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न इधर का , न उधर का

(जब कोई किसी बात पर राज़ी ना हो तो कहते हैं) किसी तरह क़रार नहीं , किसी बात पर राज़ी नहीं

इधर-उधर का

ایسا ویسا.

न इधर का न उधर का

۔کسی کام کا نہیں۔بیکار کی جگہ۔؎

इधर का न उधर का

جسے کسی پر اعتماد نہ ہو؛ جس پر کسی کو اعتماد نہ ہو، ججسے یکسوئی نہ ہو؛ جو کسی شمار میں نہ ہو؛ ہر طرف سے محروم، مردود خلائق،راندۂ درگاہ (بیشتر رہنا، کے ساتھ).

तिनका इधर-उधर न होना

ज़रा सी भी बेतरतीबी और विप्लव न होना, आयोजन और व्यवस्था में कोई फ़र्क़ न आना

इधर की न उधर की

رک: ادھر کا (رہنا) نہ اُدھر کا ، جس کی یہ تانیث ہے.

इधर न उधर ये बला किधर

किसी क़ाबिल नहीं, उस को कोई नहीं पूछता, बेसर-ओ-पा आदमी है

इधर न उधर ये बला किधर

एक अप्रत्याशित विपत्ति, आकस्मिक विपत्ति है, कोई नहीं पूछता, किसी लायक़ नहीं है

ज़माना इधर का उधर होना

हालात में क्रांति आना, परिवर्तन होना

न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम, न इधर के रहे न उधर के रहे

ऐसा काम किया गया कि हर तरह हानि हुई, कोई काम पूरा नहीं हुआ

इधर के न उधर के

of no importance, not belonging anywhere

इधर की न उधर की, ये बला किधर की

एक अप्रत्याशित विपत्ति, आकस्मिक विपत्ति है, कोई नहीं पूछता, किसी लायक़ नहीं है

न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम, न इधर के हुए न उधर के हुए

ऐसा काम किया गया कि हर तरह हानि हुई, कोई काम पूरा नहीं हुआ

ऊँट का पाद न ज़मीन का न आसमान का

जिस व्यक्ति के व्यवहार में गंभीरता न हो उसकी या मूर्ख की बात का कोई असर नहीं होता

न सर का होश , न पाँव का

बेख़बर होना

न काम का , न काज का , दुश्मन अनाज का

رک : کام کا نہ کاج کا ، دشمن اناج کا جو زیادہ مستعمل ہے

रातों का न बातों का

काम का न काज का

दीन का न दुनिया का

good-for-nothing, neither religious nor worldly-wise

नब्ज़ों का न चलना

نبضوں کی حرکت کا محسوس نہ ہونا

ज़मीन का न आसमान का

न इधर का न उधर का, बे कार, लग़्व

सर का न पाँव का

بے سروپا ، سر نہ پیر ، اوّل نہ آخر

न तीर न कमान नाहक़ का पठान

ज़बरदस्ती की हुकूमत जताने वाले के संबंध में कहते हैं

घर का न हुआ दर का

कहीं का न रहा, निकम्मा हो गया

गोज़-ए-शुतुर न ज़मीन का न आसमान का

बेतुकी बात तो बेतुकी है, न इधर की, न उधर की

बिल्ली का गूह न लेपने का न पोतने का

बिलकुल नाकारा और बेकार है

हवा का रुख़ इधर से उधर हो जाना

हवा का रुख़ बदल जाना; परिस्थितियाँ बदल जाना, समय के अनुकूल या प्रतिकूल होने की स्थिति का बदल जाना

बल ज़ोर का न ज़र का

न रूपया है न शरीर में बल है, हर प्रकार से निर्बल है

हाल का न रोज़गार का

रुक : हाल का ना क़ाल का अलख

नमाज़ का न रोज़े का

वह जो न नमाज़ पढ़ता हो और न रोज़ा रखता हो, बेनमाज़ी बेरोज़ा के बारे में कहते हैं

आँसुओं का तार न टूटना

लगातार आँसू बहना

गूड़ भरा हँसियाँ , न निगलने का , न थूकने का

रुक : गड़ भरा हंसिया है अलख

तत्ता निवाला न निगलने का न उगलने का

उस अवसर पर कहते हैं जब कुछ बन न आए

कहीं का न रहना

۱. तबाह-ओ-बर्बाद हो जाना, किसी गों का ना होना, किसी काम या जगह के लायक़ ना होना, ज़लील-ओ-रुस्वा हो जाना , मक़सद को ना पहुंचना

कहीं का न रखा

बेइज़्ज़त करना, बेआबरु करना

तत्ता कौर न निगलने का न उगलने का

उस अवसर पर कहते हैं जब कुछ बन न आए

काम का न काज का दुश्मन अनाज का

वह व्यक्ति जो खाने में कमी न करे और काम से दूर भागे, सुस्त, काहिल, आलसी

क़ाबू का न होना

वश का न होना, अधिकार का न होना, कहने का न होना

रोटी का न कपड़े का सेंत मेंत का भुत्रा

ऐसे नाकारा शख़्स के बारे में कहते हैं जो मुफ़त ख़ोरी के बावजूद रुअब जमाए या एकड़ फ़ूं दिखाए

धोबी का गधा घर का न घाट का

हर तरफ़ से टकराया हुआ, नाकाम-ओ-नामुराद , उस शख़्स की बाबत कहेंगे जिसे हर तरफ़ से धुतकार देव गया हो

साँसा भला न साँस का और बान भला न काँस का

चिंता थोड़ी देर की भी बड़ी होती है, मन की सेहत के लिए अच्छी नहीं होती

छत्री का भगत न मूसल का धनक

मूसल का धनुष नहीं बन सकता, उसी प्रकार क्षत्रिय कभी भक्त नहीं बन सकता

मसरफ़ का न रहना

इस्तिमाल का ना रहना, काम का ना रहना, काबिल-ए-इस्तेमाल ना होना

मसरफ़ का न होना

काम का न होना

नज़र का काम न करना

بینائی یا بصارت میں فرق آ جانا، اچھی طرح نظر نہ آنا

मैं अब कहीं का न रहा

मैं अब किसी की तरफ़ नहीं रहा, मैं अब किसी लायक़ नहीं रहा, अब मैं किसी को मुँह नहीं दिखा सकता

नात का न गोत का बाँटा माँगे कोत का

ग़ैर मुस्तहिक़ हो कर ज़बरदस्ती विरासत में हिस्सादार बनने वाले के लिए मुस्तामल है

नात का न गोत का बाँटा माँगे पोथ का

ग़ैर मुस्तहिक़ हो कर ज़बरदस्ती विरासत में हिस्सादार बनने वाले के लिए मुस्तामल है

चुटके का खैये, उकटे का न खैये

माँग कर खाना बेहतर है उस का एहसान लेने से जो एहसान जताने वाला हो

दोनों दीन से गए पांडे , ना इधर हल्वा न उधर माँडे

बेहतर चीज़ के लालच में जो मिलता था उस को भी खो दिया

पापी पाप का, भाई का न बाप का

the corrupt care for nothing but their vices

चुटके का खाइए, उकटे का न खाइए

माँग कर खाना बेहतर है उस का एहसान लेने से जो एहसान जताने वाला हो

बिल्ली का गू लेपने का न पोतने का

बिलकुल नाकारा और बेकार है

दोनों तरफ़ से गए पांडे , इधर हल्वा न उधर माँडे

रुक : दोनों दीन से किए पांडे उलुग़

चलना भला न कोस का बेटी भली न एक, देना भला न बाप का जो प्रभु राखे टेक

चाहे पुत्री एक ही हो देना अथवा ऋण चाहे पिता ही का हो एवं सफ़र चाहे एक ही मील का हो तीनों बुरे

गोज़-ए-शुतुर ज़मीन का न आसमान का

बेतुकी बात तो बेतुकी है, न इधर की, न उधर की

देना भला न बाप का बेटी भली न एक, चलन भला न कोस का जो साईं राखे टेक

चाहे पुत्री एक ही हो देना अथवा ऋण चाहे पिता ही का हो एवं सफ़र चाहे एक ही मील का हो तीनों बुरे

न जीने की ख़ुशी, न मरने का ग़म

किसी बात की पर्वा नहीं, किसी किस्म की उमनग बाक़ी नहीं

धोबी का कुत्ता घर का न घाट का

हर जगह से ठुकराया हुआ, नाकाम-ओ-नामुराद अर्थात कहीं का भी न रहना

तिनके का शर्मिंदा न होना

किसी का ज़र्रा भर सुलूक गवार ना करना

आता न छोड़िये , जाते का ग़म न कीजिये

आए तो सब आने दो जाए तो कोई चिंता नहीं

हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में न इधर का , न उधर का के अर्थदेखिए

न इधर का , न उधर का

na idhar kaa , na udhar kaaنَہ اِدَھر کا ، نَہ اُدَھر کا

वाक्य

न इधर का , न उधर का के हिंदी अर्थ

  • (जब कोई किसी बात पर राज़ी ना हो तो कहते हैं) किसी तरह क़रार नहीं , किसी बात पर राज़ी नहीं

نَہ اِدَھر کا ، نَہ اُدَھر کا کے اردو معانی

  • Roman
  • Urdu
  • (جب کوئی کسی بات پر راضی نہ ہو تو کہتے ہیں) کسی طرح قرار نہیں ؛ کسی بات پر راضی نہیں

Urdu meaning of na idhar kaa , na udhar kaa

  • Roman
  • Urdu

  • (jab ko.ii kisii baat par raazii na ho to kahte hain) kisii tarah qaraar nahii.n ; kisii baat par raazii nahii.n

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न इधर का , न उधर का

(जब कोई किसी बात पर राज़ी ना हो तो कहते हैं) किसी तरह क़रार नहीं , किसी बात पर राज़ी नहीं

इधर-उधर का

ایسا ویسا.

न इधर का न उधर का

۔کسی کام کا نہیں۔بیکار کی جگہ۔؎

इधर का न उधर का

جسے کسی پر اعتماد نہ ہو؛ جس پر کسی کو اعتماد نہ ہو، ججسے یکسوئی نہ ہو؛ جو کسی شمار میں نہ ہو؛ ہر طرف سے محروم، مردود خلائق،راندۂ درگاہ (بیشتر رہنا، کے ساتھ).

तिनका इधर-उधर न होना

ज़रा सी भी बेतरतीबी और विप्लव न होना, आयोजन और व्यवस्था में कोई फ़र्क़ न आना

इधर की न उधर की

رک: ادھر کا (رہنا) نہ اُدھر کا ، جس کی یہ تانیث ہے.

इधर न उधर ये बला किधर

किसी क़ाबिल नहीं, उस को कोई नहीं पूछता, बेसर-ओ-पा आदमी है

इधर न उधर ये बला किधर

एक अप्रत्याशित विपत्ति, आकस्मिक विपत्ति है, कोई नहीं पूछता, किसी लायक़ नहीं है

ज़माना इधर का उधर होना

हालात में क्रांति आना, परिवर्तन होना

न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम, न इधर के रहे न उधर के रहे

ऐसा काम किया गया कि हर तरह हानि हुई, कोई काम पूरा नहीं हुआ

इधर के न उधर के

of no importance, not belonging anywhere

इधर की न उधर की, ये बला किधर की

एक अप्रत्याशित विपत्ति, आकस्मिक विपत्ति है, कोई नहीं पूछता, किसी लायक़ नहीं है

न ख़ुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम, न इधर के हुए न उधर के हुए

ऐसा काम किया गया कि हर तरह हानि हुई, कोई काम पूरा नहीं हुआ

ऊँट का पाद न ज़मीन का न आसमान का

जिस व्यक्ति के व्यवहार में गंभीरता न हो उसकी या मूर्ख की बात का कोई असर नहीं होता

न सर का होश , न पाँव का

बेख़बर होना

न काम का , न काज का , दुश्मन अनाज का

رک : کام کا نہ کاج کا ، دشمن اناج کا جو زیادہ مستعمل ہے

रातों का न बातों का

काम का न काज का

दीन का न दुनिया का

good-for-nothing, neither religious nor worldly-wise

नब्ज़ों का न चलना

نبضوں کی حرکت کا محسوس نہ ہونا

ज़मीन का न आसमान का

न इधर का न उधर का, बे कार, लग़्व

सर का न पाँव का

بے سروپا ، سر نہ پیر ، اوّل نہ آخر

न तीर न कमान नाहक़ का पठान

ज़बरदस्ती की हुकूमत जताने वाले के संबंध में कहते हैं

घर का न हुआ दर का

कहीं का न रहा, निकम्मा हो गया

गोज़-ए-शुतुर न ज़मीन का न आसमान का

बेतुकी बात तो बेतुकी है, न इधर की, न उधर की

बिल्ली का गूह न लेपने का न पोतने का

बिलकुल नाकारा और बेकार है

हवा का रुख़ इधर से उधर हो जाना

हवा का रुख़ बदल जाना; परिस्थितियाँ बदल जाना, समय के अनुकूल या प्रतिकूल होने की स्थिति का बदल जाना

बल ज़ोर का न ज़र का

न रूपया है न शरीर में बल है, हर प्रकार से निर्बल है

हाल का न रोज़गार का

रुक : हाल का ना क़ाल का अलख

नमाज़ का न रोज़े का

वह जो न नमाज़ पढ़ता हो और न रोज़ा रखता हो, बेनमाज़ी बेरोज़ा के बारे में कहते हैं

आँसुओं का तार न टूटना

लगातार आँसू बहना

गूड़ भरा हँसियाँ , न निगलने का , न थूकने का

रुक : गड़ भरा हंसिया है अलख

तत्ता निवाला न निगलने का न उगलने का

उस अवसर पर कहते हैं जब कुछ बन न आए

कहीं का न रहना

۱. तबाह-ओ-बर्बाद हो जाना, किसी गों का ना होना, किसी काम या जगह के लायक़ ना होना, ज़लील-ओ-रुस्वा हो जाना , मक़सद को ना पहुंचना

कहीं का न रखा

बेइज़्ज़त करना, बेआबरु करना

तत्ता कौर न निगलने का न उगलने का

उस अवसर पर कहते हैं जब कुछ बन न आए

काम का न काज का दुश्मन अनाज का

वह व्यक्ति जो खाने में कमी न करे और काम से दूर भागे, सुस्त, काहिल, आलसी

क़ाबू का न होना

वश का न होना, अधिकार का न होना, कहने का न होना

रोटी का न कपड़े का सेंत मेंत का भुत्रा

ऐसे नाकारा शख़्स के बारे में कहते हैं जो मुफ़त ख़ोरी के बावजूद रुअब जमाए या एकड़ फ़ूं दिखाए

धोबी का गधा घर का न घाट का

हर तरफ़ से टकराया हुआ, नाकाम-ओ-नामुराद , उस शख़्स की बाबत कहेंगे जिसे हर तरफ़ से धुतकार देव गया हो

साँसा भला न साँस का और बान भला न काँस का

चिंता थोड़ी देर की भी बड़ी होती है, मन की सेहत के लिए अच्छी नहीं होती

छत्री का भगत न मूसल का धनक

मूसल का धनुष नहीं बन सकता, उसी प्रकार क्षत्रिय कभी भक्त नहीं बन सकता

मसरफ़ का न रहना

इस्तिमाल का ना रहना, काम का ना रहना, काबिल-ए-इस्तेमाल ना होना

मसरफ़ का न होना

काम का न होना

नज़र का काम न करना

بینائی یا بصارت میں فرق آ جانا، اچھی طرح نظر نہ آنا

मैं अब कहीं का न रहा

मैं अब किसी की तरफ़ नहीं रहा, मैं अब किसी लायक़ नहीं रहा, अब मैं किसी को मुँह नहीं दिखा सकता

नात का न गोत का बाँटा माँगे कोत का

ग़ैर मुस्तहिक़ हो कर ज़बरदस्ती विरासत में हिस्सादार बनने वाले के लिए मुस्तामल है

नात का न गोत का बाँटा माँगे पोथ का

ग़ैर मुस्तहिक़ हो कर ज़बरदस्ती विरासत में हिस्सादार बनने वाले के लिए मुस्तामल है

चुटके का खैये, उकटे का न खैये

माँग कर खाना बेहतर है उस का एहसान लेने से जो एहसान जताने वाला हो

दोनों दीन से गए पांडे , ना इधर हल्वा न उधर माँडे

बेहतर चीज़ के लालच में जो मिलता था उस को भी खो दिया

पापी पाप का, भाई का न बाप का

the corrupt care for nothing but their vices

चुटके का खाइए, उकटे का न खाइए

माँग कर खाना बेहतर है उस का एहसान लेने से जो एहसान जताने वाला हो

बिल्ली का गू लेपने का न पोतने का

बिलकुल नाकारा और बेकार है

दोनों तरफ़ से गए पांडे , इधर हल्वा न उधर माँडे

रुक : दोनों दीन से किए पांडे उलुग़

चलना भला न कोस का बेटी भली न एक, देना भला न बाप का जो प्रभु राखे टेक

चाहे पुत्री एक ही हो देना अथवा ऋण चाहे पिता ही का हो एवं सफ़र चाहे एक ही मील का हो तीनों बुरे

गोज़-ए-शुतुर ज़मीन का न आसमान का

बेतुकी बात तो बेतुकी है, न इधर की, न उधर की

देना भला न बाप का बेटी भली न एक, चलन भला न कोस का जो साईं राखे टेक

चाहे पुत्री एक ही हो देना अथवा ऋण चाहे पिता ही का हो एवं सफ़र चाहे एक ही मील का हो तीनों बुरे

न जीने की ख़ुशी, न मरने का ग़म

किसी बात की पर्वा नहीं, किसी किस्म की उमनग बाक़ी नहीं

धोबी का कुत्ता घर का न घाट का

हर जगह से ठुकराया हुआ, नाकाम-ओ-नामुराद अर्थात कहीं का भी न रहना

तिनके का शर्मिंदा न होना

किसी का ज़र्रा भर सुलूक गवार ना करना

आता न छोड़िये , जाते का ग़म न कीजिये

आए तो सब आने दो जाए तो कोई चिंता नहीं

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