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हिन्दी, इंग्लिश और उर्दू में क्या क्या न हुआ के अर्थदेखिए
मूल शब्द: क्या
क्या क्या न हुआ के हिंदी अर्थ
- कौन सी बात रह गई, कौन सा अपमान न हुआ, कौन सी रुसवाई न हुई
کیا کیا نہ ہوا کے اردو معانی
- Roman
- Urdu
- کون سی بات رہ گئی، کون سی رسوائی نہ ہوئی
Urdu meaning of kyaa kyaa na hu.aa
- Roman
- Urdu
- kaun sii baat rah ga.ii, kaun sii rusvaa.ii na hu.ii
खोजे गए शब्द से संबंधित
क्या क्या न किया
۔सब कुछ किया। कौन सी कसर उठा रखी। (मज़मून) हम ने किया क्या ना तिहरे इशक़ में महबूब किया। सब्र एवबऑ किया गिरिया-ए-याक़ूब किया
क्या न चाहिए
कौन सी चीज़ है जिसकी आवश्यक्ता नहीं, क्या कहना है, क्या बात है सब कुछ चाहिए, सब ही चीज़ की ज़रूरत है, सब कुछ मौजूद है फिर भला किस चीज़ की ज़रूरत है
क्या न चाहिए
what is not wanting (to me), what do I not want, I want everything, nothing is wanting (to me), I have everything
मरता क्या न करता
जिस की जान पर आ बनती है वो सब कुछ कर गुज़रता है, विवशता की स्थिति में सब कुछ करना पड़ता है
माया हुई तो क्या हुआ हरदा हुआ कठोर, नौ नेज़े पानी चढ़ तो भी न भीगी कोर
दौलतमंद का दिल अगर पत्थर है तो किसी काम का नहीं, कंजूस के मुताल्लिक़ कहते हैं कि इस पर कोई असर नहीं होता
माया हुई तो क्या हुआ हरदा हुआ कठोर, नौ नेज़े पानी चढ़ा तो भी न भीगी कोर
दौलतमंद का दिल अगर पत्थर है तो किसी काम का नहीं, कंजूस के मुताल्लिक़ कहते हैं कि इस पर कोई असर नहीं होता
मुर्ग़ा न होगा तो क्या अज़ान न होगी
कोई भी कार्य किसी विशेष व्यक्ति पर आश्रित या टिका, ठहरा या रुका हुआ नहीं है, रहती दुनिया तक काम होते ही रहेंगे
जोगी जुगत जानी नाहीं, कपड़े रंगे तो क्या हुआ
सन्यासी या जोगी बनने के उसूल से अनभिज्ञ अथवा अपरिचित हैं और दिखावे के लिए गेरू में कपड़े रंग लिए हैं
जोगी जुगत जानी नहीं, कपड़े रंगे तो क्या हुआ
सन्यासी या जोगी बनने के उसूल से अनभिज्ञ अथवा अपरिचित हैं और दिखावे के लिए गेरू में कपड़े रंग लिए हैं
मुर्ग़ा बाँग न देगा तो क्या सुब्ह न होगी
कोई भी कार्य किसी विशेष व्यक्ति पर आश्रित या टिका, ठहरा या रुका हुआ नहीं है, रहती दुनिया तक काम होते ही रहेंगे
मुर्ग़ बाँग न देगा तो क्या सुब्ह न होगी
कोई काम किसी की ज़ात इख़ास पर मौक़ूफ़ नहीं, दुनिया का काम वक़्त पर होता रहेगा
जोगी जुगत जाने नहीं गेरू में कपड़े रंगे तो क्या हुआ
सन्यासी या जोगी बनने के उसूल से अनभिज्ञ अथवा अपरिचित हैं और दिखावे के लिए गेरू में कपड़े रंग लिए हैं
राजा हुए तो क्या हुआ अंत जाट के जाट
कमीना कितने ही बलंद मर्तबा पर पहुंच जाये उस की फ़ितरत नहीं बदलती , दौलतमंद हो जाने के बावजूद पुरानी आदतें नहीं बदलतीं
राजा भए तो क्या हुआ अंत जाट के जाट
कमीना कितने ही बलंद मर्तबा पर पहुंच जाये उस की फ़ितरत नहीं बदलती , दौलतमंद हो जाने के बावजूद पुरानी आदतें नहीं बदलतीं
आदमी क्या जो आदमी की क़द्र न करे
मनुष्य के पास मानवतावादी ज्ञान होना आवश्यक है, मनुष्य के पास कुशल लोगों का मित्र होना आवश्यक है
आम मछली का क्या साथ न होगा
जब कोई किसी को परेशान कर चल देता है या छुप रहता है तो परेशानी उठाने वाला कहता है कि 'आम मछली का क्या साथ न होगा' या'नी फिर कभी मुलाक़ात तो होगी उस वक़्त समझ लूँगा
मुल्ला न होगा तो क्या मस्जिद में अज़ाँ न होगी
किसी ख़ास आदमी के न होने से उस से संबंधित काम रुका नहीं रहता
मुल्ला न होगा तो क्या मस्जिद में अज़ान न होगी
किसी ख़ास आदमी के न होने से उस से संबंधित काम रुका नहीं रहता
वो फूल ही क्या जो कि महेसर न चढ़े
पारबती देवी की मूर्ती पर चढ़ाया हुआ वह फूल जो उसके सर पर रह जाता था और सबसे ऊँचा गिना जाता था
संगत भली न साध की और क्या गंदी का बास
ना फ़क़ीर की रिफ़ाक़त अच्छी होती है और ना गेंदे की बूओ, इन दोनों की सोहबत पाएदार नहीं होती
जिसकी न फटी हो बिवाई वो क्या जाने पीर पराई
one who has not suffered cannot understand the sorrows of others or sympathize with them
मैं न समझूँ तो भला क्या कोई समझाए मुझे
ज़िद्दी आदमी के मुताल्लिक़ कहते हैं, आदमी ख़ुद ना समझना चाहे तो कोई नहीं समझा सकता
जिस की न फटी हो बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई
जिस को कभी दुख नहीं पहुंचा उस को दर्द मंदों के दर्द की क्या पर्वा
टूटी का क्या जोड़ना गाँठ पड़े और न रहे
जहां एक दफ़ा शुक्र रणजी हो जाये, फिर पहली सी दोस्ती नहीं होती
जिसकी न फटी हो बिवाई वो क्या जाने पीड़ पराई
one who has not suffered cannot understand the sorrows of others or sympathize with them
आगे रोक पीछे ठोक, ससुरा सरके न जाए तो क्या हो
आगे जा नहीं सकता पीछे से डंडा पड़ता है, करे तो क्या करे, जहाँ किसी ओर रास्ता न मिले तो बिना-साहस हो जाता है
जिस के पाँव न जाए बिवाई वो क्या जाने पीर पराई
۔(عو) جس کو بذات خود تکلیف نہیںہوئی وہ دوسرے کی تکلیف کو کیا سمجھے گا۔
आगे रोक पीछे ठोक, ससुर सड़कै न जाए तो क्या हो
आगे जा नहीं सकता पीछे से डंडा पड़ता है, करे तो क्या करे, जहाँ किसी ओर रास्ता न मिले तो बिना-साहस हो जाता है
समा करे न क्या करे समैं समैं की बात, किसी समय के दिन बड़े किसी समय की रात
हर मौसम अपना उचित काम करता है मनुष्य कुछ नहीं कर सकता
संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .
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miqdaar
मिक़दार
.مِقدار
quantity
[ Zyada miqdar mein khana khane ki wajah se Khalid bimar pad gaya ]
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saaKHt
साख़्त
.ساخْت
structure
[ Mard aur aurat ke jism ki saakht mukhtalif hoti hai ]
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tahriir
तहरीर
.تَحْرِیر
writing
[ Pahle takhti par likhne ki mashq karayi jati thi isliye tahreer bahut khubsoorat hua karti thi ]
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aa.iin
आईन
.آئِین
constitution, law, code
[ Angrezon mein apne dastoor aur ayin ka bada khayal hai ]
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muqallidiin
मुक़ल्लिदीन
.مُقَلِّدِین
followers
[ Hindustan mein aaj bhi Gorakhnath ke muqallidin paye jate hain ]
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KHud-Garazii
ख़ुद-ग़रज़ी
.خود غَرضی
self-seeking, selfishness, self-interested
[ Dosti mein khud-gharazi ko jagah nahin milni chahiye ]
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KHuub-ruu
ख़ूब-रू
.خُوب رُو
beautiful, handsome
[ Mahboob 'khoob-ru' ho na ho chahne wale ko khoob-ru nazar aata hai ]
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qaanuun
क़ानून
.قانُون
rule, law, canon, ordinance, statute
[ Qanoon ke paaband log hi samaaj ko ek nayi raah dikha sakte hain ]
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Gair-aabaad
ग़ैर-आबाद
.غَیر آباد
uninhabited, not peopled
[ Kuch log ghair-aabaad maqaam par rahna pasand karte hain ]
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KHarch
ख़र्च
.خَرْچ
expenditure, expenses
[ Amdani se zyada kharch samajhdar insan ki pahchan nahin ho sakti ]
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