुब्ह को आए तो उसे भूला नहीं कहते

जो आदमी थोड़ी सी ठोकर खाकर सँभल जाए तो उसे रास्ते से भटका हुआ नहीं समझना चाहिए

शाम के मुर्दे का कब तक रोए शेवन करें

हिंदू अपने मर्दे को शाम को आग नहीं देते, सुबह चलाते हैं

शाम के मुर्दे को कब तक रोए शेवन करें

उम्र भर के झगड़े की कहाँ तक शिकायत की जाये

शाम के मुर्दे को कब तक रोइये

इस तरह कैसे पूरा पड़ेगा, सारी रात कोई रो नहीं सकता

शाम के मुर्दे को कहाँ तक रोए शेवन करें

हिंदू अपने मर्दे को शाम को आग नहीं देते, सुबह चलाते हैं

शामत कह के नहीं आती

मुसीबत या विपत्ति अचानक प्रकट हो जाती है

शामतें कह के थोड़े आती हैं

मुसीबतें अचानक आती हैं, मुसीबतें ख़बर दे कर नहीं आतीं

शामत-ए-आ'माल-ए-मा-सूरत-ए-नादिर-ए-गिरिफ़्त

(फ़ारसी ज़रब-उल-मसल उर्दू में मुस्तामल) हमारे गुनाहों की सज़ा ने नादिर की सूरत इख़तियार की, जब कोई आफ़त अपनी ग़फ़लत से सर पर आजाए तो ये मक़ूला दुहराते हैं

शान के मारे की दवा दारू

हर शख़्स से इस के मरतबे के मुवाफ़िक़ बरताओ करना चाहिए

शान मारे ग़ैर को, बे शान मारे आप को

शान-ओ-शौकत से दूसरा मरऊब होजाता है और सादगी और आजिज़ी से अपने आप को नुक़्सान पहुंचता है

शह की चोट, शकर की पोट

बादशाह की तरफ़ से पहुंची हुई ईज़ा या तकलीफ़ भी अच्छी लगती है , अहतरमा कहते हैं

शह्द पर मक्खी घूमी

बहुत ज़्यादा ख़ुशामद करने वाले की निसबत बोलते हैं, ख़ुशामदी

शहना छुपा पियाल में, कौन कह कर बैरी हो

कोतवाल पियाल में छिपा है कौन कह के दुश्मनी मूल ले (इशारे से, अपना पहलू बचाते हुए या महिज़ हमाक़त से राज़ फ़ाश करना

शहना छुपा पियाल में, कौन कह के बैरी हो

कोतवाल पियाल में छिपा है कौन कह के दुश्मनी मूल ले (इशारे से, अपना पहलू बचाते हुए या महिज़ हमाक़त से राज़ फ़ाश करना

शहर भर में ऊँट बद-नाम

इस शख़्स की निसबत कहते हैं जो किसी ऐब के बाइस मशहूर हो, मशहूर आदमी ही की शामत आती है, नामी चोर मारा जाता है

शहर का सलाम देहात का दाल भात

शहर में कोरे सलाम से आवभगत करते हैं और देहात में भोजन से

शहर में ऊँट बद-नाम

जो बदनाम होता है उसी पर पहले संदेह किया जाता है या इल्ज़ाम रखा जाता है

शहसवार ही गिरता है

मुश्शाक़ ही धोका खाता है

शैख़ चंडाल न छोड़े मक्खी न छोड़े बाल

ऐसे शख़्स के बारे में कहते हैं जो हरीस हो बहुत लालची, हर चीज़ हड़प कर जाने वाला

शैख़ चंडाल न रहे मक्खी न छोड़े बाल

ऐसे शख़्स के बारे में कहते हैं जो हरीस हो बहुत लालची, हर चीज़ हड़प कर जाने वाला

शैख़ चंडाल न रहे मक्खी न रहे बाल

ऐसे शख़्स के बारे में कहते हैं जो हरीस हो बहुत लालची, हर चीज़ हड़प कर जाने वाला

शैख़ क्या जाने साबुन का भाव

ऐसे व्यक्ति से सलाह लेना जिसको मुआमले से कोई लेना-देना न हो

शैख़ पुकारें तंदूरी क़ंदूरी

ग़रज़मंद को अपने मतलब की सूझती है

शैख़ी ख़ोरे से कहा तेरा घर जला है, कहा बला से मेरी शैख़ी तो मेरे पास है

नुक़्सान के बावजूद शेखी मारने वाले की निसबत कहते हैं

शैख़ी ख़ोरे से कहा तेरा घर जलता है, कहा बला से मेरी शैख़ी तो मेरे पास है

नुक़्सान के बावजूद शेखी मारने वाले की निसबत कहते हैं

शैख़ों की शेख़ी और पठानों की टर

शेख़ों की डींग और पठानों की तर्क-वितर्क प्रख्यात है

शैतान हर जगह मौजूद है

गुनाह की ओर ले जाने वाले हर जगह होते हैं, बुरे कामों के लिए हर जगह सामान मिल जाता है

शैतान जान न मारे हलकान करे है

शैतान मारता नहीं है‏, परेशान करता है

शैतान जान न मारे तो हैरान ज़रूर करे

शैतान मारता तो नहीं है परंतु मनुष्य को बहुत परेशान करता है

शैतान का कान में फूँक देना

शैतान का दिल में ग़ुरूर और घमंड पैदा कर देना

शैतान का कान में फूँक मारना

शैतान का दिल में ग़रूर पैदा करदेना

शैतान का शीरा है

फ़सादी या उत्पाती व्यक्ति के प्रति कहते हैं

शैतान के कान काटता है

अत्यधिक चालाक एवं मक्कार व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है

शैतान को आते देर नहीं लगती

झगड़ा खड़ा होते या ग़ुस्सा आते समय नहीं लगता

शैतान ने भी लड़कों से पनाह माँगी है

लड़कों से शैतान भी घबराता है

शैतान सब जगा मौजूद है

पाप का सामान हर जगह है, बुराई जगह-जगह फैली हुई है

शैतान से बचिये हर जगह मौजूद है

बुरे कामों से हर वक़्त बचना चाहिए

शैतान तूफ़ान , अल्लाह निगहबान , तुझ पर टूट न पड़े आसमान

झूटी तहमत से ख़ुदा की पनाह, जब कोई किसी पर तहमत धरे तो कहते हैं

शकर ख़ोरे की शक्कर, मूज़ी को टुकुर

ईश्वर हर एक को उसकी इच्छा के अनुसार प्रदान कर देता है

शकर ख़ोरे को शकर ही मिलती है

जो जिस वस्तु का इच्छुक होता है उस के लिए वैसा ही सामान उपस्थित कर दिया जाता है

शक्ल भूत की सी नाम अलबेले लाल

चरित्र यदि सूरत के विरुद्ध हो तो कहते हैं

शक्ल चुड़ैलों की, दिमाग़ परियों का

(औरत) कूरुपता पर ये दिमाग़ और नाज़ुक-मिज़ाजी (जब कोई बदसूरत औरत बहुत टिमाक से रहे तो कहते हैं)

शक्ल चुड़ैलों की, मिज़ाज परियों का

(ओ) बदसूरती पर ये दिमाग़ और नाज़ुक मिज़ाजी (जब कोई बदसूरत औरत नाज़ नख़रे करे तो कहते हैं

शक्ल चुड़ैलों की, नाज़ परियों का

(ओ) बदसूरती पर ये दिमाग़ और नाज़ुक मिज़ाजी (जब कोई बदसूरत औरत नाज़ नख़रे करे तो कहते हैं

शक्ल ए दरवेश सूरत सवाल अस्त

फ़ारसी मक़ूला उर्दू में मुस्तामल, फ़क़ीर की सूरत ही सवाल है

शम' का रू पुश्त बराबर है

साफ़ अंतर्मन आगे और पीछे समान होते हैं

शम' की रौशनी जलते तलक, और दिए की रौशनी महशर तलक

शम्मा की रोशनी जलते तक है और दिए (ख़ैरात) की रोशनी क़ियामत के दिन भी काम देगी

शम' की रू पुश्त यक्साँ होती है

रुक : शम्मा का रो पुश्त अलख

शम' ले कर ढूँढिए तो पता नहीं

कमाल जुस्तजू के बाद भी दस्तयाब नहीं होता, कमयाब चीज़ या शख़्स की निसबत कहते हैं

शर' में शर्म क्या

व्यवहार में संकोच की ज़रूरत नहीं

शर शैतान ते मक्र ज़नान ते

शैतान से बुराई और औरतों से छल की उम्मीद की जा सकती है

शराब के साथ ख़ुमार है

आराम के साथ-साथ कष्ट भी है, अविभाज्य चीज़ के बारे में कहा जाता है

शराब से जौहर खुल जाता है

नशे में वास्तविक स्थिति मालूम हो जाती है

शराब से सब नशे नीचे हैं

नशीली चीज़ों में शराब सबसे बढ़ कर है

शराबियों से दूरी भली

दुष्ट और बुरे लोगों से बचना ही बेहतर है

शराब-ख़्वार हमेशा ख़्वार

शराब पीने वाला हमेशा अपमानित होता है

शरीफ़ की दस और पाजी की एक बराबर है

पाजी की एक गाली शरीफ़ की दस गालियों के बराबर है

शरीफ़ों के दाने सर दुखते पे खाने

शुरफ़ा का पास-ए-ख़ातिर ज़रूर है

शर्म की बहू नित भूकी मरी

जो व्यक्ति शर्म करे हानि उठाता है जिस तरह दुल्हन शर्म में भूखी रहती है

शर्म की माँ गोड़े रगरती है

श्रम करने में नुक़्सान ही नुक़्सान है

शर्म वाले के फूटे कर्म

शर्म करने वाला वंचित रहता है

शरमाई बिल्ली खंबा नोचे

शर्मिंदा होकर आदमी फ़ुज़ूल बातें करता है, जिसे ग़ुस्सा आरहा हो वो दूसरों पर अपनी झल्लाहट उतारता है, बेबसी में आदमी दूसरों पर गु़स्सा उतारता है, शर्मिंदा शख़्स दूसरों पर अपनी शर्मिंदगी उतारता है

शौक़ दर हर-दिल कि बाशद रहबरे दरकार नेस्त

फ़ारसी की कहावत उर्दू में प्रयुक्त, जिसको जिस चीज़ की रुचि होगी वो बिना किसी के बताए उसे सीखेगा रुचि वाले को मार्गदर्शक की आवश्यक्ता नहीं

शौक़ में ज़ौक, दस्तूरी में लड़का

जब केवल आनंद के लिए कोई काम किया जाए और उसमें लाभ भी हो तब कहते हैं

शौक़ीन बी-बी कम्मल की चोली आग लगी टहलती फिरी

ग़रीब औरत अपनी सामर्थ्य से अधिक का कपड़े पहने तो उस अवसर पर कहते हैं

शेख़ी और तीन काने

शेख़ी मारना और पास कुछ न होना

शेख़ी बग़ल में

जब कोई बरख़ूद ग़लत आदमी नुक़्सान उठाए तो कहते हैं कि चलो शेखी तो बग़ल में है

शेख़ी का मुँह काला

शेखी-बाज़ को लज्ज्ति होना पड़ता है अथवा शेख़ीबाज़ को नीचा देखना पड़ता है

शेख़ी सेठ के, धोती भाड़े की

शेखी तो बहुत है पास कुछ नहीं

शेर बकरी एक घाट पानी पीते हैं

पूर्ण न्याय और शांति है, निहायत इंसाफ़ है, बड़े और छोटे के साथ समान व्यवहार किया जाता है

शे'र फ़हमी 'आलम-ए-बाला मा'लूम शुद

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) सुख़न फ़हमी का हाल मालूम हो गया किसी अच्छे शेअर या कलाम वग़ैरा की दाद ना मिले तो तंज़न इस मौक़ा पर कहते हैं

शेर का एक ही भला

बहादुर लड़का एक ही काफ़ी है

शेर का झूटा गीदड़ खाए

आलसी और अकर्मण्य ही दूसरों पर निर्भर रहते हैं, बड़ों से छोटों का बहुत काम चलता है

शेर का खाजा बकरी

शेर की ख़ुराक बकरी है अर्थात सबल का भोजन निर्बल

शेर के बुर्क़ा' में छीछ्ड़े खाते हैं

मुक़द्दरत और अमीरी के दअवे के बाजोद थोड़े से लालच पर गिर पड़ते हैं, बातिन ज़ाहिर के ख़िलाफ़ है

शेर खाए न खाए मुँह लाल

बदनाम आदमी पर सब इल्ज़ाम थुप जाते हैं, बदनाम करे तो बदनाम ना करे तो बदनाम

शेर खाए तो मुँह लाल न खाए तो मुँह लाल

बदनाम आदमी पर सब इल्ज़ाम थुप जाते हैं, बदनाम करे तो बदनाम ना करे तो बदनाम

शेर को माँड में बैठे शिकार नहीं मिलता

बगै़र तग-ओ-दो और मेहनत के कुछ हासिल नहीं होता

शेर मारता है तो सौ गीदड़ खाते हैं

बलंद हिम्मत और आली ज़र्फ़ लोग अपनी कमाई का बेशतर हिस्सा ज़रूरतमंदों पर सिर्फ़ करदेते हैं

शेर मारता है तो सौ लोमड़ियाँ खाती हैं

बलंद हिम्मत और आली ज़र्फ़ लोग अपनी कमाई का बेशतर हिस्सा ज़रूरतमंदों पर सिर्फ़ करदेते हैं

शेर-ए-क़ालीं और है, शेर-ए-नीस्ताँ और है

बहादुरी का अमलन इज़हार और चीज़ है और बहादुरी की बातें करना और चीज़ है

शेरों का मुँह किस ने धोया

उन छोटे बच्चों से हँसी में कहते हैं जो साफ़-सुथरे नहीं रहते

शेरों से शेर ही होते हैं

शूरवीरों के बच्चे शूरवीर होते हैं

शेरशाह की दाढ़ी बड़ी थी या सलीम शाह की

बेकार बहस अथवा तकरार के अवसर पर बोलते हैं

शिग़ाले रा मुयस्सर नीस्त अंगूर

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) गीदड़ को अंगूर मयस्सर नहीं, जब कोई किसी चीज़ का अहल ना हो तो बोलते हैं

शीरीं न शवद दहन ब-हल्वा गुफ़्तन

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) किसी चीज़ का नाम लेने से इस का मज़ा नहीं आजाता, अमल के बगै़र कुछ हासिल नहीं होता

शीशा-ब-शिकस्ता रा पैवंद करदन मुश्किल अस्त

फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल, टूटा हुआ शीशा (दिल) जोड़ना मुश्किल है, दिल शिकनी की तलाफ़ी दुशवार होती है

शिकार कार-ए-बेकाराँ अस्त

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) बेकार आदमी शिकार के लिए जंगलों में मारा मारा फिरता है , शिकार बेकारों का काम है

शिकार के वक़्त कुतिया हगासी

काम के समय बहाना बनाकर ग़ायब हो जाना

शिकार को गए ख़ुद शिकार हो गए

दूसरे का नुक़्सान करने की इच्छा थी, अपना ही नुक़्सान हुआ

शिकारी कुत्ता शेर से मुँह नहीं फेरता

अनुभवी व्यक्ति कठिन कार्यों से नहीं डरता

शिकारी शिकार करें अहमक़ साथ फिरें

इस के मुताल्लिक़ कहते हैं जो दूसरों के साथ ख़्वाहमख़्वाह मारा मारा फिरता है, जब काम वाले लोगों के साथ बेकार लोग अपना वक़्त ख़राब करने के लिए साथ हो लेते हैं तो ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं

शिकारी शिकार करें चूतिया साथ फिरें

इस के मुताल्लिक़ कहते हैं जो दूसरों के साथ ख़्वाहमख़्वाह मारा मारा फिरता है, जब काम वाले लोगों के साथ बेकार लोग अपना वक़्त ख़राब करने के लिए साथ हो लेते हैं तो ऐसे मौक़ा पर बोलते हैं

शोरबा हलाल बोटी हराम

बड़ी बुराई को अपनाना छोटी से बचना

शुग़्ल बेहतर है 'इश्क़-बाज़ी का, क्या हक़ीक़ी व क्या मजाज़ी का

इश्क़ करना बहुत अच्छा है, चाहे वह किसी क़िस्म का हो

शुनीदा के बुवद मानिंद दीदा

फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल, जो कुछ देखा हो इस के मुक़ाबले में सुनी हुई बात का एतबार क्यों कर हो सकता है कहाँ आँखों देखी और कहाँ सुनी सुनाई बात

शुतुर की कौन सी कल सीधी है

हर बात बेढंगी है, हर काम में ख़ामी है (मशहूर कहावत यूं है: ऊंट रे ऊंट तेरी कौनसी कल सीधी)

सिड़ी है तो क्या बात ठिकाने की कहता है

मूर्ख है परंतु बात मतलब की कहता है

सिंघ से सर पर करे सियार

गीदड़ शेर का मुकाबला करे तो निहायत अजीब बात है, नामुमकिन बात है, अजीब बात है

सिध को साधक पूजता है

लायक़ की लायक़ क़दर करता है

सिफ़्ला की मौत माघ

ग़रीब को सर्दीयों में बहुत तकलीफ़ होती है

सींत का चूना और दादा जी की क़ब्र

मुफ़्त की चीज़ का उपयोग करने के लिए हर आदमी तैयार रहता है

सीधा घर ख़ुदा का

उस व्यक्ति के बारे में बोलते हैं जो हर मुसीबत में बार-बार भगवान को याद करता है, सिर झुकाकर भगवान को याद करने में मोक्ष जानता है, या बार-बार किसी के पास मदद के लिए जाता है

सीधी राह छोड़ के टेढ़ी राह मत चलो

सही रास्त छोड़ कर ग़लत का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए

सीधी उँगलियों घी निकले तो टेढ़ी क्यों कीजिए

अगर नवसी से काम निकले तो सख़्ती नहीं चाहिए

सीख देत औरों को पाँडा आप भरे पापों का भाँड

पण्डित औरों को तो नसीहत करे और ख़ुद गुनाह करे, उस शख़्स की निसबत बोलते हैं जो ख़ुद गुनाह का मुर्तक़िब होता है लेकिन दूसरों को मुत्तक़ी बनने की तलक़ीन करता है

सीख सीख पड़ोसन को घर में सीख जठाली को

पर एक का हुनर इस तरह से उड़ाना कि इस को मालूम ना हो

सीख सीख पड़ोसन तेरे लच्छन

सोहबत किऐ असर ज़रूर होता है

सीख उसी को देनी अच्छी जो तेरी सिक्षा माने अच्छी

नसीहत उसी को देनी अच्छी जो नसीहत को सनुए और इस पर अमल करे

सीखन सीख पड़ोसन सीख

साथ का प्रभाव अवश्य पड़ता है, किसी को दूसरे की देखा देखी कोई काम करते देख कर ये कहा करते हैं

सिखाए पूत दकन नहीं जाते

सिर्फ़ दूसरों के कहने से हिम्मत या हौसला पैदा नहीं होता

सिखाए पूत दरबार नहीं जाते

सिर्फ़ दूसरों के कहने से हिम्मत या हौसला पैदा नहीं होता

सिपाह गरी के छत्तीस फ़न हैं

हर तदबीर को काम में लाना चाहिए, हर तदबीर से काम करना चाहिए

सिपाही का माल झाँट का बाल

सिपाही के पास कुछ भी नहीं होता

सिरे ही की भेड़ काफ़ी

शुरुआत ही ग़लत, पहली ही चीज़ अधूरी, पहला ही कथन उम्मीद के विपरीत

सिर्का मुफ़्त अज़ 'असल शीरीं तर अस्त

मुफ़त का सरका शहद से ज़्यादा अच्छ्াा है, मुफ़त की चीज़ मूल की चीज़ से बेहतर मालूम होती है

सिर्का मुफ़्त बे अज़ 'असल

मुफ़त का सरका शहद से ज़्यादा अच्छ्াा है, मुफ़त की चीज़ मूल की चीज़ से बेहतर मालूम होती है

सिसकती सिसकते ने दिया पकाया, बिलकते ने खाया जीभ जली न स्वाद आया

किसी की बराए नाम हाजतरवाई होने के मौक़ा पर मुस्तामल

सिसकती सिसकते ने दिया पकाया, बिलकती ने खाया जीभ जली न स्वाद आया

किसी की बराए नाम हाजतरवाई होने के मौक़ा पर मुस्तामल

सिसकती सिसकते ने दिया पकाया, बिलकती ने खाया जीभ जली न स्वाद पाया

किसी की बराए नाम हाजतरवाई होने के मौक़ा पर मुस्तामल

सितारा भारी होना

(हैयत) अज़रूए नुजूम किसी सितारे का किसी दूसरे सितारे की निसबत किसी शख़्स के लिए मनहूस होना, नहूसत का ज़माना आना

सितारा बुरा होना

क़िस्मत फूटना, नसीब ख़राब होना

सिवय्याँ बिन 'ईद कैसी

ख़ुशी ही की तक़रीब में ख़ुशी अच्छी मालूम होती है, ख़ुशी की तक़रीब बगै़र पकवान के फीकी मालूम होती है

सियाही मू की गई आरज़ू न गई

बुढ़ापे के बावजूद संतोष नहीं हुआ, बुढ़ापे में भी जवानी के शौक़ हैं

सियाम न छोड़ो , छोड़ो न समेत , दोनों मारो एक ही खेत

दुश्मनों का लिहाज़ करना चाहिए उसे तबाह करना चाहिए ख़ाह वो सिया हो या सफ़ैद

सियाना कव्वा गू खाए यानी बुलबुल गोंदा खाए

बाअज़ चालाक-ओ-होशयार तबाह हाल होते हैं और भूले भाले कामयाब-ओ-आसूदा हाल या बाअज़ होशयार बेतौक़ीर होते हैं और भूले भाले साहब-ए-इज़्ज़त

सियार औरों को शगून दे , आप कुत्तों से डरे

गीदड़ का रास्ते में मिलना अच्छ्াा शगून समझा जाता है मगर ख़ुद कुत्तों से डरता है यानी दूओसरों को फ़ायदा पहुंचाए मगर ख़ुद को कोई फ़ायदा ना हो

सोए संसार और जागे पाक परवर्दिगार

रुक : सोवे संसार जागे पाक परवरदिगार

सोंत की अंटी और यूसुफ़ की ख़रीदारी

उस वक़्त कहते हैं जब हैसियत थोड़ी हो मगर हौसला ज़्यादा हो, हैसियत से ज़्यादा कुछ करने की इच्छा

सोचना जी मोचना

चिंता दिल को चिंतित करती है

सोहबत का असर या तुख़्म की तासीर

किसी बात का ज़्यादा असर होता है किसी के पास बैठने का या नसल का, असर या सोहबत का होता है या नसल का

सोहबत-ए-सालेह तुरा सालेह कुनद, सोहबत-ए-तालेह तुरा तालेह कुनद

(मौलाना रुम का फ़ारसी शेअर उर्दू में बतौर कहावत मुस्तामल) नेक की सोहबत तुझे नेक और बद की सोहबत बद बनाएगी

सोहे की रीत नहीं की तौफ़ीक़ नहीं

बहुत ग़रीब है जब कोई शख़्स किसी तक़रीब के पूओरा करने की हैसियत ना रखता हो इस के मुताल्लिक़ कहते हैं. वज़ा का लिहाज़ मगर हैसियत के मुताबिक़ काम करने की इस्तिताअत नहीं

सोलह सिंगार बारह अभरन

रुक : बार उभरन सोला सिंगार

सोलह सिंगार बारह अभूशन

रुक : बार उभरन सोला सिंगार

सोलह सिंघार बारह अभरन

रुक : बार उभरन सोला सिंगार

सोना अनाड़ी का बारा बानी

अनाड़ी का सोना शुद्ध होता है यानी अनाड़ी अपनी माल में मिलावट नहीं करता

सोना चाँदी आग ही में परखे जाते हैं

इंसान के औसाफ़-ओ-ख़ूओबयां आफ़त मुसीबत में ज़ाहिर होती हैं

सोना घिसे आदमी बसे

सोना कसौटी पर घिसने से और आदमी लंबी समय तक साथ रहने से परखा जा सकता है

सोना जाने कसे और आदमी जाने बसे

सोने की पहचान कसौटी पर परखने से और आदमी की पहचान पास रहने से होती है, सत्य तो अनुभव से ही जाना जाता है, खोटे खरे का परखने से पता चलता है

सोना नेक तो कान फाटे क्यों

सोना ख़ालिस हो तो कान नहीं फाड़ता

सोना पाना और खोना दोनों बुरे हैं

ये ख़्याल है कि अगर सोना मिले तो भी शगून अछअ नहीं, अगर ख़ो जुए-ए-तो भी नहीं

सोना पहन ढाँक चल

अमीरी, मालदारी, दौलतमंदी पर इतराना नहीं चाहिए, माल-ओ-दौलत पर ग़रूर अच्छा नहीं होता

सोना सुनार का अभरन संसार की

सुनारों की ख़ियानत कारी के लिए ये कहावत है खोट मिलावट कटौती इन की आदत होती है, लोगों को ख़ुश कर के अपना मतलब निकालना, रोगन-ए-फ़ाज़ मिल कर लोगों का माल मारना, मकर वफ़रीब से काम लेना

सोना सुनार का सोभा संसार की

सुनारों की ख़ियानत कारी के लिए ये कहावत है खोट मिलावट कटौती इन की आदत होती है, लोगों को ख़ुश कर के अपना मतलब निकालना, रोगन-ए-फ़ाज़ मिल कर लोगों का माल मारना, मकर वफ़रीब से काम लेना

सोने का गड़वा और पीतल की पेंदी

नामौज़ूं काम की निसबत बोलते हैं , उन लोगों के मुताल्लिक़ कहते हैं जिन में ख़ूबीयों के साथ साथ बुराईयां भी हूँ

सोने का निवाला खिलाइए और शेर की नज़र देखिए

संतान को ख़ूब अच्छा खिलाएँ-पिलाएँ और पहनाएँ परंतु उन पर कड़ी नज़र भी रखनी चाहिए

सोने की अंगूठी, पीतल का टाँका, माँ छिनाल, पूत बाँका

सोने की अँगूठी में पीतल का टांका इस तरह है जैसे माँ बदचलन हो बेटा बांका हो

सोने की बड़ीड़ी , फूस का छप्पर

किसी मामूली चीज़ पर ज़्यादा ख़र्च करने के मौक़ा पर कहते हैं, किसी चीज़ के लवाज़म भी इस के मुताबिक़ होने चाहीऐं, नामौज़ूं चीज़ अच्छी नहीं लगती

सोने की चिड़िया हाथ लगी है

अमीर आदमी क़ाबू में आया है, वकील उस अवसर पर बोलते हैं जब कोई अमीर मुक़द्दमे में फँस जाए, रंडियाँ उस वक़्त बोलती हैं जब कोई अमीर आदमी उन पर फ़िदा हो जाए और ब्राह्मण जब कोई अमीर आदमी मर जाए तो कहते हैं

सोने की कटारी , कटोरे में काैन भीक न देगा

अमीर आदमी को क़र्ज़, ख़ूओसोरत औरत को ख़ावंद फ़ौरन मिल जाता है

सोने की कटारी किसी ने अपने पेट में न मारी

कितना ही फ़ायदा क्यूँ न हो पर जान कोई नहीं लेता

सोने की कटारी कोई पेट में नहीं मारता

फ़ायदे के लालच से जान जोखों में नहीं डाला जाता, या अच्छों से बुराई कोई नहीं होती

सोने को सलाम, रूपे को 'अलैक, भूके को न देख

अमीर आदमी को सलाम करना चाहिए, दरमयानी दर्जे के आदमी का सलाम लेना चाहिए, ग़रीब की तरफ़ देखना भी नहीं चाहिए

सोने में सुहागा मोतियों में धागा

ज़ीनत और जिला का बाइस , सोने के रंगत सुहागे से खुलती और मोतीयों की बिहार तागे में पिरोने से मालूम होती है, खरे ीमान दार और अमीन मुलाज़म की निस्बत भी बोलते हैं, तीर बहदफ़ के मौक़ा पर भी कहते हैं

सोने में सुहागा

रुक : सोने पर सुहागा

सोने से घड़ावन महंगी

मूल कीमत से अधिक व्यय, इतने का माल नहीं जितने मरम्मत आदि में व्यय हो गए, दमड़ी की बढ़िया टिका सर मुंडवाई

सोते का कटरा, जागते की कटया

ग़ाफ़िल नुकसान उठाता है और होशयार फ़ायदा उठाता है

सोते का मुंह कुत्ता चाटे

सोते आदमी को किसी बात की ख़बर नहीं होती

सोते का मुँह कुत्ता चाटे

ग़ाफ़िल, बेख़बर, सोए हुए आदमी को किसी बात की ख़बर नहीं होती, ग़ाफ़िल को नुकसान ही होता है

सोते को सोता कब जगाता है

लापरवाह की लापरवाह क्या मदद कर सकता है

सोते लड़के का मुँह चूमा न माँ ख़ुश न बाप ख़ुश

बगै़र इतलाइ के किसी के साथ नेकी करना रायगां है, छुपा कर मुहब्बत करना बे कार है

सोती थी पर काता नहीं जो काता तो पाँच पाव

सुस्त औरत पर तंज़ है कि अव़्वल तो काम नहीं करती अगर करती है तो बराए नाम

सोवे संसार , जागे पाक परवर-दिगार

आधी पिछली रात का वो वक़्त जब मुकम्मल ख़ामोशी हो, पिछला पहर, रात का सुनाता

सोवेगा सो खोवेगा जागेगा सो पावेगा

लापरवाह नुक़्सान उठाएगा, होशियार फ़ायदे में रहेगा

सोया मोया बराबर है

नींद और मौत में कोई फ़र्क़ नहीं दोनों हालतों में इंसान बेख़बर रहता है, सख़्त ग़फ़लत और बेख़बरी के मौक़ा पर मुसतामल

सोया मुवा बराबर है

नींद और मौत में कोई फ़र्क़ नहीं दोनों हालतों में इंसान बेख़बर रहता है, सख़्त ग़फ़लत और बेख़बरी के मौक़ा पर मुसतामल

सोया सो चूका, जागा सो पाया

जिस ने ग़फ़लत की इस ने नुक़सान उठाया, जो होशयार रहा वो फ़ायदा में रहा, सोते की कुटया का जागते का कटरा, बहरहाल सुई और कोशिश से राहत मिलती है, ग़फ़लत बुरी, होशयारी अच्छ्াी

सोया सो खोया, जागा सो पाया

रुक : सोया सौ चूओका जागा सौ पाया

सोया सो खोया

रुक : सोया सौ चूओका

सोया-चूका

जिस ने ग़फ़लत की नुक़सान उठाया

सुब्ह हुई चूल्हे पर निगाह

सुबह होते ही खाने की तलब होती है , हरीस की यही हालत होती है

सुब्ह होती है शाम होती है, उम्र यूँ ही तमाम होती है

जीवन क्षणभंगुर है यूँ ही बीत जाता है, सुब्ह-शाम ही में जीवन समाप्त हो जाता है

सुब्ह का भूला शाम को आए तो उसे भूला नहीं कहते

अगर इंसान अपने पाप से पश्चाताप कर ले तो ये संतोषजनक है, अगर इंसान को ग़लती के बाद इसका एहसास हो और वो सही रास्ते पर आ जाए तो ये क्षमा कर देने योग्य है

सुब्ह का भूला शाम को घर आए तो उसे भूला नहीं कहना चाहिए

अगर आदमी ग़लती के बाद उसे एहसास हो जाए और वह ग़लती छोड़ दे तो क्षमा के योग्य है

सुब्ह का बिछड़ा शाम को आवे तो बिछड़ा न जानिए

अगर इंसान अपने गुनाहों से तौबा कर ले तो ये संतोषजनक है, अगर इंसान को ग़लती के बाद इसका एहसास हो और वो सही रास्ते पर आ जाए तो ये क्षमा कर देने योग्य है

सुब्ह का प्याला इक्सीर का निवाला

सुबह को थोड़ा सा खा लेना बहुत मुफ़ीद होता है

सुब्ह की पूछो शाम की कहे

बदहवास है, घबराया हुआ है

सुध बुध ना खो अपनी , बात ले मेरी मान , इस दुनिया रहना नहीं मत हो अंजान

अक़ल नहीं खूनी चाहिए याद रखना चाहिए कि दुनिया फ़ानी है

सुफ़्त भी हो मुफ़्त भी बड़े पने का भी हो

माल-ए-मुफ़्त की निसबत बोलते हैं

सुगंद लगाऊँ तो उभ मरूँ, उभ मरूँ पहने तन साड़ी हार चंबेली का भारी लगत, तुम जानत हो तन की सखवारी

इस औरत पर तंज़ है जो अपने को नाज़ुक ज़ाहिर करे और लिबास और ज़ेवर को भी भारी बताए

सुगंध लगाऊँ तो उभ मरूँ, उभ मरूँ पहने तन साड़ी हार चंबेली का भारी लगत, तुम जानत हो तन की सखवारी

इस औरत पर तंज़ है जो अपने को नाज़ुक ज़ाहिर करे और लिबास और ज़ेवर को भी भारी बताए

सुघड़ की झाड़ू , फूहड़ का बच्चा

रुक : सुघड़ की झाड़ू फूहड़ का लीपा जो असल कहावत है

सुघड़ की झाड़ू फूहड़ का लीपा

सलीक़ा मंद की सफ़ाई और बदसलीक़ा की लिपाई छिपी नहीं रहती, सुघड़ का सुघड़ पन और फूहड़ का फूहड़पन ज़ाहिर होजाता है

सुहाग भाग अरज़ानी, चूल्हे आग न घड़े पानी

आवभगत बहुत अधिक लेना-देना कुछ नहीं

सुहागन का लड़का पिछवाड़े खेलता है

जब किसी सुहागन का बच्चा मर जाता है तो ये कहावत कहते हैं क्यूँकि पति ज़िंदा होने की वजह से दूसरा बच्चा पैदा होने की उम्मीद होती है इस लिए जो बच्चा मरेगा उस को ऐसा समझो कि पिछवाड़े खेल रहा है थोड़ी देर में आ जाएगा

सुहाते की लात अन सुहाते की बात

जहाँ कुछ मिलने की आशा हो वहाँ गाली भी सह ले परंतु जहाँ कुछ प्राप्ति न हो वहाँ साधारण बात से भी नाराज़ हो उठे तब भी कहते हैं

सुख बढ़े, मुटापा चढ़े

जब मनुष्य सम्पन्न हो तो मोटा हो जाता है

सुख दुख में जो रहे सहाई सजन वावा बोलें भाई

दोस्त वही है जो दुख दर्द में काम आए, दोस्त वही है जो हर हालत में काम आए

सुख का सब कोई साथी

ख़ुशहाली के ज़माने में हर कोई दोस्त बिन जाता है

सुख के बड़े जोधा रख वाली हैं

आराम बड़ी मुश्किल से हासिल होता है

सुख के चने अच्छे दुख का पुलाव नहीं अच्छा

आराम के साथ सूओखी रोटी मयस्सर आना मुसीबत के पुलाव से बेहतर है

सुख मानो तो सुख है , दुख मानो तो दुख है , सच्चा सुखिया वो है जो सुख माने न दुख

अगर समझो तो ख़ुशी है अगर तकलीफ़ समझो तो तकलीफ़ ख़ुशी होती है . असल में ख़ुशी वो है जो आराम और तकलीफ़ की पर्वा ना करे क्योंकि आराम और ख़ुशी एतबारी कैफ़यात हैं

सुख में आए करम चंद लगे मुंडाने गंज

गंजी खोपड़ी मुड़वाना एक महामूर्खता का काम है क्यूँकि ऐसे तो खोपड़ी से ख़ून निकल आएगा

सुख में आए करम चंद लगे मुंडाने मूछ

गंजी खोपड़ी मुड़वाना एक महामूर्खता का काम है क्यूँकि ऐसे तो खोपड़ी से ख़ून निकल आएगा

सुख में रब को याद करे तो दुख काहे हो

अगर आराम के ज़माने में ख़ुदा को याद करें तो कभी तकलीफ़ ना हो

सुख संपत का हर कोई साथी

धनवान व्यक्ति के सब मित्र होते हैं

सुख से दुख भला जो थोड़े दिन का हो

दुख यदि थोड़े दिन का हो तो अच्छा है क्यूँकि इससे मनुष्य को आराम की महत्व का पता चलता है

सुख सोवे होरू जिस के गाय न गोरू

जिस के पास गाय या सींग वाला बैल नहीं होता वो चैन की नींद सोता है

सुख सोवे कुम्हार जाकी चोर न लेवे मटिया

क़ीमती माल एवं वस्तुओं को चोरी का ख़तरा होता है मिट्टी के बर्तन को नहीं

सुख सोवे शेख़ , जस का टट्टू न मेख़

ग़रीब आदमी सुख की नींद सविता है क्योंकि इस को किसी चीज़ की फ़िक्र नहीं होती

सुख सोवें शैख़ और चोर न भाँडे ले

आदमी ग़फ़लत करे तो नुक़्सान उठाता है, शेख़ आराम की नींद सविता है, क्योंकि उस की मुफ़लिसी के बाइस इस के यहां चोरी नहीं होती

सुखारी को देख सुखारी जलते हैं

एक चीज़ के दो उम्मीदवार बाहम कीना रखते हैं, हम चश्मों में हसद होता है

सुख़न अज़ सुख़न मी ख़ेज़द

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) बात से बात निकलती है, सिलसिला-ए-गुफ़्तगु में कोई नई बात ज़ाहिर होती है

सुख़न गोई मुश्किल नहीं सुख़न फ़हमी मुश्किल है

शेअर कहना आसान है शेअर समझना मुश्किल है

सुख़न शुनीदन बेख़-ए-दौलत

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) बात सुनना हुकूमत की जड़ है फ़र्याद को सुनना शाहों का वतीरा है, नसीहत सुनने वाला फ़ायदा में रहता है

सुख़न ता न पुरसंद लब बस्ता-दार

(फ़ारसी कहावत उर्दू में मुस्तामल) जब तक तुझ से ना पूओछीं तो अपनी ज़बान बंद रख , ख़्वाहमख़्वाह बकवास नहीं करनी चाहिए

सुख़न उन्हीं पर डालीए जो हँस हँस राखें मान

उन्हें से माँगना चाहीए जो हंसी ख़ुशी देना जानते हूँ

सुखियारी का पान न दुखियारी की महंदी , रचेगा पान न रचेगी महंदी

बद इक़बाली में सारी तदबीरें उलटी होजाती हैं

सुन रे ढोल, बहू के बोल

किसी को सचेत करने के लिए कहा जाता है

सुनाड़ी बेचें काँतो , अनाड़ी बेचें माँछो

होशयार आदमी हड्डियां बेचते हैं बेवक़ूफ़ लछियायाँ मतलब ये है कि होशयार आदमी ऐसा काम करता है जिस में नुक़्सान ना हो

सुनार अपनी माँ की नथ में से भी चुराता है

सुनार अपनी माँ को भी ठग लेता है फिर औरों की तो बात ही क्या

सुनार की खुटाली और दर्ज़ी के बंद

टाल मटोल करने वाले की निस्बत बोलते हैं (सुनार कहता है कि बस ज़ेवर को कठाली में डालना बाक़ी है और दर्ज़ी कहता है कि कपड़े में बंद लगाने बाक़ी हैं, ख़्वाहमख़्वाह की बहाना तराशी)

सुन्नी न शी'आ, जी में आया सो किया

स्वतंत्र बुद्धि वाले व्यक्ति के प्रति कहते हैं जो अपनी इच्छानुसार करता है, उसे किसी मसलक की परवाह नहीं होती, स्वतंत्र विचारों का व्यक्ति अथवा मनमानी करने वाले के लिए भी कहते हैं

सुर में अल्लाह बसे

गीत में भगवान का वास होता है, गीत बड़ी अजीब चीज़ है, अच्छा गीत हृदय को सत्य की ओर मोड़ देता है

सुर्ग से उतरा बबूल में अटका

आसमान से गिरा खजूर में अटका

सुर्ख़-रू चोंडा ईमान भोंडा

अच्छ्াे ज़ाहिर और बुरे बातिन वाले शख़्स के लिए मुसतामल

सुरमा सब लगाते हैं पर चितवन भाँत भाँत

काम सब करते हैं परंतु काम करने की विशेषता सब की अलग-अलग होती है

सुर्तीला सो फुर्तीला

अक़लमंद आदमी चुस्त-ओ-चालाक होता है

सुरूद ब-मस्तान याद दहानीदन

किसे के सामने दानिस्ता या नादानिस्ता ऐसी चीज़ का ज़िक्र करना जो कभी इस का पसंदीदा मशग़ला रहा हो और जिसे सुन कर वो बेचैन हो जाये

सुसरार सुख की सार , जो रहे दिना दो चार

सुसराल में बहुत आराम और मज़ा होता है अगर दो चार दिन रहें यानी थोड़े दिनों के मेहमान की ख़ातिर तवाज़ो बहुत होती है इस लिए मेहमान को ज़्यादा दिन नहीं रहना चाहीए

सुस्त मुँह का कोई न लागो फुर्तीले के सब ले भागो

सुस्त आदमी को कोई पसंद नहीं करता और फुरतेले को सब पसंद करते हैं

सुस्त मूँख का कोई न लागो फुर्तीले के सब ले भागो

सुस्त आदमी को कोई पसंद नहीं करता और फुरतेले को सब पसंद करते हैं

सुतासार न उभरे और बीस्वा राँड न होवे

बेहया का कुछ नहीं बिगड़ता

सूई छेदने से पहले ख़ोद छदती है

जैसी नी्यत होती है पहले वैसा ही पेश आता है

सूई चोर सो बज्जर चोर

चोरी थोड़ी हो या अधक फिर भी चोरी है, छोटी चीज़ें चुराने वाला पक्का चोर होता है

सूई जहाँ न जाए वहाँ भाला घुसेड़ते हैं

जहाँ थोड़ी चीज़ की संभावना नहीं वहाँ अधिक डालते हैं

सूई कहे मैं छेदूँ छेदूँ पहले छेद कराय

बदकार व्यक्ति पहले बदकारी कराता है

सूई के नाके से सब को निकाला है

कष्टों का सामना सब को पड़ा है

सूई टूटी , कशीदा से छूटी

कम ना करने का बहाना मिला, काम चोर और बहाना जोओ के मुताल्लिक़ कहते हैं

सूज सटका कपड़ा फटा

सुई अटकी और कपड़ा फटा, शरारती व्यक्ति के संबंध में कहते हैं

सूझे नहीं और ग़ुलेल का शौक़

जिसके विचार अपनी हैसियत से बढ़ कर हों उसके संबंध में कहते हैं, शौक़ या दावा उस बात का जिसकी सामर्थ्य नहीं

सूखा ढाक, बढ़ई का बाप

ढाक की लकड़ी सूख कर बहुत कठोर हो जाती है और बढ़ई मुश्किल से काटता है

सूखे धानों पानी पड़ा

धान सब सूख रहे थे तब पानी बरस गया, ऐन मौक़े पर सहायता मिल गई

सूखे लकड़ी की तरह, खाए बकरी की तरह

जो बहुत खाते रहने पर भी दुबला रहता है उस पर व्यंग में कहते हैं

सूखे में झड़ बेर घने होते हैं, सम्पत में अन ढेर घने होते हैं

ख़ुशक साली में झड़ बीर बहुत होते हैं और अगर साल अच्छ्াा हो तो अनाज बहुत होता है

सूखे सावन, रूखे भादों

सावन सूखा जाने पर भदई अर्थात भादों फ़सल अच्छी नहीं होती

सूखे टुकड़ों पर कव्वे उड़ाना

कम वेतन पर छोटा-मोटा काम करना

सूखे टुकड़ों पर कव्वों की मेहमानी

शेखी ख़ौर निस्बत बोलते हैं या ग़रीबी और मुफ़लिसी में शादी करना, नादारी में ऐश की बातें

सूली पर की रोटी खाते हैं

उनकी कमाई बड़े ख़तरनाक तरीक़ों से होती है

सूम का कुता जाए न जाने दे

बेफ़ैज़ बख़ील का साथी भी किसी को फ़ैज़ नहीं पहुंचने देता है

सूम के घर का कुत्ता, जाए न जाने दे

धनवान कृपण के नौकरों पर व्यंग्य है कि वह भी उसी के जैसे हो जाते हैं

सूना घर भिड़ों का राज

निर्जन एवं सुनसान घर जहाँ एक भी मनुष्य न हो

सूनी सार से मरखना बैल भला

रांड रहे से बदमिज़ाज और निखट्टू ख़ावंद का ज़िंदा होना बेहतर है, बदमिज़ाज शौहर ना होने से बेहतर है

सूनी सेज से मरखना बैल भला

रांड रहने से बुरे स्वभाव और निखट्टू पति का जीवित होना बेहतर है

सूप बोले तो बोले छलनी भी क्या बोले जिस में बहत्तर छेद

स्वयं अपने अवगुणों को न देख कर जब कोई दूसरों की बुराई करता है तब कहते हैं

सूप के उतारे से नाव हल्की नहीं होती

बहुत से अंबार में से थोड़ा सइ कम होजाने से अंबार नहीं घटता

सूप तो सूप छलनी भी बोली जिस में बहत्तर छेद

नीच, कमीना या तुच्छ आदमी को किसी के मामले में हस्तक्षेप करने के अवसर पर बोलते हैं, साफ़-सुथरी छवी वाला अगर शेख़ी बघारे तो ठीक है, मुँह खोलने से पहले दोषी को अपने स्वयं के दोषों को देख लेना चाहिए

सूप तो सूप हँसे छलनी भी हँसे जिस में बहत्तर छेद

रुक : सूओप बोले तो बोले छलनी क्या बोले अलख

सूरा काटे और बिल में घुस जाए

वीर पुरुष अपना रास्ता आप बना लेता है

सूरज बैरी ग्रहण है और दीपक बैरी पवन, जी का बैरी काल है आवत रोके कौन

सूरज का शत्रु ग्रहण और दिये अर्थात चिराग़ का शत्रु हवा, जान का शत्रु मौत है जब आए तो कोई नहीं रोक सकता

सूरज धूल डालने से छुप नहीं सकता

ज़ाहिरी बात को कोई छिपा नहीं सकता

सूरज धूल डालने से नहीं छुपता

ज़ाहिरी बात को कोई छिपा नहीं सकता

सूरज ख़ाक डालने से छुप नहीं सकता

ज़ाहिर बात नहीं छुप सकती

सूरज ने भान उभारी, रेन घर को सिधारी

सूओरज निकला और रात ग़ायब हुई, बड़ों के सामने छोटों की कोई हस्ती नहीं, ज़बरदस्त के सामने कमज़ोर की कोई हैसियत नहीं होती

सूरत बबीं हालश मपुरस

پوچھنے کی ضرورت نہیں، حالت چہرے سے ظاہر ہوتی ہے

सूरत चुड़ैलों की , मिज़ाज परियों का

वस्फ़ ना होने पर इतना घमन॒ड

सूरत न शक्ल भाड़ में से निकल

शक्ल तो बुरी थी ही करतूत ने उस पर और स्याही फेर दी

सूरत तबाक़ छब गठड़ी में

सूरत तो कुछ ना हो बहन, ओढ़ कर दिलकशी पैदा करने की कोशिश की जाये, ज़ाहिर में सादा मगर बड़ा रन॒गीला

सूरदास जनम के नहीं आँधर

सूरदास अंधा पैदा नहीं हुआ था

सूसन की ज़बान दराज़ी मशहूर है

سوسن کو زبان یا زبان درازی کے ساتھ استعارہ کرتے ہیں

सूत की अंटी और यूसुफ़ की ख़रीदारी

जब कोई मामूली हैसियत वाला आदमी किसी अज़ीमुश्शान काम में हाथ डालना चाहे

सूत न कपास और जुलाहे से लट्ठम लट्ठा

किसी चीज़ का ना वजूद है ना आसार या अस्बाब (इस मौक़ा पर मुस्तामल जब कि कोई बे वजूद बात को हक़ीक़त-ए-मफ़रूज़ा समझ कर उस की बुनियाद पर कोई काम या गुफ़्तगु करे)

सूत न कपास और कोली से लट्ठम लट्ठा

किसी चीज़ का न अस्तित्व है न निशानी अथवा कारण

सूत से कताई महंगी

कुल से थोड़ा बड़ा नज़र आना, चीज़ से ज़्यादा चीज़ प्राप्त करने की मज़दूरी

सू-उत्तदबीर सबबुत्तदमीर

बुरी तदबीर हलाकत का सबब है

सुवा छेदे टाट को तो पहले आप को छिदाए

पहले सूऊई या सूऊई के सिरे पर छेद किया जाता है (यानी नाका बनाया जाता है), नीयत के मुताबिक पहले ही से नज़र आने लगता है. ऐसे मौक़ा पर कहते हैं जब किसी को आज़ाद देने के लिए कोई पहले ख़ुद को आज़ार देना करे .

संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .

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