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gay के लिए उर्दू शब्द
gay के देवनागरी में उर्दू अर्थ
विशेषण
- मसरूर
- ख़ुश
- शादां
- ज़िंदा दिल
- ख़ुशमिज़ाज
- ख़ुश दिल्ली में या ख़ू शुद लाना कैफ़ीयत ज़ाहिर करते हुए
- हँसमुख
- शोख़
- बेफ़िकर
- ला उबाली
- चंचल
- समाजी या दीगर मसर्रतों का आदी या उन में खोया हुआ
- ख़ुशतबा
- ज़रक़-बरक़
- भड़कदार
- सतही
- खेल कूद की ख़ुशीयों का दिलदादा
- बदचलन
- अय्याश
- (अवामी) हमजिंस परस्त
- लौंडा
gay کے اردو معانی
صفت
- مسرور
- خوش
- شاداں
- زندہ دل
- خوش مزاج
- خوش دلی میں یا خوشدلانہ کیفیت ظاہر کرتے ہوئے
- ہنس مکھ
- شوخ
- بے فکر
- لا ابالی
- چنچل
- سماجی یا دیگر مسرتوں کا عادی یا ان میں کھویا ہوا
- خوش طبع
- زرق برق
- بھڑکدار
- سطحی
- کھیل کود کی خوشیوں کا دلدادہ
- بدچلن
- عیاش
- (عوامی) ہم جنس پرست
- لونڈا
खोजे गए शब्द से संबंधित
गयाल
ایک جنگلی بیل جس کا رن٘گ سیاہی مائل اور ٹانگیں بھوری یا سفید ہوتی ہیں ، سر چوڑا اور پیشانی چپٹی ہوتی ہے ، سینگ موٹے وزنی اور سیاہ ہوتے ہیں.
गया गाँव जहाँ ठाकुर हँसा, गया रूख जहाँ बगुला बसा, गया ताल जहाँ उपजी काई, गई कूप जहाँ भई अथाई
जिस गाँव के मालिक ने भोग में जीवन व्यतीत किया वो उजड़ गया, जिस पेड़ पर बगुले का बसेरा हो वो सूख जाता है, जिस ताल या हौज़ में काई लग जाए एवं जिस कुएँ की तह बैठ जाए वो व्यर्थ एवं बेकार हो जाते हैं
गया गाँव जहाँ ठाकुर हँसा, गया रुख जहाँ बगुला बसा, गया ताल जहाँ पकी काई, गई कूप जहाँ भई अथाई
जिस गाँव के मालिक ने भोग में जीवन व्यतीत किया वो उजड़ गया, जिस पेड़ पर बगुले का बसेरा हो वो सूख जाता है, जिस ताल या हौज़ में काई लग जाए एवं जिस कुएँ की तह बैठ जाए वो व्यर्थ एवं बेकार हो जाते हैं
गया मर्द जन खाई खटाई, गई राँड जन खाई मिठाई
खटाई खाने से मर्द नामर्द अर्थात कमज़ोर हो जाता है और मिठाई खाने वाली 'औरत बदचलन हो जाती है या बहकाये में आ सकती है
गया मर्द जन खाइत खटाई, गई राँड जन खाई मिठाई
खटाई खाने से मर्द नामर्द अर्थात कमज़ोर हो जाता है और मिठाई खाने वाली 'औरत बदचलन हो जाती है या बहकाये में आ सकती है
गया तो गया
जो हो गया सो हो गया, जो गया सो गया, जो बीत गया सो बीत गया या नुक़्सान पहुँच गया इस का ज़िक्र या शोक करना व्यर्थ है
गया मर्द जिन खाई खटाई, गई राँड जिन खाई मिठाई
खटाई खाने से मर्द नामर्द अर्थात कमज़ोर हो जाता है और मिठाई खाने वाली 'औरत बदचलन हो जाती है या बहकाये में आ सकती है
गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं
(प्रसिद्ध कवि मीर हसन की कविता का एक श्लोक कहावत के रूप में प्रयोग किया जाता है) जो मौक़ा हाथ से निकल जाये वो फिर हाथ नहीं आता, पछतावा और अफ़सोस रह जाता है
गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं
बीता हुआ समय दुबारा नहीं मिल सकता जो मौक़ा' हाथ से निकल जाए फिर हाथ नहीं आता
संदर्भग्रंथ सूची: रेख़्ता डिक्शनरी में उपयोग किये गये स्रोतों की सूची देखें .
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