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to go के लिए उर्दू शब्द
to go के देवनागरी में उर्दू अर्थ
- बाक़ीमांदा
- बक़ाया
- बाक़ी
- वो शैय जो बाहर ले जा कर कहीं और खाई जा सके (जैसे रेस्तोराँ से ख़रीद कर
to go کے اردو معانی
- باقی ماندہ
- بقایا
- باقی
- وہ شے جو باہر لے جا کر کہیں اور کھائی جا سکے (جیسے ریستوران سے خرید کر)
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गू में कौड़ी गिरे तो दाँतों से उठाए
बहुत हरीस और बख़ील आदमी की निसबत कहते हैं, बहुत कंजूस है, फ़ायदे के लिए ज़लील काम करने पर भी तैय्यार है
गू में कौड़ी गिरे तो दाँतों से उठाता है
बहुत हरीस और बख़ील आदमी की निसबत कहते हैं, बहुत कंजूस है, फ़ायदे के लिए ज़लील काम करने पर भी तैय्यार है
अमीर ने गू खाया तो दवा के लए और ग़रीब ने खाया तो पेट भर ने के लिए
कोई बुरा काम अगर किसी धनवान से हो तो उसको अच्छा समझा जाता है और वही काम कोई निर्धन व्यक्ति करे तो उस पर लान-तान की जाती है
नाक न हो तो गू खाएँ
महिलाओं की निंदा में प्रयुक्त, अर्थात अगर इज़्ज़त की परवाह न हो तो ख़राब से ख़राब बैठें
रोज़ा रक्खा रक्खा आख़िर खोला तो गूह से
लड़की को अच्छ्াी जगह चूड़ कर बुरी जगह ब्याह लेना , देर में सोच सोच कर क़दम उठाया वो भी ग़लत
लाए गा दारा तो खाए गी दारी, न लाए गा दारा तो पड़े गी ख़्वारी
पति कमा कर लाएगा तो पत्नी खाएगी, पति न कमाएगा तो फ़ाक़े होंगे
मिल गई तो रोज़ी वर्ना रोज़ा
अगर मज़दूरी या काम से पारिश्रमिक मिल गया तो गुज़ारा हो जाएगा वर्ना भूखा रहना पड़ेगा
गंगा गए तो गंगा-राम जमना गए तो जमना-दास
अवसरवादी और परिस्थिति के अनुसार अपने तरीक़े बदलने वाले व्यक्ति के बारे में बोलते हैं
मुँह की गई लोई, तो क्या करेगा कोई
मनुष्य निर्लज्जता चुन ले या निर्लज्ज हो जाए तो किसी का डर नहीं रहता, जब इज़्ज़त उतर जाती है या अपमानित हो जाता है तो मनुष्य निडर हो जाता है, धृष्ट या निर्लज्ज आदमी का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, लज्जाहीन व्यक्ति को किसी की परवाह नहीं होती
दमड़ी की हाँडी गई तो कुत्ते की ज़ात पहचानी
हानि तो हुई परंतु अनुभव तो प्राप्त हुआ, थोड़ी सी हानि हुईतो कोई बात नहीं है वास्तविक्ता का पता तो चला
उतर गई लोई तो क्या करेगा कोई
मनुष्य निर्लज्जता चुन ले या निर्लज्ज हो जाए तो किसी का डर नहीं रहता, जब इज़्ज़त उतर जाती है या अपमानित हो जाता है तो मनुष्य निडर हो जाता है, धृष्ट या निर्लज्ज आदमी का कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता, लज्जाहीन व्यक्ति को किसी की परवाह नहीं होती
कुतिया चोरों मिल गई तो पहरा देवे कौन
अपने दुश्मन हो जाएँ तो बचाव कठिन है, रक्षक ही हानि पहुँचाए तो कोई नहीं बचा सकता
माँग जाँच के गए झाँझा , माँग लें तो लगे लाजा
अगर दे दें तो ग़ुस्सा आए, अगर वापिस ले ले तो श्रम आए, इस के मुताल्लिक़ कहते हैं जो कोई चीज़ मजबूरन दे
ज़ुलैख़ा तो सारी पढ़ गए पर ये न जाना कि वो 'औरत थी या मर्द
किसी बात या घटना को प्रारंभ से अंत तक सुनना या पढ़ना किन्तु इस पर बिल्कुल ध्यान न देना
आरे सर पर चल गए तो भी मदार ही मदार
तकालीफ़-ओ-मसाइब बर्दाश्त करने पर भी अपने इरादे और अक़ीदे से बाज़ नहीं आए
बारह में तीन गए तो रही ख़ाक
वर्षा तीन महीने होती है यदि इन तीन महीनों में न हो तो ज़मीनदार उजड़ अर्थात बर्बाद हो जाता है
कुतिया चोरों मिल गई तो पहरा कौन दे
अपने दुश्मन हो जाएँ तो बचाव कठिन है, रक्षक ही हानि पहुँचाए तो कोई नहीं बचा सकता
बारह में तीन गए तो रहे क्या ख़ाक
वर्षा तीन महीने होती है यदि इन तीन महीनों में न हो तो ज़मीनदार उजड़ अर्थात बर्बाद हो जाता है
कुतिया चोरों से मिल गई तो पहरा कौन दे
अपने दुश्मन हो जाएँ तो बचाव कठिन है, रक्षक ही हानि पहुँचाए तो कोई नहीं बचा सकता
अपनी नाक कटी तो कटी पराई बद-शुगूनी तो हो गई
अपना नुक़्सान या रुसवाई हुई तो क्या, दुश्मन को तो तकलीफ़ पहुँच गई
आईना तो मुयस्सर न हुआ होगा चपनी में मूत के देख
अगर कोई कुरूप व्यक्ति किसी चंचल स्त्री से मज़ाक़ करे तो वो कहती है
संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .
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