पड़ न मरे लड़ मरे
अज्ञानी झगड़ालू के बारे में कहते हैं, निठल्लेपन से बेरोज़गारी बेहतर है
पढ़े न लिखे नाम बिद्या धर
जो जानता कुछ ना हो और जताता बहुत कुछ हो , कमइलम ताली करने वाले की निसबत कहते हैं , नीज़ ऐसा शख़्स जो अपने पेशे में तो मशहूर हो मगर इस काम का सलीक़ा इस में ना हो
पढ़ी न क़ज़ा की
बे-नमाज़ी है, नमाज़ क़ज़ा होना अर्थात नमाज़ का समय पर अदा न होना
पाँचे मीत पचासे ठाकुर
मित्र, सरदार से पांच रुपये तक और हाकिम से पच्चास रुपये तक क्षमा करे, संबंधी या जानने वालों और रईस से किसी क़दर हानि भी पहुँचे तो भी शील न तोड़िए
पाँचों पंडे छटे नरायन
इस मौक़ा पर बोलते हैं जहां चंद बड़े मुदब्बिर मश्वरा कर रहे हूँ और छटा इन सब से बड़ा नेअमत ग़ैर मुतरक़्क़बा के तौर पर आ जाए. कहा जाता है कि महाभारत में पांचों पांडे (जुधिष्टर, भीम, अर्जुन, निकल, सहदेव) शरीक थे और उन्हें छुटे निरा यन (सिरी कृष्ण जी) की शमूलीयत से फ़तह हासिल हुई थी
पाँसा पड़े अनाड़ी जीते
जोय में हार जीत पाँसा पड़ने पर है इस पर खेलने वाले की महारत या अनाड़ी पन का कोई असर नहीं पड़ता
पानी में रह कर मगरमछ से बैर
रुक : दरिया में रहना और मगरमच्छ से बीर, आदमी जहां बरवक़्त रहता हो या काम करता हो-ओ-हाँ के बड़े लोगों या साथीयों या अफ़िसरों बिगाड़ रखना अच्छा नहीं
पाप उभरे पर उभरे
पाप छिपा नहीं रहता, गुनाह या जुर्म के बारे मैं पता चल ही जाता है
पापी पाप का , भाई न बाप का
जिस को बदकारी की लत पड़ जाती है, वो रिश्ता का भी लिहाज़ नहीं करता, बदज़ात आदमी को शरारत से ग़रज़ है बाप भाई कोई भी हो
पार गए मोर हो आए
मुसाफ़िर घर वापिस आकर बहुत क़िस्से सुनाता है, ' जहांदीदा बिसयार गवेद दरोग़ ' के मौके़ पर बोलते हैं
पात पात डाल डाल
किसी के तआक़ुब, मुक़ाबले या चालाकी के दावा करने के जवाब में (मुख़्तलिफ़ ज़मायर के साथ) मुस्तामल यानी तुम हम से सबक़त नहीं ले जा सकते, हम तुम से कम नहीं
पच्छम का घोड़ा दकन का चीर
(चीर= कपड़ा, कपड़े की धजी) राजपूताना और काठियावाड़ के घोड़े मशहूर हैं और अगले ज़माने में दक्कन की तरफ़ से कपड़ा अच्छा आता था
पग बिन कटे न पंथ
बिना परिश्रम के कोई काम नहीं हो सकता, करने से ही काम होता है, बिना चले रास्ता पूरा नहीं होता
पहला खाया डंड बराबर
आदमी पिछला खाया याद नहीं रखता, एहसानफ़रामोशी के मौक़ा पर बोलते हैं नीज़ अगर क़र्ज़ हो तो इस की अदायगी एक तरह का जुर्माना महसूस होता है
पहले आप पीछे बाप
हर एक को अपना ख़्याल ज़्यादा होता है, पहले अपने फ़ायदे की बात की जाती है
पहले चूमे गाल काटा
किसी आदमी को पहले-पहल जब कोई काम सौंपा जाए और वह उसे चौपट कर दे तो कहते हैं
पहले मारे सो मीरी
जो पहले लाभ उठाए वही अच्छा रहता है, मुक़ाबले में जो पहले चोट करे वही जीतता है
पहली बिसमिल्लाह ग़लत
शुरू ही से किसी काम के बिगड़ने के बारे में बोलते हैं, काम शुरू होते ही ख़राब होगया
पक्का पान खाँसी न ज़ुकाम
यह कहावत परिहास के रूप में उस समय पर कहते हैं जब कोई बड़ी आयु की महिला के साथ संबंध बनाए या अधिक आयु की प्रेमिका से प्रेम करे, इसलिए कि उस में प्रतिद्वंदिता की आशंका कम होती है
पर आधीन सपने सुख नाहीं
ग़ैर के पाबंद को ख़ाब में भी राहत नज़र नहीं आती , दूसरे का मातहत आराम की नींद नहीं सविता, मातहत हमेशा तकलीफ़ में रहता है
पर आधीन सपने सुख नहीं
ग़ैर के पाबंद को ख़ाब में भी राहत नज़र नहीं आती , दूसरे का मातहत आराम की नींद नहीं सविता, मातहत हमेशा तकलीफ़ में रहता है
पराए माल पर दीदे लाल
दूसरे की चीज़ पर ग़ुरूर करने के मौक़ा पर बोलते हैं, दूसरे की वस्तु पर घमंड करने के अवसर पर बोलते हैं
पराई भूसी चिकने हाथ
अपने हाथों में भरी हुई ग्रीस को दूसरे की भूसी से साफ करना, जब कोई व्यक्ति दूसरे के पैसे से अपने मुश्किल काम को पूरा करता है और अकड़ता है तो देखने वाले व्यंग्य से कहते हैं
पराया चख और अपना ढक
अपनी चीज़ सेंत कर रखने और दूसरे की चीज़ उपयोग करने के औसर पर बोलते हैं, अपना माल न खाकर दूसरे का उड़ाना चाहिए, स्वार्थी की उक्ति
पराया धेंगड़ा और अपना पूत
आदमी अपनी संतान या चीज़ को बहुत महत्व देता है और दूसरे की संतान या चीज़ को महत्वहीन समझता है, अपनी हर वस्तु प्यारी होती है दूसरे की हीन, अपने बच्चे को कम आयु वाला और दूसरे के उसी आयु के बच्चे को जवान समझते हैं, अपना लड़का तो लड़का है और पराया उठाईगीरा
पराया घर थूक का डर अपना घर हग भर
अपनी चीज़ को आदमी जिस प्रकार चाहे प्रयोग करे कोई कुछ कहने वाला नहीं होता लेकिन दूसरे की चीज़ को छूने में भी सावधानी करनी पड़ती है, अपने घर में चाहे जो करो, पर दूसरे के घर में संभल कर रहना चाहिए
पेट भरे की बातें
अमीर व्यक्ति का दृष्टिकोण, अमीरी की बातें, गर्व की बातें, ग़ुरूर की बातें
पेट बुरी बला है
۔ मक़ूला। भूक बरी चीज़ है। करें किया पेट बरी बला है जो ना किराए थोड़ा है औलाद से बढ़ कर तो कोई चीज़ अज़ीज़ नहीं इस तक को तो बीच डाला
पेट है या 'अम्र 'अय्यार की ज़ंबील
(जिस के पेट में इल्ला बिल्ला उतरती चली जाये और कभी खाने से मुंह ना मोड़े ऐसे आदमी के पेट को ख़्वाजा ख़िज़र की ज़ंबील कहते हैं, हज़रत ख़िज़र अलैहि अस्सलाम के बारे में मशहूर है कि इन के पास एक ज़ंबील थी जिस में हर चीज़ समा जाती थी बाअज़ दफ़ा उम्र अय्यार की ज़ंबील भी कहते हैं
पेट है या ख़्वाजा ख़िज़र की ज़ंबील
(जिस के पेट में इल्ला बिल्ला उतरती चली जाये और कभी खाने से मुंह ना मोड़े ऐसे आदमी के पेट को ख़्वाजा ख़िज़र की ज़ंबील कहते हैं, हज़रत ख़िज़र अलैहि अस्सलाम के बारे में मशहूर है कि इन के पास एक ज़ंबील थी जिस में हर चीज़ समा जाती थी बाअज़ दफ़ा उम्र अय्यार की ज़ंबील भी कहते हैं
पेट में घुसे तो भेद मिले
किसी के मन की बात जानना बहुत कठिन है, किसी के मन की बात उसके घनिष्ठ संपर्क में आने से ही जानी जा सकती है अर्थात जब किसी से बहुत दोस्ती हो जाए तब भेद पता चलता है
पेट नहीं मानता
۔भूक की बर्दाश्त नहीं होती। (फ़िक़रा) ये कहना कि पेट नहीं मानता मजबूरी से चोरी करना पड़ती है बेहूदा बात है
पेट पिटारी मुँह सुपारी
जिस लड़के का पेट बड़ा हो या जो व्यक्ति बहुत खाता हो उस के लिए इस कहावत का प्रयोग करते हैं
पेट सब रखते हैं
भौतिक आवश्यकताएँ सब की होती हैं, सब को भूख लगती है, खाने के लिए सब को ख़ूराक चाहिए
फाटक टूटा गढ़ लूटा
फाटक टूटने से कुछ रोक नहीं रहती क़िले पर विजय प्राप्त हो जाता है और फाटक क़िले का द्वार है
फाव्ड़े के नाम गुल सफ़ा नहीं जान्ता
۔ मिसल। गुल सफ़ा। मिट्टी साफ़ करने वाला।) अलिफ़ के नाम बे नहीं जानता। जाहिल है। को दिन है (नोट) एक शख़्स धोके में एक चालाक जाहिल फ़क़ीर का चेला होगया। बारह बरस तक शाह साहिब ने कोई तालीम नहीं दी। एक रोज़ चेले ने फावड़े की तरफ़ इशारा कर के पूछा शाह साहिब इस का क्या नाम है
फट पड़े वाे सोना जिस से टूटें कान
ऐसी कोई चीज़ या बात जिसका बुरा या हानिकारक परिणाम निकले, उसके ऊपरी और ज़ाहरी लाभ छोड़ दिया जाना चाहिए, फट पड़े वो सोना जिस से टूटे कान
फिर कौन जिए किस का राज
ज़िंदगी का कोई एतबार नहीं काम फ़ौरन करना चाहीए ये काम अभी करना चाहिए फिर का क्या भरोसा क्या हो
फिर कौन मरे कौन जिए
ज़िंदगी का कोई एतबार नहीं काम फ़ौरन करना चाहीए ये काम अभी करना चाहिए फिर का क्या भरोसा क्या हो
फुप्पी भतीजे एक ज़ात, माँ बेटे दो ज़ात
इस बात की तरफ़ इशारा है कि फोपी और (भतीजी / भतीजे) यानी भाई की औलाद में जो क़ुरबत होती है सिलसिला-ए-नसब के क़ानून के मुताबिक़ माँ (बेटी / बेटे) में वो रिश्ता नहीं होता
फुप्पी भतीजी एक ज़ात, माँ बेटी दो ज़ात
इस बात की तरफ़ इशारा है कि फोपी और (भतीजी / भतीजे) यानी भाई की औलाद में जो क़ुरबत होती है सिलसिला-ए-नसब के क़ानून के मुताबिक़ माँ (बेटी / बेटे) में वो रिश्ता नहीं होता
फूल झड़े तो फल लगे
पहला पड़ाव तय हो तो दूसरा पड़ाव आए, उद्देश्य अथवा लक्ष क्रमश: प्राप्त होता है
फूल वही जो महेसर चढ़े
किसी चीज़ की मेराज ये कि वो पसंद ख़ातिर ख़ास-ओ-आम हो , चीज़ वही अच्छी जो काम आए, चीज़ वही अच्छी जिसे अच्छे लोग पसंद करें
फूल वही जो महेशर चढ़े
किसी चीज़ की मेराज ये कि वो पसंद ख़ातिर ख़ास-ओ-आम हो , चीज़ वही अच्छी जो काम आए, चीज़ वही अच्छी जिसे अच्छे लोग पसंद करें
पिए दूध और खाए माल
उस व्यक्ति के संबंध में बोलते हैं जो भोग-विलास में जीवन व्यतीत करे, उस शख़्स की निस्बत बोलते हैं जो ऐश-ओ-इशरत में ज़िंदगी बसर करे
पी प्याला मार भाला
सोच-विचार कुछ न करो बस मारने में जुट जाओ या बस जाओ और अपना काम सिद्ध करो
पीरी-ओ-सद-'ऐब
बढ़्ढ़्াापा आदमी में सैकड़ों ऐब पैदा कर देता है, फ़ारसी मिसरा : 'पीरी वसिद ऐब जेनी गुफ़्ता अंद' का इबतिदाई हिस्सा
पीस लूँ तो पीटूँ
रोज़ी की फ़िक्र मर्दे के मातम से मुक़द्दम है, तलाश-ए-मुआश सब कामों से मुक़द्दम है
पीत न जाने जात कुजात
प्रेम करने से पहले मनुष्य ज़ात देखकर प्रेम नहीं करता है, उसके लिए तो उसका प्रेमी ज़ात-पात और धर्म से बढ़कर होता है, प्यार के जुनून में जाति और कुलीनता आदि मायने नहीं रखते
पुड़िया में आता है
अर्ज़ां शैय जो महंगी हो जावे इस मौक़ा पर बोलते हैं मसलन जो घटड़ी में आती हो वो लिफाफों में मिलने लगे जैसे गंदुम नख़ूद वग़ैरा
पूस कोने घूस
पूस में आदमी सर्दी से बचने के लिए कोने में जा कर बैठता है
पूस कोने गूस
पूस के महीने में सर्दी बहुत पड़ती है इस लिए लोग कोनों में गर्म होने के लिए घुसते हैं यानी बाहर कम निकलते हैं
पूत के पाँव पालने में पहचाने जाते हैं
(किसी की) अच्छाई या बुराई का पता संकेतों से ही लग जाता है, सौभाग्य या दुर्भाग्य का पता बचपन में या प्रारम्भिक अवस्था में ही कर्मों और क्रियाओं के माध्यम से चल जाता है
पूत ना भटार पीछो ही टाएँ टाएँ
ना बेटा ना ख़ावंद मुफ़्त का रोना, इस के मुताल्लिक़ कहा जाता है कि जो इस के साथ हमदर्दी करे जिस से इस का कोई ताल्लुक़ नहीं
पूत राज , मोहताज राज
(घर में) बेटे की अमलदारी में मुहताजी होती है, बेटों की कमाई पर बेटों का मुहताज होना पड़ता है
पूत सपूत तो क्यूँ संचे
यदि बेटा अच्छा है तो उसके लिए रुपया जमा करने की आवश्यक्ता नहीं और यदि बुरा है तो भी आवश्यक्ता नहीं